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Love without wish Chapter-27

Love without wish Chapter-27

धनंजय आरध्या के हाथों से जूस का गिलास लेते हुए उसे पीं लेता है। अरे यू जूठी है मेरी। तो मै भी तो तुम्हारा हूँ। अच्छा ये बताओं तुम मुझे बालकनी से कैसे लटका सकती हो !! फिर सोचते हुए कहता है और तुम मुझे अपनी नाजुक कंधो उठाओगी कैसे? ये कह कर उसकी तरफ झुकने लगता है। आराध्या अपने मन मे सोचती है, " क्या उमापति जब भी कुछ करती हुई। इसे मेरे पीछे रखना जरूरी है क्या? क्या आपको मुझ पर कभी दया नहीं आती।  जो इस डायनाशोर के आगे भेंक देते हो। अजीब अजीब प्यारे से भाव बनाते हुए, वो मन मे सोच रही थी की तब तक उसके गालों पर धनंजय के गीले होठो के स्पर्श से वो हकीकत मे आती है। कर लीं अपने उमापति से मेरी शिकायत, कहते हुए धनंजय बची हुई जूस पीं लेता है। तुम एक नंबर के छिछोरे हो ठाकुर !! जब ना तब मुझे छूते रहते हो। अब अगर मेरे करीब आये तो.......!! तो.... ठकुराइन....!! तो... ठाकुर !! अब बात पूरी भी कर दो ठकुराइन !! तो मे तुम्हे दाल की दलघोटनी की तरह पीस दूँगी। कह कर जाने लगती है। तभी उसके हाथों कों पकड़ कर वो अपने करीब खींच लेता है। जिससे वो सीधे उसके सीने से टकरा जाती है। दोनों की नजर आमने सामने होती है।

दूर से देख रहे बिजलानी, सिंह और राठौर परिवार अपने गुस्सै का घुट पीं रहे होते है। लेकिन सब अभी बेबसी से देखने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे। क्योंकि सबको मालूम था सीधे धनंजय ठाकुर से उलझने का मतलब खुद कों बर्बाद करना था। तभी मिस्टर बिजलानी अपनी बेटी अंतरा के कानों मे कुछ कहते है। अंतरा मुस्कुरा देती है।

इधर धनवी जैसे ही संकल्प का हाथ पकड़ लेती है तो वो रुक जाता है और उसकी तरफ मुड़ कर देखते हुए कहता है, " क्या बात धनवी !! धनवी उसकी करीब आ कर कहती है, आपको मुझसे क्या बात करनी थी? वो मुस्कान लिए कहता है, पहले ये बताओं मेरे करीब आने से तुम्हें परेशानी महसूस होती है। वो अपना सर ना मे हिला देती है। लेकिन अभी तुम्हारे चेहरे पर घबराहट थी उसका क्या मतलब था ? उसकी बात पर धनवी थोड़ी देर चुप रहती है और फिर कहती है, " आप अचानक मुझे ले आये तो मुझे समझ मे नहीं आया और कोई बात नहीं थी। अब आप बता दीजिये ना की क्या बात करनी थी आपको मुझसे !! ये पूछते हुए धनवी की नजर बेचैनी से उसकी तरफ देखने लगती है। संकल्प उसकी आखों की बेचैनी देख कर उसकी टुढी कों पकड़ कर ऊपर उठाता है और कहता है, " क्या इस बेचैनी का मतलब ये समझू की तुम्हारे दिल मे भी वही अहसास है मेरे लिए जो मेरे दिल मे है। " उसकी बात सुनकर धनवी की नजर शरम से निचे झुक जाती जाती है। उसकी ये अदा देख कर संकल्प उसे खींच कर बाहों मे भर लेता है और अपने दोनों हाथों से उसको समेट कर आँखे बन कर लेता है। कुछ देर तक दोनों एक दूसरे कों महसूस कर रहे होते है। तभी धनवी के कान मे संकल्प की आवाज़ आती है। जानती हो '!! बारात वाले दिन तुम पहली नजर मे पसंद आ गयी थी मुझे। मुझे लगा की ये आकर्षण होगा इसलिये दोबारा तुमसे मुलकात या बात करने कों कोई कोशिश नहीं की। इसी बिच मैंने ये समझा की तुमसे आकर्षण नहीं प्यार है मुझे। और जब अहसास हुआ की मोहब्बत हो गयी है तुमसे से तो यहाँ चला आया।

उसकी बात सुनकर धनवी अपना चेहरा उसके सीने से निकाल कर मुस्कुरा देती है। संकल्प उसके चेहरे कों हाथ मे भर कर कहता है, " क्या तुम नहीं कुछ कहोगी !!" वो मुस्कुराते हुए कहती है, बिल्कुल नहीं !! संकल्प उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देता है और उसके माथे कों चूम लेता है। धनवी उसकी छुवन से अपनी आँखे बंद कर लेती है। वो अपने होठो कों उसके माथे पर लगाये हुए कहता है, " जबाब तो तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान ने दें दिया। इजहार तुम्हारी जुबान से सुनने का इंतजार करुँगा। दोनों मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ बढ़ जाते है।धनवी कहती है, आप आगे जाइये। मै आपके पीछे चलती हूँ। हम कहीं दूसरी जगह आये है और मै नहीं चाहती की किसी की नजर मुझ पर जाये और मेरे भाई और परिवार का नाम खराब हो। संकल्प उसकी बात पर कहता है, वैसे मै इस चीज के बिल्कुल खिलफ हूँ की इज्जत की चादर सिर्फ बेटियों के ऊपर क्यों होनी चाहिए। ये जिम्मेदारी बेटों के कंधे पर भी होनी चाहिए। लेकिन छोड़ो इन बातों कों। तुम्हारी बात अभी मान रहा हूँ लेकिन बहुत जल्द ये समस्या ही खत्म कर दूँगा। जल्दी आना, ये कहते हुए संकल्प आगे बढ़ जाता है और धनवी उसकी कहीं बात पर मंद मंद मुस्कुरा देती है।


अवनी जो धनंजय के साथ आराध्या की शादी की बात सुनकर वैसे ही खार खायी बैठी थी और उसकी दोस्त नताशा दलाल जो कब से अयान कों चाहती थी। दो दिन पहले ही लंदन से, वो ये सोच कर आयी थी की अब अयान कों परपोज़ करके उससे शादी कर लेगी लेकिन ये देख कर की अयान ने शादी कर ली है। उसका गुस्सा भी सातवें आसमां पर था। दोनों उन चारों के सामने आ जाती है। अवनी और नताशा कों देख कर ध्यान और अयान का मुँह बन जाता है। अवनी ध्यान कों देखते हुए कहती है, " क्या बात ठकुर परिवार का टेस्ट इतना खराब कैसे हो सकता है। जो ऐसे घर की लड़की से रिश्ता बना बैठे है।तुम्हें पता है नताशा :!! ये दोनों मिडल क्लास से आती और इनकी वो लीडर भी, जिसने मुझसे मेरे बचपन की मोहब्बत कों चुरा लिया। इनलोगो कों आये हुए दो महीने भी नहीं हुई लेकिन देखो इन्होने कितना लम्बा शिकार मारा है। वैसे ऐसा क्या किया था तुम तीनों ने की ठाकुर परिवार के तीनों बेटे, पूरी दुनिया कों छोड़ कर तुम पर फ़िदा हो गया और तो और शादी भी कर ली। उसकी बात पर नताशा कहती है, अपनी खूबसूरती का जाल बिछायी होगी। फिर वो अयान की तरफ देखते हुए कहती है, " तुम तो ऐसे नहीं थे अयान। किसी लड़की की तरफ देखते तक नहीं थे। सबमें सिर्फ मै ही तुम्हारी दोस्त थी। जिससे तुम प्यार करते थे, लेकिन तुमने मुझे छोड़ कर इससे कैसे शादी कर ली।अवनी कहती है, अरे छोड़ ना यार !! अभी तो कहा ना हुस्न के जाल मे फंसाया है और क्या? 

उसकी बात पर ध्यान कुछ कहता लेकिन उसके बदले दीप्ती आगे बढ़ कर कहती है, सोचो तो जरा हमारी खूबसूरती मे क्या ताकत है। इतने बड़े खानदान के बच्चे हमारे पल्लू मे बांधे चले आये। ये काबिलियत भी तो खानदानी होती है क्योंकि तानी !! उस पर तानिया मुस्कुरा कर कहता है, " नहीं दीपि !! ये बात इनके समझ मे नहीं आएगी। ये पैसे वाली लड़कियों मे ये काबलियत होती कहाँ है। हम मिडिल क्लास लड़कियों की तरह जो अपनी अदाओ से ठाकुर परिवार के बेटों कों दीवाना बना कर, अपनी उंगलियों पर नाचने की काबलियत रखती है। उन दोनों की बात सुनकर ध्यान और अयान मुस्कुरा देता है। अवनी और नताशा उन दोनों कों. मुस्कुराते देख कर गुस्से मे कहती है, " क्या हो गया तुम लोगों कों, सुन नहीं रहे हो की क्या कहा इन दोनों ने और तुम दोनों हँस रहे हो। ये दोनों घटिया लडकियाँ आज तुम्हें फंसाया है और कल. कों तुमसे कोई बड़ा पैसे वाला होगा। तो तुम्हें भी छोड़ कर उन्हें पकड़ लेनी। इन सबका.......!!!

बस..... एक शब्द और नहीं... ये कहते हुए ध्यान और अयान दोनों की आँखे कठोर हो जाती है। अयान कहता है, आगे के शब्द अपने अंदर रखो तुम दोनों नहीं तो बोलने लायक नहीं छोरुँगा। उसके बाद ध्यान कहता है, हम बीबी के गुलाम है और इनकी पल्लू मे बंधे रहना चाहते है। अगर तुम दोनों कों तकलीफ जाओ कहीं जा कर डूब मरो। ये कह कर दोनों दीप्ती और तानिया के साथ निकल कर चले जाते है। उन दोनों की बात सुनकर अवनी कहती है बहुत महंगा पड़ेगा। तुम दोनों कों ध्यान और अयान.....!!

अयानी गुस्से मे प्रथम से बात नहीं कर रही थी। प्रथम सबकी नजरों से बच कर उससे बार बार बात करने की कोशिश कर रहा था। अयानी की आखों मे आंसू आ गए थे। प्रथम उसकी आखों देख बेचैन हो गया था। इसलिये सबसे बच कर वो उसका हाथ पकड़ कर एक कोने की तरफ ले जाता है।अयानी के चेहरे कों हाथ मे भर कर कहता है, " क्या बात है बाबू !! तुम ऐसे क्यों नाराज हो। " क्यों ना नाराज हूँ आप बताईये प्रथम !! आखिर कब तक आप ये बात छिपाने वाले है। अगर हिम्मत नहीं थी मोहब्बत कबूल करने की तो करते नहीं मुझसे !! या आप मेरे साथ खेल रहे है।

प्रथम अयानी के आखिरी बात सुनकर बेहद गुस्से मे आ जाता है और वो आयानी कों कहता है, यही बात मेरी आखों मे देख कर बताओं अयानी की क्या मेरी मोहब्बत खेल है !!

धनंजय आरध्या कों सीने से लगाये हुए, दोनों एक दूसरे कों देख रहे थे। तभी कुछ बिजनेस मेन अपनी अपनी पत्नियों के साथ उनके पास आ जाते है। क्योंकि जब से उन्हें मालूम हुआ है की धनंजय की शादी हो चुकी है तो अपनी बेटियों कों सेट करना का ख्याल छोड़ कर, अपनी पत्नियों के साथ आटे है की आरध्या के. साथ उनकी पत्नियां अपनी नजदीकी बना पाए। क्योंकि धनंजय ठाकुर से मेल जोल सबके बस की बात नहीं थी। इस तरह कुछ लोगों कों करीब देख कर धनंजय खुद से आरध्या कों अलग करता है। लेकिन खुद के करीब ही रखा था। वो दोनों सबसे मिल रहे थे।

प्रथम अयानी की आखों मे आँखे डाल कर पूछता है तो वो रोती हुई उसके सीने से लग जाती है और कहती है, माफ कर दीजिये प्रथम !! मै थक गयी हूँ यू छुप छुप कर मिलने से। मुझे घुटन होने लगी है की क्यों मै ये बात छिपा रही हूँ। मुझे अब ये बात नहीं छीपानी है। हर वक़्त लगता है, अपने उस परिवार कों धोखा दें रही, जो मुझे प्यार करते है। आप समझते क्यों नहीं है। प्यार किया है कोई गलती नहीं की हूँ ।जो सर झुकाये चलु लेकिन आपकी वजह से मैंने ये बात अपने परिवार कों नहीं बता पा रही हूँ। प्रथम जब उसकी बात सुनता है तो उसके माथे कों चूमते हुए कहता है, " मै सिर्फ शादी तक चुप था उसके बाद बात करने वाला था। तुम जानती हो की तुम मेरे दोस्त की बहन हो इसलिये मुझे मौका देख कर बात करनी होगी। मुझे तुम भी चाहिए और मेरे दोस्त भी, इसलिये मौक़े की तलाश मे हूँ। बस कुछ दिन और वक़्त दें दो। मै बात कर लूँगा। उसके बाद जो होगा मै संभाल लूँगा। अब मुस्कुरा दो। मै तुम्हें रोते हुए नहीं देख सकता हूँ। अयानी मुस्कराते हुए कहती है, " आई लव यू प्रथम जी !!लव यू टु बाबू !! कह कर दोनों मुस्कुरा देते है और अंदर की तरफ चले जाते है।


सभी बिजनेस मेन आपस मे बातें कर रहे थे। उसी बीच आरध्या कों भी बिजनेस मेन की पत्नियों ने घेर रखा था। आराध्या उन सबसे बात करती हुई बोर हो चुकी थी और उनके बीच से निकलने की तरकीब निकाल रही थी। धनंजय उसके चेहरे के भाव देख कर समझ जाता है और इशारे से अयान और ध्यान कों कुछ कहता है। वो दोनों जो कुछ दूर पर खड़े अपने भाई भाभी कों देख रहे थे। उसके इशारे कों समझ कर आरध्या के पास आते है। ध्यान कहता है, एक्सक्यूज़ मी लेडीज!! मुझे अपनी भाभी से कुछ बात करनी है। उसकी बात सुनकर सभी मुस्कुराते हुए... आराध्या कों अकेले छोड़ देती है।

आरध्या ध्यान के हाथ कों पकड़ कर वहाँ चली जाती है, जहाँ संकल्प, प्रथम, अयानी, दीप्ती, अयान और तानिया मौजूद होते है। उन सबके बीच जैसे ही आती है कहती है, उफ्फ्फ !! बच गयी चमक चमचीयों से। प्रथम उसे जूस का गिलास हाथ मे देते हुए कहता है, इसे पीं लीजिये। अच्छा लगेगा। उसी बीच अयान और ध्यान कों कुछ बिजनेस मेन बुला लेते है। अब सिर्फ आराध्या के साथ सभी खड़े थे और बात कर रहे थे। संकल्प बार बार मुड़ कर देख रहा था। तभी आराध्या कहती है, धनवी कहाँ है? उसकी बात सुनकर सबका ध्यान जाता है। संकल्प भी परेशान होकर बाहर की तरफ जाता है और प्रथम भी परेशान हो जाता है। आराध्या संकल्प की बाजु पकड़ कर पूछती है, आपके साथ थी भाई !! संकल्प परेशान होकर कहता है, हाँ थी और मेरे पीछे आ रही थी लेकिन ना जाने किधर गयी। बहुत फ़िक्र हो रही है उसकी।

प्रथम फोन पर अपने सभी गार्ड कों एक्टिव कर देता है। आरध्या प्रथम से कहती है, भाई सामने देखिये। प्रथम उसकी बात पर सामने देखता है, जहाँ वसुधा तिरछी नजरों से धनंजय कों देख रही थी और अपने बेटे से इशारे मे कुछ पूछ रही थी। तानिया कहती है जरूर इस चुड़ैल ने कुछ किया है। उसकी बात पर दीप्ती कहती है, चुड़ैल नहीं उसके चूजे ने कांड किया है। अयानी परेशान होती हुई कहती है, भाभी !! भाई कों बता देते है। नहीं अयानी अभी नहीं तमाशा बन जायेगा हमारे परिवार का यहाँ पूरा भोपाल नहीं, भारत के बिजनेस मेन आये रखे है। इसलिये सावधानी से !! प्रथम भाई आप अयानी के साथ रहिए और अपने सोर्स से पता कीजिये। इधर हम देखते है। प्रथम कहता है, मै सीसी टीवी चेक करता हूँ भाभी लेकिन अयानी कों साथ नहीं रख सकता। सबकी नजर चली जाएगी। संकल्प कहता है, मै चलता हूँ आपके साथ। फिर उन चारों कों कहता है, प्लीज तुमलोग यही रहना। हम धनवी कों ढूढ़ लेगे। ये कह कर वो दोनों तेजी से निकल जाते है।

दीप्ती अयानी से कहती है, चेहरा ठीक करो अयानी। हम नहीं चाहते है की कोई तमाशा बने। तब तक मुड़ कर देखती है तो आराध्या दूसरी तरफ जा रही होती है। वो जल्दी आरध्या पीछे तीनों जाती है। जहाँ आरध्या एक वेटर के गले पर टूटी हुई कांच की गिलास लगाई हुई थी। तानिया कहती है, ये क्या?

आरध्या कहती है, ये वेटर वसुधा से कुछ कह रहा था। फिर उसकी तरफ देख कर कहती है, " कनकजुरे  बोलता है या तेरी गले की नश काट दू !! तानिया जलती हुई मोमबती उठा लेती है और दीप्ती वहाँ सजाये हुए डेकोरेशन से एक पर्दा फाड़ कर उसके मुँह बांध देती है। चारों इस तरह से उसे घेरे हुए खड़ी थी। जहाँ आदमी बिल्कुल नहीं थे और कोई एक दो आदमी आ भी रहे थे लेकिन वो सब ऐसे खड़ी थी की किसी कों ये लग रहा था की सभी ग्रुप मे खड़ी थी।

आरध्या उसके गले पर गिलास थोड़ा दबाते हुए कहती है, बोल। तानिया मोहब्बत उसकी हाथों पर गिरा रही थी बोल। लेकिन मुँह बंद दीप्ती और अयानी ने किया था। वो डरते हुए इशारे मे कहता है, मुँह खोलो बताता हूँ। आरध्या इशारे मे कहती है, कपड़ा हटा दो। वो आदमी घबराते हुए कहता है, मुझे ज्यादा नहीं मालूम लेकिन रूम नो 5005 मे जाईये। लेकिन जल्दी कहीं देर ना हो जाये।

आरध्या तेजी से मुड़ती है और कहती है, दीप्ती, अयानी तुम दोनों इस आदमी के हाथ बांध दो और मौका ढूढो जो बिना हल्ला किये अपने भाइयों कों खबर कर सको। तब तक मै और तानी संभालते है। दीप्ती और अयानी उसकी बात मान कर , उसके कहे अनुसार करने लगती है।

आरध्या तेजी से लिफ्ट मे जाती है। हाथ जोड़ कर कहती है, शिवशंभू बस संभाल लेना !! कुछ ही पलो मे वो 5005 कमरे के सामने आती है। लेकिन रूम बंद था। तानिया परेशान हो जाती है। आरध्या उसके बाल से पिन निकाल लेती है और कहती है, संकल्प भाई कों फोन कर और बुला। कुछ देर कोशिश करने के बाद वो दरवाजा का लॉक खुल जाता है। अंदर धनवी की चीखने की आवाज़ आ रही थी। जिसे सुनकर आरध्या घबराते अपनी कमर पर साड़ी बांधे हुए तेजी से दरवाजा खोल देती है।

सामने पांच लड़के धनवी के पैर हाथ कों बांध रहे थे। अचानक आराध्या और तानिया कों देख धनवी रोती हुई कहती है, भाभी !! आराध्या गुस्से मे उन पांचो कों घूरती है। जब तक उन पांचो कों समझ मे आता, तब तक आराध्या पास मे रखे फूलदान कों उठा कर उस लड़के कों मारती है, जो धनवी की गाउन की बाजु कों हाथ फाड़ चुका था। उसके फूलदान सीधा उस लड़के के माथे पर लगता है। चारों लड़के कहते है, हम तो एक के लिए आये थे लेकिन हमें तो दो और मिल गयी। जिस लड़के के माथे पर चोट लगी थी और खुन बह रहा था। वो गुस्से मे कहता है, सालों पहले पकड़ो इन कमीनी कों !! साली ने देखो कैसे मारा है।

धनवी रोती हुई कहती है, भाभी !! बचालो मुझे !! टु फ़िक्र मत कर बच्ची !! पहले इन नाली के सड़े हुई गंदगी कों तो अक्ल ठिकाने लगा दू। क्यों बे चमगादर की औलाद तेरी इतनी हिम्मत हो गयी और बदन मे इतनी गर्मी चढ़ गयी की किसी लड़की के साथ जबरदस्ती कर लोगे। महाकाल की सोगंध आज हम तुम्हें वो तांडव दिखायेगे की तुम सोचोगे की हमने जन्म काहे लिया। छूछन्द्र के वंशज !! कहती हुई दो लड़के जो सामने खड़े थे..... सीधे आरध्या और तानिया दोनों के निचे अपने सेंडिल से ऐसी लात मारती है की दोनों चीखते हुए। अपने निचे हाथ पकड़े बैठ जाते है..... मार डाला रे !! इन कमीनीयों ने मार डाला !!!

तभी तीनों लड़के उन्दोनो की तरफ आते है और आरध्या कों पकड़ने की कोशिश करते है। वहाँ मौजूद बियर की बोतल तानिया उसके हाथ मे देती है। दोनों हाथों से उन दोनों लडको के माथे पर बियर की बोतल फोड़ देती है। तानिया टु बच्ची के हाथ पैर खोल मे इनको संभालती हूँ। फिर चादर उठाती है... और तेजी से उसे घुमाती हुई एक पट्टा की तरह बना लेती है। जैसे वो चाबुक हो।उसके बाद सिर्फ उसका वो पट्टा चलता है। सबसे पहले तेजी से सबकी आखों पर मारती है। जब तक वो पांचो अपनी आखों कों मीच रहे होते है। वहाँ रखे फूलदान और बियर की बोतल तानिया के साथ सबके सर पर फोड़ देती है। आरध्या सबको वैसे मार रही थी की ताकि उसे वक़्त मिल जाये और मारने का इसलिये उसके पट्टे से जब तक वो सम्भलते, तब तक बार बार उनकी आखों पर वार करती और फिर जमकर वो और तानिया अपने सेंडली भरी लात और घुसो से उन पांचो कों कूट रही थी। इतनी देर उनके चीखने की आवाज़ आ रही थी।

आरध्या बेहद गुस्से उन मे से उसके लड़के के बालों कों पकड़ कर जोड़ से खींचती हुई कहती है, " अबे भस्मासुर के वंशज तू एक औरत की कोख से जन्म लेने के बाद भी कमीने तेरे अंदर जो राहु केतु के तरह हिंसक राक्षस का जन्म है। उससे तू खुद कों बलवान समझ लिए हो। हरामखोरों इतनी गर्मी चढ़ी है तो कहीं जा कर डूब मर वैसे भी तेरे जैसे राक्षस कों जिन्दा रहना। धारती मईया पर बोझ। कहती हुई उसे खींच खींच कर थप्पड़ मारती है।

दूसरा लड़का जैसे जी आरध्या कों पकड़ने की कोशिश करता है। आरध्या उसे एक लात मारती है क्योंकि तानिया कों पूरी तरह से धनवी पकड़ी हुई थी। आरध्या अभी बेहद गुस्से मे होती है। जब तक कोई उठने की कोशिश करता तब तक उसके हाथ और पैर के तेजी से सब पर घूम जाते थे। पट्टे से मारने के कारण सबकी आँख फूल गयी थी।इसलिये वो देख नहीं पा रहे थे ठीक से। 

आरध्या कों पकड़ ने के लिए जो लड़का हाथ उठाता है। इतने मे,वो इधर उधर नजर घुमाती है तो उसकी नजर फूल दान परी एक पतली लकड़ी पर जाती है।उसे लेकर उस लकड़ी कों उस लड़के की ऊँगली मे फंसा कर तेजी से घुमा देती है। इससे उस  लड़के की चीख निकल जाती है।

तब तक प्रथम और संकल्प अंदर आ जाते है। पांचो की हालत देख कर और धनवी की हालत देख सबसे पहले दोनों उन पांचो पर दोनों टूट पड़ते है। तभी आरध्या संकल्प कों रोकती हुई कहती है, " भाई !! इन धरती के बोझ कों हम देख लेगे। आप धनवी कों लेकर निकलिए क्योंकि हम मे से कोई अभी नहीं निकल सकता। और हम नहीं चाहते की कोई हमारी बच्ची के लिए कुछ गलत बोले। प्रथम भी कहता है, मेरे गार्ड पीछे से आप दोनों कों निकाल देगे । संकल्प जैसे ही धनवी की तरफ हाथ बढ़ाता है। वो सिमट जाती है तानिया से। संकल्प के साथ सबके आखों मे आंसू आ जाते है। संकल्प प्यार से कहता है, धनवी !! मै हूँ संकल्प !! धनवी ये सुनकर उसकी तरफ मुँह घुमाती है। उसके चेहरे पर थप्पड़ का निशान देख कर संकल्प गुस्से मे फिर से उनको मारने कों बढ़ता है तो प्रथम उसे रोकते हुए कहता है, हम सब इसकी क़ीमत वसूल लेगे। आप निकलो बच्ची कों लेकर। संकल्प तेजी से धनवी कों सीने से लगा लेता है। वो उससे लिपट कर रोने लगती है। संकल्प उसको चुप करवाता है और उसे बाहों उठा लेता है और निकल जाता है।


निचे पार्टी मे बहुत देर धनंजय कों दीप्ती और अयानी के सिवा कोई नहीं दिख रहा था।वो उन्दोनो की तरफ बढ़ता है कुछ कहने कों की तब तक वसुधा, कृष्ण राठौर के पास आकर कहती है, राठौर साहब !! सुना है रूम भी आपने बुक करवाए है, मन बहलाने के लिए। उसकी बात सुनकर सभी हैरानी से वसुधा की तरफ देखते है। धनंजय भी मुड़ कर सुनने लगता है। कृष्ण राठौर हैरान होते हुए कहता है, " मै कुछ समझा नहीं मिसेस सिंह !! " मै बताती हुई राठौर साहब मैंने कुछ देर पहले पांच लडको के साथ एक लड़की कों रूम नंबर 5005 मे जाते हुए देखा। इसलिये पूछ रही हूँ। अगर आप सबको यकीन ना हो तो चल कर देख लीजिये। रूम नंबर का नाम सुनकर दीप्ती और अयानी घबराहट से एक दूसरे का हाथ थाम लेती है। लेकिन किसी से कुछ कहती नहीं है। अयान और ध्यान भी उन्दोनो कों देखते है लेकिन कुछ पूछ नहीं पाते क्योंकि माहौल ऐसा बन गया था।

उन दोनों कों जाते ही, आरध्या चीखते हुए गुस्से मे उन पांचो की ऊँगली मे वो लकड़ी फंसा कर घुमाने लगती है। तानिया बालों कों उनके पकड़ कर खींचती हुई कहती है, मरे हुए जानवरो की औलाद !! तुम सब अपनी मर्दानी उसी लड़की पड़ दिखाते हो जो तुमसे लड़ नहीं पाती है। आरध्या एक लड़के का ज़बड़ा पकड़ कर कहती है, कसम महादेव की तुझ जैसे मर्दो कों देख कर दिल चाहता है की हम औरते बेटों के जन्म के बाद थाली ना बजा कर उनको मार डाले। अगर हम औरतों कों मालूम होता की हमारे कोख से राम नहीं रावण पैदा हुआ है तो उन्हें पालती नहीं बल्कि जन्म लेने के साथ मार डालती।कमीनों ये काम करते हुए तुम लोग आगे पीछे नहीं सोचते हो कहती हुई सबके माथे पड़ मारती है। जिससे सब चीखते है।

आरध्या गुस्से मे चीखती हुई कहती है, " क्यों दर्द हो रहा है..... खुद कों शेर समझ रहे थे ना। लगा ना हाथ कमीने !!  छू कर तो दिखा ना चिलगोजे !! जरा सीता  कों नहीं दुर्गा कों छू कर दिखा कमीने !!  रावण की तरह तुझे सीता कों उठाना आसान था क्योंकि वो सीता मईया थी। जरा दुर्गा कों छू कर दिखा महिशासुर की तरह तेरा वध कर देगी। छू ना !! इस वक़्त आरध्या बेहद गुस्से मे उस पट्टे से उन पांचो कों मार रही थी।गुस्से मे वो बिल्कुल काली लग रही थी। काली साड़ी और बाल खुले ऊपर से उसका क्रोध। वो पांचो अभी बुरी तरह से चीख रहे थे। आरध्या बस गुस्से मे पीट रही थी। वो तानिया और प्रथम के रोकने से नहीं रुक रही थी। तब तक पार्टी मे मौजूद सभी लोग उस कमरे मे तेजी से घुस आये लेकिन सामने का माहौल देख कर जहाँ सिंह परिवार के होश उड़ गए थे। वही आरध्या का क्रोध देख कर धनंजय तेजी से उसके हाथ कों पकड़ लेता है।और अपनी गहरी आवाज़ मे कहता है, "ठकुराइन!! क्या हुआ?" कुछ नहीं ठाकुर साहब ये इन चिरकुट कमीनों कों बता रही थी की एक स्त्री कोई मोम की गुड़िया नहीं है जो ये तोड़ दें। हाथ तोड़ कर रखने की ताकत रखती है। " शांत ठकुराइन कहते हुए उसे घुमा कर सीने से लगा लेता है।

फिर प्रथम से पूछता है क्या हुआ है यहाँ? प्रथम कहता है, ये पांचो किसी लड़की के साथ बतमीजी कर रहे थे तो भाभी कों बर्दास्त नहीं हुआ और उसका नतीजा है। तभी आरध्या उन पांचो कों देखती हुई कहती है, " इन लोगों कों कब समझ आएगा की कोई स्त्री कमजोर नहीं होती और इनको अगर इतनी ही अपनी मर्दानगी दिखानी है तो कमजोर कों क्यों ? किसी मजबूत स्त्री कों हाथ लगा कर देखे काट देगी इनकी मर्दानगी भी और हाथ भी !!"

उसकी कठोरता देख कर वहाँ मौजूद सभी आँखे फाड़ कर आरध्या कों देख रहे थे। कृष्ण राठौर कहते है, " मिसेस सिंह आपने तो जो कहा था। वो बात तो कहीं नहीं दिख रही है. बल्कि यहाँ मिसेस ठाकुर का गुस्सा नजर आ रहा है। वसुधा बातों कों संभालती हुई कहती है, पता नहीं राठौर साहब, मुझे जो दिखा था। वही मैंने बताया। लेकिन यहाँ लगता है, की वो लड़की शायद मिसेस ठाकुर थी।

उसकी बात पड़ धनंजय अपनी कठोर आवाज़ मे कहता है, मिसेस सिंह !! मेरी पत्नी यहाँ किसलिए थी, आप अंधी तो बिल्कुल नहीं है जो देख नहीं पा रही है। लेकिन जिस तरह से आपने निचे बात की उससे तो ऐसा ही लग रहा है। जैसे मिस्टर राठौर की पार्टी कों खराब करने की आपकी कोई साजिश तो नहीं !!"

धनंजय ठाकुर का बोलना सबको मजबूर कर गया ये सोचने के लिए और सब मुड़ कर वसुधा की तरफ देखने लगते है। लेकिन उसी बीच धनंजय आरध्या जो बेहद गुस्से मे थी उसे खुद के करीब करते हुए। उन पांचो कों देखता है और कहता है, प्रथम !! इन सबको ले चलो। बाक़ी क्या हुआ था यहाँ !! वो मै खुद मालूम कर लूँगा क्यों मिसेस सिंह !! मिसेस सिंह शब्द पड़ , वो ज्यादा जोड़ देकर कहता है। उसके साथ वहाँ से सभी ठाकुर वहाँ से निकलने लगते है।

आरध्या निकलते निकलते उन सभी कों मारते हुए कहती है, तुम जैसे नामर्दो और जानवरो की वजह से निर्भया मारी जाती है। क्योंकि वो किसी आरध्या ठाकुर की तरह मजबूत नहीं थी। मर क्यों नहीं जाते तुम सब :!! ऐसी जिंदगी जीने से बेहतर होता है किं तुम लोग मर जाते। शरम आनी चाहिए तुमलोगों की जिस उम्र मे खुद के लिए कुछ करते और अपनी जिंदगी सवारते। वहाँ खुद की जिंदगी बर्बाद खुद करने मे लगे हो। भस्मसूर के वंशज कहीं के। जो खुद कों ही भस्म करता है क्योंकि उसे शक्ति संभाली नहीं जाती।


उसके