Love without wish Chapter-13c-44
- 29 June, 2026
अयान और ध्यान की बातें सुनकर सभी उनकी तरफ देखने लगते है। अयान कहता है, "हम चाहते है, माँ/ पापा की आप सब मे से कोई उन तीनों कों नहीं बतायेगे की उनकी शादी हमसे हो रही है। हम उनको शादी के बाद चाहते है ये मालूम हो।
ये सुनकर दीपा जी कहती है, लेकिन इंगेजमेंट और सगुण मे तो वो आपको देख लेगी। ये सुनकर ध्यान कहता है, नहीं चाची जी !! हम सीधे बारात लेकर आएंगे और कोई ताम झाम नहीं चाहते है। ज्यादा नहीं सिर्फ अपने रिश्तेदारो के बिच शादी अच्छी तरह से हो जाये। बस हम उनको सरप्राइज देना चाहते है।
ये सुनकर सभी मुस्कुरा देते है। सुमति जी कहती है, अयान सगुण की सारी चीजे बोलो सबको अंदर लेकर आये। फिर दीपक जी कहते है, हमने कोई तैयारी नहीं की है। उस पर गोपी जी कहते है, पहले मुहूर्त निकलवा लेते है फिर रही बात तैयारी कों तो वो सब हम पर छोड़ दीजिये। हमारे आदमी आकर सबकुछ तैयार कर देंगे।
पंडित जी मुहूर्त देखते है और सबकुछ देखने के बाद कहते है, दस दिन बाद एकादशी अमृत मुहूर्त शुभ होगा। ये सुनकर दीपक जी और मुकेश जी कहते है, लेकिन पंडित जी इतनी जल्दी होटल या मेरेज हॉल कैसे बुक होगा। इतनी तेज लग्न है इस बार की लोग छः महीने पहले सब कुछ बुक करके रखते है, वो भी एक शादी के लिए और हमारे घर मे तीन तीन शादिया है। वो भई इतने बड़े परिवार मे, कैसे होगा सबकुछ ?
यह सुनकर अयान कहता है, हम चाहते है की हमारी दुल्हन की डोली यही से उठे और शादी भी इसी घर से हो। दीपा जी कहती है, लेकिन बेटा हमारा घर बहुत छोटा है, फिर बारात सबका स्वागत भी तो करना होगा।
ये सुनकर गोपी जी कहते है, हमारे तरफ से बाराती मुश्किल से पचीस या तीस लोग होंगे और उनके लिए ये जगह काफ़ी है। सबको न्योता हम रिसेप्शन मे देंगे। आप भी अपने करीबी रिस्तेदार कों रखियेगा।
तभी पंडित जी कहते है, अरे पहले के समय मे एक दिन मे शादी हो जाती थी। आज कौन सी मुश्किल है। हमारे पास दस दिन है।
फिर ध्यान कहता है, और सारी तैयारी हमारे आदमी कर देंगे आप उसकी फ़िक्र मत कीजिये। गोपी जी कहते है, और हमे कों दान दहेज नहीं चाहिए। भोलेनाथ की कृपा से सब कुछ है हमारे पास। अब बस बहु आ जाये।
रिंकू जी कहती है, बच्चीयां तो भोपाल है। ये सुनकर ध्यान कहता है, आप उनको बुला लीजिये। गोपी जी कहते है, कपड़े और गहने हम पहले ही भिजवा देंगे।अब आप सब तैयारी कीजिये। बच्चियों कों कैसे मानना है ये हम. आप पर छोड़ते है।
हम अब सीधे बारात लेकर आएंगे आपके घर। सभी ख़ुश होकर गले मिलते है और निकल जाते है।
ठाकुर परिवार के जाने के बाद, अब सबके चेहरे पर चिंता की लकीरे आ गयी थी।
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इधर प्रेजेंटेशन देने के बाद सभी बैठे हुए थे की कॉन्ट्रैक्ट किसे मिलेगा। आरध्या खुद मे घबराती हुई अपने हाथों कों एक दूसरे मे उलझा रही थी। धनंजय उसकी उलझन देख उसके हाथों पर अपने हाथ रख देता है और अपनी आखों से शांत होने का इशारा करता है।
आरध्या खुद कों शांत करती है। तभी कॉन्ट्रैक्ट किसे मिला ये अनाउसमेंट किया जाता है। एक आदमी आता है और नाम लेते हुए कहता है, सबकी प्रेजेंटेशन बहुत बेहतरीन थी लेकिन हमे सबसे अलग और बेहतर लगी दो कम्पनीयों की प्रेजेंटेशन,एक का नाम है, "ठाकुर इंटरप्राइजेज, मिस्टर धनंजय ठाकुर कों !!
ये नाम सुनते ही आरध्या ख़ुशी से धनंजय के गले लग जाती है। उसके अचानक इस तरह से गले लगने की वजह से धनंजय काफ़ी हैरान हो जाता है लेकिन उसे आरध्या का यू गले लगना बेहद पसंद आता है और वो भी उसे बाहों मे भर लेता है।तभी दूसरा नाम अनोसमेंट होती है और दूसरा नाम है , "मजमूदार एंड संस लिमेटे कम्पनी मिस्टर अखिल मजूमदार कों।
पुरे हॉल मे तालियों का शोर सुनाई देने लगता है। तभी अखिल मजूमदार और धनंजय स्टेज पर जाते है और दोनों कॉन्ट्रैक्ट साइन करते है।
आरध्या ख़ुशी से धनंजय कों देख रही होती है। उसकी आखों की चमक देख धनंजय भी मुस्कुरा देता है। तभी अखिल मजूमदार कहता है, हैलो मिस्टर ठाकुर। बहुत सुना था आपके बारे मे, आज आपने मिल भी लिया और आपके साथ काम करने का मौका भी मिल गया।
धनंजय कहता है, थैंक यू मिस्टर मजूमदार। मुझे उम्मीद है की हम साथ मे अच्छा काम करेंगे। हाँ!! हाँ!! क्यों नहीं मिस्टर ठाकुर !! नाउ एक्सक्यूज़ मी!!
धनंजय निचे आकर आकर आरध्या के पास आ जाता है और कहता है,"मुझे यकीन था की तुम कर लोगी!!"आरध्या कहती है, आपको इतना भरोसा मुझे पर क्यों,!! धनंजय कहता है, भरोसे की कोई उम्र नहीं होती। भरोसा हो जाता है और हाँ!! भरोसा टूटने के बाद भरोसा जितने मे ना जाने कितनी उम्र बीत जाती है। इसलिये मुझे उम्मीद है की तुम मेरा भरोसा नहीं तौड़ोगी।
आरध्या कुछ कहती। ओओओ हैलो मिस !! ये कहते हुए अखिल आरध्या और धनंजय के पास आ जाते है। आरध्या कों इस तरह नोटिस करते देख, धनंजय अपनी आँखे छोटी कर लेता है।
अखिल जब हाथ बढ़ाता है तो आरध्या हाथ जोड़ कर कहती है, नमस्ते सर !! ये देख धनंजय मुस्कुरा देता है और अखिल भी हाथ जोड़ कर नमस्ते करता है। फिर कहता है, वैसे मेरी बातों का मतलब गलत मत समझना आप,!! कॉर्पोरेट सेक्टर मे यू किसी से हाथ ना मिलाना!!इसे बेड मैनर और सामने वाला का अपमान माना जाता है।
उसकी बातें सुनकर आरध्या कहती है, "आप मेरी बातों कों दूसरे तरीके से मत लेना।जिस बेड मैनर की आप बात कर रहे है वो यहाँ की सभ्यता नहीं है। मैंने आपको अपनी सभ्यता मे आपकी सम्मान का आदर किया। मैंने आपको गाली नहीं दी। आप जैसे चंद लोग हाई क्लास के नाम पर यूरोपइये सभ्यता कों अपना लेते है और भारतीय सभ्यता कों गाली देते है।मैंने आपको आपकी हैलो के जबाब मे नमस्ते कहा तो आपने इसे बेड मैनर कहा!!! पूछ सकती हूँ क्यों?
अखिल. आरध्या की बात सुनकर चुप हो जाता है। आरध्या कहती है, जस्ट बिकॉज़ मैंने हाथ नहीं मिलाया तो बुरी हो गयी। उन्दोनो की बातें सुन सभी खड़े हो जाते है। सबको देख अखिल खुद कों अपमानित महसूस करता है और फिर धनंजय की तरफ देखता है, जो आरध्या की बात सुनकर मुस्कुरा रहा होता है।
अखिल उसे मुस्कुराते देख एक शातिर मुस्कान के साथ कहता है, "क्या बात है मिस चौधरी !! आप मिस्टर ठाकुर की असिस्टेंट है अगर मैं गलत नहीं हूँ तो!!" आरध्या कहती है, हाँ मैं इनकी सेक्टरी हूँ !!
अखिल हँस देता है और कहता है, ओह्ह्ह अब समझा ये सती सावत्री वाली बातें आप. क्यों. कह रही थी क्योंकि मिस्टर ठाकुर आपके पास थे !!
आरध्या चौंकते हुए कहती है, क्या मतलब है आपका !! धनंजय समझ जाता है की अखिल क्या कहने की. कोशिश कर रहा है। इसलिए वो आरध्या से कहता है, चलो अब चलते है।
अखिल कहता है, क्यों मिस्टर ठाकुर!!एक. मामूली सेक्टरी ही तो है। इतना क्या पॉजिसीव होने!!आज आपके साथ है तो. आपको. खुश कर रही है। कल किसी और कम्पनी मे होगी तो किसी और कों खुश करेंगे।
मिस्टर अखिल मंजूमदार!!इंडिया मे कदम पहली बार रखा है याँ बिज़नेस वर्ल्ड मे क्योंकि तुम शायद धनंजय ठाकुर कों. जानते नहीं। अब एक. शब्द और नहीं कहना नहीं तो. अंजाम बुरा हो जायेगा। धनंजय गुस्से मे उसे चेतावनी देता है।
आरध्या अब भी अखिल की बातों. कों समझ नहीं रही होती है।
अखिल कहता है, चीखो मत मिस्टर ठाकुर !! मुझे डर नहीं लगता है किसी से। रही बात इस सो कॉल्ड मिडिया क्लास लड़की की तो मुझसे हाथ मिलाने मे, मुझे ज्ञान देने लगी और तब से सभी देख रहे थे की कैसे बार बार तुमसे चिपकर गले लग रही थी। तब इसे भारतीय सभ्यता नहीं याद आयी। मैंने क्या इसे इज्जत दे कर थोड़ी तारीफ कर दी। ये खुद कों. सती सावत्री ही समझ बैठी।
फिर आरध्या कों देख कर कहता है, "धनंजय ठाकुर भी तुमसे दिल बहलाता है और मैं भी थोड़ा यही कर रहा था।"!! आगे कुछ और कहता है तब तक उसे जोड़ की थप्पड़ परती है जो धनंजय ने उसे मारा था।
अब धनंजय कहता है, मिस्टर जॉशन अगर आप चाहते है की मैं आपकी प्रोजेक्ट पर काम करुं तो आप कों मिस्टर मजूमदार डील तोड़ना होगा।
ये सुनकर सभी सकते मे पर जाते है। आरध्या धनंजय का हाथ पकड़ अपनी तरफ घुमाती हुई कहती है, इसकी नौबत नहीं आएगी।आपने क्यों ये कहा !!
धनंजय कहता है, इस इंसान ने,!! आरध्या उसके दिल पर हाथ रख कर कहती है, शांत हो जाईये। मैं हूँ ना !! उसका हाथ अपने दिल पर महसूस होते ही धनंजय शांत हो जाता है।
आरध्या मुड़ कर अखिल कों देखती है और उसे देख ताली बजाती हुई कहती है,"ओहो !! पैसे वाले बिज़नेस मेन जिन्हें लगता है की पैसे फेकेंगे और लडकियाँ इनकी बाहों मे गिर जाएगी। क्या बात है ? और ये लडकियाँ सिर्फ मिडिल क्लास की ही क्यों होनी चाहिए !! हाई क्लास की क्यों नहीं होनी चाहिए !! क्योंकि हाई क्लास तो हाई क्लास है,!! उनके पास पैसों की क्या कमी है जो वो किसी के बाहों मे गिर जाएगी। कमियाँ तो मिडिल क्लास की लड़कियों है तो पैसों के लिए वो किसी पैसे वाले बॉस याँ आदमी की बाहों मे गिर जाती होगी !!"क्यों मिस्टर मजूमदार !!
ये किस क्लास मे और किस किताब मे लिखा हुआ है। सेक्टरी है तो. बॉस के साथ संबंध होगा। प्रमोशन मिला तो किसी कों खुश करके मिला होगा। कमाल है भाई आप सबकी सोच का !! इतना पढ़ कर मेहनत करके नौकरी लेती है हम लडकियाँ अपनी बदौलत। लेकिन हमारी कैपेबिलिटी आप अमीरों के हिसाब से पैसे की वजह से और किसी कों खुश करने के कारण ही होती है।
पैसा है तो लड़की सती सावत्री हुली होगी और नहीं है तो. वो सती सावत्री कैसे हो सकती है। चलिए मान लिया की हम मिडिल क्लास लडकियाँ पैसों के लिए किसी की बाहों मे गिर जाती है। फिर आप क्यों मरे जा रहे थे, मुझसे हाथ मिलाने के लिए। मैंने कहा था आओ मेरी तारीफ करो !! मैं आयी थी आपके पास हैलो,!! हाय करने !! याँ ये कहने की मैं आपकी बाहों मे गिरना चाहती हूँ !! ऐसा कुछ कहा था !! पूछ रही हो बोलिये मिस्टर अखिल !!
अखिल उसकी बातें सुनकर चुप हो. जाता है। आरध्या फिर तेज आवाज़ मे पूछती है, मैं आयी थी आपके पास !! बोलिये,!!
अखिल कहता है, नहीं !!
आरध्या ताली बजाती हुई कहती है, देख लो. इतने पैसे है इनके पास लेकिन एक. मिडिल क्लास लड़की इनके पास हाथ तक मिलाने नहीं आयी!! इसका मतलब क्या हुआ आप जानते है मिस्टर अखिल !! आपके सो कॉल्ड हाई सोसाइटी के ईगो कों एक मालूम सेक्टरी ने हर्ट कर दिया आपको रिजेक्ट करके। बस उस बोखलाहट मे आपने ये सारी बातें बोल दी।
फिर आरध्या उसकी आखों मे देखती हुई कहती है, "दुसरो की गायरेंटी मैं नहीं लेती,!! मैं सिर्फ अपनी जिम्मेदारी लेती हूँ!!
तो ध्यान से सुनो यहाँ पर खड़े सभी लोग, मुझे यानी आरध्या चौधरी कों उड़ान पसंद है, लेकिन अपनी ताकत पर। मेरे अंदर उड़ने की इतनी ललक नहीं भरी जिसके लिए मैं कुछ भी गलत कर जाऊ!!मेरी जरूरत मेरी हैसियत के मुताबिक चलती है। जीतनी हैसियत उतनी जरूरत। मैं अपने मान सम्मान के साथ कभी समझौता नहीं करती। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा एक नौकरी चली जाएगी। शायद मुझे अच्छी नौकरी भी ना मिले। इस डर से खुद की किसी दलदल मे नहीं धकेलुंगी !! नौकरी नहीं मिली तो चाय की दुकान खोल कर बैठ जाउंगी.। समझे मिस्टर अखिल मजूमदार !!
आरध्या चौधरी उन महत्वकांक्षी लोगों मे नहीं आती जो बड़ा और पैसा कमाने की भीड़ मे गलत राह चुन लेते है। मुझे अपनी जिंदगी कों कैसे जीना है और किन शर्तो पर जीना है अच्छी तरह से आता है। ये दिल्ली है इसलिये सिर्फ जुबान चला रही हूँ, भोपाल मे मिलते तो हाथ पैर दोनों चलाती। भविष्य की चिंता मे, आरध्या चौधरी वर्तमान नहीं खराब करती। लिखा वही होगा जो महाकाल चाहेंगे। जब महाकाल की मर्जी पर दुनिया ही चलती है तो मैं क्यों चलु किसी की मर्जी पर।
हाथ जोड़ कर ऊपर करती हुई कहती है,"जय महाकाल "!!!
आरध्या उस जगह से जबाब धनंजय का हाथ पकड़ निकलने लगती है लेकिन फिर रुक जाती है और अखिल की तरफ मुड़ कर धनंजय का हाथ खुद की हाथों मे थामे हुए कहती है, " और हाँ !! इस बात का बुरा लगा आपको की हमें इनके गले मिल रहे थे. हाथ पकड़ रहे थे और पकड़े हुए है!!तो अखिल बाबू !! नजर और नियत मे, एक फर्क हर लड़की कों. समझ आता है। ये ईश्वर की विशेष कृपा होती है, हमें लड़कियों पर,!! आपकी नजर और नियत दोनों खोटी लगी हमको इसलिये हमने हाथ जोड़ कर आपको नमस्ते किया क्योंकि पुराणों मे लिखा गया है, " हाथ और पैर सोच समझ कर किसी के छूने चाहिए। क्योंकि आदमी अच्छा हो तो उसकी अच्छी ऊर्जा आपको मिल जाती है और आदमी बुरा हो तो. उसकी बुरी ऊर्जा आपको प्राप्त होती है और आप मुझे अच्छी ऊर्जा वाले नहीं लगे इसलिये हमने आपसे हाथ नहीं मिलाया, क्योंकि हमेबुरी ऊर्जा नहीं चाहिए।
चलिए ठाकुर साहब !! पहली बार आरध्या इस नाम से धनंजय कों बुला रही थी। जिसे सुनकर धनंजय मुस्कुराते हुए कहता है, चलिए मिस चौधरी। दोनों सबको हैरानी मे छोड़ कर बाहर चले जाते है।
बाहर निकलते ही धनंजय उसे गले लगाते हुए कहता है, " तुम खुद मे पूरी हो!!तुम्हें किसी की जरूरत नहीं,!! शाबाश!!जिंदगी मे कभी किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है "!!मिस चौधरी!!
आरध्या उसकी बाते सुनकर मुस्कुरा देती है और उसी तरह बाहों मे उसके कहती है," शुक्रिया!! मुझे समझने के लिए !!"
धनंजय उसे अलग होते हुए कहता है, शाम कों पार्टी मे जाना है, तैयार रहना,!!" आरध्या कहती है, लेकिन मैं तो कुछ लेकर नहीं आयी हूँ पहनुंगी क्या !!
धनंजय उसे कहता है, परेशान मत हो!मैंने इंतजाम कर दिया है। लेकिन मैं कुछ नहीं पहन लुंगी !! धनंजय उसे घूरता हुआ कहता है, मैं तुम्हें पागल दिखता हूँ !! आरध्या मुँह बनाती हुई कहती है, मुझे क्या पता!!
धनंजय कहता है, रखवा दिया है, तुम्हारी कमरे मे देख लेना। अगर पसंद ना हो तो मुझे बता देना। दूसरा कुछ मंगवा दूँगा। आरध्या कहती है, मुझे भूख लगी है।
चलो एक अच्छी जगह ले चलता हूँ। आरध्या कहती है, ठीक है लेकिन घास फुस नहीं खाऊगी ना उबला हुआ कुछ खाऊगी!! धनंजय उसे घूरता हुआ कहता है, क्या मतलब मैं घास फुस खाता हूँ !!
आरध्या धीरे से कहती है, और नहीं तो क्या !! क्या कहा तुमने !! कुछ नहीं, भूख लगी है तो चले!! हम्म्म्म... चलो। दोनों निकल जाते है।
भोपाल ----
अयान और ध्यान आ जाते है। जिनका इंतजार बहुत बेशब्र होकर तानिया और दीप्ती कर रही होती है। उनके आते ही दोनों निचे आती है। तभी गोपी जी और सुमति जी एक साथ कहते है, धनवी, अयानी इधर आओ !! दोनों खुश होती हुई उनके पास आती है और कहती है क्या बात दादी माँ !!
सुमति जी कहती है, " अरे मुँह मीठा करवाओ!तुम्हारी तीनों भाई की शादी तय हो गयी है। मिठाई खिलाती हुई कहती है, अब तुम्हारी भाभियाँ आ जाएगी!!"
दोनों मिठाई खाती हुई कहती है, सच दादी माँ,!! दोनों कहते है, हाँ बच्चे !! फिर गोपी जी दीप्ती और तानिया से कहते है, अरे तुम दोनों वहाँ क्यों खड़ी हो। इधर आओ!
दोनों बहुत भारी कदमों चलती हुई उन्दोनो के पास आती है। सुमति जी दोनों कों मिठाई खिलाती है। जिसे दोनों बहुत मुश्किल से खाती है। गोपी जी उन्दोनो के सर पर हाथ रखते हुए कहते है, तुम तीनों का पैर इतना शुभ है की हमारे घर मे खुशियाँ आरही है। जीती रहो!!
अयान और ध्यान उन दोनों कों देखते है। पीछे से प्रथम आकर कहता है, मुबारक हो दादू !! चलो मैं गाना गाऊगा.... मेरा यार बना है दूल्हा,!!कहते हुए अयान ध्यान के गले मिल कर, दोनों के कानों मे कहता है, " उसी से हो रही है !!"
दोनों दीप्ती और तानिया कों देखते हुए मुस्कुरा कर कहते है, "हाँ !! उसी से हो रही है!!
कुछ देर बाद सभी अपने अपने कमरे मे चले जाते है।
दीप्ती बेचैन होकर अयान के कमरे मे आती है। अयान वाशरूम से लोअर पहन कर और कंधे पर तौलिया रखे बाहर आता है और सामने दीप्ती की खड़े देख कर चौंकने का नाटक करते हुए कहता है," इस वक़्त तुम यहाँ !! कोई बात है क्या!!"
दीप्ती अपनी आंसू से भरी लाल आखों से उसके पास आती है और उसके तौलिया कों पकड़ कर अपनी तरफ खींचती हुई कहती है, ये था तुम्हारा प्यार जो चंद घंटो मे खत्म हो गया।इतनी लम्बी लम्बी बातें जो तुमने की थी वो झूठ थी। क्यों. की !! क्यों? कहती हुई उसके सीने पर मुक्के बरसाने लगी।
अयान उसकी हरकत पर मुस्कुरा देता है लेकिन तुरंत अपनी मुस्कान छिपा कर फिर से चेहरे कों गंभीर करता हुआ कहता है, "तुम तो मुझसे प्यार नहीं करती !! फिर!!"क्या तुम मुझसे प्यार करती हो!!"
दीप्ती कहती है अब उन बातों का क्या फायदा है, मैं प्यार करती हूँ याँ नहीं करती !! आप तो समझदार है आपको समझ जाना चाहिए की मैं अभी इस वक़्त क्यों आपके कमरे मे आयी हूँ!!"
अयान उसकी बातें सुनकर कहता है, जो पूछा उसका सीधा जबाब दो क्या तुम मुझसे प्यार करती हो!!
दीप्ती उसकी आखों मे देखती हुई कहती है, "आपको क्या लगता है "!!
अयान कहता है," तुमने ही तो कहा था की हमारा कोई मुकबला नहीं है और तुम किसी राजकुमार के सपने नहीं देखती हो।फिर अचानक ऐसी बातें क्यों !! अपने कमरे मे जाओ मेरी शादी तय हो गयी है और मैं नहीं चाहता की बिना बात का बतंगड़ बने!! अपना नहीं कम से कम मेरी इज्जत का ख्याल तो रखो !! मुझे अब कुछ नहीं लगता है। अब तुम अपने कमरे मे जाओ!! कोई इस वक़्त तुम्हें देख लेगा तो क्या सोचेगा!!
दीप्ती उसकी बातें सुनकर पूरी तरह टूट जाती है और हाथ जोड़ कर कहती है, गलती हो गयी। मुझे माफ कर दीजिये। अपने औकात से ज्यादा सोच बैठी कहती हुई अपने कमरे मे चली जाती है।
अयान उसके जाते ही दीवाल पर जोर से मुक्का मारते हुए कहता है,"माफ कर दो मुझे दीप्ती !! तुम्हारा दिल दुखाना नहीं चाहता था।
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