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Love without wish Chapter-26

Love without wish Chapter-26

धनंजय जब अंदर आया तो सीधे कमरे मे चला गया। अंदर आराध्या परेशान हुई इधर से उधर घूम रही थी। अपने नाखून कों दांतो के निचे चबाये जा रही थी। तभी वो धनंजय से टकरा जाती है। अपने माथे कों किसी सख्त चीज से टकराने की वजह से अपने सर पर हाथ रखती हुई कहती है, " पहाड़ ठाकुर बन कर क्यों. खड़े हो ठाकुर!! दिख नहीं रहा की मै कितनी परेशान हूँ !!" उसके माथे पर हाथ मारते हुए धनंजय उसकी कमर पकड़ कर अपनी करीब करता है। जहाँ आराध्या पीछे की तरफ झुकी जाती हूँ खुद कों पूरी तरह से धनंजय के बाहों मे लटक जाती है, एक टूटी डाल की तरह । तो धनंजय भी उसकी तरफ झुक जाता है और कहता है, " वैसे बताओगी ठकुराइन की तुम परेशान किस लिए हो !!"

उसकी बात सुनते ही आरध्या उसके सीने पर दोनों हाथ रख कर, उसे सीधा करती हुई खुद कों सीधा करती है और कहती है, " क्यों ? तुम्हें नहीं मालूम की पार्टी मे जाने के लिए मैंने कुछ नहीं खरीदा !! क्या पहनू पार्टी मे !!" अरे तो दो घंटे हम सबने इंतजार किया की मिसेस आराध्या ठाकुर कों कुछ पसंद नहीं आया तो इसमें किसी का कोई कुसूर है !! मेरा तो कोई कुसूर नहीं है !! ये कह कर वो अपना सर ना मे हिला देता है !!"


आराध्या घूरती हुई कहती है, " छोड़ो हमारी कमर कों ठाकुर !!" लेकिन क्यों ठकुराइन!! बनो मत तुम ! क्या तुम्हें नहीं मालूम थी की पत्नी कों कुछ पसंद ना आये तो पति कों कुछ अपनी पसंद का खरीद देना चाहिए। भूल गए अपना पति धर्म जो तुमने हमे फेरो के. वक़्त दिया था !! हम्म्म.... बोलो!!"

आराध्या के सवाल सुनकर धनंजय थोड़ा झुक कर उसके नाक से नाक कों मिलाते हुए कहता है, " वो क्या है ना पत्नी देवी जी !! आपने ही कहा की आपके पास बहुत कपड़े है तो हमने एक अच्छे पति की तरह आपकी बात मान लीं और बिना कोई जिद किये। आपके साथ वापस चले आये !!"

आराध्या प्यारा सा मुँह बनाते हुए कहती है, " लेकिन आप तो जिद कर सकते थे। क्या यही प्यार है आपका की आप अपनी पत्नी देवी की मन की बात भी नहीं जान सके !! कह कर उसकी आखों मे देखती हुई अपनी आखों की पलकों झपकाने लगती है। धनंजय मन मे कहता है, " बहुत चंठ बीबी मिली है तुझे ठाकुर !! चीत भी इसकी पट भी इसकी!! लेकिन मुझे इसी चंठ से प्यार है !! ये सोचते हुए वो आराध्या की तरफ देखते हुए अपनी मदहोश और भारी आवाज़ मे कहता है, " इस तरह देखोगी ठकुराइन तो मेरी मोहब्बत मे पड़ जाओगी और मै खुद कों कंट्रोल नहीं कर पाऊंगा !!"

आरध्या उसकी बात पड़ कुछ कहती उससे पहले धनंजय उसके होठो पर अपने होंठ रख देता है। चुकी आराध्या बिल्कुल तैयार नहीं थी इसके लिए तो वो उसके सीने पर मुक्के मारने लगती है लेकिन धनंजय कों कहाँ फर्क पड़ने वाला था। वो उसके हाथों कों पकड़ कर पीठ पर लगा देता है और उसके होठो कों चूमने लगता है। आराध्या अपने होठो कों नहीं खोलती तो वो हल्का सा उसके होठो कों काट लेता है। जिससे उसकी जुबान खुल. जाती है।धनंजय उसके मुँह के अंदर अपनी जुबान ले जाता है और तब तक उसके जुबान का स्वाद चखता रहता है। जब तक आराध्या की सांसे नहीं रुकने लगती। धनंजय उसे छोड़ देता है और उसको अपने सीने से लगा लेता है। आराध्या अपने सांसों कों संभालती हुई उसके सीने से लगी हुई होती है और वो उसके पीठ कों सहला रहा होता है।

आराध्या उसके सीने से लगी हुई कहती है, " तुम बहुत बुरे हो ठाकुर !! कह कर उसके सीने पर अपने मुक्के से मारती है। "धनंजय हँस कर उसके बालों कों चुमता हुआ कहता है, चाहे जैसा हूँ सिर्फ तुम्हारा हूँ ठकुराइन!! जरा अपने तरफ का वार्डरौब खोल कर तो देख लेती। तुम्हारे पति ने तुम्हारे लिए अपनी पसंद की कुछ चीजे लीं है। मुझे उम्मीद है तुम्हें पसंद आएगी। तुम जल्दी से तैयार हो जाओ और मेरे लिए भी सूट निकाल दो। मै फ्रेश होकर आता हूँ।"

आराध्या मुस्कुराते हुए वार्डरौब खोल कर देखती है तो उसमें बेहद खूबसूरत काले रंग की डिजानर साड़ी रखी हुई थी। वो अपने साड़ी की मैचिंग के मुताबिक धनंजय के लिए सूट निकाल देती है। फिर मुस्कुराते हुए बाहर निकल जाती है।

उसे निचे आता देख सुमती जी कहती है, बच्चे तैयार नहीं हुई अब तक !! बस दादी माँ !! आप दोनों का खाना बना दिया। काकी समय पर खिला देगी और इनके लिए कॉफ़ी लेकर जाती हूँ फिर तैयार हो जाउंगी।

कुछ देर बाद आराध्या कॉफी लेकर अंदर आती है। तब तक धनंजय तैयार हो चुका होता है। उसकी नजर धनंजय पर आ कर रुक जाता है। उसका हैंडसम चेहरा और गठिला बदन आराध्या के दिल कों धड़का रहा था !! वो अपने मन मे कहती है, " हाय !! कोई तो रोक लो मुझे इससे सममोहित होने से। क्या लग रहा है यार। दिल तो कर रहा है की कच्चा खा जाऊ !! ओह्ह्ह !! शिव!! शिव!! मै शाकाहारी हुई। लेकिन क्या करुं कंट्रोल नहीं हो रहा है। कंट्रोल आराध्या.... कंट्रोल !!"

धनंजय बहुत देर से आराध्या कों अजीब अजीब चेहरे कों बनाते हुए देख रहा था और मुस्कुराते हुए उसके करीब आता है। उसके हाथों से कॉफी ले लेता है। लेकिन आराध्या अब भी खुद मे खोयी हुई थी, उसे मालूम नहीं चलता की धनंजय उसके हाथों से कॉफी कप ले कर उसके करीब खड़ा हो चुका होता है।

धनंजय हल्का उसकी करीब झुक कर, उसके कानों के पास आते हुए कहता है, " हैंडसम है ना !!" वो कहती है... हाँ बहुत !!" तो मन कर रहा है कच्चा खाने का !!" हाँ.... बहुत मन कर रहा है कच्चा खाने का.... लेकिन क्या करुं शुद्ध शाकाहारी हूँ.... मांसाहारी नहीं हूँ।.... " उसकी बात धनंजय अपनी बात पर अफ़सोस जताते हुए कहता है, " ओह्ह..... बहुत दुख हुआ !!" फिर वो खोयी हुई कहती है, " हाँ मुझे भी !! लेकिन तुम्हें.......!!!!!


आगे कुछ कहती तब तक वो हकीकत मे आ गयी थी और धनंजय की तरफ मुड़ जाती है। जहाँ धनंजय कॉफी पीते हुए और हाथ अपने पेंट के पॉकेट मे रखे हुए आराध्या कों बेहद कशिश भरी नजरों से देख कर मुस्कुरा रहा था। आराध्या अपनी नजरों कों इधर उधर करती हुई मन ही मन कहती है, लो हो गया सियापप्पा !!"

धनंजय मुस्कुरा कर कहता है, बिल्कुल नहीं हुआ है कोई सियप्पा ठकुराइन !!" ये सुनकर आराध्या उसे घूर कर देखती है और चिढ़ती हुई कहती है, " कभी तो अपनी तांत्रिक विद्या का इस्तेमाल मत किया करो ठाकुर !! कह कर सीधे वाशरूम जाने लगती है की धनंजय तेजी से उसके हाथों कों पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है। आराध्या सीधे उसके सीने से लग जाती है।

आराध्या भागना चाह रही थी क्योंकि धनंजय की कशिश भरी आँखे उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी। उसकी सांसे बेहद तेज चल रही थी। धनंजय उसकी आखों मे देखते हुए कहता है, " मेरी आखों की कशिश तुमसे बर्दाश्त नहीं हो रही है ठकुराइन !! या अपनी मोहब्बत कों छिपा रही हो !!" धनंजय उसकी आखों मे देखते हुए अपनी बात कहता है। आरध्या अपने नजरों कों इधर उधर करती हुई कहती है," ठाकुर !! देर हो रही है मुझे तैयार होने जाने दो !!"

धनंजय गहरी सांस लेता है और उसे छोड़ देता है। आराध्या उसकी पकड़ से छूट कर इतनी तेजी से वाशरूम भागती है। जैसे कोई भुत उसके पीछे पड़ गया हो। वाशरूम मे घुसते ही उसकी सांसे ऊपर निचे होने लगती है। अपने सीने पड़ हाथ रखती हुई कहती है, ओह्ह !! बच गयी उमापति मै तो.... नहीं तो आज तो. मै सममोहन मे फंस जाती है।

धनंजय मुस्कुरा कर बाहर निकल जाता है। सभी निचे तैयार थे। जिन्हें देख कर धनंजय कहता है, तुम सब निकलो।. हम दोनों आते है। अयान दीप्ती  एक साथ निकलते है और ध्यान और तानिया एक साथ और प्रथम के साथ धनवी और अयानी निकलती है।

धनंजय उन सबको भेज कर अपने कमरे मे जाता है और उसकी नजर जब सामने पड़ती है तो उसके होश उड़ जाते है।


आरध्या अपनी कर्ल किये हुए खुले बालों मे साड़ी की प्लेट्स ठीक कर रही थी। जो उससे हो नहीं रहे थे और वो परेशान हो रही थी। धनंजय जो उसे साड़ी मे देख अपनी होश खो चुका था।लेकिन उसे परेशान देख कर वो आता है और सीधे झुक कर उसकी साड़ी की प्लेट ठीक करने लगता है। उसके अचानक झुक कर साड़ी की प्लेट ठीक करने से, आराध्या संकोंच मे कहती है, " ये तुम क्या कर रहे हो ठाकुर !! छोड़ दो मै कर लुंगी !!"

ऐसे कैसे ठकुराइन!मै कर देता हूँ ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है और पत्नी के साड़ी कों ठीक करने मे पति का कद छोटा नहीं हो जाता। ये कह कर उसकी प्लेट कों ठीक करने लगा। आराध्या बस प्यार से उसे निहार रही थी और उसके मन मे चलता है, " हाय !! ये तो मैंने सिर्फ सोशल मिडिया और टीवी पर ही देखा था। आज ये मेरे साथ हो रहा है, यकीन नहीं हो रहा है, उमा पति !!"वो अपने सोचो मे गुम थी की तब तक धनंजय के होंठ ने उसके गालों कों चूम कर उसे होश मे ला दिया। अपने होश मे आते ही आराध्या उसे घूरती हुई कहती है, " क्या है ठाकुर !! जब देखो तब मुझे चूम लेते हो। "

धनंजय उसके चेहरे कों हाथ मे भर कर, उसके माथे कों चूमते हुए कहता है, " जिसके पास कोहिनूर हो। उसे प्यार करना तो बनता है ठकुराइन!! तुम मेरे जीवन की वही कोहिनूर हो!!" आराध्या उसकी आखों मे देखती हुई कहती है, " इतनी मोहब्बत हो गयी तुम्हें मुझसे ठाकुर !!" मोहब्बत नहीं ठकुराइन!! तुम तो पूजा हो मेरी!!सम्मान हो। जब से जिंदगी मे आयी हो मेरे जीवन का अंधेरा खत्म करती गयी हो। वो धनंजय ठाकुर जिसे रिस्ते, औरत और लोगों से नफ़रत थी। उसके दिल मे तुमने अलग रौशनी भर दी है!!

आराध्या प्यार से उसके चेहरे कों अपने हाथों मे भर लेती है और थोड़ा पैर कों उठा कर और थोड़ा उसका चेहरा झुका कर माथे कों चूम लेती है और कहती है, " सूरज बादलों मे छिप सकता है।लेकिन उसकी रौशनी बादल नहीं ढक सकती ठाकुर !!"

समझ गया ठकुराइन !! अब चले!! हमदोनों ही बच गए है। सभी चले गए। क्या? मुझे छोड़ कर कैसे जा सकते है सभी!! क्या मतलब ! तुम मेरे साथ जा रही हो ठकुराइन !! ये कहते हुए उसकी कमर कों पकड़ कर अपने करीब करता है और अपनी मोहब्बत भरी नजर से उसे देखते हुए कहता है, " आज तुम बेहद खूबसूरत लग रही हो। अगर तुम अभी के अभी मेरे साथ पार्टी मे नहीं चली तो मेरा ईमान डोल जायेगा और मै कुछ कर जाऊंगा!!" ये उसने इतनी गहराई से कहीं की वो सीधे उसके सीने पर धक्का मारते हुए कहती है, " गंदे कहीं के !!" चलो अभी नहीं तो धक्के मार कर ले जाउंगी !! कह कर आगे बढ़ गयी। धनंजय मुस्कुरा कर उसके साथ हो लिया। दोनों पार्टी के लिए निकल गए।

कृष्ण राठौर एक पचास साल का शख्स यूरोप मे इनका भी अपना नाम है।ये भी एक अच्छे बिजनेस मेन है, जो इंडिया मे अब अपनी धाक जमाना चाहते है, बिजनेस मे। जिसकी शुरुआत इन्होंने भोपाल से करने की सोची। इनकी पत्नी नहीं है लेकिन इनकी एक गर्लफ्रेंड है। बिजनेस माइंड इंसान है। इनके दो बेटे है, मेहुल राठौर और उदित राठौर दोनों ही पिता कि बिजनेस संभालते है। आज इन्होने पार्टी रखी थी जिसमे भारत के जाने माने बिजनेस मेन शामिल हुई थे क्योंकि राठौर कम्पनी के साथ सभी जुड़ना चाहते थे।

कृष्ण राठौर की नजर जब अयान और ध्यान पर पहुंची। वो आगे बढ़ कर कहते है, "वेलकम!! वेलकम मिस्टर चतुर्वेदी एंड मिस्टर ठाकुर !! बहुत देर लगा दी आने मे !! " वो दोनों भी मुस्कुरा कर उनसे हाथ मिलाते हुए कहते है, " नाइस टू मीट यू  मिस्टर राठौर। "वैसे मिस्टर धनंजय ठाकुर नहीं आये। वो आते ही होंगे। फिर उसकी नजर पीछे खड़े सभी लोगों पर जाती है। अयान कहता है," मीट माय वाइफ मिसेस दीप्ती चतुर्वेदी !!" ये है मिसेस तानिया ध्यान ठाकुर। ये दोनों हमारी बहन धनवी ठाकुर और अयानी ठाकुर। फिर ध्यान पीछे खड़े प्रथम की तरफ देखते हुए कहता है,.... तभी कृष्ण राठौर कहते है, " ये मिस्टर प्रथम राज जिनकी सुरक्षा एंजेन्सी पीं आर लिमिटेटेड इंडिया की मोस्ट फाइव कम्पनी मे से एक है। आज की पार्टी की सिक्योरिटी भी तो इन्ही की कम्पनी से प्रोवाइड की गयी है। कहते हुए उससे हाथ मिला लेता है।

सभी अंदर आ जाते है। कृष्ण राठौर एक एक करके अपने दोनों बेटों से उन सभी कों मिलाता है। तभी एक खूबसूरत तीस पेंतीस साली की बेहद स्टलिश महिला उन सबके बीच आती है। उसके कपड़े बेहद बोल्ड थे। जिसे देख कर तानिया और दीप्ती का मुँह बन गया था।वो अपनी अदाओ के साथ कृष्णा राठौर के पास आती हुई कहती है, " कृष्ण आप यहाँ क्या कर रहे हो !!" कृष्ण राठौर मुस्कान लिए कहता है, मीट माय..... आगे की बात वो बोल नहीं पाता क्योंकि बाहर शोर होने लगती है।शोर सुनकर सबका ध्यान उस तरफ चला जाता है और वो महिला अपनी अधूरे परिचय से खुद कों अपमानित महसूस करने लगती है। वो अपनी मक्कारी भरी मीठे आवाज़ मे कहती है, " कृष्ण इतना शोर किस लिए है !! पता नहीं सोनाली आओ देखते है !!" कृष्ण राठौर की पार्टी मे हलचल शुरु हो चुकी थी। जहाँ बहुत कों अंदाजा हो चुका था की हलचल क्यों हो रही है। वही बहुत से लोग इस बात से अनजान थे।और बहुत कों मालूम हो चुका था की कौन आ रहा है!!"

मेहुल और उदित उत्सुकता से एक दूसरे से कहते है, " ऐसा कौन आ रहा है !! जो इतनी हलचल मच गयी, खुद डैड भी बाहर निकल गए। उसकी बात पर वहाँ वरुण और रणवीर एक साथ आते है और कहते है, " इंडिया और अमेरिका का सबसे मशहूर बिजनेस मेन धनंजय ठाकुर के लिए ये हलचल हो रही है। उन दोनों की बात सुनकर राठौर भाइयों के दिमाग़ मे कोतुहुल मच जाता है। ओह्ह !! बहुत सुना है उसके बारे मे लेकिन आज तक मौका नहीं मिला मिलने का !!" वो दोनों बाप बेटे उससे बातें करने लगते है लेकिन सबकी नजर मुख्य इंट्रेन्स पर थी।

प्रथम तेजी से बाहर जाता है और उसके पर्सनल सिकयोरिटी गार्ड वहाँ के पुरे हिस्से कों पूरी तरह से घेर लेते है।गाड़ी जैसे ही होटल के पास आकर रूकती है। बाहर मिडिया और लोगों की हलचल देख कर, आराध्या तेजी से धनंजय का हाथ पकड़ कर कहती है, " ठाकुर!! इन सबको इतनी चूल क्यों मची हुई है। तुम तो कोई फ़िल्म स्टार नहीं हो. जो तुम्हारे पीछे बोराई चल रही है!! धनंजय उसके हाथों पर अपने हाथ रखते हुए कहता है, " एक तो तुम ठकुराइन!! ये आदिकाल के भाषा कों बोलना बंद कर दो। इतने वक़्त से साथ हो तो तुम्हें नहीं मालूम की तुम्हारा पति क्या चीज है !!" वो मासूमियत से अपना सर ना मे हिलाती हुई कहती है, मुझे बस इतना मालूम है की ठाकुर कम्पनी के तुम मालिक हो और वो कम्पनी बहुत बड़ी कम्पनी है। लेकिन इसका इन मिडिया सबसे क्या लेना देना!! अच्छा छोड़ो इन बातों कों, पहले ये बताओं घबरा तो नहीं रही हो!!" नहीं मै क्यों घबराने लगी ठाकुर। ठीक है, वो मुस्कुरा देता है। तब तक खुद प्रथम आकर उसकी तरफ का दरवाजा खोलता है।

अभी तक जो वो मुस्कुरा रहा था। अब वो बेहद ठंडे अवतार मे आ जाता है। जिसमे सिर्फ और सिर्फ उसका गुरूर उसके चेहरे पर झलक रहा था। वो बाहर निकलते ही अपने कोट का बटन लगाता है। इधर अयान जैसे ही आराध्या की तरफ का दरवाजा खोलने जाता है तो धनंजय उसे रोक देता है और खुद दरवाजा खोलता है और हाथ बढ़ा देता है। आराध्या मुस्कुराते हुए उसके हाथों मे अपना हाथ दें देती है।धनंजय के हाथ उसकी कमर पर चले जाते है।

प्रथम और उसके सभी सिक्योरिटी गार्ड ने  उन्दोनो कों घेर रखा था। ताकि कोई उन्दोनो की तस्वीर ना ले सके। सब अंदर आते है। धनंजय और आराध्या जैसे ही अंदर आते है। सबकी नजर उन्दोनो पर चली जाती है।

आरध्या और धनंजय दोनों साथ मे बेहद आकर्षक जोड़ी लग रही थी।वहाँ मौजूद सभी पुरुष वर्ग की नजर आरध्या की खूबसूरती पर रुक गयी थी और मौजूद सभी महिला वर्ग की नजर धनंजय के हेंडसम चेहरे पर रुक गयी थी। जलन भी दोनों तरफ लगी हुई थी। आरध्या धनंजय के साथ ये पहली बार बिजनेस मीटिंग मे आयी थी और धनंजय की हाथों कों थाम रखा था। धनंजय कों अहसास हो गया था। इसलिये उसने धीरे से आरध्या की तरफ झुक कर उसकी कानों मे कहता है, " ठकुराइन !! मै हूँ ना, फिर क्यों घबरा रही हो। ज्यादा घबराहट हो रही है तो बोलो तुम्हारे गुलाबी होठो कों चूम लेता है। "
ये बात धनंजय ने आरध्या कों अपने अवतार मे लाने के लिए कहा और वो कामयाब भी हो गया। आरध्या दोनों हाथों से उसकी बाजु पकड़ कर। उसके बाजु पर दबाब बनाती हुई अपनी दबी जुबान मे कहती है, किसी दिन तुम्हारे होठो पर मिर्ची रगड़ दूँगी ठाकुर !! जो बहुत तोते की तरह फरकती है। उस की बात पर वो कुछ कहता। तब तक कृष्ण राठौर उसके पास खुद आ गया।

दोनों के बीच औपचारिक मुलाक़ात हुई।कृष्ण राठौर कहता है, मुझे आपका ही इंतजार था मिस्टर ठाकुर। इनसे मिलिए ये है हमारे दोनों बेटे मेहुल राठौर और उदित राठौर। वो दोनों धनंजय से हाथ मिलाते है। तभी कृष्णा राठौर कहता है, और ये है मेरी बेहद करीबी मिस सोनिया खन्ना !! सोनीया तो जब से धनंजय कों देखा, तब से उसकी आखों मे चमक दिख थी थी। जिसे आरध्या देख कर आँख छोटी करती हुई उसे घूर रही थी। सोनिया बेहद आकर्षक तरीके से अपना हाथ बढाती है, धनंजय की तरफ हाथ मिलाने के लिए। लेकिन धनंजय हाथ नहीं मिला था। उसके इस व्यवहार के बारे मे सब कों मालूम था की वो कब  किस से कैसे पेश आता है। ये उसकी मर्जी पर होती थी।

कृष्ण राठौर उत्सुकता से आरध्या की तरफ देख रहा होता है। जो धनंजय कों अच्छा नहीं लगता है और वो अपनी ठंडी आवाज़ मे कहता है, " शी इज माय वाइफ मिसेस आराध्या ठाकुर "!! वो खुश होकर उसकी तरफ हाथ बढ़ाता है। लेकिन आरध्या अपनी चिर परिचित अंदाज मे अपने हाथों कों जोड़ लेती है। उसकी आदत देख जहाँ सोनिया कहती है, सो मिडिल क्लास बिहेवियर !! उस पर धनंजय कहता है, नो मैडम !! इट्स आउर क्लचर!!"

कृष्ण राठौर बातों कों हल्का करते हुए कहता है, आईये चलते है। धनंजय सबके साथ पार्टी के अंदर बढ़ जाता है। इधर आरध्या, दीप्ती, तानिया, अयानी और धनवी के साथ एक तरफ मौजूद थी। धनंजय बिजनेस मेन सबके बीच मे बातें कर रहा था लेकिन उसका ध्यान आरध्या पर भी था। तभी ध्यान कहता है, आप फ़िक्र मत कीजिये। हम है उन सबके साथ। धनंजय थोड़ा रिलैक्स होकर सबके बीच बात करने लगता है।

इधर वरुण कों देख वसुधा कहती है, तैयारी की है ना। बिल्कुल मोम सब तैयार। आज जो होगा उससे धनंजय ठाकुर मुँह छिपाते हुए फिरेगा। पार्टी अपने शबाब पर थी। कृष्ण राठौर अपनी बात बढ़ाते हुए धनंजय से कहता है, क्या ख्याल है होटल चैन मे मिस्टर ठाकुर।आप अच्छी तरह से जानते है की अगर होटल बिजनेस मे मेरी यूरोप मे पकड़ है तो इंडिया मे आपकी। तो क्यों ना एक डील साथ मे की जाये।

धनंजय बिना किसी भाव के कहता है, इस मुद्दे पर सोचा जा सकता है लेकिन उसके लिए ये जगह तो बिल्कुल ठीक नहीं है राठौर साहब !! हम ऑफिस मीटिंग करेंगे फिर इस पर बात होगी। उन्दोनो की बात हो रही थी। इधर आराध्या की आखों पर कोई हाथ रख देता है। जिसे देख धनंजय की आँखे छोटी हो जाती है और सबके बीच से वो एक्सक्यूज़ मी कह कर आरध्या कि तरफ बढ़ जाता है ।

वही आरध्या मुस्कुरा कर कहती है, क्या भाई !! ये सुनकर सभी मुस्कुरा देते है और संकल्प मुँह बना कर आगे आ जाता है और कहता है, क्या यार !! तूने मुझे फिर से पहचान लिया। ये कह कर जैसे ही अपने बाहें फेला देता है। आरध्या जैसे ही उसके गले लगने कों होती है। उससे पहले धनंजय संकल्प के गले लग जाता है। उसकी हरकत देख सभी अपनी मुँह खोल देते है। प्रथम कहता है, जलकुकरा !! संकल्प हैरानी से, मुस्कराते हुए उसके गले लग जाता है.। और आरध्या कों देख रहा होता है, जो हैरानी से धनंजय कों देख रही होती है। आगे बढ़ कर वो धनंजय कों उससे अलग करती हुई कहती है, ठाकुर !! मेरे भाई है। मुझे तो मिलने दो !! कह कर उसके गले लगने लगती है की धनंजय उसकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ घुमा लेता है और गले लगाते हुए कहता है। करीब सिर्फ मेरे रहोगी और किसी की नहीं। समझी ठकुराइन!!

संकल्प धनंजय कों इशारे मे कहता है, ऐसे नहीं मानेगी ! मै ध्यान रखूँगा। उसकी बात समझ कर धनंजय आराध्या कों छोड़ देता है। लेकिन आरध्या नाराज हो जाती है और उसकी तरफ बिना देखे हुए कहती है, दीप्ती चल कुछ खाते है। ये कह कर सबको लेकर चली गयी। धनंजय उसे रोकता उससे पहले कुछ बिजनेस मेन उसके साथ साथ अयान, संकल्प, ध्यान कों घेर लेते है। धनंजय प्रथम कों इशारा कर देता है। वो पलकें झपका कर उन सबकी तरफ चला जाता है।

इधर कृष्ण राठौर की नजर सिर्फ और सिर्फ आरध्या पर थी। उसके पास उसके दोनों बेटे पास आकर कहते है, " डैड !! ये ठाकुर कुछ ठेढ़ी चीज नहीं है। कृष्ण राठौर कहता है, टेढ़ी है तब तो वो धनंजय ठाकुर है। वैसे डैड उसकी वाइफ बेहद खूबसूरत है। उसकी नजर अपने दोनों बेटों की तरफ जाती है। उन दोनों कों चेतावनी भरी आवाज़ मे कहता है, " दूर रहना उससे !! नहीं तो जिस मकसद के लिए हम यहाँ आये है। वो कभी पूरा नहीं होगा। अभी हम धनंजय ठाकुर से किसी तरह की दुश्मनी नहीं ले सकते। तुम दोनों ने देखा नहीं की वो कितना पोसेसिव है अपनी बीबी के लिए। हमारी एक गलती और हम खत्म हो जायेगे। जानता हूँ की उसकी बीबी बेहद खूबसूरत है और किसी का भी दिल उस पर आ जाये। लेकिन अभी नहीं !! उसके दोनों बेटे कहते है, " यानी आपकी भी नजर है डैड !! खूबसूरत चीज पर हर किसी की नजर जाती है।

इधर आराध्या जूस पीती हुई कहती है, समझता क्या है अकरु डायनाशोर !! घर पहुंचने दो तब बताती हूँ। अक्ल इसकी मैंने बालकनी से निचे लटका कर नहीं लायी तो देख लेना। धनवी पीछे खड़े धनंजय कों देखती है। वो बार बार आरध्या से कहती है, भाभी !! सुनो ना। बाद मे गुस्सा कर लेना।अयानी और संकल्प भी पीछे खड़े धनंजय कों देख कर कहते है, " अरे ठीक है आरध्या !!चलो उधर देखते है क्या है फ़ूड मे !!"

आरध्या उन सबको अपनी उंगली दिखाते हुए कहती है, " तुम लोग डरते होंगे उस डायनाशोर ठाकुर से !! मै नहीं डरती, आज ये पार्टी नहीं होती तो मै उसे आटे की तरह गूंद कर उसे पीट पीट कर मुलायम करती। अभी जो बाजरे की आटे की तरह कठोर बना हुआ है। छोरुँगी नहीं उसे मे !! तो किसने कहा छोड़ने कों, ये आवाज़ सुनकर जहाँ आराध्या खामोश होकर आँखे बंद कर लेती है और मन मे कहती है, ये यहाँ भी आ गया। वही धनवी, अयानी और संकल्प के साथ सभी वहाँ से निकल जाते है। आराध्या धीरे से कहती है कायर कहीं की।

तब तक अपने हाथ पॉकेट मे डाले हुए धनंजय उसके सामने खड़ा हो जाता है।

इधर संकल्प तेजी से धनवी का हाथ पकड़ कर एक तरफ ले जाता है, जहाँ लोग कम मौजूद होते है। धनवी घबराते हुए उसकी तरफ देखती है और कहती है, " अ.. अ... आप यहाँ मुझे क्यों लाये है? " उसके चेहरे पर डर देख कर संकल्प प्यार से उसके गाल पर हाथ रखते हुए कहता है, " हेय!! शांत हो जाओ। अगर तुम्हें मेरी मौजूदगी और मेरा छूना अच्छा नहीं लग रहा है तो माफ कर दो मुझे, लेकिन शांत हो जाओ। ये कह कर वो उससे दो कदम पीछे हो जाता है। धनवी उसकी बात से अपनी आँखे खोल देती है। सामने संकल्प उसे देख कर मुस्कुरा कर कहता है, " मेरी तीन बहन है, सगी ना सहीं लेकिन मैंने उन्हें बहन माना है और जिस लड़के कों अपनी माँ और बहन से प्यार होगा। वो लड़का कभी किसी लड़की की इज्जत और इज्जाजत के बिना उसे नहीं छू सकता है। इसलिये तुम मुझ से परेशान होना बंद कर दो। मुझे तुमसे कुछ कहना था, इसलिये ऐसे लेकर आ गया। माफ कर दो मुझे। ये कह कर वो जाने लगता है की उसका हाथ धनवी जल्दी से आगे बढ़ कर पकड़ लेती है।

दीप्ती मुस्कुराते हुए अयान के साथ सबसे मिल रही थी और ध्यान भी तानिया का हाथ थाम सबसे उसे मिलवा रहा था। क्योंकि अयान और ध्यान ने सोच रखा था की आने वाले वक़्त मे दोनों कों बिजनेस के लिए तैयार करेगा। ये विचार धनंजय का था की वसुंधरा इम्पायर वो आरध्या के साथ साथ दीप्ती और तानिया कों सोपना चाहता था। ये सब सोचते हुए, अयान और ध्यान उन्दोनो कों सबसे मिलवा रहे थे। तभी अवनी और उसकी दोस्त नताशा उन चारों के के सामने आती है।