Love without wish Chapter-39
- 29 June, 2026
" क्या बात है ! महफ़िल जमी है यहाँ तो, सारी शैतानो की टोली हमारे घर मे, " कह कर, ताली बजाती हुई आराध्या हाल मे आती है। सारे के सारे शैतान एक साथ । मानना पड़ेगा पति देव ! तुम और तुम्हारी मैय्या दस दिन भी मुझे नहीं झेल सके और ले आये अपनी राक्षसी सेना को ! वसुधा अपनी तिरछी मुस्कान लिये हुए, उठ कर आगे बढ़ जाती है और आराध्या के करीब आ कर उसने कहा, " क्यों बहुरानी ! कैसी रही !शैतान ही तुम इंसानों पर भारी पड़ती है। भूल तो नहीं गयी तुम। "
उफ्फ्फ सासु मैय्या कितना सीरियल देखती हो। महाकाल की सोंगन्ध वक़्त मिलता तो तुम सँग गिल्ली डंडा खेलने मे बहुत मजा आता। लेकिन ऊ क्या है ना ! तुमको नहीं लगता सासु मैय्या ! आज जो तुम प्रपंच रची हो कही तुम पर ही भारी ना पर जाये। ऊ का है ना ! तुमको पहली बार उज्जैन की चौधरी से पाला पड़ा है। अच्छा चलो बाहर चलो फिर बताउंगी की कैसी रही। पहले तुमने और तुम्हरे बेटे ने जो रायता फैलाया है, उसको समेट लूँ। फिर तुमसे बातें करुं। अभी तुमसे मुँह लगाने का हमरा कोई इरादा नहीं है। फिर हल्की तिरछी होकर अंतरा को देखा और कहा, " वो मेरी सासु मैय्या की नबकी बहुरिया। बाहर बहुत तुम दोनों ने, छय्या छय्या कर लिया। अब जरा हम तुम सबको.. ता..ता...थेय्या करवा देती हूँ। अयान भाई ! सभी आ गए।
अयान ने कहा, हाँ सभी गार्डन मे मौजूद है। गोपी जी बेहद मायूसी भरी आवाज मे ध्यान से कहते है, " क्या बात है ध्यान ? " ध्यान और प्रथम उन दोनों के पास आते है और बेहद आराम से कहा, " कुछ देर मे, आपको सब कुछ मालूम हो जायेगा दादू। " फिर दीप्ती से कहा, तुम संकल्प सब को बुला लो। हम बाहर जा रहे है।"वसुधा और सभी आपस मे इशारे बाजी करते है।किसी को अंदाजा नहीं था की आराध्या क्या करने वाली है। सभी अपने अपने कंधे उचका देता है। कृष्ण राठौर ने धीरे से कहा, " ये ऐसा क्या करने वाली है वसुधा ! मुझे पता होता राठौर साहब तो,मै आपको नहीं बताती। "छोड़िये ना आंटी ! जो भी करेगी लेकिन हमारी इस वार का कोई काट इसके पास नहीं होगा।"सभी मुस्कुराते हुए बाहर चले जाते है।
कुछ देर बाद आराध्या, सबके सामने आती है। पूरी मिडिया बैठी होती है। आराध्या को देखते ही, जैसे मिडिया अपने सवाल. उससे पूछती। उससे पहले ही आराध्या ने कहा " नमस्ते ! आप सब मुझसे कुछ भी पूछे, उससे पहले,मै अपनी बात रखना चाहूँगी। मेरी बात सुनने के बाद, आप सभी को लगे की कोई सवाल रह गया है तो मुझसे पूछ सकते है। "पूरी मिडिया के सामने पहली बार आराध्या सामने आयी थी। लेकिन बेहद शालीनता से उसने अपनी बात रखी, जिसे सुनकर सभी मिडिया वालों ने उसकी बात पर कोई एतराज नहीं किया।आराध्या ने कहा,
" आज सुबह -सुबह, जब धनंजय के साथ आपने मिस अंतरा बिजलानी को देखा तो बातें बनने लगी। ये सच है की अब मै और धनंजय साथ नहीं रहते। हमारे बीच मे, सब कुछ ठीक नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं की धनंजय को किसी और के साथ जीने का कोई हक नहीं। उन्होंने ये बिल्कुल सच कहा की मै उन्हें पत्नी का सुख नहीं दें पाती हूँ। तो उनको प्यार चाहिए।
मुझे इनकी अंतरा के साथ इस रिश्ते से कोई इन्कार नहीं है। क्योंकि इन्होंने अपना सब कुछ मेरे नाम कर दिया है, ये कहते हुए की दो लोगों की शादी अगर ना निभ सके तो कोई एक परेशान क्यों हो। मैंने भी उन्हें ये हक दिया की वो किसी के. साथ अपने जीवन मे आगे बढ़ सकते है और उन्होंने मुझे ये अधिकार दिया की मै खुद को बेहतर बना सकती हूँ।
ये हम दोनों के बीच की बातें है। हम दोनों ने आपसी समझौते पर अपने अपने जीवन की अलग अलग राह चुनी। क्योंकि मिस बिजलानी का अपना बिजनेस है और उनकी चाहत थी की धनंजय उनके बिजनेस मे, अपनी सारी काबलियत लगा करे उसे भी ठाकुर कम्पनी और वसुंधरा इंटरप्राइजेज की तरह बुलंदी पर ले जाये। इसलिये जब उन्होंने अपनी दिल की बात मेरे सामने रखी की मै उनके बिजनेस और परिवार को संभाल लूँ और वो अपनी नई दुनिया और प्यार के साथ आगे बढ़ना चाहते है तो मै इंकार नहीं कर सकी।
आज आपने जो कुछ भी देखा। वो किसी की साजिश होगी, इन दोनों को बदनाम करने की। नहीं तो आज से, सात दिन बाद इनकी शादी तय हो गयी है। आप चाहे तो, मेरी सासु माँ से पूछ सकते है। इनफैक्ट ! आज सभी यहाँ मौजूद ही इसलिये थे की इनकी शादी धूम धाम से करवा दी जाये।
अब आप लोग सोच रहे होंगे की पहली पत्नी के होते हुए, कैसे दूसरी शादी कर सकते है। तो आपको बता दू हम एक महीने पहले ही सेपरेट हो चुके है। मै इस घर मे, रह रही हूँ क्योंकि मेरे दादा और दादी के. साथ साथ धनंजय की भी मर्जी थी की मै यही रहु और परिवार के साथ साथ काम सँभालु।क्योंकि शादी के बाद धनंजय अपनी पत्नी अंतरा के. साथ ऑस्ट्रेलिया सिफ्ट होने वाले। "
बस मुझे इतना ही कहना था। अब आप सब चाहे तो मुझसे सवाल पूछ सकते है। इधर आराध्या की कही बात ने ठाकुर परिवार के साथ साथ वसुधा और उसकी टोलीयों के रंग उड़ा चुकी थी।ऐसी हालात बन गयी थी की कोई उस समय कुछ नहीं कह सकता था। सिवाय मुस्कुराने के।मिडिया ने सवाल किया, " मिसेस ! सॉरी मैम ! मिस आराध्या क्या आपको बुरा नहीं लगा की आपके पति, आपको छोड़ कर किसी और के पास चले गए? "
आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा, " अगर मेरे साथ कोई खुश नहीं है तो जबरदस्ती उस रिश्ते मे उसे रख कर, खुद के साथ साथ उसे भी तकलीफ दू। ये मुझे पसंद नहीं है। रिश्ता बहती नदी की तरह होती है। जहाँ दो लोग साथ साथ बहते है। लेकिन अगर कही एक जगह रुक जाये तो आप सबको मालूम है की बहता हुआ पानी और रुके हुए पानी मे क्या फर्क होता है।एक जगह रुका हुआ पानी सड़ जाता है और उसमें कीड़े लग जाते है। बहता हुआ पानी हमेशा स्वच्छ हो साफ होती है। अगर मै इनको खुद के रिश्ते मे बांध कर रखती तो हो सकता है, दुनिया के नजर मे हमारा रिश्ता पति पत्नी की तरह जरूर होता। लेकिन एक कमरे मे, जो ख़ुशी और प्रेम से पति पत्नी अपना रिश्ता जीते है। वो हमारे बीच कभी नहीं रहता। इसलिये हम दोनों ने आपसी समझ से, ये रास्ता चुना है। "
फिर एक मिडिया वाले ने सवाल किया," मैम! आपको नहीं लगता की आपका ये निर्णय बाक़ी सभी औरतों की जिंदगी मे उथल पुथल ला देगी और हो सकता उनके पति भी कुछ ऐसी ही बातें कर दें ! एक तरह से, ये गलत संदेश जायेगा ना ! क्योंकि आप कोई छोटा मोटा नाम तो नहीं है। आपके परिवार की और पति का रुतबा है, भोपाल शहर मे !"
आराध्या ने मुस्कुराते हुए उस मिडिया वाले को देखा और कहा, " आपने गलत सवाल पूछ लिया। पहला तो ये की जो काम मेरे पति ने किया है, वो किसी का पति शायद ही करे। अगर गलती से किसी के पति ने ये कर दिया तो मुझे नहीं लगता है की कोई पत्नी अपने पति को आजादी नहीं देगी !" फिर उसी पत्रकार ने पूछा, " मैम आप कहना क्या चाहती है ! हम समझे नहीं !"
आराध्या उठ कर खड़ी हो जाती है। एक बार वो वसुधा और धनंजय की तरफ देखती है, जिन के चेहरे पर बारह बजे थे। उसके बाद एक फिर से, उस ने उस पत्रकार को देखा और कहा, " मेरे कहने का मतलब ये है की मेरे पति धनंजय ठाकुर ने अपनी पूरी सम्पति मेरे नाम कर दी। यहाँ तक की परिवार भी। वो ये घर, परिवार और कारोबार छोड़ कर जा रहे है। आप बताईयेगा, क्या ऐसा कोई पति करेगा। "
सभी एक साथ कहते है, नहीं बिल्कुल नहीं '! कोई ऐसा नहीं करेगा !" आराध्या ने मुस्कुराते हुए होने हाथों की मुद्रा को बना कर कहा, " तो फिर मेरे फेसले का गलत प्रभाव कैसे किसी और पति पत्नी के रिश्ते पर होगा। अगर किसी का पति, मेरे पति की तरह अपना सब कुछ अपनी पत्नी को दें दें और कहे की " मै तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता हूँ। " तो मुझे नहीं लगता कोई पत्नी जबरदस्ती उसके गले पड़ेगी। क्योंकि महिलाये इतनी समझदार होती है और उनको मालूम है की जबरदस्ती किसी के साथ रिश्ता नहीं बांधा जाता है। "
उम्मीद करती हूँ की आप सब की सवालों का जबाब मिल गया होगा। आप सभी शादी मे आमंत्रित है जरूर आईयेगा। नमस्ते !!"
आराध्या हॉल मे बैठी हुई थी। वसुधा और टोली को तो समझ मे नहीं आ रहा था की आराध्या के किये इस वार का जबाब क्या दें। इसलिये अब वो लोग भी चुप होकर देख रहे थे।
गोपी जी आज पहली बार आराध्या से नाराज थे। सुमती जी ने गुस्से मे कहा, " क्या सोच कर तुमने इतना बड़ा निर्णय लिया आराध्या बहु। आखिर कौन पत्नी अपने पति की दूसरी शादी करवाती है। मिडिया को बुला लिया। बीना हमें कुछ बताये। जो दिल किया वो बोल गयी। हमारी कदर तो इसने धनंजय की तरफ देखते हुए, कभी की ही नहीं। तुम से हम बूढ़े बूढी उम्मीद लगा बैठे थे। लेकिन अपना और पराया। हमारे हिस्से तो दोनों मामलों मे,खाली ही रहे है !"
दीपा और दीपक जी दोनों कुंठित होकर आराध्या को देखते हुए कहा, " बड़की ! तुमरी हुर बदमाशी, बातें हमको हमेशा अच्छी लगी क्योंकि. तुम कभी गलत नहीं करती थी। लेकिन आज तूने क्या किया पगली अपने हाथों अपना घर उजाड़ लिया। अरे जमाई बाबू तो बदल चुके है। लेकिन तुम तो कम से कम उनकी गलत हरकत पर बढ़ावा नहीं. देती। एक बार नहीं. सोचा की अब तुम कैसे रहोगी और क्या करोगी।
आराध्या सड़ झुकाये फिर भी चुप थी। उसकी चुप देख कर दीप्ती और तानिया ने कहा, " चुप क्यों हो ? जबाब दो। ये क्यों किया. आखिर इतनी महान बनने का भूत तुम्हें क्यों चढ़ गया है। टीवी सीरियल की बहु बनना है तुम्हें। आरू ! ये क्या तरीका है। बोलो। एक तो इस औरत ने सुबह सुबह धनवी को थप्पड़ मार दिया। ऊपर से जो बचा कुचा कसर था। वो तूने उतार दिया।" उन दोनों की बात सुनकर आराध्या अपना चेहरा ऊपर उठाती है। उसका चेहरा लाल हो चुका था, गुस्से मे या दर्द मे, ये उसे ही मालूम था। हाँ ! आखों मे आंसू एक बून्द नहीं आयी थी। आराध्या ने अपनी कठोर आवाजे मे कहा, " किसने थप्पड़ मारा बच्ची को !"
उसके सवाल को सुनकर सभी हैरान हो गए की इतनी बातों मे, उसे धनवी को किसने थप्पड़ मारा, उस पर बातें करनी है। तानिया ने गुस्से मे कहा, " ये क्या बात हुई आरू ! अभी तक जो बातें हमने, दादी माँ ने, चाची ने कही, उसका कोई जबाब नहीं दिया तूने और कह रही है किसने मारा धनवी को !"
आराध्या ने उसे घूरते हुए कहा, जितना पूछा उतना जबाब दो तानी :! अभी उसका लहजा बेहद ठंडा था। तानिया ने कहा, सासु मैया ने !" आराध्या गुस्से मे वसुधा की तरफ घूमती है। तभी धनंजय उस के करीब आता है और उसकी बाजु पकड़ लेता है। जैसे ही आराध्या के बाजु को उसने पकड़ा। आराध्या बेहद गुस्से मे, उस से अपनी बाजु छुड़वा कर, अपने उलटे हाथ से एक थप्पड़ मारा। उसकी थप्पड़ की आवाज इतनी तेज थी की पुरे हॉल मे, गुंज उठी और धनंजय का चेहरा एक तरफ झुक गया। आराध्या ने अपनी ऊँगली दिखाते हुए कहा, " सुनो सासु मैय्या के लाडले ! हमें छूने की गलती मत करना। नहीं तो वाकई हम तुम्हारी बोटी बोटी कर देगा। हिम्मत कैसे हुई, हमें हाथ लगाने। "
धनंजय ने बेहद गुस्से मे, पलट कर उस पर हाथ उठाने की कोशिश की, लेकिन उससे पहले संकल्प और अयान ने उसके हाथों को पकड़ लिया और कहा, " कोशिश मत करना ! इस वक़्त वो तुम्हारी पत्नी नहीं ; हमारी बहन है। ये कह कर उसके हाथों को झटक दिया !" धनंजय ने ताली बजाते हुए कहा, " वाह ! पहली बार ऐसा परिवार देखा है। जो बेटे से ज्यादा बहु का सगा है। ये मेरी पत्नी है और इसे मै जब मर्जी तब छू सकता हूँ। बहुत कर ली इसने मनमानी। आज से हम दोनों एक ही कमरे मे रहेंगे।
"अरे वाह ! बहुत खुब ! कहती हुई आराध्या ताली बजाती है ।तुमने मुझे क्या समझ रखा है की तुम बाहर मुँह मार कर आओगे और घर मे, तुम्हारी आरती उतारूगी। शुक्र मनाओ की तुम्हारी छमियाँ के साथ मैंने रिश्ता कुबूल भी कर लिया और शादी भी करवा दूँगी। नहीं तो अभी थाने को बुला कर, तुम्हें अंदर करवा देती। एक पत्नी के रहते हुए, जो तुम दोनों ने गुल खिलाएं है। महिला मोर्चा निकलवाती है और तुम्हरे साथ साथ ये जो तुम्हारी अम्मा, बाबू, और चिकनी चमेली है ना ! सबके मुँह पर कालिख पुतवा कर, पुरे शहर मे घुमाती। तो ज्यादा तो बकैती करो मत तुम। हमरी खिसकी ना तो तुम्हरी कही टिकेगी नहीं। और ये थप्पड़ इसलिये मारा क्योंकि तुमरी मैया ने हमरी बच्ची को मारा था। इसलिए उसके बिटवा को हमने वारा। हमरे कमरे मे क्या तुम, इस एक सीढ़ी पर चढ़ के दिखाओ। महाकाल की सोगंध, तुम्हारे पैर को हम खोलता तेल. से ना झरकाये दिए तो कहना !"
आराध्या की धमकी भरी बात सुनकर, अंतरा ने डर से धनंजय के हाथों को पीछे खींच लिया। धनंजय भी अपने दांतो को पीसते हुए, बस चुप. हो कर आराध्या को घूर रहा था।वसुधा कुछ कहती, उससे पहले आराध्या ने कहा, रुको जरा सासु मैय्या ! जरा हम अपने परिवार से निपट ले। फिर तुम से दो चार बात करेंगे। उसके बाद अपने पुरे परिवार को देखते हुए, ख़ासकर दादी - दादी को देख कर कहा, " आप सब किस दुनिया मे जी रहे है। और आप सब ये किस बात की शिकायत मुझसे कर रहे है। ये सासु मैय्या का लाडला, आप सबके सामने किसी दूसरी लड़की के. साथ गलत अवस्था मे दिखा और आप सब ने देखा। फिर भी, मुझे आप सबसे पूछ कर बात करनी थी। जो इसने पुरुष होकर किया। वही काम मै स्त्री होकर करती तो आप सब तब भी अपने पोते को समझती की पत्नी को दूसरा मौका दो गलती हो गयी।"
उसकी बात पर सबके चेहरे झुक गए। आराध्या ने अपने हाथों को घुमाते हुए कहा, अरे वाह ! सड़ क्यों झुक गए आप सभी के। पुरुष दस स्त्रियों के साथ सम्बन्ध रखे फिर भी वो पवित्र है और स्त्री का एक पुरुष से ज्यादा, अगर दूसरे पुरुष से सम्बन्ध हो जाये तो वो अपवित्र है। ये दोहरा चरित्र और मानसिकता के कारण, स्त्री या पत्नी, मन मार कर भी उस पुरुष या पति के. साथ रह जाती है। जो किसी और स्त्री के साथ सनसर्ग करके आया हो। कमाल है ! आप सभी का। खैर दूसरे का मालूम नहीं लेकिन मै तो स्वीकार नहीं कर सकती। ऐसे पुरुष को जो एक स्त्री के रहने पर भी, दूसरी स्त्री के साथ सम्बन्ध रखे। रिश्ता बनेगा या टूटेगा, गृहस्थी रहेगी या टूटेगी, लोग ताने देंगे और मेरा जीवन कैसे बीतेगा। ये सब कुछ मेरी किस्मत मे, जन्म से पहले से लिखा जा चुका है। जो नियति मे होगा वही अटल है। फिर मै जीते जी, नर्क क्यों चुनु। क्यों उस इंसान को चुनु, जिसे देख कर मुझे धोखा याद आएगा। रोज रोज उसे अपनी आखों के आगे देख कर, मुझे खुद से घृणा हो जाएगी।❤️
"आराध्या की बातों ने सबको झकझोर दिया था। उसकी बातें थी तो. सच और हमारे समाज की एक करवी हकीकत। जिससे हम और आप कोई अछूते नहीं है। बहुत सारे या दूसरे शब्दों मे कहु तो दस मे से आठ स्त्रियां, इस दौर से गुजड़ चुकी होगी। उनके रहते हुए, भी उनके पति या बॉयफ्रेंड ने उनको धोखा दिया होगा और सब जान कर भी चुप रही. होगी। ताकि घर, परिवार, रिश्ता ना टूटे और समाज मे बदनामी ना हो। हो सकता है, उस घटना के. बाद, वो सभी सामान्य व्यवहार करती होगी। लेकिन सबके सामने। अकेलेपन मे, वो अंदर ही अंदर इस दर्द और पति के दिए धोखे से कुढ़ती होगी।
आपने ध्यान दिया होगा, अपने आस - पास की जवानी मे, पत्नीया कभी अपने पति के सामने ज्यादा नहीं बोल पाती है, सिर्फ पुरुष बोलते है । लेकिन एक उम्र ढलान के बाद,पत्नियां ज्यादा बोलते है और पुरुष चुप रहते है। क्योंकि पूरी जवानी पत्नियां, अपने पति द्वारा की गयी, हर उचित और अनुचित का, उनके मुताबिक अनुसरण करती है। शायद इसलिये बुढ़ापा आते आते उनका सब्र टूट जाता है।
हालांकि ये सभी रिश्तों पर प्रभावी नहीं होता है। कुछ प्रतिशत मे ऐसा देखा जाता है। क्योंकि प्रत्येक पुरुष धोखा नहीं देता लेकिन उनकी प्रतिशत कम होती है।"
आराध्या की बात सुनकर पूरा परिवार चुप हो जाता है। क्योंकि उसकी बातें सच थी। वसुधा घूरती हुई आराध्या को देखती है और उसके पास आ जाती है। अब दोनों आमने सामने होते है। आराध्या ने उसे यू घूरता देख कर कहा, " जो भी बोलना सोच समझ कर बोलना। क्योंकि मै अभिमन्यु नहीं हूँ की चक्रव्यूह मे, फंस जाऊ। फिलहाल तो तुम फंस गयी हो सासु मैय्या। " वसुधा ने कहा, तुम्हें ऐसा क्यों लगता है बहुरानी की मै फंस गयी हूँ। हो सकता है, जो तुमने बात, बाहर मिडिया वालों से कही। वो मै मानु ही ना ! तो तुम क्या कर लोगी। "
"अरे.. रे.. रे ! क्या सासु मैय्या ! मुझे तो लगा तुम बेहद शातिर औरत हो। लेकिन अब अहसास हुआ की तुमको किसी उज्जैन की आराध्या चौधरी से पाला पड़ा नहीं। सुनो ध्यान से, जो हमने कहा, अगर उस पर तुम या तुम्हरा लाडला बिटवा, जरा सा भी पीछे हटे तो.... कोर्ट, थाना, मिडिया, महिला मुक्ति मोर्चा... सबको इक्क्ठा कर लुंगी। और जब सबके सामने तुम्हरा बिटवा का ज़बड़ा हिला सकती हूँ तो अकेले मे इसके साथ क्या करुँगी। तुम तो सोच भी नहीं सकती। इसलिये अपनी खोपड़ीयाँ को तनिक आराम दो और शादी की तैयारी करो। हमरी भेजा को घुमाने की कोशिश छोड़ दो। उसके बाद सभी वसुधा टोली को देखते हुए कहा," वैसे तो ये काम, हमरी सासु मैय्या को करना चाहिये था। लेकिन अभी उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। इसलिये हम आप सबको कह रहे है। शादी है, हमरी सासु मैय्या की बिटवा की तो तैयारी कीजिये। कोनो कसर नहीं छूटना चाहिए। उस दिन मिडिया वाले भी मौजूद होंगे। शादी धूम धाम से होगी, क्योंकि बिजलानी साहब ! आखिर आपकी एकलौती बेटी की शादी है !"
आराध्या के. बार -बार किये धमाके ने सबका दिमाग़ हिला रखा था। हालात ये थे की वो ना कुछ बोल पा रहे थे और ना कुछ कर पा रहे थे। फिलहाल सारी बाजी आराध्या के हाथों मे थी। आराध्या ने एक बार फिर सबको देखा और इस बार सख्त आवाज मे कहा, " सासु मैय्या ! आज जो तुमने गलती की है। उसको दोहराने की गलती मत करना। जाओ और खाने पीने का इंतजाम करो। हमरे तरफ से कोई किचन मे, तभी जायेगा, जब उनको खुद के लिये कुछ बनाना होगा। तुम सब जो जमघट लगाये यहाँ, आ धमके हो तो अपना अपना बंदोबस्त करो। दोबारा हमने देख लिया ना की तुमने हमरे किसी भी परिवार के साथ बतमीजी की तो अंजाम बेहद बुरा हो जायेगा। सात दिन ! सात दिन के मेहमान हो। अपनी इज्जत अफजायी खुद करो।
फिर अपने परिवार की तरफ देखती हुई उसने कहा, " आप लोग भी. सारी चिंता छोड़ दीजिये। जबरदस्ती कोई रिश्ता नहीं टिकता है। इसलिये आप सब भी शादी मे, मन से शामिल. हो जाईये। शादी है, सासु मैय्या की बिटवा की तो. कुछ तो मनोरंजन होना चाहिए। "
गोपी जी के साथ साथ सभी बड़ो ने, उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा, " तुमने बिल्कुल सच कहा बेटी की हर बार सिर्फ बहु या बेटी क्यों समझे। तुमने जो किया, उस फैसले मे, हम तुम्हारे साथ है। " आराध्या हल्का मुस्कुरा देती है। फिर उसने कहा, " मै ऑफिस जा रही हूँ, अयान भाई। आप सब यहाँ देख लीजिये। साथ दिन बाद बहुत बड़ी शादी होने वाली है, आपके भाई की। तो तैयारी बेहतरीन हो इस पर ध्यान रखियेगा। तब तक मै ऑफिस संभाल लुंगी। आज शायद देर हो जाये तो फ़िक्र मत कीजियेगा। तीन नए प्रोजेक्ट आने वाले है, तो उस पर काम करना जरूरी है। "
आराध्या जैसे ही जाने लगती है, प्रथम और संकल्प ने कहा, हम दोनों चलते है, तुम्हारे साथ ! नहीं ! आप दोनों थोड़ा वक़्त दीजिये धनवी और अयानी पर। बाक़ी सारा काम भी है, ये कहते हुए, उसने दोनों के हाथों को दबा दिया। उसके बाद वो दीप्ती और तानिया के पास आती है। उन दोनों को देख कर उसने कहा, " तुम दोनों को मुझ पर भरोसा है ना !! " आराध्या की बात सुनकर दोनों अपने अपने सर को हाँ मे हिला देती है। " आराध्या तेजी से घर से बाहर निकल जाती है।
उसके जाते ही सारा परिवार अपने अपने कमरे मे चला जाता है। आज सबकी भूख और प्यास मर चुकी थी। लेकिन दीप्ती और तानिया के साथ साथ, अयान और ध्यान ने सबके कमरे मे, खाना लगवा दिया था। सिवाय वसुधा की टोली को छोड़ कर।
आराध्या के जाते के साथ, वसुधा के कमरे मे सभी मौजूद थे। कुछ देर के बाद वसुधा की माँ, एक ट्रे मे सबके लिये कॉफी लेकर अंदर आयी और अंतरा ने दरवाजा बंद कर दिया। उसकी माँ ने कहा, सोचा था यहाँ आ कर महरानी बन कर रहेंगे लेकिन यहाँ आने के बाद नौकरानी से भी बदतर हालात हो गयी है। हमलोगो की।
वसुधा कॉफी की कप लेते हुए कहा, समझ मे नहीं आ रहा है की इस आराध्या की काट कैसे निकलू। ये तो मछली की वो कांटा बन चुकी है। जिसका इलाज जल्दी नहीं किया तो हमारी जान ले लेगी। वसुधा की बात पर कृष्ण राठौर ने कहा, मेरे पास एक तरकीब है। अगर ये काम कर गया तो। चीत भी हमारी और पट भी हमारी। उसके बाद वो अपनी तरकीब सबको सुनाता है। जैसे जैसे वो अपनी तरकीब सुनाता है। सबके चेहरे पर शातिर मुस्कान आ जाती है।
उसकी बात पर धनंजय ने कहा, इससे तो हमारे सारे काम हो जायेगे। शादी भी और प्रॉपर्टी भी। वसुधा ने कहा, आपकी तकरीबन बेहद अच्छी है तो फिर आज से हम अपने काम की शुरुआत कर लेते है। सभी ने चीयरस करते हुए अपने अपने कपो को एक साथ किया और मुस्कुराते हुए, कॉफी पीने लगे। चाहे उनके हाथ मे, जादुई चिराग आ गयी हो।
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