Love without wish Chapter-36
- 29 June, 2026
अब सबके लिये अजीब समस्या आ गयी थी।वो क्या कहे! तब गोपी जी ने कहा, जो मर्जी हो वही करो। लेकिन आराध्या को तलाक देने की इजाजत मै नहीं दूँगा। उनकी बात पर कोई क्या जबाब देता। धनंजय ने तिरछी मुस्कान के साथ वसुधा की तरफ देखा और कहा, अब आप यही रहेगी। उसकी बात पर वसुधा के नाना और नानी ने कहा और बेटा हम भी। हाँ नानी आप भी। चलो फिर मुझे अपना कमरा दिखा दो, वसुधा की माँ ने कहा !!
धनंजय ने अयान से कहा, तुम मेरा मुँह क्या देख रहे हो अयान कमरा दिखाओ मेरी नानी और नाना के लिये और मेरे मोम डैड को उनका कमरा दिखा दो। मै भी थक गया हूँ, डिनर पर बात करेंगे, कह कर वो सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगता है।वसुधा मुस्कुराते हुए धनंजय की तरफ देख रही थी।
एक मिनट !! धनंजय.........!!!!!
धनंजय की बात सुन कर जहाँ पूरा ठाकुर परिवार सदमे मे था। कोई कुछ बोलता लेकिन आराध्या ने सबको शांत करवा रखा था। धनंजय ने अपनी बात रख कर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। तभी आराध्या ने कहा, रुक जाईये धनंजय!!
धनंजय ने मुड़ कर आराध्या की तरफ देखा और कहा," कमरे मे बात करेंगे आराध्या ! अभी मै बेहद थक चुका हूँ। चलो कमरे मे !"
आराध्या ने आगे बढ़ कर कहा, किस कमरे मे आप जा रहे है धनंजय ! उसकी बात सुनकर वसुधा के साथ साथ धनंजय भी हैरानी से उसकी तरफ देख ने लगते है। धनंजय ने गुस्से मे कहा, माना तुम बत्तमीज हो आराध्या और मैंने तुम्हारी बतमीजी पर कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन ये क्या तरीका है, जो तुम मेरी बात नहीं सुन रही हो। चलो कमरे मे कह कर उसकी हाथ को पकड़ने के लिये अपने हाथ को बढ़ाता है लेकिन आराध्या खुद को दो कदम पीछे ले लेती है।
आराध्या ने उसे घूरती हुई कहा, " आपको क्या लगता है धनंजय की आप अचानक आएंगे, अपनी माँ को लेकर और अपना हुकुम सुना देंगे और हम सब मान लेगे। तो आप बिल्कुल गलत है। ये घर दादी और दादू का है और आपका नहीं। इसलिये तेवर संभाल कर रखिये। आप को अचानक अपनी माँ पर प्यार आया और आप उनको ले कर आ गए। आ गए तो कोई बात नहीं, लेकिन किस अधिकार से आपने पापा का कमरा, अपनी माँ को देने के लिये कहा! ये घर महेंद्र ठाकुर का है और अब आपकी सुशील माँ अपने दूसरे पति के साथ रहने आयी है तो उनको कोई अधिकार नहीं है, इस घर के बेटे के कमरे मे रहने के लिये।
इसलिये अयान भैया! धनंजय जी के माता -पिता और नाना -नानी को निचे का कमरा दीजिये। दूसरी बात धनंजय जी की आपने कहा, " आप मुझे डाइवोर्स दें देंगे अगर आपकी बात नहीं मानी जाएगी तो ! लीजिये आपकी बात मान रहे है और आपकी माँ को यहाँ रहने दें रहे है !"
धनंजय ने कहा, तो अब क्या बखेरा है ! चाहे उस कमरे मे रहे या किसी और कमरे मे, रहेगी इसी घर मे। अब बात खत्म हुई। अब चलो कमरे मे, इतनी बात तो मै अपनी पत्नी की मान ही सकता हूँ। कह कर हंसने लगता है।
आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा, " इतनी जल्दी क्यों है धनंजय ! मेरी बात खत्म नहीं हुई है ! ध्यान अपने बड़े भैया का कमरा निचे कर दो। ये आज से मेरे साथ नहीं रहेंगे। " आराध्या की बात पर धनंजय ने गुस्से मे उस पर चीखता हुआ कहा, ये क्या बतमीजी है आराध्या !"
आराध्या की बात पर सुमती जी ने भी कहा, हाँ बहु ! तुम ऐसे कैसे अपने पति को बाहर दूसरे कमरे मे रहने को दें रही हो। लेकिन आगे कुछ कहती, उससे पहले गोपी जी ने गुस्से मे कहा, एक लब्ज और नहीं कहना महेंद्र की माँ ! आराध्या जो कह रही है, हमे उस पर भरोसा है। उनके साथ साथ अयान, ध्यान, प्रथम, अयानी, तानिया और दीप्ती ने भी कहा, हमें भी भरोसा है।
"जस्ट शट अप ! पत्नी है मेरी इसलिये किसी के कुछ भी कहने से कुछ नहीं होगा और तुम आराध्या, बहुत हो गयी बतमीजी, अब चलो नहीं तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा!!"
"धनंजय धमकी देना बंद करे। पत्नी तब तक थी, जब तक आपका माँ प्रेम नहीं जगा था। आप ने मुझे डाइवोर्स की धमकी दि है और मैंने आपके साथ डाइवोर्स चाहा है। तो पत्नी तब होती, जब आपके साथ रहना चाहती लेकिन मुझे खुद आपसे तलाक चाहिए।"
आराध्या की बात सुनकर सभी हैरानी से उसकी तरफ देखने लगते है। वसुधा और धनंजय एक दूसरे की तरफ देख रहे होते है, जैसे पूछ रहे हो की उन्होंने इस बात की उम्मीद नहीं की थी। इधर पूरा परिवार हैरानी से आराध्या की बात पर क्षुब्ध खड़ा था, कोई क्या कहे। लेकिन दीप्ती और तानिया चुप थी, उनको मालूम था की आराध्या ऐसे ही कुछ नहीं कहेगी। उन दोनों को देखते हुए, अयान, ध्यान और प्रथम भी चुप थे। मुकेश और दीपक और गोपी जी भी चुप थे।
लेकिन दीपा और सुमती जी गुस्से मे चीखती हुई कहा, " वो तो पागल हो गया है इसके साथ साथ तुम्हारा भी दिमाग़ खराब हो गया है। क्यों री मोरी '! अपने पागलपन मे ये क्या बकैती कर रही हो। अरे हमरी नहीं कम से कम अपने माँ पापा और ससुराल वालों का तो ख्याल रख ले !
आराध्या ने एक बार गोपी जी की तरफ देखा, उन्होंने पलकें झपका दि और सुमती जी को आँख दिखा दि। आराध्या ने गहरी सांस लीं और बहुत दिनों बाद उसने कहा, " ललिता पवार ! तुमको इस तरह चिलम चिली करने पर भी हम अपना इरादा नहीं बदलेंगे और ऊपर मौजूद हमरी माई -बाबू को और निचे मौजूद हमरे ससुराल वालों की इज्जत की दुहाई ना दो। हम सीता नहीं है जो अग्नि परीक्षा दें या घर छोड़ कर चल जाये। मर्यादा सिर्फ हमरे कंधे पर काहे देती हो ! मोरी मैय्या ! तनिक सब पर दो। अब हम बोलेगे और तुम कुछु नहीं बोलोगी। क्योंकि हम बहुत देर से खुद के माथे को ठंडा किये बैठे है तो हमको मजबूर मत करो की हम तांडव करे। अब चुप कर जाओ !"
आराध्या की बात सुनकर दीपक जी ने दीपा का हाथ पकड़ लिये और चुप रहने को कहा। आराध्या ने कहा, तो धनंजय जी ! ये फ़िल्म और टीवी सीरियल नहीं है की एक पेपर दोगे और उस पर साइन करने से तलाक हो जायेगा। बिल्कुल नहीं ! ऐसा नहीं होगा। अगर तुमने और तुम्हरी मतारी ने, मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया तो 498 होगी। जिस पर तुम्हारी पुरानी अम्मा और नए बाबू जी के साथ साथ तुम को दहेज उत्पीरण, मार -पीट और ना जाने क्या क्या धारा लगवाएंगे की तुम यहाँ रहोगे या जेल मे, वो समझ लो। और हमारी तरफ से गवाही देने के लिये बहुत लोग तैयार है।इसलिये धनंजय जी ! जिस कमरे मे जाने की तुम सोच रहे हो। उस मे कदम मत रखना। ये घर तुम्हारा है तो मेरा भी है, जब तक तलाक नहीं हो जाता।
धनंजय ने उसकी तरफ गुस्से से देखा और कहा, " क्या तुम मुझे धमकी दें रही हो आराध्या। तुमने जीतनी बातें की उसमें अभी तलाक तो फ़ाइल हुआ नहीं है, फिर तुम्हारी बात मै क्यों मानु ? चलो एक बार तुम्हारी बात मान भी लूँ तो तलाक के बाद तुम्हारा हक नहीं है की तुम इस घर मे रहो। तो निकलो यहाँ से। "
आराध्या ने उसकी तरफ घूरा और व्यंग्य से हँसते हुए कहा, क्या बात है धनंजय जी ! अपनी माँ की संगति मे क्या आये दिमाग़ घास चरने चली गयी क्या ? "तलाक के एवज मे लड़की को कुछ मिलता है, जिसे क्या कहते है, गुजारा भत्ता !! एक तो ये घर आपका नहीं है। आपकी ये चाहत है की मै फिर भी यहाँ से निकल जाऊ तो जिनका घर है, उनसे पूछ लेती है।
"दादू !मुझे धनंजय से तलाक के एवज मे, इस घर मे उसी कमरे मे रहने का अधिकार चाहिए, जिसमे मै रह रही हूँ। क्या आप देंगे ?"
गोपी जी ने उसके सर पर हाथ रखते हुए कहा, तू आज से इस घर की बेटी है और इस घर पर और यहाँ के हर हिस्से पर तेरा उतना ही हक है जितना धनंजय को है।
अब गोपी जी ने अपने कठोर आवाज़ मे कहा, " धनंजय तुमने ऐसा क्यों किया! ये नहीं पूछुंगा लेकिन अगर तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहती है तो जबरदस्ती तुम्हें मै करने नहीं दूँगा। जिस दिन आराध्या चाहेगी की तुम उसके कमरे मे आओ। उसी दिन तुम ऊपर वाले हिस्से मे रहोगे। और एक बात तुम दोनों सुन लो। आज तलाक का जिक्र हो गया, दोबारा नहीं. होना चाहिए।
आराध्या तुम अपने नीजी जीवन मे स्वतंत्र हो फैसला लेने के लिये। जब तक तुम नहीं चाहोगी, तब तक धनंजय तुम्हारे कमरे मे नहीं जायेगा। अब तो तलाक की बात नहीं करोगी। आराध्या अपनी आँखे बंद कर लेती है... नहीं दादू ! बस यही. चाहिए। फिर गोपी जी ने कहा, ध्यान, धनंजय का कमरा भी निचे वाले हिस्से मे कर दो।
धनंजय ने कुछ कहना चाहा। उस से पहले ही गोपी जी ने हाथ दिखा कर कहा, बूढा हुआ हूँ लेकिन अभी गोपीकांत ठाकुर हूँ। जितना कह दिया। उतना ही मानो। बहुत तमाशा हो चुका है।
धनंजय गुस्से मे, वसुधा के कमरे मे घूम रहा था। देखा मोम ! आपने उस लड़की की हिम्मत, उसे क्या लगता है की मै उसकी इस हरकत पर परेशान हो जाऊंगा और उसके पीछे पीछे अ जाऊंगा। ऐसा नहीं होगा। उसको तो कल बताऊंगा की अपने पति को छोड़ने का अंजाम क्या होता है।
वसुधा ने मुस्कुराते हुए कहा, हाँ ! कल इस इन ठाकुर परिवार की दिन और रात हम खराब करेंगे। अभी आराम करो जाओ। कल नई शुरुवात होगी। धनंजय के साथ साथ वसुधा और रणवीर भी मुस्कुरा देते है। धनंजय उस कमरे मे चला जाता है, जो उसे अभी मिला था।
इधर वसुधा ने जल्दी से किसी को फोन किया। बताओं क्या खबर है? उधर से कुछ कहा गया। जिसे सुनकर उसने कहा, नहीं ! ढूढो ढूढो उसे, वो हमारे हाथ से नहीं निकलना चाहिए।हमारे जीत का रास्ता है वो। ये कह कर वसुधा फोन काट देती है। रणवीर ने उससे कहा, क्या हुआ ? उसने गुस्से मे अपने हाथों पर हाथों को मारते हुए कहा, बहुत चालाक है वो। ना जाने कहाँ निकल गया है। "अरे तुम फ़िक्र मत करो जायेगा कहाँ ? मिल ही जायेगा। आओ जरा खुद को थोड़ा आराम दो।
आराध्या तेजी से कमरे मे जाती है और दरवाजा बंद कर के, उसी से लग कर रोने लगती है। अपने सीने पर हाथ रखी हुई.. उसके आंसू गिरे जा रहे होते है। ये क्या कर रहे हो ठाकुर ! धनंजय को याद कर के उसके आखों से आंसू रु नहीं रहे थे। उसे समझ मे नहीं अ रहा था की वो क्या करे? खुद मे सोचती हुई.... उसका सर दर्द से फटा जा रहा था। तो क्या उस दिन जो मैंने तुम्हें देखा था वो सच था ठाकुर। तुमने मुझसे झूठ बोला। मुझे अपनी मोहब्बत की झूठी जाल मे इसलिये उलझाए रखा ताकि तुम ये कर सको। बहुत गलत किया तुमने ठाकुर। ये कहती हुई वो अपने आखों के आंसुओ को पोंछ लेती है। तुम्हें मै बताउंगी धनंजय ठाकुर की आराध्या चौधरी के दिल से खेलने की क़ीमत कैसे चुकानी पड़ती है। तुम्हें लगा की मै टूट कर रोने लगूंगी। बेहद गलत सोच लिया तुमने मेरे बारे मे।
तभी दरवाजे पर उसके दस्तक होती है। वो खुद को संभालती हुई खड़ी होती है और दरवाजा खोल देती है। सामने अयान -दीप्ती, धयान -तानिया और प्रथम -अयानी खड़े होते है। तानिया के हाथ मे चाय की कप होती है। आराध्या एक तरफ हो जाती है और सब अंदर आ जाते है। प्रथम दरवाजा लगा देता है।
आरू तू ठीक है ना ! हाँ भाभी आप ठीक है ना ! ध्यान और तानिया ने आराध्या की तरफ देख कर कहा। अयान ने परेशानी मे कहा, मुझे तो यकीन नहीं होता है की ये हमारा धनंजय है। ये तो कही से नहीं लगता है की हमारा धनंजय है। उसकी बात अयानी ने कहा, हाँ ! आज पहली बार भाई ने बार बार भाभी को ठकुराइन की जगह आराध्या कह कर पुकारा। उन्हें देख कर लग ही नहीं रहा था की सुबह वाले भाई जो थे और शाम वाले वाले भाई दोनों मे बेहद फर्क है। प्रथम ने कहा, आज कल वो सब काम अकेले करने लगा था। कब आता था और कब जाता था ? मुझे शामिल तक नहीं करता था।अचानक ऐसा क्या हो गया की पंद्रह साल पुराना नफ़रत उसकी खत्म हो गयी। उसकी बात पर अयान ने भी कहा, समझ तो मुझे भी नहीं अ रहा है।
सभी आपस मे ही धनंजय के बदलते व्यवहार पर बात कर रहे थे। तभी अयान के नंबर पर फोन आता है। बीना देखे हुए वो फोन उठा लेता है और उधर से उसे कुछ कहा जाता है। जिसे सुनकर अयान ने अचानक से कहा, व्हाट? आर यू स्योर वकील साहब !! ठीक है, हम कल बात करते है, आप मुझे उसकी कॉपी अभी भेज दीजिये।
अब सबकी नजर अयान पर जाती है। आराध्या की भी नजर अयान की तरफ जाती है। प्रथम ने तेजी मे पूछा, बताओं वकील ने ऐसा क्या कहा की तुम्हारे होश उड़े हुए है। अयान ने उसकी तरफ देखा और फिर आराध्या के पास अ कर बैठ गया। आराध्या उसकी तरफ देख रही थी। अयान ने कहा, भाभी ! मुझे नहीं पता की ऐसा क्यों किया धनंजय ने। क्योंकि आज के उसके व्यवहार को देख कर, इस बात पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है।
"वकील का फोन आया था। जो कह रहा था की दस दिन पहले धनंजय ने अपनी पावर ऑफ़ अटेरनी आराध्या के नाम के दि है।" उसकी बात पर आराध्या ने कहा, आपको मालूम नहीं है की अब हमारे देश मे पावर ऑफ़ अटर्नी का महत्व नहीं है।' हाँ ! ये बात मालूम है भाभी ! लेकिन पावर ऑफ़ एटरनी का मतलब ये हुआ की धनंजय ने सब कुछ आपके नाम कर दिया है। वो भी दो महीने पहले ही। दस दिन पहले उसने ये किया है की बीना आपकी अप्रूवल के कोई कुछ नहीं कर सकता, यहाँ तक की धनंजय भी नहीं !"
अब सवाल ये उठता है की उसने जब सब कुछ पहले से तय कर रखा था तो आज जो कर रहा है, वो क्या है? अयान की बात पर ध्यान ने कहा, कही भाई की कोई मजबूरी तो नहीं। कही इस वसुधा ने कुछ ऐसा तो नहीं किया, जिसके कारण भाई इस तरह से उसकी बात मानने पर मजबूर हो गए। धयान की बात सुनकर एक बार फिर सब खामोश हो जाते है।
इधर रिंकू और दीपा जी ने रोती हुई सुमती जी के पैरों को दबती हुई कहा, अम्मा जी ! इतना मत रोवो, सब भोलेनाथ ठीक करेंगे। तबियत खराब हो जाई आपका। शांत हो जाओ अम्मा ! सुमती जी ने रोते हुए कहा, लेकिन आज जो हुआ, उससे हमारा घर बिखड़ जायेगा बहुरिया। जिस पोते पर हम को भरोसा था की वो सब संभाल लेगा। आज उसी ने सब कुछ बिखेर कर रख दिया। ले आया उस डायन को घर, जो सालों पहले हमारे परिवार को खा गयी थी। उस समय हमारी हड्डीयाँ बूढी नहीं थी और हमने सब संभाल लिया। लेकिन अब हमारी हड्डीयो मे ताकत नहीं है। इस टूटे हुए घर को अब हम नहीं संभाल पाएंगे। क्योंकि घर का चिराग ही आग लगाने पर आमादा है। "
सुमती जी को यू रोते बिलखते देख कर दीपा जी उनको पानी पिलाती है। गोपी जी चुप होकर बैठे थे और उनके पास मुकेश और दीपक जी मौजूद थे। सुमती जब चुप नहीं हुई तो गोपी जी ने कहा, " शांत हो जाओ महेंद्र की माँ ! हमें आराध्या बहु पर पूरा भरोसा है। आज पहली बार उस बच्ची को शांत और विचलित देखा। आज उसे देखा की किस कदर वो ताकत विहीन खड़ी थी लेकिन फिर भी उसने संभाल लिया। तुम अगर ऐसे ही रोती रही और जिस तरह से उसे परेशान किया। वैसे मत करना। अब जो भी करना होगा, वो बच्चे ही करेंगे। धनंजय की अक्ल को ठिकाने सिर्फ आराध्या ही लगायेगीं। हमें बस अपनी बहु का साथ देना होगा और उस पर विश्वाश करना होगा।मेरी इन बूढी आखों ने बहुत दुनिया देखी है और मुझे सहीं गलत की परख है। इसलिये आज मैंने आराध्या बहु की मन की उसे करने की छूट दें दि।
गोपी जी की बात सुनकर सभी उनकी तरफ देखते है।दीपा जी ने भी उनकी बातों को सुनकर कर कहा, " हाँ अम्मा ! बाबू जी ठीक कह रहे है। हमरी बड़की मौरी! ऐसे तो चुप रहने वाली मे से नहीं है। आज जो उसने छुपी कर रखी थी, तो जरूर उका दिमाग़ मे कुछ खिचड़ी पक रही होगी। सुमती जी ने भी सबकी बातों पर गौर किया और कहा, " अगर आप सबको आराध्या पर भरोसा है तो मुझे भी भरोसा है। अब मै भी देखूगी की वो कैसे सब कुछ संभालेगी।
ऊपर आराध्या क कमरे मे सभी ने ध्यान की बात पर गौर किया। तभी आराध्या तेजी से अलमीरा की तरफ बढ़ जाती है, जैसे उसे कुछ याद आया हो और धनंजय क लॉकर को खोलती है। पासवर्ड उसका जन्मदिन था, इसलिये आसानी से लॉकर खुल चुका होगा। उसमें एक लिफाफा था, जिस के ऊपर मे लिखा था " मेरी ठकुराइन "!!!
सभी आराध्या की तरफ देखते है। आराध्या के हाथ उस लिखें नाम पर घूमने लगते है और उसके आखों के आंसू उस लिफाफे पर गिरने लगती है। तानिया और दीप्ती उसके पास आती है। क्या हुआ आरू ! कहती हुई उसके कंधे पर हाथ रखा। आराध्या ने अपनी आँखे बंद किये हुए कहा," कुछ देर के लिए मुझे अकेला छोड़ दो आप सब। कल बात करुँगी !" तानिया ने कुछ कहना चाहा लेकिन ध्यान ने उसके कंधे पर हाथ रखा और ना मे अपना सर हिला कर कुछ कहने से मना कर दिया।
दीप्ती और तानिया ने उसे गले लगा कर कहा, तू फ़िक्र मत कर सब ठीक हो जायेगा। कोई जरूरत हो तो हमें बुला लेना।हम्म्म्म कह कर आराध्या ने अपने सर को हिला दिया। एक एक करके सभी लोग चले जाते है और अयानी धीरे से दरवाजा बंद कर देती है।
उनके जाते ही आराध्या जमीन पर बैठ जाती है। फिर उस लेटर को खोल कर पढ़ने लगती है। जैसे जैसे उस मे लिखें शब्द को वो पढ़ती जाती है। उसके आखों से आंसू गिरते जा रहे थे।
तानिया और ध्यान जब कमरे मे आते है तो तानिया तेजी से ध्यान की सीने से लग कर रोने लगती है। ध्यान उसकी हालत समझ रहा था। उसे मालूम था की तानिया और आराध्या दोनों बचपन की दोस्त है और दोनों क्या तीनों एक दूसरे की आत्मा से जुड़ी हुई है। आज आराध्या की ख़ामोशी उसे भी तोड़ रही थी क्योंकि उसने आराध्या को हमेशा हर मुश्किलों पर खड़े होते और लड़ते देखा है। शांत हो जाओ तानी ! भाभी ठीक हो जाएगी। मुझे पूरा भरोसा उन पर। तुम अगर ऐसे टूटी तो भाभी का साथ कैसे दोगी।
ये कह कर ध्यान ने तानिया के चेहरे को हाथों मे लिया फिर उसके होठो पर अपने होठो को रख दिया।तानिया के भी हाथ उसके गर्दन पर चले आये। ध्यान ने उसके होठो को छोड़ उसकी कानों के पास अपने लबों को रख कर कहा, " सब कुछ महाकाल पर छोड़ दो। खुद को शांत करो और नई सुबह का इंतजार करो। ये वक़्त भी बीत जायेगा। " कह कर उसके गर्दन पर अपने होठो को उसने रख दिया। तानिया भी अपनी बेचैनी कम नहीं हो रही थी। ध्यान ने उसे बाहों मे उठा कर बिस्तर पर ले गया। ध्यान अभी मेरा मन नहीं है, ये सब करने का। पागल लड़की मै तो बस तुम्हारे दिमाग़ से ये बातें निकलना चाह रहा हूँ क्योंकि हम अभी कुछ नहीं कर सकते है। कल की सुबह मालूम होगी की आगे क्या करना है हमें ! तब तक के लिये खुद को शांत करना होगा ना और मेरे मुताबिक ये तरीका सबसे बेहतर है, मानसिक शांति के लिये।
ध्यान की बात पर तानिया कन्वेन्स नहीं होती है। लेकिन ध्यान ने उसकी बात को नजर अंदाज कर दिया और उसके होठो को फिर से अपने होठो मे दबा लिया। तानिया उसकी करीबी से खुद को अलग नहीं कर पायी और वो भी उसका साथ देने लगी।
इधर दीप्ती गुस्से मे इधर से उधर पुरे कमरे मे चक्कर काटती हुई कुछ ना कुछ बोली जा रही थी। अयान जो कब से उसे देख रहा था। सीधे उठ जाता और उसे बाहों मे भर कर बिस्तर पर आ कर लेट जाता है।ये क्या कर रहे तुम ! दीप्ती ने उसे घूरते हुए कहा। वही कर रहा हूँ जो जरूरी है। जब सवाल सामने हो तो उसे हल करना चाहिए। लेकिन उसके लिये खुद को परेशान करने की जगह मजबूत करना जरूरी है। तो खुद को आराम दो। फिर उसे बाहों मे भर कर, उसके बालो को सहलाने लगता है।
अयानी सीने लगी हुई प्रथम से कहा, " आज का दिन सबसे खूबसूरत और याद होता लेकिन देखो क्या हो गया! प्रथम ने उसे बाहों मे भरे हुए उसके माथे को चूम कर कहा, इस तरह से परेशान होने से कुछ नहीं होगा अयानी। अब तो बस ये समझना है की धनंजय ने ये किया क्यों ? और हमारे सारे सवालों का जबाब हमें कल सुबह मिलेगा। अभी चलो सो जाओ। लेकिन मुझे नींद नहीं आएगी। ये तो अच्छा हुआ की धनवी यहाँ नहीं है और उसे कुछ नहीं मालूम है। प्रथम ने उसकी बात पर सहमती जताते हुए उसे अपनी बाहों मे लिये हुए, बिस्तर पर लेट गया।
उज्जैन सिंह निवास...
भोपाल हुई सारी बातों से बेखबर धनवी घबराई -सिमटी हुई सी, कमरे मे बैठी हुई थी। संकल्प जब आया तो बिस्तर पर उसे यू बैठे देख कर उसने मुस्कुरा दिया और फिर उसके करीब आ कर बैठ गया। संकल्प का अहसास होते ही धनवी ने खुद को और समेट लिया। उसे यू खुद को समेटा हुआ देख कर, संकल्प धीरे से उसके पास आता है और उसके चेहरे पर से घुघट हटा देता है।
कुछ पल के लिये उसकी नजर मासूमियत से भरी नाजुक सी धनवी पर आ कर रुक जाती है। उसकी झुकी पलकें, काँपते होंठ, संकल्प को मदहोश कर रही थी। धनवी अपने संकल्प से इस तरह घबराओगी तो हम बातें कैसे करेंगे। उसकी बात पर धनवी हैरानी से उसकी तरफ देखती है। उस ने उसे मुस्कुरा कर कहा, माना की पहली नजर की मोहब्बत हुई है तुमसे और मुझे मेरी मोहब्बत हमेशा के लिये मिल गयी। इस बात की ख़ुशी है। लेकिन इसका मतलब ये तो बिल्कुल नहीं है की हम शादी के साथ ही पति पत्नी का संबंध बना ले। कुछ वक़्त जरूरी है, जहाँ तुम पूरी तरह से तैयार हो. सको और फिर हम रिस्ते को बढ़ाये तो वो ज्यादा गहरा और खूबसूरत होगा।
धनवी ने मुस्कुरा कर कहा, " क्या आप सच कह रहे !" हाँ मेरी डॉल !बिल्कुल सच कह रहा हूँ। सब चलो कपड़े बदल लो। फिर मुझे तुम्हें अपनी बाहों मे भर कर महसूस करना। धनवी ने शर्मा कर अपना सर हाँ मे हिला दिया।फिर संकल्प ने उसके हाथों को थाम लिया और उसे लेकर वो वाशरूम की तरफ भेजते हुए कहा, तुम अंदर जाओ। मै कपड़े निकाल देता हूँ।
कुछ देर बाद संकल्प ने अपनी बाहों मै लिये धनवी के माथे को चूमते हुए कहा, बहुत बहुत शुक्रिया मेरी जिंदगी मे आने के लिये। धनवी ने भी अपने चेहरे को हल्का ऊपर कर उसके माथे को चूमते हुए कहा, आपका भी शुक्रिया मुझे अपनी जिंदगी बनाने के लिये ! दोनों मुस्कुराते हुए एक दूसरे को बाहों मे भर लेते है। संकल्प धीरे से उसके होठो पर अपने होठो को रख देता है। दोनों आज बेहद सुकून से एक दूसरे के होठो को चूम रहे होते है।
ठाकुर हवेली..... आराध्या रोती रोती जमीन पर बैठी हुई बिस्तर से टेक लगायी हुई सो चुकी होती है। आधी रात को एक काला साया उसके कमरे मे आता है। उसको यू निचे बैठे बैठे सोया देख कर धीरे से उसके करीब आ कर उसे बाहों मे उठा लेता है और बिस्तर पर बेहद आराम से सुला देता है।
आराध्या के गालों पर गिरे आंसू जो सुख चुके होते है। उस को हल्के अंगूठे से छू कर महसूस करता है। फिर उसके माथे पर अपने होठो को रख कर, उसे कंबल ओढ़ा देता है। कुछ देर तक उसे निहार कर जैसे ही जाने लगता है। आराध्या के हाथ उसके हाथों को थाम लेती है। एक पल को साया घबरा जाता है और वो मुड़ कर देखता है तो आराध्या गहरी नींद मे थी। उसे देख कर वो गहरी सांस लेता है और धीरे से झुक कर उसके हाथों खुद से छुड़ाने लगता है।
आराध्या नींद मे ही उसे कस कर पकड़ लेती है.... ठाकुर ! ठाकुर ! उसके मुँह से ये सुनकर उस साया ने खुद को उससे छुड़ाना बंद कर दिया और उसकी बगल मे उसे बाहों मे भर कर लेट गया।उसके लेटते ही आराध्या उसके सीने मे सिमट गयी...। जैसे नींद मे उसको उसका सुकून मिल गया हो।
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