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Love without wish Chapter-29

Love without wish Chapter-29

धनंजय बेहद गुस्से मे था। भोपाल से बाहर जंगल के बीच एक वीरान सी हवेली के आगे धनंजय की गाड़ी रूकती  है। एक बड़ा सा लोहे का दरवाजा खुलता है, उनकी गाड़ी सीधे अंदर चली जाती है। धनंजय बाहर निकलता है और सीधे अंदर की तरफ बढ़ जाता है। अंदर पूरी हवेली काले और लाल रंग से मिल कर बनी थी। अचानक कोई यहाँ आ जाये तो बेहद डरवाना भाव आ जाता है। अंदर मे चीखने की आवाज़ आ रही थी। धनंजय तेजी से अंदर की तरफ जाता है। जहाँ उन पांचो लडको कों बिना कपड़े के बेहद बुरी तरीके सा टॉर्चर किया जा रहा था।

धनंजय सामने पड़े हुए उन पांचो लडको कों देखता है और अपने आदमी की तरफ हाथ बढ़ाता है। वो आदमी उसके हाथ मे ग्लब्स पहनते हुए लाल रंग मे गर्म सलाखे उसकी हाथों मे देता है। उसके हाथों मे गर्म सलाखे देख कर, वो पांचो रोते हुए कहते है, सर हमें माफ कर दीजिये !! हमें पैसे का लालच दिया गया और हमें नहीं मालूम था की वो ठाकुर परिवार की बेटी है। नहीं तो हम ऐसा नहीं कर सकते है। धनंजय बेहद खतरनाक तरीके से मुस्कुरा देता है और उन सबको देखते हुए कहता है,

" क्या बात है !! जब अपनी मौत देखी तो गलती का अहसास हो गया। तुम सबने तब कुछ क्यों नहीं सोचा, जब तुम अपनी कुछ पल की मस्ती के लिए किसी लड़की की जिंदगी बर्बादी कर देते हो। तब उस मासूम की चीख सुनकर रुकते हो और उन्हें छोड़ देते हो। नहीं ना !! बेटी बड़े घर की हो या गरीब घर की वो एक औरत होती है। जिसका सम्मान तुम जैसे राक्षस नहीं कर पाते है। अगर ऐसा करते तो निर्भया नहीं होता। इसलिये मुझसे माफ़ी की उम्मीद मत करना और ये कहते हुए वो दहकता हुआ लोहा उन पांचो के नीजी अंग पर बेहद दर्दनाक तरीके से रख कर उससे जोड़ से दबा देता है। उसके साथ साथ यही काम प्रथम, ध्यान और अयान भी करते है। पांचो की दर्दनाक चीख निकलती है और वो सभी मर जाते है। "

धनंजय उन पांचो कों देखते हुए कहता है, बस इतना भी झेल नहीं सके.... कमीने :!! लेकिन यार इन से पहले मालूम करना था की किसके कहने पर इन्होंने ये किया। प्रथम की बात पर धनंजय कहता है, वसुधा सिंह के इशारे पर ये हुआ था और अब इस हरकत की क़ीमत उसे बहुत जल्दी चुकानी होगी।

ठाकुर हवेली

संकल्प अंदर जाता है, जहाँ धनवी पानी के निचे बेहोश हो चुकी थी। धनवी कहते हुए संकल्प उसे तेजी से गोद मे उठा कर सोफे पर लिटा देता है। आरध्या, धनवी की हालत देख कर आँखे बंद कर लेती है। भाई आप बाहर जाओ और डॉक्टर कों बुला दो। तब तक मै बच्ची के कपड़े बदल देती हूँ। संकल्प बाहर जाता है, हालांकि वो भी भीगा रहता है लेकिन अभी उसे सिर्फ धनवी की फ़िक्र थी।लेकिन दीप्ती बाहर आकर उसे अयान के कपड़े देती हुई कहती है, भाई आप कपड़े बदल लीजिये। आप ठीक रहेंगे तो सब ठीक रहेगा। खास कर धनवी। उसके साथ साथ तानिया कहती है, मै कॉफ़ी बना कर लाती हूँ।

आराध्या धनवी के कपड़े बदल देती है और ड्राईर से उसके बालों कों सूखा रही होती है की डॉक्टर आती है। उसके पीछे संकल्प आता है। डॉक्टर धनवी कों बेहोश देख कर और चेहरे पर निशान देख कर, कहती है, आप सब बाहर जाईये। मै आंतरिक भी जाँच कर लेती है। उसकी बात पर आरध्या कहती है, उसकी जरूरत नहीं है डॉक्टर !! आप बस देखिये क्योंकि वाशरूम मे बेहोश हो गयी थी। उसकी बात सुनकर डॉक्टर उसे देखती है और कहती है, कुछ खास नहीं है !! कमजोरी के कारण बेहोश हो गयी है। इंजेक्शन दें दिया है, कुछ देर मे होश आ जाएगी। ये कह कर डॉक्टर चली जाती है।

संकल्प धनवी के पास बैठ जाता है और उसके चेहरे कों देखता रहता है। तानिया उसे कॉफ़ी देती हुई कहती है, आप ये पीजिये। आपको थोड़ा अच्छा लगेगा। वो अपना सर ना मे हिला देता है।आरध्या कहती है, भाई !! ये तरीका ठीक नहीं है। जो हो गया वो बदल नहीं सकते है लेकिन दोबारा ऐसा ना हो उसकी कोशिश करनी जरूरी है। इसलिये खुद कों सम्भालिये। अगर आप वाकई बच्ची के लिए गंभीर है तो इतना याद रखिये की वो बच्ची है और आपसे तो बेहद बच्ची है। उसकी बात सुनकर संकल्प उसे घूरते हुए कहता है, तू कहना क्या चाहती है की मै बूढा हूँ !!

दीप्ती अपने सर पर हाथ मार कर कहती है, अरे भाई आपको बूढा किसने कहा। बस हमने बच्ची कों बच्ची कहा। तो संकल्प कहता है, इसका मतलब तो यही हुआ की मै बूढा हूँ और धनवी के लिए बेहतर नहीं है। उसकी बात सुनकर जहाँ अयानी परेशान थी क्योंकि उसकी भी कहानी कुछ ऐसी ही थी। वही तीनों बहन कों संकल्प पर गुस्सा आ रहा था। आरध्या कुछ कहती है... तब तक पीछे से आवाज़ आती है, तो इसमें क्या गलत कहाँ बूढ़े कों बूढ़े कहेगे ना !! कोई जवान तो नहीं !!

आरध्या अपना सर हिलाते हुए कहती है, आ गए दुनिया के चिरयोवन के मालिक !! क्या कहा तुमने ठकुराइन !! आराध्या जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहती है, कुछ नहीं ठाकुर साहब !! बस ये सोच रही थी की आज पहली बार देख रही हूँ की, "चोर -चोर मोसेरे भाई नहीं है !!" उसकी बात सुनकर जहाँ दीप्ती और तानिया हँस देती है। वही उसकी बात ना धनंजय के पल्ले पड़ा ना ही वहाँ मौजूद किसी भी पुरुष वर्ग कों !!"

धनंजय उसे घूरते हुए कहता है, इसका क्या मतलब हुआ ठकुराइन :!! मुझे समझाओगी !! हाँ क्यों नहीं खुद के गले मे पत्थर बांध कर कुंवा मे कूद जाऊ। पागल नहीं हूँ। ये आरध्या धीमी आवाज़ मे खुद मे कहती है। तभी अयानी कहती है, भाई !! भाभी के कहने का मतलब ये था की आप कौन से जवान हो। जो आप संकल्प भाई कों बूढ़े कह रहे हो :!!" आरध्या अपने माथे पर हाथ मार कर कहती है, बेबकुफ़ भाई की अक्लमंद बहन !! अब तुझे कौन बचाएगा आराध्या। क्योंकि धनंजय उसे घूर कर देख रहा होता है।उसके करीब आ कर कहता है, इस पर बात हम कमरे मे करेंगे ठकुराइन !!

फिर बेहोश धनवी कों देखता है और पूछता है, कैसी है बच्ची !! तानिया सब कुछ बता देती है। गहरी सांस भरते हुए कहता है, संकल्प रात बहुत हो गयी है तुम जा कर आराम कर लो यहाँ हम मौजूद है !! उसकी बात पर आराध्या कुछ कहना चाहती थी लेकिन धनंजय उसे रोक देता है।

संकल्प धनवी के हाथों कों थामे कहता है, " मै अपनी मर्यादा कभी नहीं भूलता क्योंकि मेरी भी तीन बहने है। तुम्हारी फ़िक्र समझता हूँ लेकिन एक बार इसे होश आ जाये। फिर मै खुद कमरे से बाहर चला जाऊंगा। तब तक मुझे भी नींद नहीं आएगी। आराध्या कहती है," भाई !! आप अपने कमरे मे जाइये। जैसे ही धनवी होश मे आती है। मै आपको बता दूँगी। आप खुद तीन बहन के भाई है तो समझ सकते है की बच्ची के भाई का कहना कोई गलत नहीं है। उसे होश मे आने दीजिये। जो हमें जानना था वो हम जान चुके है और ठाकुर !! ने इस बात कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसका मतलब हम सभी जानते है। इसलिये आप जाये।और आप सब भी जाईये। मै हूँ बच्ची के साथ।

आरध्या की बात सुनकर संकल्प के साथ साथ सभी बाहर निकल जाते है। लेकिन संकल्प के साथ साथ कोई भी कमरे मे नहीं जाता है, बल्कि हाल मे बैठ जाता है। दीप्ती और तानिया कहती है, " अयानी तुम जा कर आराम करो हम सब है। अयानी एक नजर प्रथम की तरफ देखती है और फिर कमरे मे चली जाती है। फिर दोनों कहती है, " संकल्प भाई ने कपड़े बदल लिए है। आप सब भी बदल लीजिये। अयान कहता है, हम सब अभी यहाँ है, पहले तुम दोनों फ्रेश हो जाओ। थोड़ी देर सो जाओ। नहीं अयान हम ठीक है और अब सुबह होने वाली है। हम आते है, फ्रेश होकर। ये कह कर दोनों चली जाती है। उन दोनों कों जाते देख धनंजय कहता है, अयान, ध्यान, प्रथम तुम तीनों जाओ फ्रेश हो जाओ।उसकी बात पर तीनों कमरे मे चले जाते है।

बाहर हॉल मे संकल्प और धनंजय बच जाते है। धनंजय संकल्प के चेहरे कों देखता है, जिसमे उसे धनवी के लिए फ़िक्र साफ समझ आ रहा था। वो उसके बगल मे बैठ कर उसके हाथों पर हाथ रख कर कहता है, बच्ची ठीक है और उसके गुनेहगारो कों सजा मिल चुकी है। उसकी बात पर संकल्प की मुट्ठीयां कस जाती है, वो कहता है, मुझे उनलोगों कों अपने हाथ से मारना था। तुम धनवी के साथ थे इसलिये तुम्हें हम नहीं ले गए। अभी बस उसकी फ़िक्र करो।क्या तुम नाराज नहीं हो की मै धनवी कों पसंद करता हूँ।

अयान कमरे मे आता है तो. उसकी नजर बेख्याली मे खोयी हुई दीप्ती पर जाती है। जो आईने के पास खड़ी होकर अपने गहने उतार रही थी। अयान पीछे से उसके कमर कों पकड़ कर अपनी तरफ घूमता है तो उसकी आखों मे नमी उसे दिखता है। अयान उसकी आखों के आंसुओ कों पोंछते हुए कहता है, " ऐसे घबराओगी तो मुश्किल मे कैसे सब कुछ सँभालोगी। " आज अगर जीजी कुछ पल और देर कर देती तो ना जाने क्या हो जाता। वो तो उनकी एक आदत बेहद अच्छी है की वो कहीं भी जाती है तो अपनी नजर, दिमाग़, कान सब कुछ बेहद सक्रिय कर लेती है। नहीं तो आज ना जाने क्या हो जाता है। अयान गहरी सांस भरते हुए उसे सीने से लगा लेता है और कहता है, " बाहरी दुनिया मे जानवर घूमते है, जो हर वक़्त किसी ना किसी मासूम की मासूमियत का शिकार करते है। कमी किस मे नहीं जानता लेकिन हमें हमारी बच्चियों कों ये बताना पड़ेगा की घर से बाहर या अंदर उन्हें हमेशा सचेत रहना होगा। क्योंकि उनकी हल्की असावधानी उन जानवरो कों मौका दें देती है। उन्हें समझना होगा की बाहर मे सिवाय खुद के किसी पर भरोसा करना गलत है।
दीप्ती कहती है, हाँ !! सतर्क तो हम लड़कियों कों रहना होगा। आधी रात कों कहीं निकलने से पहले ये सुनिश्चित करना होगा की सुरक्षित है या नहीं। आज सोचती हूँ की अगर निर्भया ने ये सोचा होता तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती। आप ठीक कह रहे है। दूसरे की सहायता से पहले हमें खुद की सहायता करनी होगी। हम खुद जागरूक रहे तो कम से कम खुद कों ये जबाब दें सकते है की मै तो सावधान थी लेकिन जो होनी थी वो हो गयी।

अयान उसके माथे पर हाथ फेरते हुए कहता है, हाँ !! दुनिया मे, सभी स्त्रियों कों समझना होगा की उनका जीवन आसान नहीं है। ना घर मे और ना बाहर मे। इसलिये उनको हमेशा सचेत ही रहना होगा। हल्की लापरवाही उनके जीवन कों बदल कर रख देगी। चलो अब फ्रेश हो जाओ कह कर उसके माथे कों चूम लेता है।

इधर धनंजय कहता है, "जब तुमने धनवी कों पसंद करते हो तो ये सवाल क्यों पूछ रहे हो। मै उन भाइयों मे शामिल नहीं हूँ की जो बेबवजह की पाबंदी लगाते है। मै भी उसके लिए कोई जीवनसाथी ढूढ़ता तो तुम जैसा ही ढूढ़ता। तुम भूल रहे हो की मै धनंजय ठाकुर हूँ। शादी के दिन ही तुम पर नजर चली गयी थी। उसी वक़्त मैंने तुम्हारी जानकारी निकाल ली थी। बस देखना था की तुम्हारे अंदर हिम्मत कितनी है।
वैसे तो आज कल लड़के मोहब्बत तो कर लेते है लेकिन उसे लड़की के परिवार के सामने कुबूल करना नहीं चाहते है। बल्कि चोरी छिपे मिलना पसंद होता है लेकिन सामने से लड़की की परिवार के सामने इज्जत से ना उसका हाथ मांगते है और ना ही अपनी मोहब्बत कों कुबूल करते है। और कभी कुछ लड़के इतनी हिम्मत दिखा भी दें तो लड़की के परिवार वालों समझ मे नहीं आता की जब लड़का सामने अपनी बात रखने आया है तो उसकी बात शांति से सुनकर अपने विचार दें। बिना सुने ही वो लड़के कों मारने लगते है।

तो ये कहना बेहद गलत है की लड़के सहीं और लड़की का परिवार गलत होता है। और ना ही लड़का गलत और लड़की का परिवार सहीं होता है। दोनों तरफ से समझदारी की उम्मीद रखनी चाहिए। बेटियों कों ये बताना चाहिए की बाहर की दुनिया मे उसे अगर कोई पसंद आता है तो बाहर छुप कर मिलने से बेहतर है की वो अपने परिवार कों बताये। और परिवार वाले इतना भरोसा अपनी बेटी कों दें की वो उसकी किसी भी बात कों ठन्डे दिमाग़ से सुननेगे। फिर कोई प्रतिक्रिया देंगे। तो शायद कभी बेटियों कों कोई बाहर वाला बेबकुफ़ नहीं बनाएगा। क्योंकि हर लड़के संकल्प और प्रथम जैसे नहीं होते है। जिन्हें वाकई मोहब्बत होती है और वो उस मोहब्बत की मंजिल कों पाना चाहते है।"

धनंजय ने अपने शब्दों मे संकल्प कों सब कुछ कह दिया। संकल्प हल्का मुस्कुरा कर सर झुका कर कहता है, " मोहब्बत बेहद कठिन सफर है ठाकुर साहब !! ये जीतनी आसानी से होता है। उससे कहीं कठिन है इसे निभा लेना। इसके रास्ते बेहद कठिन होते है। लोग कभी इस भाव कों नहीं समझ पाते है की " इश्क वो आग का दरिया है, जिसमे डूब कर जाना है !!" इसका सहीं अर्थ है की मोहब्बत जब होती है तो उससे ही रह जाती है। उस मोहब्बत से अलगाव ये कह कर नहीं होता की अब तुम्हारे लिए कोई अहसास नहीं बचा। इसलिये मोहब्बत हर कोई कर सकता है लेकिन निभाना तो बस बहुत कम दिलवाले करते है। "

तभी आरध्या बाहर आती है, और कहती है, धनवी कों होश आ गया है। दोनों उसके साथ कमरे की तरफ बढ़ जाते है। धनवी ख़ामोशी  से छत कों देख रही होती है। धनंजय उसके सर पर हाथ रख कर कहता है, " बच्ची :!! खुद कों दोष देना बंद करो और इस घटना से निकलो क्योंकि जिंदगी है बच्चे !! जहाँ हमें वो मिल जाता है, जिसकी हमें उम्मीद नहीं होती है। कभी कभी वो बेहद अच्छी होती है तो कभी कभी बेहद बुरी। इसलिये हमें अच्छी और बुरी दोनों चीजों के लिए तैयार रहना होगा। जानता हूँ तुरंत सम्भव नहीं होगा लेकिन ऐसा भी असम्भव नहीं है जो नहीं होगा। समझी। कह कर उसके माथे कों चूम लेता है। फिर संकल्प कों देख कर इशारे मे कहता है, की अब तुम सम्भालो। आराध्या कों साथ लेकर निकल जाता है बाहर।

संकल्प बेहद मोहब्बत से धनवी के सर कों चूम कर कहा, " ऐसे तो मेरी जानू नहीं थी। वो जबाब देती थी और लड़ती थी। ऐसे कब तक रहोगी। तुम्हें देख कर दिल मे दर्द हो रहा है। प्लीज धनवी इतनी कमजोर तो ना बनो। धनवी ऊपर की तरफ देख रही थी, उसकी आखों से आंसू बिना कहे उसके दर्द कों बयां कर रहे थे। संकल्प उसके आखों के आंसू कों पोंछते हुए, अपना सर ना मे हिला कर उसे रोने से मना करता है। उसकी नजर संकल्प से रोती है और रोते हुए उसने कहा, " अच्छा नहीं लग रहा मुझे संकल्प जी :!! अहसास हो रहा है की उनलोगों के गंदे हाथ मेरे शरीर पर कीड़े की तरह रेंग रहे है। खुद से घृणा हो रही है। क्या करुं संकल्प जी !!"कह कर उसकी आखों मे देखने लगती है।

संकल्प जो अपनी मर्यादा नहीं तोड़ना चाहता था लेकिन धनवी की हालत देख कर बिस्तर पर बैठ जाता है और उसे सीने से लगा लेता है। बाहों मे लिए हुए उसने कहा, " क्या अब भी घृणा हो रही है। "वो उसके गले लगे हुए अपना सर ना मे हिलाती है। संकल्प उसके चेहरे कों हाथ मे भर कर बेहद मोहब्बत से उसके माथे पर अपने होठो कों रख देता है। उसकी मोहब्बत के अहसास से धनवी अपनी आँखे बंद कर लेती है। संकल्प के होंठ धीरे धीरे धनवी के चेहरे हर हिस्से कों चूम रहा था। फिर उसकी हाथों से होते हुए उसकी बांह कों चुमता है। फिर उसके गले कों चुमता है और उसके बाद फिर से उसके चेहरे कों अपने हाथों मे भर लेता है। धनवी की आँखे सुकून से बंद थी तो संकल्प उसके चेहरे के सुकून कों देख कर मुस्कुरा देता है और धीरे से उसके होठो और अपने होठो कों रख देता है। उसकी भी आँखे बंद हो जाती है। दोनों बेहद मोहब्बत  से एक दूसरे कों चूम रहे होते है। कुछ देर बाद संकल्प उसके चेहरे कों छोड़ कर उसे अपने सीने से लगा कर कहा ," अब सुकून से सो जाओ !! जानू और उसके बाद आँखे खोलने तो मेरी पुरानी धनवी कों वापस कर देना। ये कह कर उसके बालों कों सहलाने लगता है।

इधर अयानी बेचैनी से कमरे मे इधर उधर घूम रही थी की प्रथम सीधे उसके कमरे मे आता है। प्रथम कों अपने सामने देख कर तेजी से उसके सीने से लग जाती है। धनवी के साथ जो भी हुआ उसका असर अयानी के ऊपर भी हुआ था। जिसे प्रथम ने महसूस कर लिया था। इसलिये वो सीधे उससे मिलने चला आया। प्रथम उसे गोद मे उठा कर बिस्तर पर सुला कर कहा, " सो जाओ !! सब ठीक है। मै हूँ ना बहुत जल्दी सब कुछ ठीक हो जायेगा। कह कर उसके बालों कों सहलाने लगता है। अयानी जैसे इसी सुरक्षा की इंतजार मे थी। प्रथम के बाहों मे, वो सुकून से...आराम से अपनी आँखे बंद कर लेती है।

आराध्या कमरे मे आती है और तेजी से वाशरूम चली जाती है। धनंजय उसे वाशरूम जाते हुए देखता है तो कुछ कहता नहीं है। लेकिन काफ़ी देर हो जाती है वो बाहर नहीं निकलती है।

आराध्या आईने के पास खड़ी गुस्से मे खुद कों देख रही होती है। बाहर मौजूद धनंजय काफ़ी देंड़ से आरध्या के बाहर निकलने का इंतजार कर रहा था। क्योंकि वो खुद कपड़े बदल कर आ चुका था। वो परेशान होकर वाशरूम के पास आकर आवाज़ देते हुए कहा, " ठकुराइन !! ठकुराइन दरवाजा खोलो !!" आरध्या जैसे ही उसकी आवाज़ सुनती है। तो अपने चेहरे कों फिर से एक बार पानी से धोती है और बाहर आ जाती है।

धनंजय की नजर उसके चुके चेहरे पर जाता है तो उसकी आँखे छोटी हो जाती है। जब वो उसके बगल से जाने लगती है तो धनंजय सीधे उसे गोद मे उठा लेता है। अचानक धनंजय की ऐसी प्रतिक्रिया देख, वो जल्दी से अपनी दोनों बाहें उसके गले मे डाल देती है। वो उसे मुस्कुरा कर बाहर बालकनी मे ले जाता है और उसकी सबसे खूबसूरत जगह पर ला कर बिठा देता है। दोनों आसमान की खूबसूरती निहार रहे थे। जहाँ रात की काली गहराइयों कों खत्म करती हुई सवेरा अपनी पंखो कों फेलाने लगा था। ठंडी ठंडी हवा दोनों के चेहरे की थकान कों दूर कर रही थी।

क्या बात है ठकुराइन !! गहरी सांस भरते हुए, आराध्या ने कहा, " दिल चाहता है ठाकुर !! उस वसुधा सिंह कों चुलु भर पानी मे डूबा डूबा कर तब तक मरू। जब तक उसे ये महसूस ना हो जाये की ये द्वेष, दुष्टता एक औरत होकर दूसरी औरत के लिए कोई औरत कैसे रख लेती है। " खुद कों शांत करो ठकुराइन कर्म का हिसाब सबको देना होता है। किसी कों उसके कर्म का फल तुरंत मिल जाता है तो किसी कों कुछ देर बाद लेकिन मिलता जरूर है। "

धनंजय की तरफ घूम कर उसने कहा, " नहीं ठाकुर कर्म का नहीं !! कर्म का हिसाब तो देना ही इंसान क्या भगवान क्या, दुनिया मे हर एक जीव कों देना होता है। सवाल ये है की मर्द जात जो खुद कों बेहद शक्तिशाली समझते है। फिर जब किसी लड़की के साथ कुछ करते है तो अकेले क्यों नहीं अपनी शक्ति कों आजमाते है। पांच मर्द अगर एक औरत कों दबोचे तो वो कमजोर पड़ ही जाएगी ना ठाकुर !! पांच मर्द किसी एक मर्द कों भी दबोचे तो वो भी कमजोर पड़ जाये।
लेकिन यहाँ सवाल मर्द का नहीं है। सवाल औरत का है... ऐसा कोई मर्द का बच्चा है की अगर उसे मर्दानगी दिखानी हो तो वो अकेले उस औरत और लड़की से लड़ कर दिखाएंगे।
तुम यकीन मानो ठाकुर कोई निर्भया नहीं होगा क्योंकि हम औरते एक मर्द से हमेशा ताकतवर होती है, जब सवाल हमारी इज्जत पड़ आ जाता है। लेकिन साले दोगले उन वाहियात मर्दो की मर्दानगी पर जो झुण्ड मे भेड़ीयों की तरह एक मेमना पर टूट पड़ते है। ये कहते हुए की वो अपनी मर्दानगी दिखाएंगे !!"

आरध्या आवेशित होकर और कुछ कहती की उससे पहले धनंजय तेजी से उसके होठो पड़ अपने होठो कों रख देता है।आराध्या अपनी आँखे बंद कर लेती है। उसे इस सुकून की तलाश थी जो धनंजय ने उसे दी थी। कुछ देर बाद धनंजय उसके होठो कों छोड़ कर, उसकी कमर पकड़ लेता है और उसे खुद के करीब कर लेता है। आरध्या की नजरें झुकी हुई थी। धनंजय हल्का झुक कर उसके कानों के पास आ कर अपनी धीमी आवाज़ मे कहा, " तुमने मुझे बूढा कहा था !! अगर तुम मौका दो तो मै तुम्हें बताउ की मै बूढा हूँ या जवान !! ये कह कर उसके कान कों हल्का सा काट लेता है।

आराध्या जैसे उसकी बात सुनती है, उसका चेहरा और कान लाल हो जाता है और मुँह खोले हुए उसकी तरफ देखती है।धनंजय शरारत से मुस्कुराते हुए कहा , " तुमने ही तो कहा था ठकुराइन!! की मै बूढा हूँ तो चलो बताता हूँ की मै बूढा हूँ या जवान !! ये कह कर आरध्या की कमर कों पकड़ अपनी तरफ और करीब कर लेता है। आराध्या उसकी अपनी बड़ी बड़ी आखों की पलकों कों झपकाती हुई उसकी बातें सुन रही होती है। आरध्या कों कोई प्रतिक्रिया नहीं करता देख धनंजय अपने होंठ कों उसके गर्दन पर रख कर हल्का सा चूम लेता है।

आरध्या उसके चेहरे कों जल्दी से पकड़ कर खुद से अलग करती हुई कहा, " ये... ये... भाँग चढ़ाई लियो हो ठाकुर !! बहकी बहकी बातें और इतनी बेशर्मी भरी तुम कहाँ से सीखो है। तनिक बताय दो हमको। महादेव की कसम......!!बस ठकुराइन !! कह कर धनंजय उसके होठो पर अपने हाथ रख कर कहा, " हर बात पर तुमको !! भोलेनाथ कों तंग करना जरूरी है ठकुराइन !! अरे तनिक उनको भी आराम दो। काहे परेशान किए रहती हो तुम उनको !!"

धनंजय की उसकी जुबान मे बोलता सुनकर। वो बेयकिनी से अपने मुँह पर हाथ रखती हुई कहा, " हाई मोरी अम्मा !! तुमको कुछ !! मतलब ठाकुर ये तुम मेरी भाषा मे मुझे कों जबाब दें रहे हो !! तुमरी सटक गयी है या कही कोई स्क्रू दिमाग़ की गिर गयी है !!"ये कह कर खुद कों उसकी गोद से हटा कर, उसके सामने खड़ी हो जाती है।
इस समय धनंजय झूले पर बेटा हुआ आरध्या कों देख रहा था और आरध्या उसके सामने खड़ी कमर पर हाथ रखी हुई उसे घूर रही थी।

धनंजय ने मुस्कुराते हुए कहा, " अच्छा तो ये बताओं की तुम मुझे घूर क्यों रही हो। क्या मैंने कुछ गलत कहा !!" आराध्या अपने होठो कों गोल मोड़ती हुई और आखों कों छोटी कर कहा, " तुम्हें नहीं लगता ठाकुर की मैंने हाथ पकड़ ने दिया तो तुम ने मेरी कमर पकड़ ली !! हम्म्म्म !! बोलो !! बोलो !!"

वो तेजी से उसकी कमर पकड़ अपनी करीब करता है। अरे.. ये क्या कर रहे हो तुम.. कसम से बोराई गए हो क्या तुम !! बिल्कुल नहीं ठकुराइन तुमने ही तो कहा की मेरी कमर पकड़ो। अब अपनी प्यारी ठकुराइन की बात कैसे नहीं मानता इसलिये मैंने पकड़ लिया !! उसने उसे घूरते हुए  एक गहरी सांस ली और कहा, " देखो ठाकुर !! मुझे मालूम है की तुम मेरे दिमाग़ कों भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हो। नहीं तो मै अपने ठाकुर कों पूरी तरह जानती हूँ की कब,कैसा है !! अब मुझे छोड़ो भौर हो चुकी है तो फ्रेश होकर जाउंगी पूजा करने। मन मेरा शांत नहीं है !!

उसकी बात पर वो मुस्कान लिए उसे अपनी गोद मे फिर से बिठा देता है। जब जानती हो ठकुराइन की मै सिर्फ तुम्हारा दिमाग़ भटका रहा हूँ तो तुम भटकने क्यों नहीं दें रही हो। क्योंकि ठाकुर !! मेरा दिल कर रहा है की उन लडको कों भट्टी मे जला कर भून दू। कलंक है धरती पर। फिर उस बुढ़िया की सर के सारे बाल कों नोंच दू और पुरे भोपाल मे गंजा कर के घुमाऊ। हिम्मत कैसे हुई हमारी बच्ची के साथ ऐसे करनी की। वो तो वैसे भी इतनी मासूम है की उसे दुनिया की दोगली चरित्र से कोई सरोकार नहीं है !! मालूम नहीं इन हैवानो से, धरती मैया कों मुक्ति कब मिलेगी। "

बस मेरी उज्जैन की रानी !! बस !! तुम्हें क्यों लगता है की वो लड़के बच गए होंगे। धनंजय की बात पर उसने उसे हैरानी से देखा और कहा, क्या मतलब ठाकुर !! क्या तुमने उन लोगों के साथ कुछ किया ? लेकिन तुम कों तो पूरी बात बहुत बाद मे चली थी, फिर तुमने ऐसे कैसे सोच लिया?? "वो ऐसे ठकुराइन की अगर मेरी ठकुराइन कों इतना गुस्सा आया था की वो बस अपना काली का रूप दिखा रही थी। सब कुछ भूल कर !! इसका मतलब बिल्कुल साफ था की जरूर उन लोगों ने बहुत बड़ी गलती की होगी !!
आराध्या उसकी बात पर, उसकी आखों मे देखती हुई कहा," इतना भरोसा करते हो अपनी ठकुराइन पर !!" खुद से ज्यादा भरोसा करता हूँ अपनी ठकुराइन पर। कह कर उसके होठो पर अपने होठो कों रख देता है। इस वक़्त आराध्या भी उसे नहीं रोकती है। दोनों एक दूसरे कों बेहद सिद्द्त से चूम रहे थे। इधर दोनों एक दूसरे कों चूम रहे होते है और सामने सूर्य देव ने भी अपनी लालिमा भरी रौशनी उन दोनों पर दें दी। सुबह की खूबसूरती मे, दोनों एक दूसरे के प्रेम भरे स्पर्श का आनंद ले रहे होते है। जब तक दोनों की सांसे अपनी संयमता नहीं छोड़ देती है।

आराध्या पूरी तरह से धनंजय की बाहों मे सिमटी हुई, अपनी बरकाबू सांसों कों रोक रही होती है और धनंजय उसके बालों कों सहलाते हुए, अपनी मदहोश से भरी आवाज़ मे कहा, " ठकुराइन !! आराध्या भी अपनी बेकाबू तेज सांसों कों संभालते हुए, उसे जबाब दिया, " हुह... "!!! कब तक अपने ठाकुर कों बेचैन करने का इरादा है, तुम्हारा। कुछ वक़्त और ठाकुर। हम्म्म्म !! ठीक है ठकुराइन !! जितना वक़्त लेना है, ले लो !! इन सब बेचैनीयों की क़ीमत तुमसे ले लूँगा। मंजूर है ना !! मंजूर है ठाकुर !!"

"अब तो सुबह हो गयी। नींद भी तुमने नहीं ली। कोई बात नहीं। मुझे आदत है। हम्म्म्म !! ठीक है। तुमसे एक जरूरी बात करनी थी।" आरध्या की नजर धनंजय की गंभीर होते चेहरे पर जाती है... मन मे सोचती है, अभी अचानक इतने गंभीर होने का क्या मतलब है, ठाकुर का  !!!