Love without wish Chapter-6
- 29 June, 2026
अयान दीप्ति से बहुत सारे काम करवाए जा रहा था और दीप्ति उसे किए जा रही थी । दीप्ती मन ही मन ढेरो गाली दे कर बस काम किये जा रही थी। अयान बस उसके लाल चेहरे क़ो देख मुस्कुराते हुए बस मजे ले लिए जा रहा था। जबाब दीप्ती को बर्दाश्त नहीं हुआ तो फाइल उसके टेबल पर पटकती हुई कहती हैं कि आपकी परेशानी क्या है!! क्या आपने कसम खा ली है कि सालों भर का काम मुझे से आज ही करवाएंगे?
यह सुनकर अयान थोड़ा सा पीछे होते हुए कहता है, "तुम मुझे डरा रही हो। दीप्ती मुंह बनाते हुए कहती है," आपको डरा नहीं रही हूं आपसे पूछ रही हूं,क्या आपको डर लग गया मुझसे?
अयान उसकी बात सुनकर कहता है, बिल्कुल नही!! लेकिन तुम्हें मुझसे जरूर डर लगेगा। इस पर दीप्ती अपनी आँखे बड़ी करती हुई कहती है, "क्या आप मुझे डरा रहे हैं?
अयान कहता है," हां बिल्कुल। यह कहते हुए वह अपने तरफ से निकलता है और दीप्ती जहाँ खड़ी रहती है उसके पास आने लगता है। उसे इस तरह से आते देख दीप्ती के कदम पीछे जाने लगते हैं और वह कहती है, " आप यह क्या कर रहे हैं"?
अयान उसकी आखों मे देखते हुए कहता है, तुम्हें डरा रहा हूं और तुम डर रही हो ? ये कहते हुए वो दीप्ती के ऊपर झुकने लगता है। दीप्ती वही खड़ी पीछे की तरफ झुकती हुई कहती है, " मै नही डर रहा हूँ ?? बताइए क्या करेंगे आप?
अयान मुस्कुरा कर अपना हाथ उसकी कमर मे डाल कर अपनी अपनी तरफ खींचता है,और अपने चेहरे को उसकी गर्दन पर झुकाते हुए अपनी गरम सांसों क़ो उसकी गर्दन पर छोड़ता है। जिसे महसूस कर दीप्ती की आँखे खुद ब खुद बंद हो जाती है। उसकी मुट्ठीयाँ अपने कपड़ो पर कस जाती है।
अहान उसे धीरे से कहता है, "क्या तुम्हें मुझसे डर लग रहा है? वो कुछ नहीं कहती। तब तक प्रथम आ जाता है और कहता है कि कौन किसे डरा रहा है? यह सुनकर जल्दी से अहान दीप्ती से अलग होता है। ऐसे अलग होते देख दीप्ती की सांस मे सांस आती है और वो तेजी से केबिन से बाहर चली जाती है।
अयान प्रथम को घूर कर देखता है और कहता है तुझे पागलपन का दौरा पड़ा था जो तू ऐसे आ गया। यह सुनकर प्रथम कहता है," मुझे क्यों दौरे चढने लगे। मुझे तो लगता है आज तुम तीनो ने नाश्ते की जगह घास खा लिया है। अजीब है। मैं अभी तो जा रहा हूं लेकिन शाम को हम अपनी जगह पर मिलेंगे। मुझे तुम तीनों से बात करनी है।
अयान उसके सवाल क़ो दोहराते हुए कहता है, हम तीनों से बात करनी।!!!
प्रथम कहता है, "हाँ!! तुम तीनों से बात करनी है। आज टेलीकास्ट देखा उसकी पूरी फिल्म तुम तीनों से सुनना है।अभी चलता हूँ,' इस बारे में हम शाम को बात करेंगे। तुम यह बातें धनंजय और ध्यान को भी बता देना । यह कहते हुए प्रथम निकल जाता है। अयान मन में सोचते हुए ऐसा क्या हो गया जो इसने इतनी गंभीर बात की है?
धनंजय आराध्या को काम करते देख रहा होता है पता नहीं क्यों उसकी नजर बार-बार आराध्या के चेहरे पर आ रही उसकी जुल्फों पर चली जाती है। जिसे वो बार बार हटाती हुई काम कर रही होती है। धनंजय अपने मन मे कहता है," पता नहीं यह लड़कियां इतनी लंबी रखती क्यों है, जो इन्हें डिस्टर्ब करती है। फिर खुद से कहता है कि मैं क्या-क्या नोटिस करते जा रहा। पागल कर देगी ये लड़की मुझे।
फिर वह अपने काम पर ध्यान देता है। लंच का समय होने को आता है तो आराध्या कहती है सर लंच ऑवर है, क्या आपके लिए कुछ मंगवाना है। यह सुनकर धनंजय कहता है, नही!! आप जा कर लंच कर लीजिये। उसके बाद चार बजे जो. मीटिंग है उसकी तैयारी करनी है।
आरध्या उसकी बात सुनकर तेजी से वहां से निकल जाती है? नीचे उसका इंतजार दीप्ति और तानिया कर रही होती है।आरध्या निचे आते साथ कहती है, ओह्ह्ह!! बाल बाल बच गयी उस डायनाशोर से। ये सुन कर दीप्ती कहती है, हाँ और मै उस दमपिचास से !!! तानिया कहती है और उस वनमानुष से।
ये सुनकर तीनों एक दूसरे क़ो देखती है और हंसती हुई सभी एक दूसरे क़ो हाई -फाइ करती है। उन तीनों क़ो इस तरह से हँसता देख कुछ स्टॉफ कहती है। देखो आज ही आयी ये तीनों और वहाँ पहुंच गयी, जहाँ पहुंचने के लिए हमने इतने साल मेहनत की। उनकी बातें सुनकर उनकी सीनियर मैनेजर सुरभि, ज्योति, और प्रियंका आती है और कहती है, ये तुम किसके बारे मे बात कर रही थी।
तो उनमे से एक स्टॉफ सर झुका कर कहती है, मैम आज आप तीनों थी नही इसलिये आपको मालूम नही है। प्रियका कहती है क्या मालूम नही है!! तभी वो सभी आराध्या, तानिया, दीप्ती की तरफ हाथ दिखाती है। वो तीनों अभी अभी बैठी थी खाने के लिए। उन तीनों की तरफ ऊँगली करती हुई कहती है, मैम ये तीनों आज ही ज्वाइन हुई है और आते के साथ अयान सर, ध्यान सर, और धनंजय सर की पर्सनल सेक्टरी बन गयी है। तभी उनमे से दूसरी स्टॉफ कहती है, "तीनों का ऐटिटूड तो देखिये किसी से मिलना तो दूर बात तक करना पसंद नही करती है।"
यह बातें सुनकर प्रियंका, ज्योति और सुरभि की आँखे बड़ी हो जाती है और वो कहती है, हमसे आगे जाने की कोशिश इन तीनों क़ो मंहंगी पड़ेगी।
इधर तान्या कहती है कि जरा घर पर चाची को और फोन करके बता दें कि हमें नौकरी मिल गई है। यह सुनते हुए आराध्या कहती हां यार मैं तो भूल ही गई। आराध्या फोन करती तभी एक शख्स उनके पास आता है और कहता है, हैलो मिस !! यह सुनकर तीनों उसकी तरफ देखती है। जैसे पूछ रही हो की आप कौन है ?
ये देख कर वो कहता है, ओह्ह्ह!! माफ कीजियेगा !मै अपने बारे मे बताना तो भूल ही गया!! मेरा नाम अर्जुन मेहरा है और मै यहाँ का प्रोजेक्ट हेड हूँ। आप सब शायद आज ही ज्वाइन की है। उसकी बातें सुनकर सभी हाँ मे सर हिलाती है। आरध्या कहती है, आप चाहे तो हमारे साथ बैठ सकते है सर।
ओह्ह्ह नही!!आप मुझे सर नही बुलाये। अर्जुन कह सकती है वैसे आपका नाम !! ओह्ह्ह!! कहती हुई आराध्या कहती है, माफ कीजिये मैंने अपना परिचय आपको दिया नही, "जी मेरा नाम है आराध्या चौधरी, ये है दीप्ती चौधरी और ये है तानिया मिश्रा। हमने आज ही पर्सनल सेक्टरी की जॉब मिली है।
ओह्ह्ह!! कमाल हो गया, कहते हुए अर्जुन थोड़ा हैरानी जताता है। ऐसा क्यों कह रहे है अर्जुन जी। नही ऐसा कुछ नही है वो मैंने सुना था की हमारे बॉस क़ो फीमेल स्टॉफ नही चाहिए लेकिन आप तीनों की जोइनिंग हुई तो सोच रहा था।
आराध्या उसकी बात सुनकर कहती है, बॉस इज ऑलवेज राइट!! ये कहावत आपने सुनी होगी ना। अर्जुन हँसते हुए कहता है बिल्कुल। फिर रहने दीजिये ये बॉस की बातें। अभी हमें भूख लगी है और हम यहाँ आज लंच नही लाये है तो हम लंच करेगे। आप चाहे तो हमारे साथ बैठ सकते है।
अर्जुन कहता है, नेकी और पूछ पूछ !! लेकिन आज की लंच मेरी तरफ से। दीप्ती पूछती है, वो किस ख़ुशी मे !!
अर्जुन हाथ फिर आराध्या के आगे करते हुए कहता है, क्या हम दोस्त बन सकते है। ये सुनकर आरध्या हाथ आगे बढ़ा कर कहती है, दोस्त इतनी जल्दी,'मै बनाती नही अर्जुन जी लेकिन हम ऑफिसियल फ्रेंड जरूर बन सकते है।"
यह सुनकर अर्जुन कुछ कहता है, तब तक तालियों की आवाज़ आने लगती है और आरध्या के साथ सभी उस आवाज़ की तरफ देखती. है।
तालियों की आवाज सुनकर आराध्या उधर देखती है और कहती है अब इन छिपकलियों को क्या हो गया कि ऐसे क्यों तालियां बजा रही है हमें देख कर ? यह सुनकर अर्जुन कहता है यह तीनों इस ऑफिस की बेस्ट एंप्लॉय है। इनकी बातें कोई टाल नहीं सकता इनकी पावर और की अपेक्षा ज्यादा है।यह आज तक जिस प्रोजेक्ट को हैंडल करती है वह सभी कामयाब रहे है इसीलिए इन तीनों का घमंड जो है वह सातवें आसमान पर है।
अर्जुन की बातें सुनकर तानिया कहती है, तुम भी नही बोल सकते है। यह सुनकर अर्जुन कहता है, मेरा और इसका डिपार्टमेंट अलग है..... मै मेन्युफैक्चरिंग का हेड हूँ। ये सभी पी आर और डिज़ाइनिंग की हेड है।
मुझे यह नहीं पता कि आप तीनों ने क्या किया है जो आप तीनों को देखकर यह तीनों तालियां बजा रही है। दीप्ती कहती है, " कबूतरी कहीं की पता नहीं क्या परेशानी है इनकी ? आराध्या कहती है छोड़ो यह सब बातें अर्जुन जी आज आप हमें आज लंच करवाने वाले थे तो ऑर्डर कीजिए। हमें बहुत तेज भूख लगी है फिर किसी और दिन हम आपको लंच करवा देंगे।
अर्जुन कहता है जरूर यह हमारी ऑफिशियल दोस्ती के नाम। ये सुनकर आराध्या मुस्कुरा देती है। अर्जुन ऑर्डर दे देता है तभी प्रियंका आती है ; सुरभि और ज्योति के साथ और अर्जुन को देखते हुए कहती है क्या बात है, " अर्जुन नई दोस्ती हुई है? अर्जुन उसे जवाब नहीं देते हुए कहता मुझे नहीं लगता कि तुम्हें जवाब देना मैं जरूरी समझता।
यह सुनकर प्रियंका अपनी मुठियाँ बंद कर लेती है फिर आराध्या की तरफ देखती हुई कहती सुना है, " तुम धनंजय सर की पर्सनल असिस्टेंट हो। आराध्या कहती है जी आपने सही समझा। फिर उसे देखती है और कहती है, " ऐसा क्या है किया तुमने जो तुम्हारे ऊपर सर मेहरबान हो गए ? क्योंकि यहाँ के हर स्टॉफ क़ो मालूम है की धनंजय सर क़ो फीमेल पसंद नही अपने आस पास। फिर तुमने ऐसा क्या किया होगा!! उसकी बात सुनकर तानिया कुछ कहती लेकिन आराध्या उसका हाथ पकड़ लेती है। इशारे से चुप रहने क़ो कहती है।
ज़ब आरध्या उसे कोई जबाब नही देती। तब फिर कुछ देर सोचती हुई प्रियंका कहती है, कही तुमने कोई घूस तो नहीं दिया?ये सुनकर सुरभि और ज्योति हंसती हुई कहती है, क्या दिया होगा इसने !! प्रियंका भी हंसती हुई उसे देखती है, उस की इस तरह की बातें सुनकर और उसका लहजा देखकर आराध्या को बुरा लगता है और थोड़ा अजीब लगता है।
लेकिन वह अपनी भावनाओं को चेहरे पर आने नहीं देती और उसकी तरफ देखती हुई कहती है," हां!! तुम सही कह रही हो मैंने घूस दिया है। यह सुनकर सुरभि कहती है तुमने किस तरह का घूस दिया है।आराध्य कहती है कि तुम किस तरह की घूस की बात कर रही हो!! यह मुझे कैसे पता होगा!! जब तक तुम मुझे तीन -चार ऑप्शन बताओगी नहीं,' तब तक मैं कैसे बताऊंगी कि कौन सा ऑप्शन मैंने चुना है ?
उनकी बहस सुनकर सभी उनके आस पास खड़े हो जाते है। ये देख प्रियंका मन मे सोचती है, इतने लोगों के बिच बेज्जती का मजा चिखाऊगी इनको की आगे से हमारे आगे खड़ी होने मे दस बार सोचेगी।
ज्योति कहती है कि तुमको लगता है तुम बहुत तेज हो!! जरूरत से ज्यादा जबान चलाती हो तुम। तुम्हें मालूम भी है की हम कौन है?
आरध्या उसकी बातें सुनकर कहती है, तुमने एक साथ इतने सवाल पूछ लिए तो अब जबाब देनी तो बनती है, " हाँ!! मुझे मालूम है की मैं तेज हूं ; अरे एक जुबान तो है जो सबकी चलती है लेकिन मेरी जुबान के साथ साथ हाथ -पैर भी चलते है।।और हाँ आखिरी सवाल का जबाब मुझे नही मालूम की तुम लोगो कौन हो और मुझे तुम तीनों क़ो जानने मे कोई दिलचस्पी नही है।
यह सुनकर तानिया और दीप्ति हंस देते हैं। अर्जुन भी आराध्या की बातें सुनकर मुस्कुरा देता है।
यह देखकर प्रियंका घूमती हुई कहती है तुम दोनों अगर चुप रहोगी तो ज्यादा अच्छा रहेगा नहीं तो ज्यादा दिन इस कंपनी में तुम तीनों क़ो टिकने नही दूँगी ।
यह सुनकर सीधे तानिया और दीप्ती उठकर उसके पास आ जाती है। अभी उन्दोनो के इस तरह खुद के सामने आने से चौंक जाती है, लेकिन आरध्या हँस देती है। जिसे देख कर अर्जुन कहता है क्या बात है आराध्या आप हँस क्यों रही है। वो कहती है आप सामने देखिये अर्जुन जी क्लामैक्स होने वाला है। आरध्या के साथ अर्जुन भी उन्दोनो क़ो देखने लगता है।
वो दोनों प्रियंका के हाथ को पकड़ते हुए कहती है, "स्वामिनी!! देवी!! कुछ ऐसी कृपा करो कि किसी तरह हमें यह नौकरी से निकाल दिया जाए। देवी आज ही ऐसी ऐसी कृपा कर दो कि हम यह नौकरी छोड़कर कहीं दूर चले जाए। ये कहती हुई वो दोनों एक्टिंग भी करने लगती है। जिसे देख सभी की आँखे हैरत मे होती है लेकिन आराध्या मुस्कुराते हुए कहती है," हां!! देवियों अगर तुम ऐसी कृपा कर दोगी,तो कसम से हम तो पूरी उम्र तुम्हारे नाम की पूजा करेगी।
उन दोनों तीनों की अजीबो गरीब बातें सुनकर प्रियंका कहती है, "हाथ छोड़ो मेरा और झटक देती है। सुरभि कहती है कैसी पागल क़ो यहाँ रखा गया है नौकरी पर इतनी अच्छी कम्पनी मे नौकरी मिलना इतना मुश्किल है फिर भी इन्हें नौकरी नही चाहिए।पागल कही की।चलो यहाँ से कहती हुई तीनों चली जाती है। उनके अस पास जितने लोगो होते है उनको देख कर कहती है, यहाँ का तमाशा खत्म हो गया। जाओ यहाँ से !!
उनतीनों की बातें कोई और भी बहुत देर से सुन रहा होता है।
आरध्या, अर्जुन क़ो हँसते देख कर कहती है," आप फीमेल की बातों में बड़े मजे ले रहे हैं। जाकर लंच आर्डर कीजिए क्योंकि हमें भूख लगी है और हमें जाना है वापस अपने काम पर? अर्जुन हंसते हुए कहता है, " क्या बात है!! मुझे लगा था की यहाँ कोई कैट फाइट होगी। लेकिन यहाँ तो इतनी नेगेटिव बातों पर पॉजिटिव इंपैक्ट दिया है आपने !! लीजिये लंच भी आ गया।
आराध्या हंसती हुई कहती है, " अर्जुन जी यह लोग ज्यादा ही टीवी सीरियल में ड्रामा देखती है इसीलिए इन्हें लगता है कि जो भी बकवास ड्रामा मे सुनती है वही अगर हकीकत मे करेगी तो...!! वही थोड़ी होगा जो ड्रामा मे इन्होंने देखा है। हकीकत और फ़साने मे बहुत फर्क है अर्जुन जी। जो इनके समझ की बाहर की बात है। हकीकत मे, जिंदगी में हर कोई चाहता है कि हर परेशानी से जितना दूर हो सके उतना दूर रहे। कीचड़ मे पैर रखकर कौन चाहेगा कूदना। सभी कीचड़ देख थोड़ा साइड होकर चलते है,ताकि कीचड़ के छींटे ना पड़ जाए!! बस हम भी उसी नियम पर चलते हैं?
अर्जुन मुस्कुराते हुए कहता है आप सब से दोस्ती करने करना बहुत मजेदार है खासकर आपसे आराध्या जी यह कहते हुए अर्जुन की आंखों में कुछ चमक थी जिसे तान्या देख लेती है लेकिन कुछ कहती नहीं।आराध्या कहती है अब ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है बिना सिर पैर की बातें मुझे पसंद नहीं है। फिर लंच करने लगते हैं उसके साथ सभी लंच करने लगते है।
अर्जुन के साथ आराध्या की बातें सुनकर धनंजय जो अयान और ध्यान के साथ बाहर निकल रहा होता है उसकी नजर आराध्या में पड़ती है और उसे इस तरह से हंसते हुए बातें करते देख उसकी आंखों में अजीब सा गुस्सा आ जाता है।
धनंजय जब आराध्या को अर्जुन के साथ बात करते हुए और हंसते हुए देखता है तो उसे अंदर से अच्छा नहीं लगता उसके साथ पीछे खड़े अयान और ध्यान को भी तानिया और दीप्ति का यू हंस हंस के बात करना पसंद नहीं आता है लेकिन वह चुप रहते हैं क्योंकि आगे धनंजय करेगा खड़ा रहता है। धनंजय को जब बर्दाश्त नहीं होता तो वह सीधे कैंटीन में आता है उसको कैंटीन में आता देख वहां के सारे एंप्लॉय खड़े हो जाते हैं।
तानिया और दीप्ती क़ो देख आयान और ध्यान की आंखें छोटी हो जाती है लेकिन उस समय वह कुछ कहते नहीं। वो दोनों भी अर्जुन के साथ खड़ी हो जाती है तीनों क़ो देख कर।लेकिन आराध्या बड़े मजे से खा रही होती उसका ध्यान नहीं जाता कि धनंजय उसके सामने खड़ा है।
धनंजय को देख प्रियंका दौड़ के आती है कहती है गुड आफ्टरनून सर आप यहां हमें बहुत खुशी हुई आपको देख कर। आज आप हमारे साथ क्या लंच करेंगे? इतनी बातें सुनकर धनंजय उसकी तरफ घूमते हुए देखता है और कहता है, "तुम कौन हो मैं तुम्हें नही जानता!! इसीलिए बीच में बोलने का हक तुम्हें किसने दिया!! नाउ गेट आउट? इतने लोगों के सामने अपने इस तरह से इंसल्ट होता देख प्रियंका को बहुत बुरा लगता है लेकिन वह कुछ कह नहीं सकती और थोड़ा साइड हो जाती है। धनंजय देखता है कि सब कोई उसे देख कर खड़े हो गए आराध्या के तो वह जोर से कहता है मिस आराध्या। धनंजय के इस तरह आराध्या नाम पुकारने से प्रियंका मन ही मन कहती है मेरा नाम इनको नही मालूम जबकि मै इतने सालों से यहाँ काम कर रही हूँ और यह एक दिन की आई हुई लड़की का नाम इनको याद है। मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं आराध्या !!
आराध्या खाना मुंह में डालते हुए सामने देखती है मन ही मन कहते लो आ गया डायनाशोर!! अपने हाथ का निवाला सामने बढ़ाते हुए कहती है," सर!! आपको भूख लगी है लीजिये खा लीजिये। बहुत टेस्टी खाना है आपके केंटीन का।
आराध्या की बेबाक बातें सुनकर सभी एम्प्लोयी की आँखे बड़ी हो जाती है और अयान और ध्यान बस धनंजय के भाव क़ो देख कर हैरान हो रहे होते है।
धनंजय गुस्से में, उसका बाजू पकड़ते हुए कहता है मुझे भूख नहीं लगी है लेकिन तुम्हें कुछ ज्यादा ही भूख लगी है चलो यहां से कहते हुए उठाने लगता है !! लेकिन सर!! अभी तो खाना मेरा बचा हुआ है और लंच आवर खत्म हो गया अभी 10 मिनट बचे हुए हैं। नहीं!! कुछ नहीं बचा है चलो चुपचाप मेरे साथ।तुम चलोगी या मैं तुम्हें खींच कर ले चलूं। आराध्या गुस्से में कहती है कि क्या खाना भी नहीं काने की अनुमति है यहां पर? धनंजय उसे एक खींच के ले कर चला जाता है। आराध्या मुंह बनाती हुई कहती है डायनासोर कहिका!! ।
पीछे से अयान और ध्यान भी तानिया और दीप्ती को देखते हुए कहता है, "आप दोनों क़ो इनविटेशन दू!! या चलेगी!! अगर आप सब का लंच और हो गया हो तो केबिन में पहुँचो ।दोनों अर्जुन से कहती है,"नेक्स्ट टाइम कहीं और पार्टी करेंगे अभी हमें काम पर जाना …। उन्दोनो की बातें सुनकर अयान और ध्यान क़ो बहुत गुस्सा आता है लेकिन कोई कुछ कहता नही।
धनंजय उसे लेकर सीधे अपने लिफ्ट में जाता है। आराध्या उससे हाथ छुराते हुए कहती है,"आपने मुझे ना हाथ धोने दिया ना खाना खाने दिया की प्रॉब्लम क्या है आपकी ? धनंजय उसकी बातों का जबाब नही देता और उसका ध्यान उस के होठों के नीचे लगे खाने पर जाता है। धनंजय उसकी तरफ धीरे से बढ़ने लगता है तो आराध्या पीछे की तरफ जाने लगती है। जैसे ही आरध्या लिफ्ट के दिवार से चिपक जाती है तो खुद के करीब आते धनंजय क़ो देख उसकी आँखे बंद हो जाती है। धनंजय उसके करीब आकर उसके होठों के निचे लगे खाने को अंगूठे से पूछते हुए कहता है तुम्हें नहीं लगता तुम ज्यादा ही बोलती और सोचती हो। इस समय धनंजय आरध्या के बेहद करीब था दोनों की गरम सांसे एक दूसरे पर महसूस हो रही थी।उसी तरह झुके हुए वो आराध्या के आँखे खुलने का इंतजार करता है। वो उसकी मासूम सर खूबसूरती में इस कदर खो जाता है की आरध्या की ज़ब आँख खुलती भी है तो भी वो उसके करीब ही खड़ा रहता है।
आराध्या उसका मुंह देखते हुए कहती आपको नहीं लगता कि आप कुछ ज्यादा ही बॉसगिरी कर रहे हैं। आप मुझे इस तरह से कैसे ला सकते हैं मैं भूखी थी। यह सुनकर धनंजय उसे प्यार से कहता है चलो मैं तुम्हें खाना खिलाता हूं। मुझे आपके साथ खाना नहीं खाना। मैंने कब कहा मेरे साथ खाना खाना है? हमारी बाहर में भी मीटिंग है इसीलिए मैं तुम्हें लेने आया। जल्दी से फ्रेश हो जाओ और चलो वहीं मीटिंग के बाद तुम कुछ खा लेना।
आरध्या मन ही मन कहती है, " कुछ खा लेना। आगे का खाना छीन लिया और बात करते है की कुछ खा लेना।धनंजय उसकी बातें सुनकर कर हल्का मुस्कुरा देता है लेकिन ये मुस्कुराहट कोई देख नही पाता फिर वो अपने शख्त रूप में आकर कहता है!!चलो!! दोनों मीटिंग के लिए निकल जाते है।
शाम को ऑफिस आवर खत्म होता है तीनों बाहर खड़ी रहती है।तीनों की हालात काम करते करते बहुत बुरी थी। तानिया कहती है मालूम होता है, इतना जहरीला बॉस मिलेगा तो कभी यहाँ नौकरी नही करती। तभी दीप्ती कहती है, जहर का तो तोड़ है यार!! मेरा वाला तो चांडाल है, जिसे देख कर लगता है, नर्क में आ गयी हूँ। उन्दोनो की बात सुनकर आरध्या कहती है लगता है, हम तीनों. की किस्मत में राक्षस प्रजाती के प्राणी लिखें थे। कहाँ हम स्वर्ग की देवियाँ कहा वो नर्क के राक्षस। उनतीनों की बातें गाड़ी में बैठे हुए तीनों सुन रहे होते है। धनंजय कहता है मेरा तो मुझे मालूम है लेकिन तुम दोनों उन दोनों बच्चियों क़ो क्यों परेशान करने में लगे हो।
ये सुनकर अयान कहता है अच्छा तुम्हारी वाली माता है और ये दोनों बच्चीयाँ !! तुमसे तो बात करना ही फिजूल है। हाँ हाँ तो मत करो।
तभी ड्राइवर एक आता है और उनके पास खड़ा हो जाता है तानिया कहती है ड्राइवर!! आरध्या मुंह बनाते हुए कहती है, " हाँ!! डायनाशोर ने कहा है की कुछ दिन ड्राइवर हमें पिक और ड्रॉप करेगा.। क्योंकि हमें इस एरिया के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं है।
यह सुनकर दीप्ति कहती है चलो अच्छा है, "घर पर जाकर आराम से माँ -पापा से थोड़ा बात करेंगे। यहाँ तो एक ही दिन में लग रहा है की पहाड़ तोड़ कर आयी हूँ।आराध्य कहती हाँ चलो यार मुझे भूख भी लगी है दोपहर में खाने भी नहीं दिया उसके बाद तीनों गाड़ी में बैठ जाती है।
पीछे से धनंजय उन्हें देखता है जब तीनों गाड़ी में बैठ जाती है तो वह भी वह भी अयान और ध्यान भी निकल जाता हैं। तीनों के मोबाइल पर मैसेज आता है प्रथम का!! अयान कहता है, अरे मुझे याद आया प्रथम ने हमें हमारे वाले जगह पर बुलाया है, कह रहा था की जरूरी बात करनी है। ये सुनकर ध्यान गाड़ी बढ़ा देता।
गाड़ी में बैठते ही तानिया पूछती है क्या हुआ उस समय जब लेकर गए थे सर तुझे? आराध्या मुंह बनाते हुए कहती है, कुछ नही हुआ। उसके बाद मीटिंग में गए एक बड़े से होटल में। मीटिंग के बाद डायनाशोर ने कहा यह खाना है यह खाओ।
तभी दीप्ती ने कहा तो इतना सड़ा मुँह बना कर क्यों बोल रही है। यहाँ से लेकर गए तो कम से कम तुझे खाने क़ो तो कहा। यहाँ हमें तो पानी तक नही पीने दिया। उन्दोनो शैतानो ने।
आराध्या कहती है, वो खाना था,सूप, सलाद उबला हुआ कोरियन खाना। ऊपर से कहता है,आज से कैंटीन में तुम्हारा जाना बंद लंच के टाइम में तुम मेरे साथ यही लंच करोगी। हेअल्थी खाना।
उसकी बात सुनकर दोनों खी खी खी खी करती हुई हॅसने लगती है । आराध्या मुंह बनाते हुए कहती है, तुम्हें हँसी आ रही. है सोचे मेरे बाबू का क्या हाल हो गया होगा कहती हुई अपने पेट पर हाथ घुमाती है। उसकी बातें सुनकर तानिया और दीप्ति हंसते हुए कहती है कोई बात नही घर चलते है फिर कही घूमने निकलेंगे और कुछ अच्छा अच्छा खायेंगे।
आराध्या कहती है, "यार!! मेरा मूड का दही बारा मत बनाओ।मेरा मूड बहुत खराब है चलो पहले घर पर बात कर लेते फिर कहीं शाम में हम घूमने चलेंगे।
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