Love without wish Chapter-1
- 29 June, 2026
एक आलिशान बिल्डिंग जहाँ एक बड़ा आलिशान कमरा,जिसमे एक हैंडसम इंसान बैठा हुआ सिगार पी रहा होता है। तभी एक तेजी आदमी आता है और कहता है, " ब्रो घर से दादू का फोन आया है "।
जिसे सुन कर सिगार पी रहा इंसान कहता है, इसमें कौन सी बड़ी बात है वो तो हमेशा आता है। ब्रो तुम नहीं समझ रहे हो इस बार वो बहुत गुस्से मे है।
अच्छा भूमिका बांधना बंद करो और बताओं क्या बात है। वो कहता है दादा जी का फोन आया था उन्होंने कहा है की इस बार महाशिवरात्रि की पूजा वो तुमसे करवाना चाहता हूँ और तुम्हें किसी भी हालात मे इस बार भोपाल आना ही पड़ेगा।
मैं फोन करता हूँ। ब्रो तुम कर लो फोन लेकिन इस डर दादू तुम्हारी एक नहीं सुनने वाले है।
लेकिन तुम तो जानते हो अहान मैं नहीं जाना चाहता भोपाल, वो भी शिवरात्रि के दिन तुम्हें याद है ना हुआ क्या था उस दिन। हाँ मुझे याद है,"धनंजय "बहुत अच्छी तरह से याद है लेकिन भाई कब तक तू भागेगा। उस दिन के ज़ख्म हम सभी के जहन मे है लेकिन हम अपने अतीत से एक ना एक दिन निकलना होता है मेरे भाई!!तू समझ रहा है ना कहते हुए अहान उसके कंधे पर हाथ रखता है।
धनंजय उसकी बात सुन कर कहता है, तू जा अहान मैं खुद दादू से बात कर लेता हूँ। अहान अपने सर को ना मे हिलाते हुए, चला जाता है।
धनंजय खुद से कहता है, आप क्यों नहीं समझते है दादू मैं उस दर्द मे खुद को फिर से नहीं जीना चाहता हूँ। फिर एक आह भरते हुए फोन करने लगाता है,"हैलो दादू।
उधर से, उसके दादू कहते है,"अगर तूने फिर से मुझे ये कहने के लिए फोन किया है की तू नहीं आ सकता तो कान खोल कर सुन ले इस बार अगर तू घर नहीं आया तो मेरा मरा हुआ मुँह देखना।"
दादू, जोर से बोलता हुआ धनंजय कहता है... "दादू "ऐसी बात आप करके मुझे ब्लैक मेल कर रहे है।
नहीं, धनंजय मैं तुम्हें ब्लैक मेल नहीं कर रहा हूँ। तुम्हें आना है तो आना है बस! कब तक भागेगा बच्चे, हमें समझते है तेरे दर्द को लेकिन बच्चा, हर दर्द से भागा नहीं जाता। अब आठ साल हो गया बच्चा। लौट आ ना जाने कब ये बूढ़ी आँखे बंद हो जाये, कहते हुए वो रोने लगते है।
बस कीजिये दादू, आपको इस तरह से मैं दुखी नहीं देख सकता हूँ..... मैं आ रहा हूँ। आप अपना ध्यान रखियेगा। मैं आ रहा हूँ। जिसे सुनकर उसके दादू कहते है,"महादेव मेरे बच्चे को हमेशा खुश रखे। मैं तेरा इंतजार करुँगा।
धनंजय फोन रखने के बाद अहान को फोन करता है और कहता है जैट रेडी कर हम भोपाल जा रहे है। क्या कहा तूने सच मे। धनंजय उसकी एक्साटमेंट देख कर, चिढ़ते हुए कहता है, बंदर की तरह उछलना बंद कर समझा।
अहान उसकी बात सुनकर खुद से बुद बूदाते हुए कहता है,"कभी हँस ले तो भूकंप आ जायेगा "। उधर से कहता है, अगर बोलना हो गया हो तो जाओ तैयारी करो।
फिर एक गहरी सांस लेते हुए धनंजय खिड़की के पास खड़ा हो जाता है......कैसे भूल जाऊ , आठ साल पहले जो हुआ उसे। वो भी शिवरात्रि के दिन जिस दिन मैंने अपनी जिंदगी के बहुत कीमती चीज हमेशा हमेशा के लिए खो दी थी सिर्फ और सिर्फ अपनी बेबकूफी की वजह से.... सोचते हुए उसकी मुट्ठीयाँ कस जाती है और वो जोर से एक पंच वहाँ के दीवाल पर मारता हुआ कहता नहीं.... नहीं भूल सकता मैं दादू कुछ नहीं भूल सकता है।
कुछ देर बाद अहान आता है और कहता है, जैट तैयार है। धनंजय कहता है,'ओके मैं तैयार होता हूँ।
उज्जैन
अरे हटो हटो जल्दी जल्दी.... ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय.... अरे हट जाओ काकी आज फिर देर हो गयी। कहती हुई वो सीधे महादेव के मंदिर के अंदर आती है..... पंडित जी ये मेरी पूजा की थाली कहती हुई.... महादेव की प्रार्थना गाती है।
पंडित जी उसके माथे पर हाथ रखते हुए कहते है, महादेव तुम्हारे जीवन मे खुशियाँ भर दे आराध्या बेटी... बहुत जल्द तुम्हारी मुलकात उससे होगी जिसे खुद महादेव ने चुना है।
आराध्या मुस्कुराते हुए कहती है, पंडित जी पहले तो आज मुझे महादेव मुझे मेरी चाची से बचा ले फिर जिसे भेजेंगे उसे देख लुंगी। हर हर महादेव पंडित जी। जीती रहो बिटिया।
आरध्या भागती हुई अपने घर पहुँचती है...। तभी उसकी चाची दरवाजे पर खड़ी हुई कहती है, "आ गयी महादेव की पूजा करके "जिसे सुन कर आरध्या कहती है,"देखो चाची ज्यादा नहीं सुनुँगी महादेव के बारे मे। आ गयी हूँ और सब काम करके गयी थी तो फिर से ललिता पवार के रूप मे मत आओ, कहती हुई अपने पैरों को धोती है।
ये लो प्रसाद खाओ....। सुन रहे है दीप्ती के पापा, फिर से आपकी लाड़ली ने मुझे ललिता पवार कहा। मैं कह रही हूँ इस लड़की के लक्षण एक भी लड़कियों की तरह नहीं है, ससुराल जाएगी तो हमारी नाक कटा कर ही मानेगी।
फिर ऊपर देखते हुए उसकी चाची कहती है,"आप दोनों देख रहे है ना!! भाई साहब!!! जीजी.... ये एक भी बात मेरी नहीं सुनती, फिर नहीं कहियेगा की मैंने अपना फर्ज नहीं निभाया।
आरध्या अपने चाचा और छोटी बहन के साथ खड़ी होकर ऊपर की और देखती है, जहाँ उसकी चाची देख रही होती है," फिर अपने चाचा को देखती हुई कहती है...... मुझे तो समझ नहीं आता की आलोक नाथ को नीरूपा राय की जगह ललिता पवार कैसे मिल गयी। उसकी बात सुन कर, उसके चाचा घूरते हुए कहते है, अपनी चाची को ललिता पवार बना कर चैन नहीं आया जो मुझे आलोक नाथ बना रही है।
आराध्या उनकी बात सुन कर कहती है.... चल दीपि.... शिव शंभू... शिव शंभू।
उसके चाचा अपना सर ना मे हिलाते हुए फिर से अखवार पढ़ने लगते है और अपनी पत्नी से कहते है, "दीप्ती की माँ अगर भैया - भाभी से वार्तालाप हो गया हो तो चाय दे दो।
अपने पति की बात सुन कर घूरती हुई कहती है, मेरी तो कोई इज्जत ही नहीं है घर मे। हुँह।
भोपाल शहर का ठाकुर परिवार , जितना बड़ा नाम उतना ही बड़ा ओहदा। ठाकुर परिवार भोपाल शहर का सबसे प्रतिष्ठित परिवार मे माना जाता है।
इस घर का सबसे बड़ा पोता आज लंदन से आठ साल बाद भारत लौट रहा है।
गोपीकांत ठाकुर जिनका बड़ा पोताधनंजय ठाकुर जैसा नाम वैसी ही इनकी शख्सियत ....जो एक बहुत बड़े बिज़नेस मेन है।इनकी खानदानी बिज़नेस thakur & sons pvt limited company के साथ साथ, इनकी अपनी भी कम्पनी है, जिसे इन्होंने आठ साल पहले शुरू किया था और आज वो कम्पनी यूरोप की टॉप कंपनी मे गिनी जाती है,"वसुंधरा इंटरप्राइजेज"।
ये बेहद कम बोलने वाले,गुस्सैल,बेदर्द, बेरहम, भावहीन, खतरनाक, और बेहद महत्वकांछी व्यक्ति है।जिसे किसी से प्यार नहीं है, जो किसी पर रहम नहीं दिखाता। जिसे दुनिया मे किसी से मतलब नहीं है, सिवाय अपने परिवार और अपने करीबी लोगों के आलवा,इनको दुनिया मे सिर्फ अपने काम से लेना देना है। इनकी जिंदगी घड़ी के हिसाब से चलती है, ना एक मिनट कम ना एक मिनट ज्यादा, इन्हें हर चीज वक़्त पर ही करनी होती है। बहुत अनुशासन पसंद इंसान है।शिव के भक्त, लेकिन अभी महादेव से इनकी नाराजगी चल रही है।
ये अपने दादा के वजह से आठ साल बाद अपने घर भोपाल वापस लौट रहे है।
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सुबह के चार बजे के करीब जैट भोपाल एयरपोर्ट पर उतरती है।जैट के आगे काले रंग के सूट मे 15-20 कमांडो खड़े हो जाते है। तब जैट से,28 साल,6"4" इंच का लम्बा, गेहूँवा रंग, बड़ी भूरी आँखे, भूरे बाल.... बेहद आकर्षक गठिला बंद, चौड़ा सीना..... देखने मे इतना हैंडसम की, किसी की नजर उसी पर आकर ठहर जाये। ग्रे रंग के थ्री पीस सूट पहने हुए, धनंजय अपने कोट के बटन को खोलते हुए बाहर निकलता है।निकलते ही वो अपनी आखों मे चश्मा लगाते हुए, भोपाल शहर को देखता हुआ मन मे कहता है..... लौट आया हूँ मैं लेकिन आठ साल पहले वाला धनंजय बन कर नहीं। धनंजय ठाकुर बन कर लौटा हूँ.।
ठीक उसके पीछे से एक और लड़का उसी की उम्र का बाहर निकलता है।ब्लू रंग के थ्री पीस सूट आखों मे चश्मा लगाए हुए।
अयान चतुर्वेदी, उम्र 28 वर्ष,6"1", रंग -सांवला, आँखे गहरी और काली। गठिला और सुडोल बदन। धनंजय की तरह ज्यादा आकर्षक तो नहीं लेकिन उससे कम भी नहीं। ये इनके बचपन के दोस्त इनकी शख्सियत बिल्कुल इनके दोस्त की तरह पूरी तो नहीं लेकिन कुछ हद तक जरूर है। ये हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं करते, गंभीर, शांत, और शातिर है। इनकी नजरों से कुछ भी नहीं छिप सकता।
दोनों एक दूसरे की कमजोरी और ताकत को एक दूसरे से जुड़ कर पूरा करते है.। जिसके कारण इनके आगे अच्छे अच्छे खिलाड़ी हार मान जाते है।
दोनों एक साथ गाड़ी की तरफ बढ़ रहे होते और उन्दोनो को पूरी तरह से उनके बॉडीगार्ड कवर किये हुए होते है।दोनों कुछ देर बाद ठाकुर विला मे पहुंचते है।
ठाकुर विला, पुराने समय के तरीके से बनी हुई सफेद रंग बहुत ख़ूबसूरत विला है। काले रंग के नकाशी की हुई बड़ा सा लोहे का दरवाजा, जहाँ से गाड़ीयाँ ठाकुर विला मे प्रवेश करती है। ज़ब गड़िया अंदर आती है तो बहुत बड़ा फाउंट से होकर अंदर की ओर प्रवेश करती है। जहाँ घर तक पहुंचने से पहले, दोनों तरफ खूबसूरत फूलों और पौधों को इस तरह से लगाया गया है की कोई भी उस प्रकितिक छटा को देखने के लिए रुक जाय।
तब जाकर ठाकुर विला पास गाड़ी पहुँचती है।
गाड़ीयों के रुकते ही, दरवाजे पर गोपीकांत जी, उनकी पत्नी खड़ी होती है। रानी जरा आरती की थाली ला, सालों बाद इस घर का चिराग वापस आया है, कहती हुई सामने अपनी नम आखों से धनंजय को देखती है। धनंजय ओर अहान दोनों दरवाजे पर खड़े होते है। दोनों की आरती दादी माँ उतार कर, थाली रानी को दे देती है।
दोनों झुक कर अपने दादा ओर दादी के पैरों को छूते है।खुश रहो बच्चों, जुग जुग जियो मेरे लाल कहती हुई दादी, धनंजय को गले लगा लेती है ओर रोती हुई कहती है, "तुझे अपनी बूढ़ी दादी की याद एक पल नहीं आयी। कितना सताया तूने मुझे।
जिस पर गोपीकांत जी कहते है भाग्यवान क्या बच्चों से सारी बातें यही कर लोगी अंदर नहीं आने को कहोगी। कितने लम्बे सफर से आये है दोनों। थक गए होंगे। अब आ गए है तो सारे गीले सिकवे बाद मे कर लेना।
तब जा कर दोनों से कहते है, अंदर आओ बच्चों। धनंजय जैसे ही अपने कदमो को अंदर रखने की कोशिश करता है उसके पैर काँपने लगते है, वो पूरी तरह पसीने से भींग जाता है। जिसे देख कर सभी के चेहरे पर चिंता की लकीरें आ जाती है।
उज्जैन
चौधरी सदन......
एक घर ना छोटा ना बड़ा, सुबह सुबह घर मे, बहुत प्यारी आवाज़ से की भगवान शिव की स्तुति गायी जा रही होती है।
ये है हमारी आराध्या चौधरी, शिव भक्त, उम्र -25साल,5"7" दूधिया रंगत, काली मिर्गनैनी सी बड़ी बड़ी आँखे, काले ओर लम्बे बाल.... आवाज़ इतनी मीठी की कोई उसकी आवाज़ एक बार सुन ले तो कभी ना भूले। इनका स्वाभाव बिल्कुल बच्चों की तरह है। जल्दी किसी की बातों को दिल से नहीं लगाती है। हर उल्टी बातों का सीधा मतलब निकाल लेती है। जवाब दिए बिना चुप नहीं रहती लेकिन जवाब भी इनका बहुत मीठा ही रहता है।बोलती इतनी है की सभी कहते है, ऑल इंडिया रेडिओ है जो हमेशा बजती रहती है।
कोई कितना भी इनसे नाराज रहे लेकिन ज़ब ये सामने होती है तो कोई भी इनसे अपनी नाराजगी नहीं दिखा सकता है। गुस्सा इन्हें जल्दी आता नहीं लेकिन आता है तो किसी को भी जलाने की ताकत रखती है। इनको सिवाय पूजा के आलावा ओर कोई भी काम समय पर ना करने की आदत है। कोई भी काम बिना तौर फोड़ किये इनसे हो नहीं सकता ओर अगर किसी दिन ऐसा अजूबा हो जाये तो शिव जी को पेरा का भोग चढ़ा आती है।
कहानी को आगे बढ़ाने से पहले हम कहानी के कुछ मुख्य किरेदारों के बारे में जान लेते है।
धनंजय ठाकुर -28 साल,6"4" इंच का लम्बा, गेहूँवा रंग, बड़ी भूरी आँखे, भूरे बाल.... बेहद आकर्षक गठिला बंद, चौड़ा सीना..... देखने मे इतना हैंडसम की, किसी की नजर उसी पर आकर ठहर जाये। ठाकुर इपायर के वारिस। लेकिन इनकी अपनी भी एक अलग पहचान है, वसुंधरा इपायर जो इन्होंने अपने बल बुते पर खड़ा किया है।
तो चलिए मिलते है, ठाकुर परिवार से,
1. गोपीकांत ठाकुर -(77 वर्ष, बड़ी बड़ी मुछे,), इनकी पत्नी सुमति ठाकुर (73 वर्ष, एक कुशल और सज्जन महिला )
दोनों पति पत्नी का उम्र के बाद भी रुबाब इनका अब भी बरकरार है।भोपाल शहर में ये बहुत इज्जतदार और सम्मानित व्यक्ति है। कोई भी इनकी आज्ञा की अवहेलना नहीं करता है। इस उम्र में भी बिल्कुल चुस्त -दुरुस्त है।दोनों पति -पत्नी एक दूसरे के बिल्कुल पूरक है।
2. महेंद्र ठाकुर (55वर्ष,)और इनकी पत्नी वसुंधरा ठाकुर (53वर्ष ).. धनंजय ठाकुर के माता -पिता। जिनके बारे मे हम आगे बात करेंगे।
3. धनवी ठाकुर (20 वर्ष )प्यारी मासूम और अपने भाई की लाड़ली। धनंजय ठाकुर की छोटी बहन।
4. ध्यान ठाकुर (24 वर्ष, बहुत गुस्से, खूबसूरत और अपने भाई की कार्बन कॉपी। धनंजय ठाकुर का छोटा भाई।
5. अयान चतुर्वेदी (28, वर्ष )धनंजय ठाकुर का सबसे अच्छा और एकलौता दोस्त।
6. आयानी चतुर्वेदी (22वर्ष )अयान चतुर्वेदी की बहन।धनवी से बड़ी है लेकिन दोनों पुरे ठाकुर परिवार को हिलाये रहती है। दोनों के होते हुए ही ठाकुर परिवार मे रौनक लगी रहती है। इनदोनो को दुनिया मे किसी का डर नहीं है सिवाय ध्यान ठाकुर के वो भी तब तक ज़ब तक धनंजय इनके पास नहीं रहे। ज़ब इनका बड़ा भाई होता है तो ये दोनों फिर किसी से नहीं डरती है।
इनदोनो के माता -पिता नहीं है और बचपन से दोनों भाई बहन ठाकुर परिवार के साथ ही रहते है।
अयान हमेशा से धनंजय के साथ रहता है दोनों की दोस्ती की अलग ही कहानी है। ध्यान दोनों के लिए उनका पसंददीदा खिलौना है जिसके साथ वो दोनों ख़ुश होते है। वक़्त के साथ इन दोनों की दोस्ती गहरी होती चली गयी और अयान धनंजय के हर सुख दुख का साथी बन गया।
7) प्रथम राज (27 वर्ष,5"11")रंग गेहूँवा, कद काठी सुडोल। ठाकुर परिवार के ड्राइवर का बेटा। लेकिन धनंजय का सबसे अच्छा दोस्त ठाकुर परिवार का चौथा बेटा। जो पिछले आठ साल से धनंजय और अयान का इंतजार भोपाल मे कर रहा है।
तो ये था धनंजय ठाकुर का ना बड़ा ना छोटा परिवार।
अब मिलते है उज्जैन के चौधरी परिवार से........।
आराध्या चौधरी (25 साल उम्र,5"7" दूधिया रंगत )स्वाभाव से बिल्कुल हँसमुख और चंचल।इन्होंने मेनेजमेंट की पढ़ाई की हुई है और अपनी यूनिवर्सिटी की टॉपर है। अभी अच्छी नौकरी की तलाश मे है।
इनके बारे और जानेगें आगे की कहानी मे।
उज्जैन मे इनका एक छोटा मगर प्यारा सा घर है। जो इनकी दादा द्वारा बनाई गयी हुई है।
1) सूरज चौधरी और अनीता चौधरी । आराध्या के माता पिता है। ये अपने माता -पिता की एकलौती संतान है। एक अचानक हुए हादसा मे इनके माता -पिता की मौत हो गयी। इनके बारे मे हम आगे जानेगे।
2) आरध्या के चाचा -चाची
दीपक चौधरी और दीपा चौधरी।
आरध्या के चाचा पोस्टऑफिस मे काम करते है। इनका स्वभाव बहुत शांत है और अपने भाई -भाभी की आख़री निशानी आराध्या से बहुत प्यार करते है। आरध्या की चाची जुबान की बहुत तेज है लेकिन दिल की बुरी नहीं वो भी आराध्या से बहुत प्यार करती है। उन्हें अपनी मरती हुई जेठानी जिसे वो अपनी सगी बहन से भी ज्यादा प्यार करती है, उनको वचन दिया था की वो आराध्या का ख्याल अपनी बेटी से भी ज्यादा करेगी। बस इस कारण वो आराध्या को लेकर कुछ ज्यादा ही पोसेसिव हो गयी और अपनी रूढ़िवादी विचारों के कारण वो ये सोचती है की लड़कियों को ज्यादा शासन मे रखने से, लड़कियों मे अच्छे संस्कार आते है और वो शादी के बाद अपना वैवाहिक जीवन सुखी और समझदारी से निभाती है।
दूसरे शब्दों मे कहे की उनका ज्यादा प्यार आरध्या के लिए हानिकारक हो गया। उनका हमेशा रोक टोक करना। आरध्या के लिए वो ललिता पवार हो गयी और उनके चाचा अमोल पलेकर।
3) दीप्ती चौधरी (23 वर्ष,5"6") रंग गौरा। शांत, मधुर और सौम्यता की मूरत जो अपनी तूफान बहन द्वारा मचाई गयी तबाही को समेटती है। इनकी भी पढ़ाई पूरी हो गयी है और ये भी बहन के साथ नौकरी ढूढ़ रही है।
ये है आराध्या की छोटी बहन। इनके चाचा की एकलौती बेटी।
4) संकल्प सिंह (27वर्ष,6"1")गौरा रंग और आराध्या के दोस्त। ये उज्जैन के सिंह परिवार के एकलौते बेटे है। सिंह परिवार बहुत प्रतिष्टिठीत परिवार है। इनका बड़ा कारोबार है जिसे इनका बेटा संभालता है। संकल्प मे बड़े होने का कोई घमंड नहीं है और वो बहुत सौम्य इंसान है। जिसे सबकी मदद करना पसंद है।
5) तानिया मिश्रा (25वर्ष,5"5")रंग गेहूँवा दिखने मे अच्छी है। ये हमारी आराध्या और दीप्ती दोनों की बचपन की दोस्त है और तीनों की अपनी एक अलग दुनिया है।
बस यही है हमारी आराध्या का छोटा सा परिवार। आगे की कहानी मे धीरे धीरे सभी लोगों से मुलाक़ात होगी और फिर उनके बारे मे जाननेगें।
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