Love without wish Chapter-5
- 29 June, 2026
आराध्या जब देखती है कि धनंजय सामने खड़ा हो कर उसे देख रहा होता है। तो उसे देखकर कहती है कि आप यहां के सीईओ हैं या उमाशंकर। आराध्या की मुंह से यह सुनकर की वो यहाँ का क्या है, " उमाशंकर या सीईओ!! धनंजय को गुस्सा आता है और उसके करीब आकर कहता है, " तुम्हें क्या लगता है मैं क्या हो सकता हूं यहाँ का।
आराध्या मुँह बनाती हुई कहती है, "ज़ब से मिले हो बोमकेश बक्शी जैसे सवाल पूछ रहे हो!! मैं कोई भगवान तो हूं नहीं जो मुझे मालूम हो कि आप क्या हो, इंसान हो या इंसान के रूप में भुत !! तो आप अगर बता देते तो मुझे मालूम हो जाता।
क्या बता देता की मैं इंसान हूँ या भुत !! नही जी बिल्कुल नही!! मुझे यकीन है की आपके अंदर जिन्न है....!! मैं तो बस उमाशंकर जी को ढूंढ रही हूं और वह मुझे मिल नहीं रहे हैं।
उसकी बातें सुनकर धनंजय कहता है कि अगर उन्हें ढूंढ रही हो और वह तुम्हें नहीं मिल रहे हैं।तो ज़ब तुम मेरे केबिन में आई थी तो बाहर तुमने बोर्ड नहीं पढ़ा था।
आराध्या ने कहा कि मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया था।अच्छी बात है ध्यान नहीं दिया था," कहते हुए धनंजय अपनी सीट पर बैठते है, " तुम्हें क्या लगता है उमाशंकर जी इस चेयर पर बैठ सकते हैं। आराध्या मुंह बनाते हुए कहती है आप क्यों मेरे साथ केबीसी खेल रहे हैं आप सीधे बता दीजिए कि आप ही सीईओ हैं। यह लीजिए यह पेपर मुझे नीचे मिस्टर अयान चतुर्वेदी ने यह देते हुए कहा था कि आज से मैं आपकी असिस्टेंट हूं और मुझे सारी चीजों की जानकारी उमाशंकर जी से मिलेगी। लेकिन वह मुझे मिल नहीं रहे हैं तो बताइए अब मैं क्या करूं?
धनंजय उसके फाइल को देखते हुए कहता है जब तक मैं यह फाइल देख रहा हूं जाओ नीचे से मेरे लिए कॉफी लेकर आओ उसकी बात सुनकर आराध्या कहती है, " ओ हैलो!! मैं आपकी असिस्टेंट हूं, ना की आपकी नौकर हूं। जो आपके लिए जाओ कॉफी लेकर आओ!! जाओ पानी लेकर आओ। यही करुँगी। उसकी बातें सुनकर धनंजय कहता है, " क्या तुम्हें नहीं मालूम है की असिस्टेंट की जॉब क्या-क्या होती है? यह सुनकर आराध्या मासूमियत से अपना सर ना में हिलाती हुई कहती है, " यह मेरी पहली नौकरी है इतनी बड़ी कम्पनी मे,इसीलिए मुझे नहीं पता की इस जॉब में शामिल है कॉफी लाना भी और पानी पिलाना भी।
अब मालूम हो गया ना!! तो जाओ मेरे लिए कॉफी लेते आना लेकिन मैं ब्लॉक कॉफी पीता हूं? आराध्या उसकी बातें सुनकर नीचे चली जाती है कॉफी लाने के लिए । धनंजय उसके जाते के साथ मुस्कुराते हुए कहता है, " बहुत तुम पटर पटर बोलती हो अब बताता हूं तुम्हें क्या करना है और कैसे करना?
आराध्या जाते हुए मन में सोचती है पता नहीं क्यों ऐसी फीलिंग आ रही है शंभूनाथ की यह आदमी मुझसे ना बदला ले रहा है लेकिन मुझे यह नहीं समझ में आ रहा है कि कौन से जन्म का बदला ले रहा है इस जन्म में तो मैं इसे पहली बार मिली हूं पिछले जन्म में तो कहीं मेरा यह दुश्मन नहीं था यह सोचते हुए तो आगे बढ़ती चली जाती है और किसी से पूछती है कि केफेटेरिया कहां है?
दीप्ति काफी देर से अयान को घूर रही होती है और वो उसे सब कुछ समझा रहा होता है। जब उसे बर्दाश्त नहीं होता तो वह गुस्से से कहता है,'इस तरह से मुझे घूर घूर कर तुम्हें क्या मिल जाएगा!! क्या तुम्हें नौकरी नहीं करनी है?? उस की बातें सुनकर दीप्ती कहती है, "अगर मैं कहूं मुझे नहीं करनी है तो क्या करना होगा!! अयान मुस्कुराते हुए कहता है," बहुत आसान है, "5 करोड़ वापस करने होंगे और तुम नौकरी को छोड़ सकती हो ।
दीप्ति उससे चिढ कर कहती है," यह तुम मेरे से बदला ले रहे हो। तुम्हें पहले से मालूम था कि मैं यहां नौकरी कर रही हूं? अयान उसकी बातें सुनकर कहता है कि अगर मैं इस पर सफाई दूं भी तो भी तुम मानोगे नहीं,'तो यही मान लो कि मैं तुमसे बदला ले रहा हूं। लेकिन मुझे यह नहीं समझ में आ रहा मैं तुमसे किस बात का बदला ले रहा हूं। इस पर दीप्ती कहती है कि उस दिन मंदिर में जो मैंने तुम्हारे पैर तोड़े थे, उस बात का।
उसकी बातें सुनकर अयान अपने पैर को झुक कर देखता है,'कहता है मेरे पैर तो ठीक है कब टूटा? दीप्ति कुढ़ती हुई कहती है बस हो गया अब बता दो क्या करना है!! अयान उसे पेपर देता है कहता है यह सारी चीजें हमारे लैपटॉप मे फोल्डर बनाकर रख दो और फिर मुझे इसका प्रेजेंटेशन तैयार करके दो। यह सुनकर दीप्ती कहती है, "यह सारे काम मुझे अभी करना है तो अयान कहते नहीं इसके लिए तुम अगले जन्म की तैयारी कर लो?
दीप्ति उसकी बात सुनकर कहती है क्या आप कोई बात सही तरीके से नहीं कह सकते। अयान कहता है,' मैं सही तरीके से ही तो कह रहा हूं तुम्हें समझ में नहीं आया तो मैं क्या करूं!! हां!! यह सारी फ़ाइल की फोल्डर अभी बनानी हैं और इसकी सारी तैयारी करनी है। लैपटॉप तुम्हें मिल जाएगा कंपनी के तरफ से ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद जब तुम अपने घर जाओगी तो रात में भी तुम आराम से कर सकती हो। उसके पहले तुम्हें सारे फाइल को फोल्डर बनाकर अपने लैपटॉप में रखना होगा। अब जल्दी से काम करो। दीप्ती उसे देखते हुए कहती है कि मैं कहां बैठूं!!
अयान अपने ऑफिस में कॉर्नर पर टेबल कुर्सी देख कर कहता है तुम आज से यही बैठोगी। दीप्ती कहती है," क्या मैं आपके केबिन में 24 घंटे आपके नजरों के सामने रहूंगी!! अयान कहता बिल्कुल मैडम आप मेरे ही नजरों के सामने रहेगी और मेरे ही सामने सारे कामों को करेंगे अब चलिए बैठीये ? दीप्ति मन मसोस कर के वहां बैठ जाती है और अयान मुस्कुराते हुए उसे देख रहा होता है। कुछ देर बाद अयान कहता है जाओ पहले मेरे लिए कॉफी लेकर आओ फिर यह काम करना। मैं क्यों जाऊं? अयान कहता है जाना तो तुम ही पड़ेगा क्योंकि तुम्हें ही मैंने अपने असिस्टेंट के तौर पर रखा है तो तुम जाकर कॉफी लेकर आओ? दीप्ति चुपचाप कॉफी लेने नीचे चली जाती है।
ध्यान तानिया को देखता है,और कहता है। आपको किस तरह के काम आते हैं। तान्या उसकी तरफ आंखें तिरछी करके कहती है क्यों आपने मेरा प्रोफाइल नहीं पढ़ा। तो फिर कैसे मुझे जॉब पर सिलेक्ट किया? उसके जवाब सुनकर उसे घूर कर देखता है और उस से कहता है, " सुनो क्या नाम है तुम्हारा फिर उसके फाइल को देखता है और कहता है तान्या मिश्रा मुझे बिल्कुल पसंद नहीं कि कोई मुझे पलट कर जवाब दे इसीलिए अपनी आंखें और जुबान को थोड़ा कम चलाया करो और जितना कहूं उतना किया करो यह कहते हुए उसकी आंखें बहुत कठोर लग रही थी। जिसे देख तान्या एक पल के लिए सहम जाती है और वह घबराते हुए कहती है, "जी..जी..जी..सर। यह सुनकर ध्यान मुस्कुराते हुए कहता है,' गुड वेरी गुड!! अब जाओ मेरे लिए कॉफी लेकर आओ फिर मैं बताऊंगा तुम्हें क्या करना और हां तरीके से आना और तरिके से जबाब देना। तानिया सर झुका के कहती है तरीके से आऊंगी और तरीके से जवाब दूंगी। ध्यान कहता है, गुड ।
वहां कैफेटेरिया में पहले से ही आराध्या कॉफी ले रही थी और कुछ सोच रही थी। तब तक दीप्ती और तान्या को देखती है आते हुए उन दोनों को देख कर खुश होते कहती है कैसा रहा तुम दोनों का पहला दिन। दोनों मुंह बनाते हुए कहती है लगता है किसी पिंजरे में फंस गए हैं? उन दोनों की बातें सुनकर आराध्या कहती है क्या हुआ ऐसा क्यों कह रही हो?
फिर वह दोनों बताती हैं,' की कैसे क्या क्या हुआ!!उन दोनों की बातें गौर से सुनकर आराध्या कहती है," तुम दोनों का तो ठीक भी है, " लेकिन मेरा वाला जो है वो तो मुझे चाकू दिखा कर कहता है,' मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाए!!!?
आराध्या की बातें सुनकर वह दोनों मुस्कुरा कर कहती है इतना बुरा करता है फिर भी तू गाना गा रही है। अरे नही पारो!! ये तो दर्द है तुम्हारे देवदास की करुं तो क्या करूं!! कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया बिना पढ़े!! मुझे क्या पता था कि मैं किस जल्लाद के साथ काम करुँगी। तुम दोनों को भी अच्छी सलाह दे रही हूं कि चुपचाप काम करना। काम से मतलब रखना मुंह नहीं चलाना। ज्यादा बोलोग तो बहस होगी और और नही बोलोगी तो बहस नहीं होगी और बात नहीं बढ़ेगी।
वह दोनों उसकी बातें सुनकर हां कहती हैं और तीनों कॉफी लेकर अपनी अपनी अपनी अपनी जगह पर चली जाती है।
आराध्या अपनी सोच मे डूबी हुई, कॉफी लेकर धनंजय के केबिन मे जा रही होती है की अचानक किसी से टकरा जाती है। जिससे सारी गरम कॉफ़ी उसके हाथ से लेकर उसके कपड़े पेट के हिस्से तक जलाती हुई गिर जाती है। एक सिसकी के साथ उसकी आँखे बंद हो जाती है की तभी.... आह्हः मुझे जला दिया इसने..... आह्हः मैं जल गयी ये सुनकर वो अपनी आँखे खोलती है तो एक लड़की उछलती हुई चिखी जा रही है।
आराध्या उसे ऊपर से निचे तक देखती है मॉडर्न ब्लैक वन पीस पहनी हुई, मेकअप के साथ एक लड़की चीख रही होती है। उसके साथ खड़ी लड़की उसे दर्द मे देख कहती है, अवनि !!!अरे कोई डॉक्टर क़ो बुलाओ। जला दिया इसने अनिका क़ो।
फिर आराध्या क़ो देख अवनि गुस्से मे कहती है, अंधी!!ध्यान कहाँ था तुम्हारा!!आराध्या उसे कुछ कह नही पाती है। क्योंकि!!
अभी तक आराध्या समझ नही पा रही थी की जली वो थी पूरी कॉफी उस पड़ गिरी और चिल्ला ये रही है और ये है कौन? वो सोच ही रही थी की अवनि की चीख सुनकर धनंजय अपनी केबिन से बाहर निकला और कोडिडोर मे उसे इस तरह चिल्लाते देख। वो उसके पास आकर अपनी कठोर आवाज़ मे कहता है, "अवनि !! ये पागलो की तरह क्यों चिल्ला रही हो!ये ऑफिस है मेरा!! तुम्हारा घर नही।जो पागलों की तरह चीख रही हो।
धनंजय देखो तो मेरा हाथ जला दिया इसने। बताओं कशिश इस लड़की आराध्या क़ो घूरती हुई कहती है, कैसे इसने मुझ पड़ कॉफी गिरा दी।हाँ!! मिस्टर ठाकुर इसने जान बुझ कर अवनि पड़ कॉफ़ी गिरा दी।
धनंजय वहाँ खड़ी आराध्या क़ो घूरता हुआ कहता है," दिखता नही है!! देख कर नही चल सकती थी तुम। ध्यान कहाँ था तुम्हारा। सर वो मैं.... आराध्या कहने की कोशिश करती है लेकिन धनंजय उसकी बात नहीं सुनता।
इस तरह से बार-बार अवनी के रोने से धनंजय इरिटेट हो चुका था और वह इस इरिटेशन में आराध्या से कहता है देखकर तुम कुछ नहीं कर सकती देखो कितना जला दिया है।आराध्या कोई जवाब देती उससे पहले धनंजय अवनि का हाथ पकड़कर अपने केबिन में चला जाता है और बोलते हुए जाता है कि मेरे लिए दूसरी कॉफी बनाकर लेते आना।
आराध्या वहीं से चुपचाप चली जाती है। उसे भी जलन हो रही थी लेकिन वो चुपचाप जाकर कॉफी बनाने चली जाती है।
ऊपर देखती हुई कहती है, शिव शम्भु क्या बॉस मिला है मुझे।
केबिन के अंदर,धनंजय आकर बैठ जाता है। अवनि उसे कुछ कहती उससे पहले वो फोन करते हुए अपने असिस्टेंट को बुलाता है और कहता है पंकज मेरे ऑफिस मे आओ अभी । तब तक आराध्या कॉफी लेकर अंदर चली आती है और उसके साथ-साथ पंकज भी अंदर आता है। धनंजय पंकज की तरफ देख कर कहता है कि,अवनि मैडम को ले जाओ और हॉस्पिटल में जाकर इनका इलाज करवा दो।
यह सुनकर अवनि कहती है कि तुम नहीं चलोगे मेरे साथ। धनंजय उसे गंभीर नजरों से देख कर कहता है तुमने मुझे खुद का नौकर समझ रखा है। आरध्या ज़ब टेबल पर कॉफ़ी रखती है तो धनंजय की नजर उसके लाल हुए हाथों पर चली जाती है। उसका हाथ पूरी तरह से लाल हो रखा होता है लेकिन वह देख कर भी कुछ कहता नहीं ।
आराध्या भी कॉफी रखकर। फ़ाइल रेक के पास जाकर सभी फाइल को लिस्ट के साथ ठीक करती है और उनमे से जरूरी फ़ाइल निकल कर रखती है। जिसकी फोल्डर उसे बनानी होती है।
अवनि फिर से कहती है, " धनंजय मुझे तुम्हारे साथ जाना है। धनंजय कहता है कि अगर ज्यादा बकवास की तो यहीं से बाहर निकलवा दूंगा और घूरते हुए पूछता है कि तुम्हें मेरे ऑफिस में आने की इजाजत किसने दी। अवनि मुंह बनाते हुए कहती है कि इतने सालों बाद आए हो तो मुझे मन किया तुमसे मिलने का इसीलिए मैं यहां खुद चली जाए।
धनंजय कहता है दोबारा बिना अपॉइंटमेंट के तुम मेरे ऑफिस में नहीं आ सकती। अवनि का मुंह बन जाता है, धनंजय की बातें सुनकर और वह कहती है कि यह गलत बात है।एक तो तुम्हारी इस अनपढ़ एम्प्लोयी ने मेरे हाथ जला दिए। ऊपर से कॉफी मुझे लाकर नही दी। मै ये सारी बात दादा जी क़ो बता दूंगी।
धनंजय कहता है शौक से लेकिन घर पर जाकर। दोबारा यहां नहीं आना । पकज इनको ले जाओ। पंकज झुक कर कहता है मैम मैं मेरे साथ चलिए।धनंजय अपने लेपटॉप पर काम करने मे व्यस्त हो जाता है। जिसे देख कर अवनी अपने पैरों क़ो पटकती हुई बाहर चली जाती है। उसके जाते ही धनंजय अपना लैपटॉप बंद करता है और आरध्या के पास चला आता है।
उसके हाथ को पकड़ लेता है। इस तरह धनंजय क़ो हाथ पकड़ते देख आरध्या उसे घूरती हुई कहती है ये क्या है?
धनंजय बिना कोई जबाब दिए उसे अपने केबिन मे बने उसे अपने सीक्रेट कमरे में ले कर चला जाता है।आराध्या दीवाल क़ो खुलते देख और उसमें कमरा देख कर कहती है," मिस्टर डायनासोर आप मुझे इधर कहां लाया है …!!देखिये मै कोई सलीम के मोहब्बत मे दीवानी अनारकली नही हूँ जो आप मुझे जिन्दा दिवार मे चुनवाने लाये है।
धनंजय उसकी बेतुकी बातें सुनकर कहता है और मै कोई ज़िल्लेइलाही नही हूँ मिस पिलर!!
उसकी बातें सुनकर आरध्या मन मे कहती है। ये तो बहुत हाजिर जबाबी कर रहे है। अच्छा तो हमारा हाथ छोड़िये।
पहले थोड़ी देर मुंह बंद रखो और एक जगह खड़ी रहो।
फिर वह फर्स्ट एड बॉक्स निकालता है और उसके हाथ को और पूरे बॉडी को स्कैन करता है। आराध्या उसे इस तरह से घुरता देख कहती है कभी लड़की नहीं देखी।
धनंजय मुंह बना कर कहता है, लड़की देखी है लेकिन पिलर नही देखी और तुम क़ो किसने कहा की तुम लड़की हो।और आपसे कितने कहा की मै लड़की नही हूँ तो आप मुझे घूर क्यों रहे है।
धनंजय उसे आखों से इशारे करते हुए दिखता है की देखो टीशर्ट के ऊपर यह दाग है इसका मतलब है कि तुम्हारा अंदर हिस्सा भी जल गया। इसे सुनकर आराध्या कहती है तो क्या हुआ ?? क्या मै आपकी उस मोरनी की तरह रो रही हूँ।
धनंजय बॉक्स से टेप निकाल उसका मुंह बंद कर देता है। फिर कहता है चुपचाप बैठी रहो फिर उसे बिस्तर पर बिठा देता है । किसी को फोन करके कहता है मुझे लड़कियों के कुछ कपड़े चाहिए।
आराध्या का मुंह बंद रहता है इसलिए वह बार-बार उसे घूरती है धनंजय दूध एक हाथ किसके बाजू को पकड़े रहता है और उसे बिस्तर पर लिटा देता है अब आराध्या की आंखें बड़ी हो जाती हैं। धनंजय कहता है घुरो मत!! तुम्हारे साथ कुछ कर नहीं रहा हूं।
बहुत ज्यादा जल गया है इसीलिए उस पर क्रीम लगा रहा हूं।आराध्या नजरों से कहती है खबरदार मेरा कपड़ा उठाया तो इसे देख धनंजय कहता है, " सुनो ज़ब तुम लडकियाँ साड़ी पहनती हो शॉर्ट टॉप पहनती हो तो तब भी तुम्हारा पेट का हिस्सा दीखते रहता है तब तो तुम लोग को शर्म नहीं आती और भी मैं उसमें क्रीम लगा रहा हूँ तो तुम्हें शर्म आ रही है चुपचाप लेटी रहो।
आरध्या अपने मन में कहती है, "हे शंभूनाथ!! कैसे पागल आदमी से मुलाकात करवा दिया है यह कभी कोई चीज सीधी क्यों नहीं समझता है? धनंजय उसके जलन वाले हिस्से को देखता है और कहता है," इतना जला हुआ लेकिन तुम्हें जलन नही हुई। सच मे तुम्हारे दिमाग़ का स्क्रू ढीला है। वो तो अच्छा था की लाल निशान रह गए। फरवरी का महीना था शायद इसलिये ये कहते हुए उसके हाथों पर क्रीम लगा देता है और कहता है देखो हो गया ना। मैंने कुछ किया।
धनंजय धीरे से बहुत ध्यान से उसके हाथों में पूरी तरह से क्रीम लगाने के बाद धीरे से उसकी कुर्ती को ऊपर करने लगता है जिससे आराध्या हाथ रोकती है। धनंजय कहता है घबराओ मत मैं किसी भी मर्यादा को क्रॉस नहीं करूंगा। अगर तुम असहज हो तो खुद लगा लो। ये कहते हुए उसे क्रीम दे देता है और उसके मुँह से टेप निकाल देता है।
जैसे ही उसके मुँह से टेप हटाता है वैसे ही आराध्या कहती है, क्या पहले दिन मेरा राम नाम सत्य करना है सर!!अरे मैंने क्या किया!!वो सर पर हाथ मारती हुई कहती है, कुछ नही किया भोले नाथ!!आप जाईये मै क्रीम लगा लुंगी।
हम्म्म्म!!! ठीक है!!तुम्हारे लिए कपड़े मगवां दिए है वो पहन लेना!!!इतनी मेहरबानी किस लिए। कोई मेहरबानी नही है!!बस ये कपड़े तुम्हारे मेरी गेस्ट की वजह से खराब हुए है।
तो......!!
अब कोई शब्द नही ये कहते हुए आरध्या क़ो हैरान छोड़ धनंजय बाहर चला जाता है।
धनंजय कमरे से बाहर आते ही कुर्सी पर बैठते हुए,खुद ही मन में सोचता है कि पता नहीं इस लड़की को देखकर मुझे क्या हो जाता है ; कितना बोलती है और पता नहीं क्यों मैं इसके आगे पीछे घूमते रहता हूं और इसके साथ ही बोलते रहता हूँ!! कही
इसे मजा चिखाने के चक्कर मे मुझसे कोई गलती तो नही हो गयी। जरा देखूँ ये मिस पिलर अब कौन सा कारनामा कर रही है अंदर। ये सोचते हुए वो अपना लैपटॉप खोलता है।
आराध्या रूम के अंदर बैठी हुई क्रीम लगा रही होती है और अपने मन में बढ़ बढ़ाते हुए कहती है, " शंभू नाथ!! कैसे हिटलर बददिमाग़ इंसान से मुलाकात करवा दिया है आपने!! हर बात पर तू तू मैं मैं तू तू मैं मैं !! और हर बात पर धमकी देते रहता है प्रभु !!! बचा लो प्रभु !! आज तो हद हो गयी कहता है, तुम लडकियाँ साड़ी पहनती हो या छोटे टॉप पहनती हो तब भी तो पेट दिखता है। अब बताओं प्रभु पेट दिखना और किसी गैर का पेट छूना दोनों मे फर्क है ना!! कौन समझाये उस डायनाशोर क़ो !! उसको कुछ समझ में ही नहीं आता क्या करता है नहीं करता है!! ऐसे इंसान बनाया क्यों यह तो मानव नही आदिमानव है!! ऊपर चेहरा करके मुँह बनाती हुई धनंजय क़ो जी भर के कोसी जा रही होती है।
धनंजय उसे वेबकेम मे देखता हुआ अपनी आईबरों ऊपर कर के कहता है, हिटलर, बददिमाग़, आदिमानव, डायनाशोर......!!! ये खुद क़ो इतने अच्छे नाम से क्यों नवाज रहा है, "कहते हुए प्रथम उसके सामने आता है। उसे देख कर धनंजय अपने चेहरे क़ो फिर पहले कि तरह कठोर करता हुआ कहता है,"तुम यहाँ क्या क्या कर रहे हो!!कुछ नही गुलशन बहार बस तुमसे मिलने आया हूँ और ये बताने आया हूँ कि जिस डैम प्रोजेक्ट का तुम इंतजार कर रहे थे वो आने वाला है। तो तैयारी शुरू कर दो। हम्म्म्म ठीक है। अब तुम जाओ। अरे रुको यार !! तुम पहले ये बताओं कि जब मैं अंदर आया था तो तुम मुस्कुरा रहे थे। क्योंकि मैंने तुम्हें मुस्कुराते हुए कभी नही देखा था। इसलिये पूछ रहा हूँ।
धनंजय उसे कहता है, लगता तुझे कुछ दिनों के लिए अगर श्रीलंका भेज दूँ तो कैसा रहेगा। हमारे आदिवासी प्रोजेक्ट के लिए तुम बेहतर है। अरे माफ कर दे बाप गलती हो गयी!!!मैं चलता हूँ अयान से मिलने जाना है। कहते हुए तेजी से निकल जाता है।
आराध्या खुद से बोलते हुए कुछ देर बाद कमरे से बाहर आती है। उसे अब तक बोलता देख,धनंजय काम करते हुए मन मे कहता है, ये चुप कब होती होगी। पता नही सोते वक़्त भी कही बोलती ही रहती होगी।
धनंजय क़ो खुद से बात करता देख, आरध्या उसके पास आकर उसे घूरती हुई कहती है,"आप खुद मे बात कर रहे है। " ये सुनकर काम कर रहा धनंजय उसकी तरफ देखते हुए पूछता है, " कैसा है तुम्हारी चोट,अब दर्द या जलन तो नही हो रहा।
। आराध्या अपना सर ना मे हिलाकर जवाब देती है, "नही सर अब ठीक हूँ और ये कपड़े भी मुझे ठीक आये।
उसकी बात सुनकर कर धनंजय का ध्यान आराध्या के कपड़ो पर जाता है, गुलाबी रंग कि कुर्ती मे उसका गौरा रंग और खिल रहा था। धनंजय मन मे कहता है,"कुछ तो बात है इसमें जो मेरा ध्यान इसकी तरफ खुद ही खिंचा चला आता है।
जी सर!! इस आवाज़ के साथ धनंजय उसे कहता है यह फाइल ले जाओ और सारी छोटी से छोटी जानकारी क़ो चेक करके ठीक कर लेना। फिर इसकी एक प्रजेंटेशन तैयार करना है। कल मल्होत्रा और जावेरी कंपनी के साथ इस प्रोजेक्ट पर हमारी मीटिंग है और इस प्रेजेंटेशन के आधार पर ही हमारी डील फाइनल होगी।
आराध्या, धनंजय की बातों को ध्यान से सुन कर उसे नोट डाउन कर रही थी। छोटी सर छोटी पॉइंट नोट करने के बाद, धनंजय उसे कहता है,"ये रहा तुम्हारा लैपटॉप। इस मे ही तुम अपने सारे फोल्डर और प्रजेंटेशन बना कर मुझे रात तक मेल कर दोगी। मैं उसे चेक कर लूँगा। फिर कल इस पर एक बार फइनल काम कर लेगे।समझ गयी। यस सर। मैं कर लुंगी। ओके गुड।
तुम तीनों का अकॉमडेशन अलॉट हो गया है। तो ऑफिस का ड्राइवर कुछ दिनों तक तुम तीनों क़ो पिक और ड्राप दोनों कर देगा। जबाब तक तुम्हें इस जगह कि अच्छी से जानकारी नही हो जाती। उसके बाद तुम लोग खुद देख लेना।
यह सुनकर आराध्या मुस्कुराते हुए कहती है आपका बहुत-बहुत शुक्रिया सर !! शुक्रिया नहीं काम करके दिखाओ जिसकी वजह से तुम्हें सैलरी मिलेगी। आराध्या मुँह बनाते हुए कहती है जी सर। धीरे से खुद मे कहती है, जंगली मेढक। हुँह।
ध्यान तानिया को सारा नोट डाउन करवा रहा होता है। तानिया डरती हुई सब कुछ नोट डाउन कर रही होती है। तभी ध्यान उसे गौर से देखते हुए कहता है कि, "एसी चलने के बावजूद भी तुम्हें इतना पसीना क्यों आ रहा है। यह सुनकर तानिया कहती है नहीं सर ऐसा कुछ नहीं है,"उसकी आवाज में घबराहट और हकलापन देख …।ध्यान उसे गौर से देख रहा होता है और उसकी तरफ एक गिलास पानी बढ़ाते हुए कहता है,' यह लो पानी पी लो?
वह कांपती हुई हाथों से गिलास को पकड़ती है। जिसे देख ध्यान उसके हाथ को पकड़ता है और पानी भरा गिलास उसके मुँह से लगा देता है। तानिया उस गिलास को अपने मुंह में लगाती है और एक सांस में पूरा पानी की जाती है। जिसे देख ध्यान कहता है," तुम्हें मुझ से डर लग रहा है।
तानिया सर हिलाते हुए कहती है। नहीं डर नहीं लग रहा है लेकिन आते के साथ आपने जिस तरह से बातें की उससे उम्मीद करती हूं कि मेरे से कोई गलती ना हो। ताकि आप से मुझे डांट खानी नहीं पड़े । यह सुनकर ध्यान मुस्कुराते हुए कहते अच्छा डांट खाना पसंद नहीं है इसलिए इतना कांप रही हो तुम।
मैं कांप नहीं रही हूं बस मुझे ज्यादा प्रेशर है कि काम मे, मेरे से कोई गलती ना।
यह सुनकर ध्यान उसके कंधे पर हाथ रखता है। उसके ऐसे करते देख तानिया थोड़ी असहज हो जाती है। जिसे समझ कर वो हाथ हटाते हुए कहता है, " मैंने इसलिए नहीं डांटा था कि तुम इतनी घबरा जाओ मुझसे!! मैंने इसलिए डांटा था क्योंकि बाहर में जब सभी बातें कर रहे थे और तुम चुपचाप सुन रही थी। खुद को अगर दूसरे के आगे इतना कमजोर रखोगी तो यह कहीं से भी अकलमंद ही नहीं होती है। जब भी आपको कोई कुछ कहे तो उसका जवाब देना जरूरी पड़ता है आज अगर किसी ने तुम्हें दो बातें, बिना तुम्हारी गलती के सुना दी और उसका तुमने जवाब सही तरीके से नहीं दिया। तो अगली बार वह तुम्हें चार बातें सुना जाएगा। यह मौका क्यों दोगी तुम दूसरे को?
तानिया उसकी बातों को ध्यान से सुनती है और खुश हो जाती है और अपनी कुर्सी से उठ कर सीधे उसके गले लगती हुई कहती है, " यानी आप मुझे डरा नही रहे थे समझा रहे थे। मैं आगे से ख्याल रखूंगी, सर!! ये कहती हुई वो पूरी तरह से ध्यान से लिपटी हुई थी। उसे बिल्कुल होश नही था कि अभी जिसके कंधे पर हाथ रखने से वो असहज हो रही थी। अभी वो उससे लिपट कर शुक्रिया कहती जा रही है।
ध्यान मुस्कुराते हुए अपने बाजु से उसको बाहों मे भरते हुए धीरे से कहता है, "मुझे मालूम नही था कि तुम इस बात पर इतनी ख़ुश होकर मेरी बाहों मे आ जाओगी।ये सुनकर तानिया क़ो होश आता है और वो उसकी बाहों से छूटने लगती है लेकिन ध्यान उसे अपनी बाहों से नही छोड़ता।
अरे लगता है मैं गलत वक़्त पर आ गया, ये आवाज़ सुनते ही ध्यान खुद क़ो तानिया से अलग होते हुए कहता है, प्रथम भाई आप!! क्यों मैं नही आ सकता.। हाँ क्यों नही आईये।
फिर तानिया क़ो देख कर कहता है मिस मिश्रा आप ये फ़ाइल ले कर जाईये। ओके सर।
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