Love without wish Chapter-19
- 29 June, 2026
जैसे ही तीनों दूल्हे के हाथ मे तीनों दुल्हन अपने हाथों कों देती है। तो ध्यान अपने हाथों का दबाब तानिया के हाथों पड़ बढ़ा देता है। अयान भी बहुत नाजुक से दीप्ती के हाथों कों अपनी हाथों मे गिरफ्त करता है और धनंजय ने आराध्या की हाथ कों इतनी मजबूती से पकड़ रखा होता है की जैसे उसे बता रहा हो की वो चाहे तो भी अपना हाथ नहीं छुड़ा सकती है।
तीनों लड़कियों कों ये छुवन अलग अहसास देती है, लेकिन तीनों इस बात कों नजर अंदाज कर देती है। फिर वो तीनों स्टेज पड़ आती है और अपने अपने दूल्हे के बगल मे आकर खड़ी हो जाती है। तीनों की नजर अभी तक अपने दुल्हो पड़ नहीं जाती है। जिसे देख ध्यान और अयान अपना सर ना मे हिलाते हुए, मन मे कहते है, क्या बेबकुफ़ लडकियाँ है कम से कम अभी तो. देख लेती की इनकी शादी किनसे हो रही है।
तभी सभी आवाज़ देते है, की जयमाला की रस्म शुरू करो मुहर्त का वक़्त बिता जा रहा है। धनंजय एक तक घुघट के अंदर आराध्या कों निहार रहा था। सबसे पहले दूल्हे अपनी अपनी दुल्हन कों जयमाला पहनाते है। जयमाला पहनने के बाद तीनों इंतजार करते है की तीनों दुल्हन अब उनको जयमाला पहनाएगी। लेकिन तीनों माला लिए सर झुकाये खड़ी रहती है। जैसे इस दुनिया मे हो ही नहीं। कुछ देर इंतजार करने के बाद जब लोगों के बीच बातें बनने लगती है, तो धनंजय हल्का झुक कर आरध्या के करीब होकर कहता है, मिस पिलर !! स्टेचू स्टेचू बाद मे हम खेल लेगे। पहले शादी कर लेते है। आरध्या जैसे ही ये आवाज़ सुनती. है, हैरानी से अपना सर उठा लेती है और घुघट से ही धनंजय कों देखती है, जो उसके सामने दूल्हा बन कर खड़ा है। जब धनंजय देखता है की अब भी शॉक है तो वो धीरे से उसकी कमर पड़ हाथ रख कर दबा देता है। जिससे आरध्या झटके मे उसके गले मे वरमाला डाल देती है। सभी तलियाँ बजाने लगते है। तभी दीप्ती और तानिया कों होश आता है और वो जल्दी से ध्यान और अयान के गले मे माला पहना देती है, बिना उन पड़ ध्यान दिए।
ये देख ध्यान और अयान दोनों कों बुरा लग जाता है की उनकी वालियों ने अब तक उन्हें नहीं. देखा। तभी स्टेज पड़ धनवी और अयानी आती है, उन्दोनो के पास और गले लगती हुई कहती है, बहुत प्यारी लग रही है, आप तीनों भाभी !! आरध्या तो समझ चुकी थी की उसकी शादी किससे हो रही है, लेकिन धनवी और अयानी कों देख दीप्ती और तानिया अपने बगले मे खड़े अपने दूल्हे कों देखते है, जो उनको देख कर मुस्कुरा रहे होते है। ध्यान तो अपनी आँखे विंक कर लेता है, दीप्ती कों देख कर !!
दीप्ती और तानिया कों तो अभी कुछ समझ नहीं आं रहा था की कैसे रेएक्ट करे। बस वो दोनों बिल्कुल शांत हो गयी थी। दोनों की आखों मे नमी आं गए थे। जो घुघट के अंदर से भी ध्यान और अयान के नजरों से नहीं छिपे थे। दोनों अपनी अपनी वालियों का हाथ पकड़ कर लेते है। जैसे कह रहे हो की हम बस तुम्हारे है।
इधर आरध्या कों चुप देख धनंजय कुछ नहीं कहता है, बस धीरे से एक बात कहता है, मुबारक हो मिसेस ठाकुर "!! आरध्या उसकी बातें सुनकर एक नजर फिर उसे देखती है।
तभी दीपा और रिंकू जी कहती है, मुहूर्त का वक़्त हो. गया है, चलिए मंडप पड़। तीनों जोड़े कों मंडप पड़ ला कर बिठा दिया जाता है। सामने गोपी और सुमति जी बैठे अपने पोतों की शादी देख रहे होते है। गोपी जी कहते है," सुमति !! सालों बाद फिर से हमारी ठाकुर हवेली खुशियों से झूमेगी। ये सुनकर सुमति जी कहती है, " सब भोलेनाथ की कृपा है !!" मै तो सबसे ज्यादा ख़ुश अपने धनंजय के लिए हूँ। उसकी की चिंता थी की वो कभी किसी रिश्ते मे बंधेगा भी याँ नहीं !! अपनी पत्नी की बात सुनकर गोपी जी कहते है, हाँ !! अगर आठ साल पहले हमारे बच्चे के सामने वो सच नहीं आया होता तो कितना अच्छा होता। लेकिन जो भी है, अब हमे उम्मीद है की वो पहले वाला हमारा धनंजय हो जायेगा, आरध्या के साथ!!दोनों बातें कर रहे थे की तभी दीपक और मुकेश जी उनके आगे हाथ जोड़ कर थोड़ा झुक कर खड़े हो जाते है और बहुत ही आदर से पूछते है, " माँ - बाबूजी स्वागत सत्कार मे कोई दिक्कत तो नहीं हुई !!" ये सुनकर दोनों उन दोनों के हाथों कों पकड़ कर कहते है, बिल्कुल नहीं, उम्मीद से बढ़ कर सम्मान और आदर किया है आप सभी ने। हम बहुत खुश है।
तभी संकल्प पीछे से आकर कहता है, " चाचा जी,!! कन्यादान के लिए पंडित जी बुला रहे है "!! दोनों गोपी और सुमति. जी से आज्ञा लेकर मंडप की तरफ चले आते है। वही पड़ प्रथम, धनवी और अयानी भी होते है। प्रथम की नजर अयानी पड़ थी और दोनों शादी देख कर अपनी अपनी शादी के ख्वाब देखने लगते है। धनवी और संकल्प एक दूसरे कों नजरों से देखते हुए मुस्कुरा देते है।
सबसे पहले दीपक और दीपा जी आरध्या का कन्यादान करते है। इस वक़्त आरध्या और दीपा जी दोनों एक दुसरे कों देख कर रो रही होती है। दोनों का रिश्ता ही कुछ अलग था। ना वो माँ बेटी की तरह थी ना चाची भतीजी की तरह। उनका रिश्ता तो नमक और पानी की तरह था। फिर उसके बाद तानिया और ध्यान का कन्यादान रिंकू और मुकेश जी करते है। इधर दीप्ती और अयान का कन्यादान दीपा और दीपक जी करते है।
कुछ देर बाद फेरो की रस्म होती है और उसके बाद सिंदूर दान की रस्म होती है। सिंदूर दान के वक़्त तीनों दुल्हन के घुघट कों उठा दिया जाता है। तीनों दुल्हनो की नजर अपने अपने दूल्हे पड़ जाती है। तीनों दूल्हे मुस्कुरा कर तीनों के मांग मे अपने नाम का सिंदूर सजा देते है। जिसे पहनते ही तीनों की आँखे बंद हो जाती है और तीनों के नाक पड़ सिंदूर गिर जाता है।
पंडित जी कहते है, आज से आप दोनों पति पत्नी हुए !! ये सुनते ही जहाँ तीनों दूल्हे के चेहरे पड़ मुस्कान आं जाती है और तीनों दुल्हनो की नजर झुकी रहती है। पंडित जी कहते है, जाईये एक एक करके अपने से सभी बड़ो का आशीर्वाद लीजिये। महादेव आपकी जोड़ी बनाये रखे और हमेशा खुश रखे।
सभी आकर पहले दादा और दादी के पैरों कों छूते है। दोनों सभी जोरों कों आशीर्वाद देते हुए कहते है, सदा सुहागन रहिए और हमेशा खुश रहिए। सभी फिर दीपा और दीपक जी के पैर और रिंकू और मुकेश जी के पैरों कों छू कर आशीर्वाद लेते है।
फिर सभी महा पंडित जी का आशीर्वाद लेते है। पंडित जी सबके माथे पड़ हाथ रखते हुए कहते है, नए जीवन की शुरुआत करो। कल्याण हो। फिर दीपक जी कहते है, दीपक विदाई की तैयारी करो। विदाई शी मुहूर्त पड़ होनी चाहिए।
ये सुनते ही दीपा जी के साथ साथ रिंकू जी का कलेजा बाहर आं जाता है। तीनों लडकियाँ अब होश मे आती है तो उनकी आखों मे आंसू बहने लगते है। जिसे देख पंडित जी कहते है, ये तो विधि का विधान है की बेटियाँ हमेशा अपने बाबुल का आँगन छोड़, अपने पति के आँगन की शोभा होती है। इस तरह रोते नहीं है।
दीपा और दीपक जी बहुत हिम्मत करके धनंजय के पास आते है और हाथ जोड़ कर कहते है, " बेटा !! हम हमारे दोनों जमाइयो से मिल चुके है लेकिन आपसे हमारी मुलकात नहीं हुई !! हम बस यही प्रार्थना आपसे करते है, की बेटी तो हमारी दीप्ती है लेकिन महादेव जानते है की हमारे लिए दीप्ती से पहले आरध्या रही है। ये सुनते ही आरध्या दीपा के गले लग कर फफक कर रो देती है। दीपा जी उसे अपने कलेज़े मे समेटे हुए कहती है, ये जब दिल से दुखी होती है, तो खामोश हो जाती है। नहीं तो हमेशा चहकती रहती है। आप हमारे बड़े दामाद है। आप सबके इतनी हैसियत नहीं हमारी फिर भी हमारी बच्ची का ध्यान रखियेगा। कोई गलती हो जाये तो नादान समझ कर माफ कर दीजियेगा। "
धनंजय उन्दोनो का हाथ पकड़ कर कहता है, मै वादा करता हूँ की आपकी बेटी कों कोई शिकयत का मौका नहीं दूँगा।आप निश्चिन्त रहिए। " सभी रिंकू, दीपा, मुकेश और दीपक जी कों ये दिलासा देते है। सबका का रो रो कर बुरा हाल होता है। तीनों लडकियाँ रोती हुई विदा होती है। सभी उन तीनों कों रोते हुए विदा करते है।
गाड़ी मे जब भोपाल के लिए रवाना हुई तो तीनों लड़कियों का मायका, बचपन, सभी कुछ पीछे छूट गया। तीनों का रोते रोते बुरा हाल था। ध्यान, तानिया का हाथ पकड़ उसे अपने सीने से लगाते हुए कहता है, बस चुप हो जाओ। तानिया उससे कोई बात नहीं करती है। अयान जब दीप्ती कों चुप करवाने की कोशिश करता है तो दीप्ती खुद उसके सीने से लग कर रोने लगती है। आरध्या खिड़की से बाहर छूटती उज्जैन कों देख रही थी। वो जोर जोर से तो नहीं रो रही थी लेकिन उसके आँखे के आंसू लगातार बह रहे थे। जिसे वो बहने दे रही थी।
धनंजय की नजर उस पर लगातार बनी हुई थी। जब उसे बर्दाश्त नहीं हुआ आरध्या का यू खिड़की से बाहर देखना तो उसकी बाजु कों पकड़ कर वो अपनी तरफ खींचते हुए धीरे से कहता है, अब तुम्हारे आखों से एक बून्द भी आंसू नहीं गिरने चाहिए नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। आरध्या उसकी आखों मै देख रही होती है। धनंजय कों उसकी आखों मे बेहिसाब नाराजगी और शिकायत दिख रही थी। लेकिन इस वक़्त बात करना उसने मुनासिब नहीं समझा इसलिये वो बस उसे बाहों मै भर कर गाड़ी मै सीधा होकर बैठ गया।
कुछ घंटो बाद सभी ठाकुर हवेली मै आं पहुँचे थे। दरवाजे पर तीनों दूल्हा और दुल्हन खड़े थे। सुमति जी के साथ साथ धनवी और और अयानी के साथ सभी रिस्तेदार उनके स्वागत के लिए खड़ी थी। सभी ने तीनों की आरती कर गृह प्रवेश करवाया। फिर मंदिर मै भगवान के सामने हाथ जोड़ कर सभी ने प्रणाम किया। सुमति जी सभी औरतों के शादी की बची सारी रस्मे एक एक करके पूरी की।
फिर धनंजय परेशान होकर कहता है, दादी माँ, मै बहुत थक गया हूँ। अब मुझे बहुत थकान हो रही इसलिये मै जा रहा हूँ। आपको जो भी करना है वो अकेले कीजिये। सुमति जी कहती है, अरे हो गया सारे रस्म। शादी हुई है तो रस्म भी. होंगे ना!!चल अब आखिरी रस्म बाक़ी है वो कर ले फिर कुछ नहीं करना।
तीनों एक साथ कहते है, बिल्कुल नहीं दादी अब कोई रस्म नहीं होगी। धनवी और अयानी कहती है, भाई हमारे नेग तो रह ही गया। ध्यान और अयान कहता है, जो चाहे ले लेना। लेकिन अब जाने दें। सभी जाने लगते है तो सुमति जी कहती है, रुको तुम तीनों !! ऐसे नहीं जा सकते हो। अपनी अपनी दुल्हनो कों गोद मै उठाओ। फिर ले जाओ। ये सुनकर कोई कुछ कहता, उससे पहले धनंजय आरध्या कों गोद मे उठाता है और सीधे अपने मै ले जाने लगता है।
पीछे खड़ी सारी औरते हँस देती है और कहती है इसे बहुत जल्दी है सुहागरात मनाने। ये बात आरध्या सुन लेती है और उसकी पकड़ धनंजय के कुर्ते पर कस जाती है।
धनंजय उसके गुस्से कों घबराहट कों समझ जाता है और वो आराम से अपने कमरे की तरफ चल पड़ता है। इधर ध्यान और अयान भी दीप्ती और तानिया कों अपने कमरे मै ले जाते है। तीनों जोड़ी जाने के बाद सुमति जी सभी से कहती है, अब आप सब भी आराम कीजिये। रात बहुत हो गयी है।
ध्यान तानिया कों लेकर जैसे ही अपने कमरे मै लाता है। तानिया की नजर पुरे कमरे मे जाती है जो पूरी तरह फूलों से सजी होती है। जिसे देख उसके अंदर अलग सी घबराहट होने लगती है। ध्यान उसे गोद मै लिए हुए कहता है, घबरा रही हो !! वो अपनी कांपती आवाज़ मै कहती है, नहीं !!वो मुझे निचे उतारीये।
ध्यान प्यार से उसे निचे उतार देता है और अपने सामने खड़ा कर देता है। तानिया की नजर झुकी होती है और ध्यान बस तानिया की खूबसूरती कों निहार रहा होता है। वो उसके चीन कों पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर करता है। तानिया की नजर नीची होती है। ध्यान उसकी झुकी पलकों कों देख खुद कों काबू नहीं रख पाता और उसके पलकों पर अपनी होठों कों रख देता है। उसकी छुवन से तानिया खुद कों.समेटने लगती है। ध्यान उसके चेहरे पर अपनी उंगलियों कों चलाते हुए कहता है, " क्या बात है तानी !! क्या तुम खुश नहीं हो!! ये शादी की बात तुमसे छिपाया इसलिये तुम नाराज हो !!"
तानिया अपनी आंसू भरी नजरों से ध्यान कों देखती हुई कहती है, नहीं नाराजगी नहीं है आपसे लेकिन आपको मुझे बताना चाहिए था ना '!! मै कितना रोई हूँ ये सिर्फ मै जानती हूँ। लेकिन आपको उससे क्या? आप तो सब सब कुछ जान कर मुझे परेशान कर रहे थे। कहती हुई रोने लगती है। ध्यान उसे बाहों मै भर कर कहता है, " तुम ही तो मेरी मोहब्बत कों सवालों मे बांध रही थी। तुम्हें मुझ पर शक था इसलिये मैंने सीधे अपनी मोहब्बत कों मजिल पर पहुंचा कर ही आगे बढ़ना ठीक समझा। ताकि हमारे बीच गलतफहमी ना हो। मानता हूँ आज के समय मै प्यार मोहब्बत पर से भरोसा उठ गया है। जहाँ लड़की ईमानदार होती है तो लड़का बेईमान और जहाँ लड़का ईमानदार होता है तो. लड़की बेईमान होती है।
तुम्हारा मुझ पर भरोसा ना करना गलत नहीं था लेकिन मुझे अपनी मोहब्बत का तुम पर यकीन दिलाना जरूरी था। इसलिये सीधे शादी की बात कर लीं। रही बात तुम्हें नहीं बताने की तो तुमने भी तो मुझे सताया था। बस मैंने हिसाब बराबर कर लिया।
तानिया उसकी बात सुनकर उसके सीने से खुद कों अलग करती हुई बेहद मासूमियत से कहती है,लेकिन मैंने तो इति सा आपको सताया था और आपने मुझे इतना परेशान किया !! ध्यान उसकी मासूमियत देख मुस्कुरा कर उसके होठों कों हल्का सा चूम लेता है। अचानक इस तरह उसके चूमने से तानिया शर्मा कर अपने चेहरे कों घुमा लेती है। उसे इस तरह घूमते देख ध्यान अपनी मोहब्बत भरी आवाज़ मै कहता है, अगर तुम अभी तैयार नहीं हो तो कोई बात नहीं हम बाद मै अपने रिस्ते कों आगे बढ़ायेगे। ये कह कर ध्यान जाने लगता है तो तानिया उसकों पीछे से अपनी बाहों मै भर्ती हुई कहती है, बीते दिनों मै बहुत तड़पी हूँ आपके लिए। मुझे ये नहीं मालूम था की आपके साथ जीवन की डोर बंध रही है मेरी। मै तो मान चुकी थी की अब हमारी कभी मुलकात नहीं होगी। मै अपनी तड़प, बेचैनी कों आपकी मोहब्बत से दूर करना चाहती हूँ। आज मै आपके साथ अपनी मोहब्बत की शुरुआत करना चाहती हूँ।
ध्यान उसकी बातें सुनकर अपनी आँखे ख़ुशी से बंद कर लेता है फिर उसकी तरफ घूम कर कहता है। मै भी इंतजार नहीं करना चाहता हूँ। भले ही मुझे मालूम था की मेरी मोहब्बत अब मुकम्मल हो रही है फिर भी बेचैनी थी, घबराहट थी की अगर तुम्हें जब सच मालूम होगा तो कहीं तुम मुझसे नाराज ना हो जाओ। मुझसे मुँह ना मोड़ लो।
तानिया उसके हाथों कों थामे हुई कहती है, जिससे मोहब्बत कब हुआ मालूम नहीं लेकिन बेहद सिद्द्त से हुआ। वो मुझे उस वक़्त मिल जाय। जिस वक़्त मेरी उम्मीदें टूट चुकी हो। तो बताईये मुझसे ज्यादा बेशब्र कौन होगा !!
ध्यान ये सुनते ही उसके होठों पर अपने होठों कों रख देता है। दोनों एक दूसरे कों किश करने लगते है। ध्यान के हाथ किश करते हुए एक एक करके तानिया के बदन से उसके गहने कों अलग कर रहे होते है। जब तानिया की सांसे उखड़ने लगी तब ध्यान ने उस के होठों कों चूमने की जगह अपने होठों कों उसके गर्दन पर रख दिया। तानिया के पुरे बदन मै झुरझूरी होने लगी थी। वो भी ध्यान की मोहब्बत मै खुद कों खोने लगी थी। इस बीच कब ध्यान ने उसके लहंगे और चोली कों उससे अलग कर दिया। उसे होश नहीं रहा। जब ध्यान के हाथ उसकी खुले बदन पर घूमने लगी तब जा कर उसे अहसास हुआ और वो ध्यान से और चिपक कर खुद कों छिपाने लगी। ध्यान उसे गोद मै उठा कर बिस्तर पर ले जाता है। तानिया अपनी आँखे बंद किये हुए, अपनी लरजती आवाज़ मै कहती है, लाइट्स ऑफ़ कर दो प्लीज !! ध्यान उसकी शरम से भरे लाल चेहरे कों देख लाइट्स ऑफ कर देता है।
अब उसे अपनी मोहब्बत की दुनिया मै ले जाता है। जहाँ तानिया की सिसकियाँ अब गूंज रही होती है।फिर एक चीख के साथ दोनों एक दूसरे के साथ अपनी मोहब्बत की मंजिल पर पहुंचते है। आज उन्होंने अपनी मोहब्बत के साथ नई जिंदगी की शुरुआत कर दी।
अयान ज़ब दीप्ती कों लेकर कमरे मे आता है तो दीप्ती अपनी रूखी आवाज़ मे कहती है, अब मुझे निचे उतारीये।अयान उसे बाहों मे लिए हुए ही कहता है, अगर ना उतारू तो..... दीप्ती घुघट से ही उसे घूरती है, जिसे अयान समझ जाता है और वो अपने होठों से उसे गोद मे लिए हुए ही उसके घुघट कों उठा देता है।और दीप्ती के खूबसूरत चहेरे कों निहारे लगता है।
दीप्ती गुस्से मे कहती है, ये क्या तरीका था। अब तो मुझे उतारो। ये सुनकर अयान कहता है, तुम्हारा मूड देख तो कहीं से नहीं लग रहा है की आज हमारे बीच सुहागरात होने वाली है तो सोचा घुघट उठाने की रस्म ऐसे ही अदा कर दूँ !!
दीप्ती भी उसे उसी तरह से जबाब देती हुई कहती है, हाँ जैसे आपने धोखा दिया। उसी तरह मैं भी आपको धोखा दूँ क्यों है ना?
अयान कों उसकी बातें सुनकर बुरा लगता है और वो उसे गोद से उतार देता है। फिर उससे आगे बढ़ कर बिना उसकी तरफ देखें हुए कहता है, "अगर मोहब्बत कों.तुम. धोखा और शादी कों फरेब का नाम दें रही हो तो आगे क्या कहुँ???? कोई शब्द नहीं रखा तुमने कुछ भी कहने कों.!! फिर उसकी तरफ मुड़ जाता है। उसकी आखों मे नमी देख दीप्ती कों भी अपनी कहीं बातों कों बुरा लगता है। अयान उसकी तरफ देखते हुए कहता है, " तुम मुझ से लड़ लेती। शिकायत कर लेती।नाराज हो जाती, गुस्सा हो जाती। तो मैं तुम्हें तब तक मना लेता ज़ब तुम मान नहीं जाती। लेकिन तुमने तो मुझे धोखेबाज ही कह दिया।"
फिर उसकी बाजु पकड़ कर कहता है, ' मेरी आखों मे देख कर बताओं दीप्ती क्या मैं तुम्हें धोखेबाज लगता हूँ। मोहब्बत किया है मैंने तुमसे!. इजहार भी किया तुमसे! लेकिन तुम्हारी ही बहुत सारी शिकायत, सवाल किये तो उसका जबाब सिर्फ यही था की मोहब्बत मैं तुमसे शादी के बाद ही करुं !! "
फिर दीप्ती रोती हुई कहती है लेकिन आपने ये भी तो नहीं बताया की आपसे मेरी शादी हो रही है।आपको पता है ही मैं कितनी तड़पी हूँ आपके लिए। मेरे लिए एक एक दिन कितना भारी पर रहा था। मैं अंदर ही अंदर रो रही थी। लेकिन आपको उससे क्या? आप तो खुश थे?
अयान उसकी आखों से बह रहे आंसू कों पोंछते हुए कहता है, " अच्छा पहले ये बताओं की तुम दुखी क्यों थी? तुम तो मुझसे प्यार नहीं करती थी। प्यार तो मैं सिर्फ तुमसे करता था। फिर क्यों इतनी दर्द मे थी तुम "!!
दीप्ती उसकी बात सुनकर अपनी नजरों कों इधर उधर करने लगी और फिर हकलाती हुई कहने लगी," मुझे कपड़े बदलने है !!" ये कह कर उसकी बगल से जाने लगी तो आयान ने उसका हाथ पकड़ अपनी तरफ कर लिया और फिर अपनी गहरी नजर उस पर डालते हुए कहा, "पहले मेरे सवालों के जबाब दो !!"
दीप्ती उससे नजरें चुराती हुई कहने लगी क्या जबाब दूँ !! यही तो मैं भी पूछ रहा हूँ की तुम खुश क्यों नहीं थी शादी से। दीप्ती अपनी नजर झुकाते हुए कहती है, आप ने ज़ब अपनी दिल की बात कहीं थी। उसी वक़्त मैं भी आपसे अपनी दिल की बात कहना चाहती थी। लेकिन मेरे अंदर हैसियत का डर मुझे आपसे अपनी दिल की बात कहने से रोक रहा था।
अयान बेशब्री से उसे अपनी करीब करता है और उसके चेहरे पर झुकते हुए अपनी मदहोश आवाज़ मे कहता है, " तो फिर अब कह दो। मैं सुनने के लिए कब से तैयार हूँ।बोलो ना !! दीप्ती उसकी कशिश भरी नजरों मे खुद कों खोती हुई हुई कहती है, मुझे भी आपसे मोहब्बत है आयान !! मैं भी चाहती थी की आपके साथ अपनी जिंदगी बिताऊं। लेकिन ज़ब शादी की बात सुनी तो लगा खुद से खुद की आत्मा कों अलग कर रही हूँ। बहुत तड़पी हूँ मैं अयान। बहुत तड़पी हूँ आप के लिए !!
अयान उसकी बातें सुनते ही सीधे उसके होठों पर अपने होठों कों रख देता है और सिद्द्त से उसे चूमने लगता है। दीप्ती भी अपनी बंद आँखे कर उसकी छुवन कों महसूस कर उसका साथ दें रही थी। कुछ देर बाद ज़ब दोनों की सांसे एक दूसरे का साथ छोड़ने लगती है तो खुद कों दोनों अलग करते है। दोनों ने अपने सर कों एक दूसरे से लगा रखा था। अयान फिर से कहता है, क्या अब भी तुम नाराज हो मुझसे !! दीप्ती अपना सर ना मे हिलाती है। फिर आज हम अपनी शादी की शुरुआत कर सकते है। दीप्ती आयान की बातें सुनकर शर्मा कर उसके सीने से लग जाती है।
अयान कों उसकी इज्जाजत मिलते ही अयान कहता है। मैंने तुम्हारे किये कुछ रखा है। सोचा था जिस दिन तुम्हें मना लूँगा उस दिन तुमसे वो पहने कों कहूँगा। लेकिन मेरी. किस्मत देखो मेरी मोहब्बत मुझे शादी रात ही मिल गयी इसलिये अब इसे पहन कर आओ। दीप्ती उसकी आखों मे देखती हुए, अपना सर हाँ मे हिलाती है और अपने गहने खोलने लगती है। अयान खुद उसके एक एक गहने खोल देता है और उसके गालों कों चूमते हुए कहता है, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।
कुछ देर बाद दीप्ती एक लाल रंग की नाईट ड्रेस मे आयान के सामने शर्माते हुए आती है। वो बेहद रिवीलिंग ड्रेस थी जिसे पहन कर दीप्ती खुद कों टॉवेल से कवर कर लेती है। फिर अयान कों देखती हुई कहती है, ये कुछ अजीब है!! अयान मोहब्बत से उसे देखते हुए उसके करीब आता है और उसके ऊपर से टॉवेल कों निचे गिराते हुए कहता है, " इतना भी अजीब नहीं है दीप्ती !! तुम बेहद हसीन लग रही हो। आयान की नजर ज़ब दीप्ती के गौरे बदन पर जाती है तो उसको अपना गला सूखता हुआ सा महसूस होने लगता है।
दीप्ती कुछ आगे कहती तब तक अयान उसके होठों कों फिर से अपने कब्जे मे ले लेता है। इस बार उसकी किश बेहद इंटेसन्स और मोहब्बत से भरी होती है। जिस मे दीप्ती खुद कों खोने से रोक नहीं पाती। उसके हाथ खुद ब खुद अयान के गर्दन पर चले जाते है।
अयान किश करते हुए उसके बदन के हिस्से से नाईट ड्रेस का ऊपरी हिस्सा निचे कर देता है। अब दीप्ती का खूबसूरत अंग पूरी तरह से अयान की आखों मे बस जाता है। अयान के हाथ उसके बदन के हर हिस्से से होकर चल रहे थे। दीप्ती उसकी छुवन और हया से पिघलती हुई खुद की सांसों कों संभालती हुई कहती है, अयान लाइट्स बंद करो दो। मुझे शरम आं रही है।
अयान उसकी बात सुनकर सीधे उसे गोद मे उठा कर बिस्तर पर ले जाता हुआ कहता है, " मेरी आखों मे देखो दीप्ती। "दीप्ती मुश्किल से अपनी आँखे खोल कर अयान कों देखती है। अयान मुस्कान के साथ लाइट्स बंद कर देता है। अब मध्यम रौशनी मे अयान की मोहब्बत के रंग मे रंगी दीप्ती की सीसीकियां, चीखे...... आहे..... मिलकर दोनों की मिलन की गवाही दें रही थी। दोनों ने अपनी मोहब्बत भरी कहानी की शुरुआत कर दी थी।
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