Love without wish Chapter-40
- 29 June, 2026
आराध्या आज सबको सब कुछ बोल गयी थी लेकिन खुद बेहद परेशानी थी। गाड़ी मे सर को पीछे किये, आँखे बंद वो कुछ सोच रही थी। उसे देख कर लग रहा था की ना जाने कितनी भारी बोझ के निचे खुद को दबाये रखा है। बहुरानी ! ऑफिस आ गया,' ड्राइवर की आवाज पर आराध्या की आँखे खुलती है और वो बाहर निकल कर ऑफिस चली जाती है। शाम का वक़्त हो चुका था। तो सभी एम्प्लोयी घर की तरफ जा रहे थे। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस सबने देखी थी। आराध्या पर सबकी नजर थी। कोई उसे दिलासा भरी नजरों से देख रहा था, तो कोई सम्मान भरी नजरों से और किसी के आखों मे उसके लिये दुख था। आराध्या ने काफ़ी कम वक़्त मे, अपनी जगह ठाकुर ऑफिस मे बना ली थी। सभी उसके स्वभाव से, उसका सम्मान करते थे। उसके व्यवहार मे, बड़ा छोटा कुछ नहीं था। इसलिये आज सबकी मन मे, धनंजय के लिये काफ़ी नाराजगी थी।
आराध्या सबकी नजरों को महसूस करते हुए, लिफ्ट से अपने फ्लोर पर आ जाती है। जहाँ सारे काम को समेटने के. बाद उमाशंकर जी जा रहे होते है। आराध्या को देख कर वो रुक जाते है, " बिटिया ! आप इस वक़्त ऑफिस मे! कोई जरूरी काम है तो बता दीजिये। हम रुक जाते है। " नहीं काका ! आप बस श्याम काका से कह दीजिये की मुझे एक कप. कॉफी बना कर दें दें। आप घर जाईये। मुझे कुछ काम है इसलिये मै रुकूंगी। कहती हुई आराध्या अपने केबिन मे चले जाती है। उसे जाते देख उमाशंकर जी ने खुद से कहा, " महदेव आपको सहनशक्ति दें। आप इस मुश्किल घड़ी से खुद को निकाल पाए !" वो कह कर निचे चले जाते है।
अयान पुरे ठाकुर परिवार के. साथ गोपी जी के कमरे मे बैठा हुआ था। आज का दिन और आने वाला समय पता नहीं क्या क्या होने वाला था। अयान ने कहा, " मै चाहता हूँ की दादू -दादी आप दोनों कुछ दिन के लिये उज्जैन माँ -पापा के. पास चले जाये। शादी तक ना जाने क्या क्या तमाशे हो और आप दोनों की सेहत को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता हूँ। जो होना होगा वो तो वक़्त आने पर मालूम हो ही जायेगा। लेकिन अभी आप दोनों के साथ साथ धनवी, और अयानी भी आप लोगों के साथ जायेगे। पता नहीं क्यों? दिल बेचैन है। आप लोग अगर सुरक्षित रहते है तो बाक़ी हम लोगों सीधा ध्यान इस वसुधा और इसके लोगों पर लगा सकते है।
अयान की बात पर दीपक और मुकेश जी ने भी कहा, " हम भी अयान बेटे की बातों से सहमत है। क्योंकि आराध्या की बात पर हमें पूरा भरोसा है। वो जो कर रही है, वो कुछ सोच कर ही कर रही होगी। इस बीच अगर आपकी तबियत खराब हो गयी तो और परेशानी बढ़ जायेगीं। "
गोपी जी ने कहा, " लेकिन हमारे जाने से धनंजय तो नहीं बदल जायेगा। उसने जो किया उसकी माफ़ी तो उसे नहीं मिल जाएगी या फिर से उसका और आराध्या का रिश्ता फिर से ठीक तो नहीं हो जायेगा। हम अपने घर को छोड़ कर क्यों जाये। अगर इसी परिस्थिति मे, मौत लिखी है तो हम मर जायेगे। वैसे भी जवानी मे, बेटे -बहु के तमाशे ने तोड़ दिया हमें और बुढ़ापे मे, पोते के तमाशे ने मार दिया। हम दोनों पति - पत्नी का पिछले जन्म के कर्म बहुत खराब रहेंगे होंगे। इसलिये इस जन्म मे, ये दिन हम देख रहे है। भागने से क्या हासिल हो जायेगा। "
गोपी जी का दुख सब समझ रहे थे और उनके साथ सभी दुखी थे। दीपा जी ने कहा, " बाबू जी ! हमको लगता है की हमरी बड़की बिटिया और दामाद जी को नजर लग गयी है। इसलिये जमाई बाबू की बात मान कर आप सब चलिए। वहाँ महाकाल की पूजा और दोनों बच्चों के नाम पर रूद्राअभिषेक करवाये गे। सब ठीक हो जायेगा, महादेव की कृपा रही तो। दीपा जी की इस बात पर, गोपी और सुमती जी के साथ साथ सबको एक उम्मीद बँधी। सुमती जी ने कहा, " हम, हमारे बच्चों के लिये, ये जरूर करेंगे। हो सकता है, सब ठीक हो जाये। "तभी धनवी ने कहा," लेकिन भाई ! भाभी को तो कुछ मालूम नहीं है और क्या हमारा जाना जरूरी है। " उसकी बात पर अयानी ने भी कहा, " हम दोनों यही रहते है "!
अपनी दोनों बहनो की बात पर अयान ने प्रथम और संकल्प को देखा। प्रथम ने अपने सर को हिलाया और अयानी से कहा," भाभी को मालूम है और उन्होंने ही जाते जाते, ये बात कही। रही बात तुम दोनों की तो,' ये बात तो मानोगी ना की दुश्मन हमारे घर मे ही मौजूद है। हमारी हल्की लापरवाही, हमें उनके आगे मजबूर कर देगी। जितनी कम लोग होंगे, हमारा ध्यान उतना उनकी हरकतों पर होगा। तुम दोनों अभी उज्जैन मे, सुरक्षित रहोगी क्योंकि वहाँ अब भी संकल्प की पकड़ है। इसलिये तुम्हारे साथ संकल्प जा रहा है। प्रथम को नहीं भेज सकता क्योंकि सारी सिक्योरटी इसके हाथों मे है। एक बार हमें मालूम चल जाये की धनंजय ऐसे क्यों कर रहा है। तब हम कुछ कर सकते है और ये सब कुछ हमें शादी से पहले करनी होगी।
तभी संकल्प ने कहा, फिर दीप्ती और तानिया को भी ले जाता हूँ। उसकी बात दोनों ने एक साथ कहा, " अगर हम दोनों भी चलें गए तो आरू अकेली हो जाएगी। फिर नजर रखना भी जरूरी है। हम खुद को सुरक्षित रख सकते है। "आपस मे सबकी सहमती बन गयी थी तो तानिया और दीप्ती ने सबके सामान पैक करने शुरू कर दिए थे।
इधर वसुधा की टोली बाहर एक सुनसान जगह पर मौजूद थी। जहाँ सभी बैठे हुए थे। वसुधा ने पुरानी तस्वीरे निकाली और कहा, ' मैंने सोचा था की इन तस्वीरों का इस्तेमाल करके ठाकुर परिवार इज्जत नीलाम कर दूँगी। लेकिन अब समझ मे नहीं आ रहा है की इन तस्वीरों का इस्तेमाल करुं तो कैसे करुं !" सभी उन तस्वीरों को देख रहे थे। अंतरा ने कहा, " आंटी ! इस तस्वीर मे है कौन ? इस औरत के साथ अंकल तो पहचान आ रहे है लेकिन ये कौन है ? "
वसुधा ने अंतरा के हाथ से तस्वीर लिया और कहा, " पहले तो आंटी बोलना बंद करो ! मै मोम हूँ तुम्हारी क्योंकि मेरे बेटे से तुम्हारी शादी होने वाली है।दूसरी बात की इस तस्वीर मे, मै हूँ "वसुधा सिंह "! लेकिन अब मैंने प्लास्टिक सर्जरी करवा कर चेहरा बदलवा लिया है। ये जो तुम तस्वीर मे, चेहरा देख रही हो ना ! ये है चेहरा,ठाकुर परिवार की बहु वसुंधरा का है।"
उसकी बात पर कृष्ण राठौर के आखों मे अचानक चमक आ गयी। उसने वो तस्वीर उठाया और उसे देख कर कहा, " हम अब भी इस तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते है। धनंजय ना सहीं, आराध्या तो है। इस तस्वीर का इस्तेमाल करके, हम उससे पूरी प्रॉपर्टी लेकर, उसे अपने घुटनों पर ला सकते है। क्योंकि तुम्हारा चेहरा बदल चुका है। अब धनंजय तो मिडिया मे चर्चा का विषय है ही ! उसके साथ साथ उसकी माँ भी चर्चा मे आ जाये तो कमाल हो जायेगा। धनंजय के मेटर को आराध्या ने चालाकी से सही कर लिया है। लेकिन ये मसला बिल्कुल ठीक नहीं कर पायेगी।बदनाम होगा ठाकुर परिवार, बस इसमें रणवीर के चेहरे को ब्लोवर कर देना होगा। बाक़ी तो तुम जानती हो आगे क्या करना। एक बार आराध्या इस मेटर मे उलझ गयी तो हमारे लिये उससे पेपर पर साइन करवाना आसान हो जायेगा।
हमारे दो आदमी ठाकुर के ऑफिस मे, घुस गए है। एक बार सिर्फ मानसिक तौर पर आराध्या को उलझाना होगा। फिर चालाकी से पेपर साइन करवा सकते है। क्योंकि वो बेहद शातिर है, ऐसे तो हमारे हाथ वो आएगी नहीं। इसलिये ये तरीका सहीं होगा। एक बार प्रॉपर्टी हमारे नाम हो जाये। फिर हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ता की ठाकुर परिवार की इज्जत रहे या इज्जत की धज्जियाँ उड़ जाये !!"
कृष्ण राठौर की बात पर सभी मुस्कुरा देते है। वसुधा ने खुश होते कहा, कमाल की तरकीब लगाई है तुमने। चलो फिर इस काम को कल अंजाम देते है। सभी मुस्कुराते हुए, वहाँ से निकल जाते है। उनके जाते ही एक काला साया बाहर निकलता है। जिसके हाथ मे एक पेन होता है, जिसमे पीली रौशनी जल रही होती है।
आराध्या आँखे बंद किये कुर्सी पर सर को पीछे किये हुए थी। उसके आखों से आंसू बह कर उसके गालों पड़ गिर रहे थे । तभी किसी के कठोर हाथ बेहद प्यार से उसके गालों पर गिर रहे आंसुओ को अपने अंगूठे से पोछ देता है। आराध्या के लब बंद आखों मे मुस्कुरा जाते है। उसके मुस्कुराते होंठ पर जब किसी के होंठ आकर चूमते है तो वो उस शख्स के बाहों मे, खुद ही सिमट जाती है। ऐसे सिमटती है की जैसे सदियों बाद किसी से मुलाक़ात हुई हो। उस शक्श ने उसे होठो को चूमते हुए उसे गोद मे उठाया और ऑफिस के सीक्रेट कमरे मे लेकर चला गया। दोनों एक दूसरे के होठो को तब तक चूम रहे थे, जब तक दोनों की सांसों ने इज्जाजत नहीं दी उन्हें रुकने को।
कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे के सर से सर को लगाये हुए, अपनी सांसों को संयमित कर रहे होते है। कुछ देर बाद उस शख्स ने कहा, " नाराज हो "!! आराध्या ने भी बच्चों की तरह अपने सर को हाँ मे हिला दिया। उसकी हरकत पर वो मुस्कुराये बीना नहीं रह सका। उसने उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया। तो मेरी खुंखार ठकुराइन अपने ठाकुर से इतनी नाराज है। आराध्या धनंजय की बात पर,उससे लिपट कर जोर जोर से रोने लगी, रोते हुए उसने कहा," अब बर्दास्त नहीं हो रहा है ठाकुर !" उसे यू रोता - बिलखता देख धनंजय को घबराहट हुई और उसने उसके चेहरे को हाथ मे भर लिया। रोने की वजह से उसका पूरा चेहरा लाल हो गया था, ख़ासकर उसकी नाक टमाटर की तरह लाल हो गयी थी। उसके लाल चेहरे को देख कर कहा," ओह्ह ! तुम्हें मालूम है ठकुराइन ! माँ कहा करती थी की जिसके नाक पर बहुत पसीना आता है और जिसके नाक रोते वक़्त, ऐसे टमाटर की तरह लाल हो जाते है। वो बिल्कुल नकचढ़ी होती है, उसे बेहद तेज गुस्सा आता है। "
आराध्या ने जैसे ही उसकी बातें सुनी, तो चुप हो गयी और अपनी नाक को सिकोड़ कर उसे घूरते हुए कहा, " क्या कहा तुमने मुझे नकचढ़ी ! माँ को बताया नहीं की उनका बेटा कैसा है ! दुष्ट आदीमानव, डायनाशोर की तरह ! हुह !" अच्छा जी ! बिल्कुल जी ! वैसे कोई मुझे डायनाशोर शुरु दिन से बुलाया करता था। उसकी बात पर आराध्या ने भी मुँह बनाते हुए कहा, और कोई मुझे भी मिस पिलर बुलाया करता था। याद ना हो तो याद दिलाऊ। धनंजय ने मुस्कुराते हुए कहा, " तुम्हें मालूम है ठकुराइन ! तुमसे उज्जैन मे गाड़ी के पास पहली मुलाक़ात से लेकर, हर मुलाक़ात मे तुम मेरे करीब आती चली गयी। जिसका अहसास मुझे दिल्ली की पार्टी मे हुआ। जब तुम्हारी शादी की बात सुनी तो लगा की किसी ने जिस्म से रूह को अलग कर दिया है। लेकिन जब ये मालूम हुआ की मेरी दबी हुई चाहत ही मेरी जिंदगी बनने की मत पूछो मेरी ख़ुशी का आलम क्या था। तुम कब मेरी खाली जिंदगी मे, अपने रंग भर्ती चली गयी मालूम नहीं हुआ। मेरी खामोश जिंदगी की आवाज हो तुम। मेरी जिंदगी की धड़कन हो तुम।
धनंजय उसके माथे को एक बार फिर से मोहब्बत से चूम लेता है। आराध्या की आँखे बंद हो जाती है। कब तक ठाकुर :! और कब तक ऐसे रहना होगा !" उसकी बात पर धनंजय उसे बाहों मे भरते हुए कहा, मालूम नहीं ठकुराइन ! लेकिन बहुत जल्दी ये किस्सा खत्म करुँगा बस एक बार हम अपने मकसद मे कामयाब हो जाये। वैसे किसी को शक तो नहीं हुआ ?
धनंजय की सवाल पर आराध्या ने कहा, नहीं :! किसी को शक नहीं हुआ। एक पल तो मुझे भी लगा की ये क्या हुआ मेरे साथ। अगर शादी वाले दिन तुमने वो मेसेज नहीं दिया होता तो मै मर जाती है। हेय '! पागल लड़की ! दोबारा मत कहना ! तुम तो मेरी जान हो ! इसलिये तो वो खत छोड़ कर गया था। धनंजय की बात सुनकर आराध्या को वो दिन याद आ जाता है। जब उसने वो खत पढ़ा था। जिसमे धनंजय ने उसे लिखा था की" घर मे जो मौजूद है, वो तुम्हारा ठाकुर नहीं है। बहुत जरूरी काम के लिये ये कदम उठाया है। इसलिये भरोसा रखना , अपने ठाकुर पर !"
आराध्या ये सोचती हुई धनंजय की आखों मे देखती है। उसके मन मे अब भी ये सवाल था। धनंजय ने उसे देखते हुए कहा, " याद है, जिस दिन तुम पहली बार मेरे लिये ऑफिस मे खाना लायी थी ! उस दिन मै बेहद गुस्से मे था। " आराध्या उसकी बात पर हाँ मे सर हिलाती है। उस दिन मैंने तुम्हे अपना अतीत बताया था। उसी दिन जब मुझे वसुधा ने इतने विश्वास के साथ धमकी दिया तो मै कुछ सोचने पर मजबूर हो गया।
मुझे ये तो बहुत पहले से मालूम था की कोई बहुत बड़ी बात तो बीते कल मे हुई थी। जो मेरे आखों के सामने छीपायी गयी है। मै फिर उस चीज के पीछे लग गया। एक एक पल की खबर वसुधा की लेने लगा। उसे लगा की मै तुम्हारे मोहब्बत मे, सब कुछ भूल चुका हूँ। क्योंकि उसने भी अपने कुछ आदमी. हमारे पीछे लगा रखे थे । जिसमे अवनी पहली वो लड़की थी, जिसे उसने मेरे पीछे लगा रखा था। लेकिन तुम्हारे आने के बाद, उसे लगा की शायद बाजी उसके हाथ से निकल ना जाये।
इसी बीच, सिर्फ तुम्हें देखने के लिये, उसका घर पर आना और तुम्हारा उसको, उसकी औकात दिखाना। उसे अंदर तक हिला गया। सालों बाद उस दिन उसकी आखों मे घबराहट देखी थी । उसी दिन से मेरा शक और गहरा हो गया। उसके बाद मे बस उसके पीछे साये की तरह लग गया था। तुमने ध्यान दिया होगा की मेरा आना जाना भी अकेले होने लगा था। ताकि वो समझे की मेरा ध्यान उस पर से हट गया। जिस दिन धनवी के साथ जो कुछ हुआ। उसी दिन घर की नई मेड को, इसने हीरा काकी की जगह पर रखवा दिया था। वो दोनों गाँव जाने के नाम पर अचानक गायब हो गए थे।चुकी धनवी के साथ इतना कुछ हो गया था और फिर शादी के मैटर मे, हम सभी उलझ गए थे तो किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया।
आराध्या ने उसकी बात हैरान होते हुए कहा, "इसलिये उन दिनों आप का व्यवहार बेहद अजीब होता था।" धनंजय ने अपने सर को हाँ मे हिलाया। लेकिन जब आपको मालूम था की घर मे, उस चुड़ैल की कोई जासूस है तो आपने उसे निकाला क्यों नहीं और निकालना छोड़ो बताया क्यों नहीं। धनंजय ने मुस्कुराते हुए उसके नाक को हल्का सा पिंच किया और कहा, " तुमने कभी देखा अपने ठाकुर को ज्यादा बोलते हुए !" वो सर अपना इन्कार मे हिलाती है।
"ठकुराइन ! शक बहुत पहले से था। लेकिन बात पंद्रह साल पहले की थी, जिसका मुझे पता लगाना था। तुम तो जानती हो ना की जहाँ छः महीने दुनिया बदल जाती है। वहाँ पंद्रह साल की बात थी। मैंने जान बुझ कर उसे नहीं निकाला ताकि वो वसुधा तक खबर पहुँचाती रहे की मेरा व्यवहार बदलने लगा है। उसकी चाल को समझने के लिये मुझे पहले उसे ये यकीन दिलाना था की मै उसकी चाल मे फंस गया हूँ। जिसका नतीजा मॉल याद है तुम्हें ! आराध्या अपना सर हाँ मे हिलाती है।
उस दिन रात मे मुझे मालूम हुआ की " वसुधा सालों से पागल खाने मे किसी के लिये पैसे रखवाती है। " इसके लिये मुझे भोपाल के पहाड़ी इलाका मे बने उस हॉस्पिटल मे जाना था। जहाँ किसी का जाना वर्जित था। " हल्दी वाले दिन,सबको लगा की मै ऑफिस मे हूँ। लेकिन इस कमरे मे एक सीक्रेट डोर है उससे जुड़ी लिफ्ट है। जिसकी जानकारी सिर्फ मुझे है। मै इस डोर से उस जगह निकप गया जहाँ वसुधा महीने मे एक बार जरूर जाती है।
आराध्या ध्यान से, धनंजय की बात सुन रही थी।
आराध्या ने कहा, " तो हल्दी वाले दिन मैंने जिसे होटल मे उस अंतरा के साथ देखा था। वो तुम नहीं थे।" आराध्या की बात पर धनंजय ने कहा, " अगर वो मै होता ठकुराइन ! तो क्या तुम मुझे करीब आने देती। हल्दी से शादी तक अगर तुमको याद हो तो हम बहुत बार एक दूसरे के करीब आये थे। " "ओह्ह ! बेशर्म आदमी कुछ तो. सोच समझ कर बोला करो !" आराध्या की बात पर धनंजय ने कहा, अभी बातें कर रहा हूँ इसलिये अपने हाथों को नियंत्रण मे रखा है। नहीं तो बता देता तुम्हें.. की कौन कितना बेशर्म है। " अच्छा छोड़ो ना ठाकुर ! पहले ये बताओं की तुम्हें कैसे मालूम हुआ की तुम्हारा बहरूपिया घूम रहा है।
" ठकुराइन ! जब धनवी के साथ हादसा हुआ था तो उसके अलगे दिन आधी रात को मुझे फोन आया था, इटली से। जब मैंने तुमसे कहा था की मुझे इटली जाना होगा !" हाँ मुझे याद है ! लेकिन तुम गए नहीं थे !" हाँ ठकुराइन ! मै गया नहीं था। जैसे मुझे मालूम हुआ की वसुधा का बेटा वरुण वहाँ प्लास्टिक सर्जरी करवाने गया है। मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया। क्योंकि वसुधा ने भी अपनी प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी।मैंने सोचा की मै इटली चला जाऊंगा। फिर जब मेरे आदमियों ने मुझे मेरी ही तस्वीर भेजी तो मै समझ गया की वरुण ने मेरे चेहरे को अपने चेहरे पर लगवाया है। उसके बाद मैंने इटली जाने की प्लानिंग छोड़ दी।
फिर एक चाल चली। जहाँ मुझे मालूम था की वसुधा कुछ बड़ा खेल खेलेगी। इसलिये मैंने उसके सामने एक डील रखी की अगर वो अपनी तस्वीर रणवीर के साथ, किसी को नहीं दिखाएगी तो मै उसकी सारी बातें मान लूँगा। चुकी वसुधा को ये मालूम नहीं था की मुझे मालूम हो गया की, उसने अपने बेटे को मेरी शक्ल दें दी है। इसलिये उसने भी झूठी डील मेरे साथ कर ली। लेकिन मुझे धनवी की शादी तक उसे उलझा कर रखना था। इसलिये मैंने सब कुछ जान कर भी चुप रहना बेहतर समझा। साथ ही ये भी मालूम करना था की ये और क्या छिपा रही है।
क्योंकि तुम्हें भी मालूम है ना ! ये मेरी माँ नहीं है। ये बात मेरे सिवा घर मे कोई नहीं जानता है। वसुधा और वसुंधरा दोनों जुडवा बहन थी। मेरी माँ बेहद सीधी और सरल स्वाभाव की महिला थी तो वसुधा उतनी ही तेज और चालाक महिला थी।मेरे पिता महेंद्र ठाकुर ने माँ से प्रेम विवाह किया था। धनवी के जन्म के बाद, मेरे पिता वसुधा की तरफ आकर्षित होने लगे। वसुधा के बारे मे कोई नहीं जानता था, सिवाय मेरे माता पिता के। यहाँ तक की मेरे दादा दादी भी नहीं। बस इसी बात का फायदा वसुधा ने उठाया। उसने बेहद शातिर तरीके से मेरे पिता को अपने जाल मे फंसा लिया। उनके साथ मिल कर एक रात मेरी माँ की जगह वसुधा ने ले ली और रातों रात दोनों ने मिलकर मेरी माँ वसुंधरा को गायब कर दिया।
वसुधा अब ठाकुर परिवार के हैसियत मे खुद को ढालने लगी। उसका व्यहार मेरे दादू और दादी दोनों को खटक रहा था लेकिन कुछ कहते नहीं थे। सोचते थे की बहु अगर किटी पार्टी, या घूमने फिरने का शौख रखती है तो इसमें क्या बुराई है। क्योंकि वसुधा के झूठी मोहब्बत मे मेरे पिता भी उसके इशारो पर नाचने लगे थे। फिर एक दिन मेरे पिता को वसुधा पर शक हो गया। फिर उनको मालूम हुआ की वसुधा का पति रणवीर सिंह है।लेकिन मेरे पिता ने यही पर समझदारी से काम लिया। अब वो वसुधा को बीना बताये, धीरे धीरे सब कुछ मेरे नाम पर करते गए और मेरी माँ वसुंधरा को ढूढ़ने लगे। लेकिन वो भूल गए की वसुधा बेहद चालबाज औरत है। उसे जैसे ही भनक लगी की पापा को उस पर शक हो गया है। उसने, उनका एक्सीडेंट
करवा दिया।
पापा का एक्सीडेंट और वसुधा के रूप मे माँ के व्यवहार का बदल जाना, हम बच्चों के साथ साथ मेरे दादा और दादी को भी तौर चुका था।मुझे ये बात पहले से मालूम थी, ये बाद वसुधा जानती थी। पापा की वसीयत जानने के बाद, पंद्रह साल पहले, वसुधा ने मेरे आगे शर्त रखी थी की अगर मैंने उसकी बात नहीं मानी तो वो एक झटके मे मेरे भाई बहन सबको खत्म कर देगी। इसलिये उसने मेरे आगे शर्त रखी की मै एक नई कम्पनी वसुंधरा इंटरप्राइजेज खोलू और जब मै तीस का हो जाऊंगा तो ठाकुर कम्पनी के सारे शेयर वसुंधरा मे ट्रांसफर कर के उसे दें दू। क्योंकि पापा के एक्सीडेंट के कुछ महीनो बाद उसे मालूम हुआ था की पापा ने ठाकुर कम्पनी की सारी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक मेरा दें दिया है।
धनंजय की बात सुनकर आराध्या ने कहा, लेकिन आपने तो सारी प्रॉपर्टी फिर मेरे नाम कैसे कर दी। धनंजय ने उसके गालों पर हाथ रखते हुए कहा, " तुम्हारे नाम जो प्रॉपर्टी है, उस पर तुम्हें मैंने मालिकाना हक दिया है, जो मुझे मेरे पिता ने दिया था। पूरी प्रॉपर्टी जब मे, पूरी तरह तीस का हो जाऊंगा तो 60 और 40 परसेंट की शेयर हमारे नाम होगी। "
आराध्या ने कहा, " मतलब मै समझी नहीं ! मतलब ये की 60% मे मेरे दोनों भाई -बहन, अयान और प्रथम होंगे और 40% मे तुम और मै ! लेकिन ये तभी होगा जब मै तीस के होने के बाद मालिकाना हक छोड़ दू। लेकिन वही मालिकाना हक मैंने तुम्हारे नाम कर दी है। और इसलिये वसुधा ने अपने बेटे और उसकी प्रेमिका को. मिडिया मे आउट कर दिया ताकि तुम उससे अलग हो जाओ। और वो फिर से वसीयत के हिसाब से अंतरा को उसका मालिकाना हक दें देती।
"लेकिन क्या उसे ये नहीं मालूम है की आप के रहते हुए ये कैसे सम्भव है !" धनंजय ने उसकी तरफ देखा और उसके हाथ को पकड़ कर कहा, " जब उसे ये मालूम होगा की मै जिन्दा हूँ तब ना ! मेरा एक्सीडेंट तो उसने धनवी के शादी के अगले दिन ही करवा दी थी और उसी दिन वो अपने बेटे को धनंजय के रूप मे लाकर तुम सब के सामने रख दिया।
आराध्या ने घबराते हुए कहा, " ये क्या मतलब है !" मतलब ये है ठकुराइन की उसने इस बार मुझे मारने की पूरी तैयारी कर ली थी और इसलिये मैंने हर बार तुम्हें मानसिक तौर पर तैयार किया था। क्योंकि मुझे जो मालूम करना था, वो बीना मेरे मरे.... उसके मुँह पर हाथ रखती हुई उसने अपना सर ना मे हिलाया। कुछ भी बोलो ठाकुर लेकिन ये मत बोलना।
"यही सच है ठकुराइन ! उस दिन अधूरा मेसेज मैंने बेहद जल्दी मे भेजा था। मै तुम्हारे सामने होता नहीं लेकिन महादेव ने उस दिन मेरी रक्षा की। गाड़ी पहाड़ी के निचे गिरती की उससे पहले मे पहाड़ी से कूद गया। दो दिन तक वसुधा के आदमी मुझे उसी जंगल मे ढूढ़ते रहे। जब उन लोगों को तस्सली हो गयी की मै मर चुका हूँ। तब उन्होंने धीरे धीरे दाव खेलनी शुरू कर दी।"
आराध्या ने फिर पूछा ', " तो किस बात की जानकारी तुम्हें चाहिए थी और किसे वसुधा पागलखाने मे हर महीने मिलने जाती है और पैसे देती है। तुम्हें मालूम हुआ !"
उसकी बात पर धनंजय कुछ देर चुप रहा और फिर कहा, " हाँ ! वहाँ मेरे माता - पिता कैद है !" क्या? आराध्या ने हैरानी से पूछा !"
Recent News
Love Without Wish Chapter-51
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-50
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-49
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-48
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-47
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-46
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-42
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-41
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-40
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-39
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-38
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-36
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-35
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-24
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-23
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-29
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-27
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-26
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-25
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-20
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-19
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-13c-44
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-6
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-5
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-4
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-3
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-2
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-1
- 29 June, 2026