Love without wish Chapter-51
- 29 June, 2026
वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता है। ये बात धनंजय और आरध्या के जीवन मे भी आया था। पुरे परिवार को खबर हो चुकी थी की वसुंधरा और महेंद्र ने क्या साजिश रची थी। आयान और युक्ता को भी मालूम हो गया था की उसे कोई बीमारी नहीं थी। ध्यान और तानिया को खबर हो गयी थी की दादी और दादू को मीठा जहर दिया जा रहा था। लेकिन किसी ने भी कुछ भी वसुंधरा और महेंद्र से नहीं कहा। ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसे कुछ हुआ ही नहीं था।
धनंजय ने कुछ बड़ा करने की सोच रखी थी। इसलिये आज पूरा परिवार इकट्ठा हुआ था। वसुंधरा और महेंद्र को इसकी कोई खबर नहीं थी की उनका सच सबको मालूम हो गया है। सब इस तरह से जता रहे थे। जैसे कोई बात ही ना हुई हो। आज ध्यान और तानिया वापस आने वाले थे, जिसकी जानकारी सिर्फ धनंजय और अयान को थी।
किचन मे आज आरध्या और युक्ता काम मे लगी हुई थी। उनको यू काम करता देख कर ना जाने क्यों वसुंधरा को कुछ खटक रहा था। वो उन दोनों को बीना कुछ कहे हुए सीधे कमरे मे जाती है। महेंद्र जो कब से फोन पर किसी से बात कर रहा था।वसुंधरा के आते ही उसे फोन थमा देता है। उधर से उसे कुछ कहा जाता है, जिसे सुनकर वसुंधरा गुस्सै मे हो जाती है। इन लोगों की ये हिम्मत की ये वसुधा ठाकुर के साथ चलबाजी करे। तुम सब कुछ तैयारी रखो... आज ये लोग हमारा क्या खेल खत्म करेंगे। हम इनकी कहानी खत्म करेंगे। ये कह कर उधर से वसुधा को फिर कुछ कहा जाता है। जिसे सुनकर वसुधा मुस्कुरा देती है।
महेंद्र ने वसुंधरा सा कुछ पूछा। उसकी बात सुनकर दोनों मुस्कुरा उठे।
आरध्या किचने मे काम कर के अपने कमरे मे जाती है और उसके फोन पर एक मेसेज आता है। जिसे देख उसके चेहरा का भाव बदल जाता है। वो कुछ सोच पाती और कर पाती तब तक वसुंधरा और महेंद्र उसके कमरे मे आ जाते है। उन दोनों को अपनी तरफ मुस्कुराते देख वो गुस्से मे उनको घूरती है, " अगर धनवी और अयानी को खरोंच भी आयी तो तुम दोनों की मै वो दुर्गति करुँगी जिसकी तुमने कल्पना भी नहीं की होगी। "
मेरी दुर्गति बाद मे करना बहुरानी। अगर तुम ख़ामोशी से इस जगह नहीं पहुंची तो हॉस्पिटल मे मौजूद मेरे आदमी ना जाने उन दोनों के साथ क्या कर दे और तुमको मालूम भी नहीं हो। वसुंधरा ने अपनी बात कहीं। ' जीजी 'कहती हुई जैसे ही दीप्ती कमरे मे आती है तो उसकी बात सुनकर, वो उसकी तरफ मारने को बढ़ती है। तभी महेंद्र की आवाज़ गूंजती है, ए लड़की एक कदम भी आगे बढ़ी तो जो हम कह रहे है, वो कर जायेगे।
आराध्या उसके हाथों को खींच कर अपने तरफ कर लेती है। फिर उन दोनों घूर कर देखती है, " ये तो बहन और मौसी के नाम पर कलंक है तो आप पिता के नाम पर। हम कैसे मान ले की आप जो कह रहे है। वो सच है क्योंकि वो है तो आपकी भी बेटी लेकिन कलयुग है। इसलिये ये नहीं कहूँगी की पिता ऐसा नहीं होता है। आपके जैसे पिता को देख कर भरोसा हो गया की कलयुग अपने चरम पर है। पहले इस बात का भरोसा दीजिये की अगर मै आप दोनों की बात मान लूँ तो.....!!
वसुंधरा ने महेंद्र को इशारा किया। महेंद्र किसी को फोन करता है, " दोनों लड़कियों को कुछ मत करना। उनको जैसे आयी है वैसे जाने देना। लेकिन जब मे कहु तब !" फिर आराध्या की तरफ देखते हुए, बाहर गाड़ी खड़ी है उसमें तुम दोनों जा कर बैठ जाओ। हम दोनों क्यों? बात तो सिर्फ मेरी हुई थी। लेकिन सुन तो लिया तुम्हारी इस बहन ने भी और हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते है। वसुंधरा ने अपनी बात कहीं।
जैसे ही तुम दोनों गाड़ी मे बैठोगी। मेरे आदमी तुम्हें लाइव वीडियो दिखा देंगे। हम बस इतना ही कर सकते है। आराध्या ने अपनी आँखे बंद की, " माफ करना ठाकुर ! लेकिन तुमसे बात करने का कोई मौका नहीं मिला !"
शाम के वक़्त,धनंजय ऑफिस मे बैठा हुआ था की तभी अयान आता है और अपने हाथों मे मौजूद टैब उसकी तरफ कर देता है। उस टैब को देख कर उसकी आँखे लाल हो जाती है। वो सीधे कुर्सी से उठता है, चलो घर चलना है। पूरा परिवार पहुंच चुका होगा। लेकिन धनंजय अभी हमे कहीं और होना चाहिए। नहीं अयान अभी हमे घर पहुंचना है। ये कहते हुए वो ऑफिस से घर की तरफ निकल गया। आज उसकी गाड़ी की स्पीड तेज थी। जो आज तक उसने ऐसे गाड़ी नहीं चलाई थी। अरे यार गाड़ी इतनी तेज क्यों चला रहा है। धनंजय उसे कुछ नहीं कहता... चालीस मिनट का रास्ता उसने पंद्रह मिनट मे पूरी की।
अंदर जैसे ही वो आता है वसुंधरा और महेंद्र आराम से मुस्कुराते हुए सोफे पर बैठे हुए थे। धनंजय बीना उनकी तरफ देखे हुए ऊपर जाने को होता की वसुंधरा की आवाज़ गूंजती है। रुक जाओ धनंजय ! तुम उसे जिसे ढूढ़ने जा रहे हो वो तुम्हें नहीं मिलेगी। उसकी बात सुनकर धनंजय की जगह अयान गुस्से मे चीखा, " क्या बकवास कर रही हो आप :! क्या किया है आपने? "
अयान ये सवाल बेकार है इन दोनों से पूछना क्योंकि ये दोनों इस लायक नहीं की ऐसे सवाल इन से पूछा जाये। ये कह कर धनंजय ने अपने कदम उनके तरफ बढ़ा दिए। धनंजय का औरा इस समय इतना खतरनाक लग रहा था की वसुंधरा और महेंद्र घबराहट से अपने कदमों को पीछे करने लगे। अब बताइये ठकुराइन कहाँ है और आप लोग क्या चाहती है।
उसकी बात पर वसुंधरा हंसती है, क्या बात है धनंजय ठकुर ! तुम्हारी नाक के निचे से तुम्हारी बीबी को गायब कर दिया और तुम्हें मालूम भी नहीं चला।
धनंजय आराम से उसकी तरफ देखता है। जब मै इतना कमजोर हूँ और आप दोनों इतने बहादुर तो ये भी बता दीजिये की आपने मेरी माँ और आराध्या के माता पिता के साथ क्या किया !" वसुंधरा और महेंद्र हैरानी से उसे देखते है।
पहले अपने बीबी के बदले हमे जो चाहिये वो तो दे दो। अयान पेपर दो इन्हें। धनंजय पीछे मौजूद अयान से कहता है। अयान आगे बढ़ कर उसे तीन पेपर देते है, "ये है ठाकुर इंटरप्राइजेज और वसुंधरा कम्पनी के सारे शेयर जो आप दोनों के नाम कर दी गयीं।"महेंद्र ठाकुर तेजी से उस पेपर को उठा कर देखता है। पेपर देखने के साथ वो मुस्कुराते हुए वसुंधरा को हाँ कहता है।
अयान ने अब गुस्से से कहा, अब बताओं आप सभी ने वसुंधरा माँ के साथ क्या किया !" उसकी बात पर वसुंधरा ने मुस्कुराते हुए कहा, कमाल है अपनी बीबीयों की बजाय तुम्हे ये जानना है की उस वसुंधरा के साथ क्या किया !! छोड़ो ना वसु '! हम जाने से पहले इसे इतना तो बता सकते है की हमने इसकी और उस आराध्या के माँ बाप के साथ क्या किया।
धनंजय अपनी आँखे बंद कर चुका था लेकिन खामोश था। अयान भी हैरानी से वसुंधरा और महेंद्र की तरफ देखता है। धनंजय अपनी आँखे बंद कर के इशारा उसे चुप रहने को कहता है।
वसुंधरा ने हँसते हुए कहा, तो सुनो मेरे प्यारे बेटे हम दोनों ने तुम्हारी माँ के साथ क्या किया !"
"महेंद्र मुझ से बहुत प्यार करते थे और मै भी करती हूँ। जब हम वापस दिल्ली से वापस आये तो तुम्हारी माँ के खाने मे धीरे धीरे जहर देने लगे लेकिन एक दिन उसे हमारी सच्चाई मालूम हो गयी। आज भी याद है वो मुझसे मिलने घर पर आयी थी। पहली बार मेरे माता पिता को मालूम हुआ की मै और महेंद्र एक दूसरे से प्यार करते और वसुंधरा को रास्ते से हटाने मे लगे हुए थे। वैसे तो मेरे माँ बाप को वसुंधरा नहीं पसंद थी। लेकिन तुम्हारे जन्म के बाद मेरे माँ बाप का मन वसुंधरा की तरफ हो गया था।
उस रात मेरा इन तीनों से बहुत झगड़ा हो गया था। लेकिन मैंने और महेंद्र ने तैयारी पहले ही कर लिए थी। इसलिये जैसे ही वसुंधरा मुझसे लड़ने को हुई तो मैंने हथोड़ी से उसके सर पर वार किया। वो बीमार और कमजोर पहले से थी। वो खुद को संभाल नहीं पायी लेकिन मेरे माँ बाप ने मुझे थका दे दिया। तब तक महेंद्र भी अपने आदमियों के साथ पूरी तैयारी से आ गए थे। उस रात वसुंधरा को खत्म कर के मै हमेशा के लिये वसुंधरा बन कर ठाकुर हवेली मे जाने वाली थी।
मेरे बाप ने मेरी माँ और अपनी बड़ी बेटी को घर से बाहर भगा दिया।
लेकिन ना वो बचा और ना मेरी माँ और बहन। दोनों जब बाहर भागी तो संयोंग से उनकी मुलकात आराध्या के माता पिता से हो गयी। वो दोनों भोपाल से उज्जैन जा रहे थे। तुम्हारी माँ की हालत देख कर दोनों पति पत्नी ने अपनी गाड़ी मे उनको बिठा लिया।
लेकिन वो रात शायद हमारी रात थी। अचानक मौसम बदला और तूफान ने हमारा साथ दिया। हमारी लोगों ने उस गाड़ी का पीछा किया और तुम जानते हो की क्या हुआ। पहाड़ के पास आ कर तुम्हारी माँ दम तोड़ चुकी थी। लेकिन अब हमारी समस्या ये थी उसके माँ बाप सब कुछ जान चुके थे। इसलिये हमने उन्हें भी मार डाला और गाड़ी मे आग लगा दी। वो सब गाड़ी मे चीखते रहे और हम बस अपनी जीत पर मुस्कुरा रहे थे।
बस ये समझ लो की तुम्हारी माँ ही तुम्हारे पत्नी की माँ बाप के मौत का कारण बनी। तुम लोग भी जिन्दा नहीं रहते लेकिन उस बुढऊ ने वसीयत बदल दी और हमे इतना साल इंतजार करना पड़ा।
अपनी बातें कहते हुए वसुंधरा और महेंद्र मुस्कुराते हुए उन दोनों को देखने लगते है। महेंद्र ने कहा, मुझे कभी वसुंधरा से प्यार नहीं था। मैंने हमेशा उसे वसुधा समझा और तुम तीनों से तो मेरा कोई लेना देना नहीं था। अब बातों को ज्यादा ना बढ़ाते हुए कहूँगा की हमे सुरक्षित तोर पर निकलने दो ताकि तुम्हारी बीबी और बहन तुम्हें सुरक्षित मिल जाये। क्योंकि जब इतना जान गए हो तो ये भी जान चुके होगे की मेरा बेटा मयंक के कब्जे मे तुम्हारी बीबी और बहन है। वैसे तो वो बड़ा शरीफ है लेकिन तुम्हारी बीबी उसे पहले से पसंद है। इसलिये अगर कुछ भी करने की कोशिश की तो मुझे नहीं मालूम की वो क्या कर जायेगा। महेंद्र अपनी बात कह कर उन दोनों को तिरस्कार भरी नजरों से देखता है।
धनंजय बीना कुछ कहे उनकी तरफ कदम बढ़ाने लगता है। अपने स्वाभाव से शांत धनंजय आज भी शांत था लेकिन उसकी आँखे बेहद खतरनाक लग रही थी। जो किसी को काँपने पर मजबूर कर देती है। उसके बढ़ते कदम महेंद्र और वसुंधरा के अंदर घबराहट भर रही थी।
धनंजय ने उनके चेहरे के उड़े रंग को देख मुस्कुरा देता है, " क्या बात है मेरी ख़ामोशी आप सब को इस कदर डरा रही है। तो सोचिये मेरा बोलना आपकी कहीं मौत ना ले आये। इतना तो समझ चुका हूँ की आपको सब कुछ आपके बेटे ने बता दिया है। लेकिन क्या आपके बेटे को मालूम है धनंजय ठाकुर क्या है ? क्योंकि मेरे बारे मे जानना हर किसी के बस की बात नहीं है। क्या आपके बेटे को मै उसी तरह की मौत दू, जो आपने कभी मेरी माँ को दिया था।"
वसुंधरा ने अपने बेटे की मौत का नाम सुनकर उसकी तरफ चीखती है, खबरदार जो तुमने ऐसा कुछ सोचा तो। नहीं तो तुम्हारी प्यारी बीबी और उसकी छोटी बहन दोनों को मेरा बेटा ऐसी मौत देगा की तुम उसकी लाश भी नहीं देख पाओगे।
धनंजय उसकी तरफ देखता है, " आपने अभी तक मेरी ठकुराइन को जाना नहीं। चलिए थोड़ा उसे भी जान लेते है। " तभी अयान ने फोन किया और बहुत सारे आदमी काले कपड़ो मे अंदर आ गए। इतने लोगों को देख कर वसुंधरा और महेंद्र परेशान हो जाते है, " देखो हमारे साथ अगर तुमने कुछ भी किया तो समझ लेना की तुम्हारी पत्नी को तुम देख नहीं पाओगे। हम अपने वक़्त पर हमारे बेटे के पास नहीं पहुँचे तो समझ लेना की इसका अंजाम बेहद बुरा होगा। "
अरे वसुधा तुम इतनी परेशान क्यों होने लगी। मै कुछ नहीं करुँगा। चलो तुम्हारे बेटे के पास ले चलता हूँ। धनंजय की बातें सुन कर वसुधा हैरानी से उसे देखती है। उसकी हैरानी देख कर अयान ने मुस्कुरा कर देखा, " अरे घबराओ नहीं। हम तुम्हें हाथ भी नहीं लगाएंगे। हमारी आदत है की हम गंदे खुन से अपने हाथों को रंगते नहीं और अभी तो हमारी घर की मुख्य दोनों सदस्यो को तुम्हारे बेटे ने अपने कब्जे कर रखा है। तो घबराओ मत और चलो हमारे साथ। "
उसकी बात पर महेंद्र ने अपनी घबराहट मे कहा, " लेकिन तुम लोगों को कैसे मालूम है की वो कहाँ है ? " सारे सवालों का जबाब आपको मिल जायेगा। अयान ने अपनी बात कहीं।
आरध्या और दीप्ती को जंगल की तरफ एक पुराने से गैरज मे लाया गया। अंदर का नजारा देख दीप्ती और आरध्या की आँखे बंद हो गयी थी। तभी उसके सामने एक लम्बा चोड़ा कद काठी का इंसान आता है। जिसे देख कर आरध्या ने कहा, " मयंक ठाकुर "! बिल्कुल सही पहचाना भाभी । उन दोनों को देख कर मयंक ठाकुर मुस्कुरा देता है।
आइये ! आइये आप अंदर आ कर अपने चाहने वालों से मिल लीजिये। मुझे उम्मीद है की इनको देख कर आप भागने की नहीं सोचेगी। आराध्या और दीप्ती की नजर सामने बेहोश तानिया, ध्यान और दादी -दादू पर जाती है। दीप्ती उनकी तरफ भागती है।
अरे संभल कर छोटी भाभी जी ! मरे नहीं है जिन्दा है। वो क्या है ना आपके जेठ बहुत चालाक निकले तो हमने सोचा की जब बड़ा भाई इतना चालाक है तो थोड़ी चालाकियाँ हम भी कर ले।
उसके बाद आराध्या के पास आ कर उसके चारों तरफ घूमते हुए, उसके बालो को सूंघता है," ओह्ह ! भाभी जी आपकी अदा और खूबसूरती ने ऐसा दीवाना बना दिया मुझे की लंदन छोड़ कर यहाँ आ गया। कसम से ! इतनी लड़की देखी है लेकिन आपकी जैसे नमकीन लड़की तो बस दीवाना बना देती है। "
"वो उबर खाबर खपेरल की इमारत, जब गले के अंदर नमक मुट्ठी भर जाती है ना ! तो उसका प्राण भी खींच लेती है और तुम जैसे चिलगोजे शक्ल वालों को नमकीन भुजिया हमने बहुत खिलाया है !"
आराध्या की बात सुनकर मयंक ने हँसते हुए कहा, " ओह गॉड ! आई लाइक ईट... यू आर ओसम :!!" तुम्हारी इसी अदा को देखने के लिए मैंने अपनी दोनों छोटी बहन को जाने दिया और इनको पकड़ लिया। ताकि तुम्हें करीब से देख सकूँ।
आराध्या अपनी बाहों को बँधी हुई उसे घूरती है, " ओह्ह ! चांडाल माई के बुरबक बेटा ! तनिक ठहर जाओ। ऐसे क्या भोकाल मचा रखे हो बे। तुम हमको लाये हो या हम खुद आये है। पहले इह तो समझ लो। तुम अपने बरके भैया को जानते नहीं हो ना ! आओ बैठो तुमको हम बताते है की धनंजय ठाकुर बला कौन है ! जो शिव शम्भु हमरे गले मे डाल दिए है। "
मयंक उसकी बातों. को समझ नहीं पा रहा था। फिर भी उसके कहने पर बैठ जाता है। आरध्या उसे देखती है, तुम बैठो ! जिसके लिए हम आये है। "जरा उनसे मिल ले। रुको आराध्या ! अभी तुम यहाँ से कहीं नहीं जा सकती हूँ। तुम मेरे पास रहोगी। जब तक मेरे मोम डैड नहीं आ जाते है। तुम्हारी बहन वहाँ है और अभी सभी बेहोश है और दो घंटे उनको होश नहीं आएगा। या शायद कभी होश आये ही ना !" मयंक ने जैसे ही ऐसे कहा। आरध्या उसे घूरती है, " जुबान संभाल के वसुधा के पुत ! कहीं ऐसा ना हो की जुबान काट दी जाये। "
"तुम मुझे धमकी दे रही हो आराध्या।" मयंक ने गुस्से मे उसे फुफकारा। आराध्या उसके एक नजर दीप्ती को देखती है, दोनों इशारे मे कुछ बातें की। फिर वो उसके सामने कुर्सी पर बैठ गयी।
मयंक उसे देख कर मुस्कुराते हुए कहा, " जानती हो तुम्हारा पहली नजर मे, मै दीवाना बन गया था। चाहता तो तुम को उठा कर हमेशा के लिये ले जाता। लेकिन पीठ पीछे काम करने की आदत नहीं है मुझे इसलिये आज सबके आखों के सामने तुम्हें ले जाऊगा और तुम्हारा पति कुछ नहीं कर पायेगा। "
आराध्या अपने सर को ना मे हिलाती है, " हाय! सोचा नहीं था की तेरे दिमाग़ मे भूसा भरा होगा। मै आराध्या धनंजय ठाकुर हूँ। अपनी ठाकुर की ठकुराइन! वो क्या है ना तुझे मै नमकीन लगी लेकिन मै अपने ठाकुर को जहर लगती हूँ। मेरी आदत है जब तक मै दो चार लात मुक्के ना चला लूँ। लम्बी लम्बी डायलॉग ना मार लूँ। तब तक मुझे मजा नहीं आता है।
मेरे ठाकुर को मेरी इसी अदा से मोहब्बत है और इसलिये उसने मुझे तेरे साथ तीन पांच करने को भेजा है। वो क्या है ना ! जहाँ मै बहुत बोलती हूँ ! वहाँ मेरा ठाकुर बिल्कुल नहीं बोलता है। जहाँ मेरे हाथ पैर चलते है, और सामने वाले का मुँह हाथ तोड़ देती हूँ। वही मेरे ठाकुर को किसी को हाथ लगाना पसंद नहीं है। वो किसी के खुन से अपने हाथों को रंगना पसंद नहीं करता है। फिर सोचो ! लोग उससे डरते क्यों है? आराध्या अपना सवाल पूछती है।
मयंक उसके सवाल पर अपने सर को ना हिला देता है। ये बात !देखा किसी को नहीं मालूम की मेरा ठाकुर आखिर करता क्या है? चलो अपने कान इधर लाओ। मयंक अपने कानों को उसकी तरफ कर देता है।
वो जोर से कहती है, क्योंकि ! वो सामने वाले की दिमाग़ की नशे को उखाड़ देता है गधे ! जैसे तेरे दिमाग़ की दही उसने जमा ली है। वो दुश्मन को टारगेट करता है। लेकिन मारता कब और कैसे है ? ये दुश्मन को मरने के बाद भी मालूम नहीं चलता है। इसलिये उससे लोग डरते है।
मयंक ने उसकी बात पर हँसते हुए कहा, तुम मुझे डरा रही हो। मै नहीं मानता और अगर ऐसा होता तो तुम सब मेरी कैद मे नहीं होते और उसका सब कुछ मेरे नाम पर नहीं मैंने करवाया होता है।
मयंक की बात पर आरध्या ने मुस्कुरा दिया।
" अरे छुटकी मैंने सोचा नहीं था की वसुधा का लाडला बिल्कुल गधेरा निकलेगा। कभी कभी सोचती हूँ की इसकी माँ वाकई तेज है। ओह छोटके शहजादे ! मै यहाँ तुम्हारे कहने पर नहीं बल्कि तुम हमारी कहने पर आये हो। तुमने नहीं ये प्लानिंग मेरे ठाकुर की थी। बस इसमें वो अपनी दोनों छोटी बहनो को घसीटना नहीं चाहते थे। इसलिये जब तुम्हारे आदमी हॉस्पिटल गए। तब उन्होंने ध्यान को कहा की वो तुम्हारे सामने टारगेट बन जाये और तुम बीना किसी नुकसान के धनवी और अयानी को छोड़ दो। "
वो तो मुझे तेरे साथ दो चार बातें करनी थी और उनको मालूम था की उनकी ठकुराइन ये बीना किये मानेगी नहीं। इसलिये उन्होंने मेरा मनोरंजन करने के लिए मुझे भेज दिया। वैसे भी मेरा फैलाया रायता मेरा ठाकुर ही समेटता है।
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