Love without wish Chapter-4
- 29 June, 2026
मै तुम दोनों क़ो आखिरी मोहलत दे रहा हूँ अगर मुझे मेरे पैसे सुद समेत वापस नहीं दिए तो इस घर से बाहर भिकवा दूँगा। अंदर ये बातें कोई दीपक जी और दीपा जी क़ो बोल रहा था। जिसे सुनकर आरध्या कहती है, ये कौन है जो हमारी ललिता पवार से इतनी ऊँची आवाज़ मे बात कर रहा है कहती हुई अंदर आ जाती है।
जहाँ ललित हजारी अपने बेटे लखन हजारी के साथ बैठा हुआ था और उसके चाचा से पैसे मांग रहा था। ज़ब आरध्या दीप्ती के साथ अंदर आती है तो लखन हजारी की नजर दीप्ती पर जाती है और अपनी गंदी और भद्दी आवाज़ मे कहता है, पापा आप इतना क्यों परेशान हो रहे है। अगर ये पैसे वापस नहीं करते तो इनको कहिये ये अपनी बेटी की शादी मुझसे करवा दे। सारे पैसे मै अपने ससुराल वालों की माफ कर दूँगा कहते हुए दीप्ती क़ो देखता है।
दीपा जी कुछ कहने क़ो होती है तो उससे पहले आरध्या कहती है, वो शक्ति कपूर के घटिया वर्जन, वो तो फ़िल्म मे ऐसे रोल करता था और तूने उसे हकीकत मे कॉपी कर ली। ज़ब ये कॉपी कर लिया है तो. उसका अंजाम नहीं देखा तूने की उसकी कैसी हालत फ़िल्म मे होती है, तु सोच की तेरी उससे बुरी हालत मै हकीकत मे ना कर दूँ,कहती हुई उसको अपनी आँखे दिखती है।
जिसे देख कर लखन कहता है, ए लड़की। आरध्या उसकी तरफ से देखना छोड़, ललित हजारी की तरफ देखती है और कहती है, "चचा!!!कितना वक़्त दे रहे हो पैसा लौटने का!! ये सुनकर ललित हजारी कहता है, तीन महीने इससे ज्यादा नहीं।
ठीक है चचा तो तीन महीने के अंदर तुम्हें सारे पैसे सुद समेत लौटा दूँगी। तब तक तुम अपने इस कपूत क़ो हमारे सामने मत लाना, नहीं तो इसकी वो हालत करुँगी की सुद समेत तो छोड़ो.... मूल भी नहीं रहेगा। ले जाओ इस शक्ति कपूर के घटिया वर्जन क़ो और बोलो अच्छी फ़िल्म देखें।
दोनों हाथो क़ो ऊपर उठा कर जोड़ती हुई, कहती है, हर हर महादेव !! उन्दोनो क़ो बाहर जाने का इशारा करती है। जाते जाते ललित जी दीपक जी से कहते जाते है की तीन महीने बाद आज के दिन आऊंगा और आज जो किया है तुम्हारी इस बेटी ने उसकी कीमती वसूल कर जाऊंगा।
उसके जाते ही आरध्या मुड़ कर अपने चाचा चाची की तरफ देखती हुई कहती है, ये आप दोनों हमे कब बताने वाले थे। उसके चाचा कुछ कहते उससे पहले वो हाथ दिखती हुई उनको चुप करवाती है और अपनी चाची की तरफ देखती है और कहती है, इतना बोलती रहती है दिन भर चपड़ चपड़.... ना जाने कितनी बार ऊपर फोन लगा लेती है लेकिन एक बार हमे नहीं बता सकती थी।
ये जो हम इतने आराम से नौकरी ढूढ़ रहे थे वो जल्दी कर लेते। उसकी बातें सुनकर दोनों कहते है, हम तुमदोनों क़ो परेशान नहीं करना चाहते थे।
दीप्ती और आरध्या उनके पास निचे बैठ कर कहती है, हमसे नहीं कहते तो. किसे कहते है। कितना कर्ज है?जिसे सुनकर दोनों कहते है तीस लाख!!!भैया भाभी के इलाज के लिए लिया था और सोचा की उनकी जान बच जाये लेकिन नहीं हो सका कहते हुए दोनों रोने लगते है। उनकी बातें सुनकर आराध्या उन्दोनो की आखों की आंसूओ क़ो पोंछती हुई कहती है,"अब छोड़िये ये सब! आप मुझे नीरूपा राय नहीं ललिता पवार ही अच्छी लगती है। ये सुनकर दोनों मुस्कुरा देते है !! अब चलिए,हमदोनों की नहीं हमें तीनों की जाने की तैयारी कीजिये।
जिसे सुनकर दीपा जी कहती है, यानी तुम तीनों मुझे यहाँ अकेले छोड़ कर जा रही हो। फिर ऊपर की और देखते हुए कहने लगती है, जीजी!!!! आरध्या जल्दी से उठ कर उनके मुँह क़ो बंद करती हुई कहती है, अरे मेरी ललिता पवार ये बार बार तुम काहे नीरूपा राय क़ो फोन घुमा देती हो। हमें तुम्हारे आलोक नाथ क़ो कहीं नहीं ले जा रहे है।
फिर वो अपनी घूरती नजरों से पूछती है।
आरध्या कहती है हम खुद की, दीप्ती की, और तानिया की बात कर रहे है जिसकी पहली इंटरव्यू हम तीनों ने पास कर ली है और फइनल राउंड के लिए हमे आज शाम क़ो भोपाल निकलना है। कल इंटरव्यू देने। तो. तुम एक ही काम करना अगर हमें सफल हो गए तो. भोलेनाथ क़ो पेड़ा का भोग चढ़ा देना। अब समझी। उसकी चाची अपनी आँखे झपकाते हुए हाँ कहती है। हम्म्म्म तो ठीक है अब हम हाथ हटा रहे है, आप शांति से हमारे जाने की तैयारी कीजिये।
हमे उम्मीद है की ये नौकरी हम दोनों बहन क़ो मिल जाएगी और कर्ज भी खत्म हो जायेगा।उसकी बात सुनकर दीपक जी कहते है, लेकिन लाडो!!तीस लाख तीन महीने मे कैसे हो पायेगा। हो जायेगा चाचू!!! भोलेनाथ है ना सब कर लेगे।
फिर दीपक जी कहते है, लाडो कौन सी कम्पनी है? चाचू प्रताप इंडस्ट्री मे मेरा और तानिया का हुआ और दीप्ती की वंसुंधरा इंरप्राइजेज मे। आरध्या की बात सुनकर दीपक जी कहते है, लेकिन लाडो!!!तुम दोनों क़ो अलग अलग क्यों?? अरे नहीं चाचू दोनों कम्पनी एक ही बस हमारे एजुकेशन के मुताबिक हमने अप्लाई किया था और इंटरव्यू दिए थे। अच्छा!!!।
आरध्या इसमें सब कुछ खाने की चीज डाल दी है, कहती हुई दीपा एक बैग सामने रख देती है। फिर दीप्ती दो बैग लेकर बाहर आती है। बाहर से तानिया भी अपना सामान लेकर अंदर आती है। उसके साथ उसके माँ भी आती है। आरध्या क़ो देख कर कहती है, आरध्या बेटी मै तेरे भरोसे इसे जाने दे रही हूँ। इसके पापा तो बिल्कुल राजी नहीं थे ज़ब तुम्हारे बारे मे सुना तब जा कर माने। आप फ़िक्र मत कीजिये काकी!हम इनदोनो का ध्यान रखेगें।
दीपा जी कहती है, लेकिन ये इतना सारा समान क्यों ले जा रही हो तुम सब। उनकी बात सुनकर आरध्या कहती है, चाची हो सकता है..!! नहीं!नहीं हो सकता है क्यों?? होगा मुझे यकीन है अपने भोलेनाथ पर। तो चाची नौकरी हो गयी तो अकॉमडेशन कम्पनी ही दे रही है। फिर नौकरी होने के बाद तुरंत तो आना मुश्किल है ना इसलिए हम सबने इतनी पैकिंग कर ली है की हमारा काम चल जाये। फिर बिच मे एक दिन की छुट्टी लेकर या शनिवार रात क़ो आ जायेगे और रविवार फिर वापस हो जायेगे।
दीपा जी भाबुक होती कहती है, तु वहाँ बदमाशी तो नहीं करेगी ना!!अपना ध्यान रख लेगी। आरध्या उनकी बात सुनकर कहती है, हम्म्म्म!!!ये तो मुश्किल है कहना क्योंकि वहाँ झाड़ू लेकर मेरी ललिता पवार नहीं मिलेगी, कहती हुई उनके गल लग कर कहती है, सब संभाल लुंगी और अगर नहीं संभाल पायी तो, आप फोन कर देना अपनी नीरूपा राय क़ो।
तीनों घर से विदा लेती है और निकल पड़ती है अपने सफर पर।
भोपाल
धनंजय अपनी कमरे मे खिड़की के पास खड़ा था। अभी उसने सिर्फ लोअर पहन रखी थी और ऊपर का हिस्सा खुला था। उसका घटिला बदन रात की चांदनी मे बेहद मोहक लग रहा होता है। अभी इस वक़्त वो ना जाने किस सोच मे गुम था।
रोज की तरह आज भी धनंजय शिव मंदिर मे पूजा करने सुबह के चार बजे पहुंचा था। लेकिन आज वो अकेले ही आया था। ज़ब उसकी नजर शिवलिंग पर पर पड़ती है तो वो देखता है की आज उसके आने पहले हीं भोलेनाथ की पूजा हो चुकी थी। कुछ पल सोचने के बाद की किसने महादेव की पूजा इतनी सुबह की होगी ; वो महादेव की पूजा शुरू करता है। तभी किसी की स्तुति की आवाज़ आने लगती है। धनंजय पूजा करते हुए, मन मे कहता है ये तो वही आवाज़ लेकिन फिर क़ो नजरअंदाज कर अपनी पूजा पर ध्यान देने लगता है।
पीछे से घंटी की आवाज़ सुनकर धनंजय का ध्यान फिर भंग हो जाता है और वो मन मे कहता है पता नहीं कौन है ?
तभी पीछे से आवाज़ आती है, हम है? ये सुनकर धनंजय सोचता है, क्या ये पागल है ? फिर आवाज़ आती है।
"हमें है शिव शंभू आराध्या चौधरी उज्जैन वाली। वैसे तो आप सब जगह एक हीं है फिर हमारा तो फर्ज है की आपको हम अपना परिचय दे दे। वो क्या है ना आपके चाहने वाले तो गिनती के है नहीं ना अनगिनत है । इसलिये हमें अपना नाम बताना जरूरी लगा। उमापति आज मेरी यहाँ भोपाल शहर मे, ठाकुर कम्पनी मे,फाइनल इंटरव्यू है ; बस उसमें पास करवा देना। वो क्या है ना ? वैसे तो हमें अपनी काबलियत पर पूरा भरोसा है। लेकिन इस बार बात तीस लाख कर्ज की है, जो हमारी ललिता पवार ने हमारी नीरूपा राय के लिए ले रखा था। ताकि वो बच जाये। लेकिन तुम तो ले गए उनको अपने सँग, अब छोड़ गए कर्ज। तो इसे चुकाना तो जरूरी है इसके लिए नौकरी की जरूरत है। नहीं तो हमारे चाचा -चाची के सर से छत क़ो ललित हजारी छीन लेगे और हमने वादा किया है की तीन महीने मे हम उसके पैसे चुका देंगे। अब कैसे चुकाएंगे ये हम तुम पर छोड़ते है।
हम अपने माता -पिता के जाने का दोष तुमको नहीं देते जानते हो क्यों ? होनी और अनहोनी अगर तुम्हारे हाथ मे होती तो तुम अपनी जान से प्यारी सती मैया क़ो जाने देते जिनकी विरह मे तुम तो वैरागी बन बैठे।
इसलिये उमापति बस कृपा कर देना आज हम पर। ठाकुर कम्पनी मे आज हमारी नौकरी पक्की करवा देना । यहाँ हमारी नौकरी हुई नहीं की शुद्ध पेड़े का भोग वहाँ हमारी ललिता पवार तुमको चढ़ा आएगी और यहाँ हम चढ़ा देंगे। लालच नहीं दे रहे है उमापति बस ये हमारा प्यार समझ लेना। बस ध्यान रख लेना शभू नाथ।
🙏जय महाकाल 🙏"
कहती हुई फिर से घंटी बजाती हुई निकल जाती है।
धनंजय जो बहुत से उसकी बात सुन रहा था मंदिर के अंदर, महादेव की पूजा कर वो भी निकल जाता है। उसके दिमाग़ मे आरध्या की एक हीं बात घूमती है, "हम अपने माता -पिता के जाने का दोष तुमको नहीं देते जानते हो क्यों ? होनी और अनहोनी अगर तुम्हारे हाथ मे होती तो तुम अपनी जान से प्यारी सती मैया क़ो जाने देते जिनकी विरह मे तुम तो वैरागी बन बैठे। ये बातें सोचते सोचते अपने घर पहुंच जाता है।
आज धनंजय अपने वक़्त से पहले ऑफिस निकलने लगता है तो अयान उसे रोकते हुए कहता है की, आज इतनी जल्दी कोई खास बात है। नहीं लेकिन ध्यान क़ो कहा था नई जोइनिंग के लिए वही देखना है। ये सुनकर अयान क़ो थोड़ा शक होता है और पूछता है की ये काम तो एच आर डिपार्टमेंट का है फिर तुझे इसमें क्यों दिलचस्पी होने लगी।
धनंजय कहता है बात मेरे लिए असिस्टेंट की है तो उसे मैं भी देखूँगा की किसे चुना जा रहा है। ये सुनकर अयान कहता है लेकिन आज सिर्फ फीमेल कैंडिडेट्स की फाइनल राउंड इंटरव्यू है। तेरे लिए जो असिस्टेंट देखा जा रहा है वो मेल है और उनकी सेडुल कल की है।
आज टेक्निकल, मार्केटिंग और ऑपरेशनल कैंडिडेट की इंटरव्यू है। धनंजय कहता है, मुझे मेल -फीमेल से कोई लेना देना नहीं है मुझे खुद के लिए बेस्ट असिस्टेंट चाहिए। अगर तुम्हारे सवाल जबाब हो चुके हो तो मैं जाऊ क्योंकि तुम तो समय पर आने से रहे।कहते हुए निकल जाता है। अयान उसे जाता हुआ देख रहा होता है। तभी एक तरफ ध्यान और दूसरी तरफ प्रथम दोनों उसके कंधे पर हाथ रख कर कहते है, "pok इंडिया मे आएगा या नहीं " क्या इस पर विचार कर रहे हो। नहीं मैं ये सोच रहा हूँ की पाकिस्तान कब से भारत मे शामिल होने लगा है। " मतलब।
मतलब ये दो प्रमुख अफ्रीका की प्रजातियां, हमारा धन आज कुछ ज्यादा ही बदला बदला लग रहा है। क्या? कहते हुए दोनों उसके कंधे से हाथों क़ो गिरा लेते है। अयान कहता है, हाँ!!!कल तक उसे अपने इर्द -गिर्द तक फीमेल नहीं चाहिए थी और आज वो कह रहा है की उसे फर्क नहीं पड़ता मेल और फीमेल से।
ये सुनकर दोनों कहते है, यही पर अगर अमृत मंथन निकालोगें तब तो कुछ नहीं निकलने वाला है। इसलिये ऑफिस चलो देखें बात क्या है।ये कहते हुए तीनों निकल जाते है।
यहाँ एक होटल से तैयार होकर आराध्या, तानिया और दीप्ती निकलती है। दीप्ती और तानिया ने ब्लू जींस के साथ नारंगी रंग के शर्ट पहन रखे थे और बालों क़ो पोनी कर रखा था, एक हाथ मे घड़ी और दूसरे हाथ मे ब्रासलेट पहन रखी थी, मेकअप मे काजल और होठों पर हल्की लिपस्टिक । आरध्या ने ब्लैक जीन्स के साथ ब्लू कुर्ती पहनी थी गले मे सफ़ेद रंग की फ्लोरल स्कार्फ लपेट रखी थी। बालों क़ो अच्छे से फ्रेंच जुड़ा कर रखा था। हाथों मे मेटल चुड़ी और दूजी मे घड़ी आखों मे गहरा काजल। लिपस्टिक उसे पसंद नहीं था इसलिये वो लगाती नहीं थी, वैसे ही उसके होंठ गुलाबी दीखते थे। तीनों निकल जाती है इंटरव्यू के लिए।
ऑफिस के बाहर उतरते ही दीप्ती और तानिया निकलती है, आरध्या कहती है तुम दोनों आगे चलो हम ऑटो वाले क़ो पैसे देकर आते है। कितने हुए भैया। दीदी 210 रूपये। क्या लूट कर आज ही करोड़पति बन जाओगे जो मुँह मे आया बोल दिया। अरे दीदी आपने रिजव करवाया था। ओ भाई !! हमने कहा था रिजब मे चलने के लिए। नहीं दीदी। लेकिन आप तीन थी तो हमने सोचा रिजब ही होगा। तीन सीटर तुम्हारी ऑटो है और हम तीन बैठ लिए तो रिजब हो गयी। बीस बीस रुपया यहाँ तक किराया है ये लो पकड़ो साठ रूपये और किसी और दिन करोड़पति बनना है।कहती हुई अंदर जाने लगी। खुद मे बड़बराती हुई, अजनबी देखा नहीं की लूटने चले आये। बताओं अगर हमने होटल वाले से ये नहीं पूछा होता है की वहाँ से यहाँ तक आने मे कितने पैसे लगने वाले है तब तो उसने दीदी!! दीदी करके हमें लूट ही लेना था, बोलती हुई जाती रहती है की किसी से टकरा जाती है और उसके हाथों से फ़ाइल छुट कर निचे गिर जाती है।
अपने सर क़ो सहलाते हुए बिना ऊपर देखें ही कहती है इतनी बड़ी कम्पनी है और बिच मे ये पिलर खड़ा करने का क्या मतलब किसी का सर फूटे इनकी ब्ला से, कहती हुई अपने सारे पेपर उठाने लगती है। तभी वहाँ खड़ा इंसान कहता है, "एक्सक्यूज़ मी " .... तुमने पिलर किसको कहा ???
आरध्या पेपर समेटती हुई कहती है क्यों डायनाशोर की तरह आवाज़ निकाल कर डरा रहे हो। पिलर सामने है देख लो ना मुझसे क्यों पूछ रहे हो। वैसे ही उस ऑटो वाले की वजह से देर हो चुकी है।
फिर से इस बार तेज आवाज़ आती है, यहाँ डायनाशोर कौन है?? इस आवाज़ के साथ ही पूरा ऑफिस जो जहाँ था वही खड़ा हो गया। आरध्या भी खींचती हुई पेपर उठा कर सामने देखती हुई कहती है, क्यों गलाफाड़ रहे हो। आवाज़ तुम्हारी डायनाशोर की तरह लगती है और देखो इधर पिलर कहती हुई हाथ दिखती है।
आराध्या धनंजय के सवाल पर जैसे ही सामने तरफ हाथ दिखाती है वहां उसे कुछ दिखता नहीं है।
फिर वह उसकी तरफ देखती है और कहती यही तो पिलर था कहां गया!! धनंजय उसकी बेतुकी बातें सुनकर अपनी ठंडी आवाज़ मे कहता है, और डायनाशोर !!
आराध्या अपनी तेवर से कहती है, "आपकी आवाज़ !! तुम जानती हो की किससे बात कर रही हो। आरध्या थोड़ी सी खींझ कर उसके थोड़े पास आकर धीरे से कहती है," गुरु डायनशोर!! क्यों मेरे पीछे पड़े हो। पिलर था लेकिन अब नही है. अब मै क्या करुं।
धनंजय उसे घूर कर कहता है, " जब यहाँ पिलर होगी तभी तो तुम्हें दिखेगी। तुम्हें नही लगता की तुम्हें कुछ ज्यादा दिखता कुछ ज्यादा ही सुनाई देता है ? आराध्या उसकी बातें सुनकर गुस्से में कहती है, "ठीक है!! इसके लिए इतना जोर से बोलने की क्या जरूरत है!! अब बात खत्म करो और हटो मेरे रास्ते से मुझे इंटरव्यू के लिए लेट हो रहा है। ये पिलर और डायनाशोर के चक्कर मे, कही मुझे जॉब से ना हाथ धोनी पर जाये।
ये बार बार तुम किसे डायनाशोर और पिलर बोले जा रही हो । आरध्या उसे छोटी आँखे करती हुई उसकी तरफ बढ़ती जाती है और उसके कदम पीछे होते जा रहे होते है। फिर वह उसकी टाई क़ो पकड़ती हुई कहती है, तुम्हें कह रही हूँ,"पिलर वाला डायनाशोर। कहती हुई उसके बगल से जा रही होती है। तो पीछे से फिर धनंजय उसे आवाज देते हुए कहता है," तुम्हें नहीं लगता तुम्हें मुझे सॉरी कहना चाहिए?
उसकी बातें सुनकर उस की तरफ मुड़ कर कहती है, " ठीक है मुझे माफ कर दीजिए!! मैंने गलती से आपको पिलर समझ लिया धन्यवाद। हुँह !! व्हाट रुबिश!! तुम्हें ठीक से माफी मांगने भी नहीं आती। आराध्या कहती है, " तुम्हारी परेशानी क्या है!! मैं तुम से टकरा गई इसलिए या तुम्हारा यह हट्टा कट्टा शरीर मेरे टकराने से टूट गया और तुम इसलिए रोये जा रहे हो!! आखिर समस्या गया है?
धनंजय कुछ कहता तब तक तानिया की आवाज आती है, "आराध्या जल्दी आ।आरध्या, धनंजय क़ो देख कर कहती है,"तुम मुझसे बाद में लड़ लेना पिलर खंभे अभी मुझे माफ कर दो और मुझे जाने दो मेरा इंटरव्यू है। धनंजय उसी गुस्से में घूर कर जाते हुए देखता रहा और वह वहां से चली गई।
सभी ऑफिस के एंप्लॉय खड़े होकर धनंजय को देख रहे थे। जिसे देख कर धनंजय अपनी कठोर आवाज़ मे कहता है, क्या किसी क़ो अपनी नौकरी प्यारी नही है। यह सुनकर सभी अपने अपने कामों में लग जाते हैं।
धनंजय गुस्से से ऑफिस के केबिन में आता है। अपनी टाई की नॉट क़ो ढीला करके बैठता है। तभी पीछे से अयान आता है और कहता क्या हुआ तू इतनी गुस्से से क्यों उबल रहा है?
धनंजय बिना उसे किसी बात का जबाब दिए। अपने असिस्टेंट क़ो फोन करते हुए कहता है," उमाशंकर " आज जितनी भी कैंडिडेट्स का इंटरव्यू के लिए आयी है। उन सभी की फ़ाइल मुझे पांच मिनट के अंदर मेरे टेबल पर चाहिए । अयान उसकी बातें सुनकर थोड़ा क्यूरियस होकर उसे देखते हुए कहता है, "क्या बात है धनंजय!! तू इसमें कब से इंटरेस्टेड होने लगा?
धनंजय उसकी बातों का कोई जवाब नहीं देता असिस्टेंट आकर डरते हुए कहता है, मेय आई कमिंग सर!! कमिंग!! उसके सामने सारे फाइल रख देता है और खड़ा हो जाता है। गो उमाशंकर। वह डरते हैं वहां से चला जाता।
धनंजय सभी फ़ाइल क़ो देखता है और उसमें से तीन फ़ाइल निकाल कर, अयान को देते हुए कहता है,"इस तीनों कैंडिडेट की जॉब डन करो। इनके अकॉमडेशन का इंतजाम करो।फिर एक फ़ाइल निकल कर अयान क़ो देते हुए कहता है, ये मिस आरध्या चौधरी मुझे अपनी पर्सनल सेक्टरी के तौर पर चाहिए। बाक़ी दो कैंडिडेट्स किस डिपार्टमेंट के लिए बेहतर है उन्हें वो पोस्ट दे दो।
यह अयान उन सभी फ़ाइल को देखता है तो उसकी आंखें चमक जाती है," क्योंकि एक फ़ाइल मे,दीप्ति की फोटो पर नजर जाती है। जिसे देख कर कहता है, "अरे यह तो यह वही लड़की है जो मुझे मतलब हमें उज्जैन में मिली थी। अयान आगे कुछ कहता, उससे पहले धनंजय अपनी ठंडी आवाज़ मे कहता है," तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट करो। तीन साल के अंदर ये नौकरी छोड़कर नहीं जानी चाहिए अगर यह किसी ने नौकरी छोड़ने की कोशिश करती है तो पेनेल्टी के तौर 5 करोड़ देने पड़ेंगे।
अयान उसकी बातें सुनकर कहता है, "क्या बात है भाई? इतनी दुश्मनी किस लिए क्या बिगाड़ा है इन तीनों ने तुम्हारा। जहाँ तक मुझे मालूम है तो इनकी वजह से हमारी बहने सुरक्षित थी। कुछ गड़बड़ है क्या तेरे दिमाग में!!
अयान आगे कुछ कहता इससे इससे पहले ही धनंजय कहता है तुम जाओ और मुझे यह लड़की अभी एक घंटे के अंदर मेरे पर्सनल असिस्टेंट के रूप में चाहिए। अयान उसके ऑफिस से निकलते के साथ दिमाग को झटक ते हुए कहता है पता नहीं इसे क्या हो गया है क्या दिमाग में इसकी खिचड़ी पका रहा हैं।
बाहर बैठे कैंडिडेट में से, एच हार गीतिका आती है और कहती है, मिस आराध्या चौधरी, मिस तानिया मिश्रा और मिस दीप्ती चौधरी," कांग्रेचुलेशन आल ऑफ़ यु!! ऑल आर सिलेक्टेड। यह सुनकर तीनों बहुत ख़ुशी से एक दूसरे के गले लग जाती है।
गीतिका मुस्कुराते हुए कहती है, "आपको आज से ही जॉइनिंग देनी पड़ेगी आपकी रहने के लिए फ्लैट अवेलेबल करवा दिया गया है और ये आप सभी के कॉन्ट्रैक्ट पेपर है। अच्छी तरह से पढ़ कर इस पर साइन कर दीजिये।
तीनों को कॉन्ट्रैक्ट पेपर देती है तो वह तीनों पढ़ती है," जिसमे सब कुछ ठीक था लेकिन एक कॉलम मे लिखा था की तीन साल के अंदर नौकरी छोड़ने पर पांच करोड़ की पेनेल्टी देनी होगी।ये पढ़ कर तानिया कहती है, अब क्या करना है। आरध्या कहती है, हम नौकरी क्यों छोड़ेंगे वो भी इतनी अच्छी कम्पनी की। कर दो साइन। ये सुनकर तीनों साइन कर पेपर गीतिका क़ो देती हुई कहती है। शुक्रिया आपका। वो मुस्कुरा देती है.और कहती है कि आप तीनों जाइए 8 फ्लोर पर वहां आपको मिस्टर चतुर्वेदी मिल जाएंगे वही आपको आगे की गाइडलाइन बताएंगे। यह सुनकर तीनों निकल जाती है 8 फ्लोर के लिए।
जब 8 फ्लोर पर पहुंचती है तो वह पूरा फ्लोर बिल्कुल सन्नाटे में रहता है कहीं कोई नही नजर आता है उन्हें।
फिर उनकी नजर ऑफिस के बोर्ड पर जाती है, जिस पर मिस्टर अयान चतुर्वेदी लिखा देख। वह समझ जाती है और तीनों अंदर आती है।
अयान कुर्सी पर बैठा रहता है और जैसी तीनों कहती है गुड मॉर्निंग सर!! अयान अपनी चेयर घुमा लेता जिसे देखकर दीप्ति की आंखें तो बड़ी हो जाती है। आराध्या उसे पहचान नहीं पाती लेकिन तानिया उसको देख कर मुस्कुराती हुई कहती है, "आप यहाँ "। यह सुनकर अयान कहता है चलिए आपने पहचानो तो सही मुझे लगा आप मुझे पहचानेगी भी नहीं। नही हमलोगो क्यों नही पहचाने गें आपको, क्यों दीप्ती. हमारे मे आपको सिर्फ आरध्या नही पहचानती आपको।
उसकी बातें सुनकर आयन कहता है," नही!! कुछ लोगों के चेहरे देखकर लग रहा है कि वह मुझे देख कर खुश नहीं। ये बोलते हुए उसकी नजर दीप्ति पर थी।
फिर वह आराध्या की तरफ देखते हुए कहते हैं आप ही है ना मेरी दोनों बहनों की सेवियर। आराध्या मुस्कुराके कहती है उस दिन वह दोनों छोटी आप ही की बहन थी। वह कहता हैं, हाँ!! वह दोनों मेरी ही बहन थी। नाइस टू मीट यू सर आई एम आराध्या चौधरी। अयान कहता है नाइस टू मीट यू टू मिस आराध्या चौधरी। फिर तीनों को अपनी तरफ से एक एक फाइल देते हुए कहते यह तीनों आपके फाइल है। इसमें आपके काम क्या होंगे वो लिखा हुआ है।मिस आराध्या आपको टॉप 11 फ्लोर पर जाना पड़ेगा वहां आप पर्सनल असिस्टेंट है हमारे सीईओ कि आज से और अभी से वहां जाएंगे। आपको वहां पर उमाशंकर जी मिलेंगे उनसे आप हर चीज को समझा देंगे।
तानिया को फाइल देते हुए कहता है कि, " आपको जाना है 7th फ्लोर पर वहां पर आपको मिस्टर ठाकुर मिलेंगे जिनसे आपको सब कुछ समझना है आप उन्हीं के अंदर काम कर रही हैं। यह सुनकर तानिया भी अपने फाइल लेकर नीचे चली जाती है। दीप्ति उसे घूरती भी कहती है और मुझे कहां जाना होगा सर? अयान उसे देख कर मुस्कुरा कर कहता है आपको मेरे साथ ही काम करना है मिस चौधरी।
जिसे देख दीप्ति कहती है मैं आपके साथ काम नहीं करूंगी। ये सुनकर अयान कहता है कि यह तो आपको कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से पहले सोचना चाहिए था मिस चौधरी। अब चलिए मेरे साथ बकवास मत कीजिए सारे कामों को समझ लीजिए कहते हुए उसे उठाता और कहता है, चलिए पहले साइट पर जाना। दीप्ति उसके पीछे पीछे चली जाती है।
तानिया जब 7 फ्लोर पर आती है तो वह ध्यान ठाकुर का ऑफिस पूछती है। लेकिन सभी लड़कियां उसे देखती है जैसे कोई एलियन देख रही हो। तानिया मन मे कहती है, "सबकी सब पागल है क्या??
उन मे से एक आकर पूछती है,"आप को सर से क्या काम है? तभी पीछे से किसी की कठोर आवाज़ आती है,"आप लोग यहां किस सब्जी क़ो बेचने के लिए इक्क्ठा हुए है। सभी लड़कियां जैसी ही ये आवाज़ सुनती है, बिना पूछे मुड़े ही, सभी डर कर अपने अपने टैक्स पर वापस चली जाती है। तानिया भी आवाज़ सुनकर डर जाती है और वो भी पीछे नही मुड़ती और अपने मे कहती है, भोलेनाथ!! ये कौन सा ड्रेकुला है !! आवाज़ ही इतनी डरवानी है पता नही खुद कैसा होगा।
मिस तानिया मिश्रा !! अपना नाम सुनकर वो घूमती है तो सामने देखते है और मन मे कहती है, ध्यान ठाकुर !! यह फाइल मुझे मिस्टर अयान चतुर्वेदी ने दिया है। ध्यान वह फाइल लेते हुए कहते हैं आइए ऑफिस में। उसके साथ उसके ऑफिस में चली जाती है।
इधर आराध्या भटकते हुए 11 फ्लोर पर पहुंचती है जहां कोई कहीं ना कहीं नहीं था वह फाइल लेकर इधर-उधर देखती है कि उमाशंकर जी कहां मिलेंगे उसे लेकिन उसे उमाशंकर जी नहीं मिलते है। तब जाकर वह सीधे एक केबिन में घुस जाती है, और वहां पर पुकारना शुरू कर देती है उमाशंकर जी उमाशंकर जी।
धनंजय जो वॉशरूम गया था उसकी आवाज सुनकर कहता है," यह फिर से वही आवाज कहीं वही लड़की तो नहीं आ गई। जैसे ही वह वाशरूम से निकलता है उसकी नजर आराध्या पर जाती है जो इधर-उधर देखकर उमाशंकर को ढूंढ रही होती है। धनंजय उसकी तरफ देखकर अपने दोनों हाथों को पॉकेट में डालते हुए कहता है। मिस पिलर। आराध्या उसकी तरफ देख कर कहता है मिस्टर डायनासोर।
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