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Love without wish Chapter-49

Love without wish Chapter-49

वसुंधरा ने धनंजय को फोन लगा दिया था, आरध्या की बात सुनकर। धनंजय ने फोन देख उठा कर कहा, " हाँ माँ बोलिये ! क्या हुआ सब ठीक है। वसुंधरा ने कहा, मै तो ठीक हूँ बेटा ! लेकिन क्या तुझे अपनी पत्नी पर ध्यान नहीं देना चाहिए की वो कहाँ जाती है और किस्से मिलती है। मानती हूँ की तुम दोनों को एक दूसरे पर पूरा भरोसा है। लेकिन ऐसा भरोसा मत करो जैसा भरोसा तुम्हारी माँ ने किया था। नतीजा तुम्हें मालूम है। आज तुम्हारी पत्नी मालूम है की कहाँ गयी है !"वसुंधरा के सवाल पर धनंजय ने कहा, हाँ माँ ! वो आज धनवी और अयानी को हॉस्पिटल ले जाने वाली थी। फिर ऑफिस आएगी। इसमें कौन सी बड़ी बात है।
वसुंधरा ने हँसते हुए कहा, " एक बार बेटा धनवी और अयानी से भी पूछ लेता। वैसे मै बता दू की वो दोनों अपने पति के साथ हॉस्पिटल गयी है और तेरी बीबी किसी और जगह। मुझे तो कह कर गयी है की बॉयफ्रेंड से मिलने जा रही हूँ। बाक़ी तू देख ले। क्या तुझे मेरी तरह धोखा खाना है या कुछ समझदारी दिखानी है। चल रखती हूँ। " वसुंधरा ने इधर फोन रखा तो धनंजय ने भी फोन रख दिया और फिर लैपटॉप पर काम करने लगा।

अयान उसे इतना शांत देख कर, बेहद हैरानी से कहा, तूने माँ को जबाब क्यों नहीं दिया। जब भाभी को वो उल्टा सीधा बोल रही थी। तू धनवी को बोल की वो उनको फोन करके बता दे की भाभी उसके साथ है। हर कोई उनकी पति और बहन की तरह नहीं होता है। " अयान की बात पर धनंजय ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन वो सच कह रही थी। वाकई ठकुराइन, धनवी और अयानी के साथ नहीं है। अयान ने चौंकते हुए कहा, क्या मतलब ! यानी तुझे माँ की बातों पर भरोसा है। धनंजय ने एक मजाक के लहजे मे अपने चेहरे के भाव बना कर कहा, " नहीं ! मुझे अपनी ठकुराइन पर पूरा भरोसा है। आज उसे कोई तिगड़म लगाना है इसलिये वो नहीं आयी है और मुझ से झूठ भी बोला इसलिये क्योंकि मै उसे रोक दूँगा। लेकिन वो रुकने वाली नहीं है। माँ की बात पर नहीं, अपनी ठकुराइन पर पूरा भरोसा है मुझे।
वैसे भी मै कानों सुनी बात पर छोड़, आखों देखी बात पर भी तब तक भरोसा नहीं करता हूँ। जब तक खुद तह तक ना पहुंच जाऊ। वैसे भी भाई ! आज लोग पानी के गहराइयों की परख ऊपर बैठ कर करते है। मै पानी की गहराइयों मे उतर कर उसकी परख करता हूँ। इसलिये फ़िक्र मत कर आज वो जरूर कोई कांड को करने या सुलझाने गयी है।

अयान ने मुस्कुराते हुए कहा, तो तुझे डर नहीं लगता की अगर वो किसी मुश्किल मे फंस गयी तो तू क्या करेगा। धनंजय अपने मोबाइल को उसकी तरफ घुमा देता है। जिस पर आराध्या की लोकेशन मालूम चल रही थी। पत्नी है वो मेरी और मेरी जिंदगी है। उसकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकता। इसलिये उसके मंगलसूत्र मे जिपीएस और कुछ गार्ड उसके पीछे हमेशा लगाये रखता हूँ। क्योंकि उसे पंगा करने की और लेने की आदत है। तू फ़िक्र मत कर तेरी परेशानी का इलाज ही तेरा भाई और भाभी ढूढ़ रहे है । बस कुछ दिन ऐसे ही कर जैसा कर रहा है। इस बार हमारे घर की सारी परेशानियों को खत्म कर दूँगा। धनंजय की बात पर अयान ने कहा, यार!सोचा नहीं था की एक बार फिर हम तीनों भाई इस दर्द से गुजड़ेगे। सामने वाले ने एक बार भी नहीं सोचा की वो क्या और क्यों कर रहा है। " अयान की बातों पर धनंजय ने कहा, दर्द देने वाले अगर ये सोच लेते की जिसे दर्द दे रहे है। उसे भी दर्द होगा तो दुनिया खूबसूरत नहीं हो जाती। अब छोड़ो इन बातों को देखो ठकुराइन आज क्या गुल खिलाती है। इस बात पर दोनों भाई हँस दिए।

इधर वसुंधरा ने जैसे ही फोन रखा उसकी आँखे चमक गयी। अपनी पत्नी की चमकती आखों को देख कर महेंद्र ने कहा, क्या बात है वसु ! तुम बेहद ख़ुश नजर आ रही हो। वसुंधरा ने मुस्कुराते हुए कहा, जो काम सालों पहले वसुंधरा ने किया था। वही काम आज उसका बेटा कर रहा है। अपनी जीवन साथी पर भरोसा कर के। ये लड़की मै आपको कह रही हूँ। बेहद तेज है और अपनी खूबसूरती के आकर्षन पर धनंजय को मुठ्ठी मे की हुई है। एक दिन ये भी वही करेगी, जो आपने किया था। इस तरह की खूबसूरत लडकियाँ क्या करती है, लडको को अपनी खूबसूरती के जाल मे फंसा लेती है। और आप तो बेहतर जानते है, मर्दो को कुछ नहीं सूझता, खूबसूरती के आगे। वो ऐसे बेबकुफ़ होते है, जिनको सिर्फ खूबसूरती से मतलब होता है। गुलाब की खूबसूरती मे इस तरह मोहित हो जाते है की गुलाब के निचे लगे कांटे से भी उन्हें फर्क नहीं पड़ता है। मर्दो की कमजोरी ही सुंदर स्त्रियां रही है तो आपका बेटा कौन सा रामा अवतार है, जो इस मोह पांस मे नहीं फसेगा।

महेंद्र ने उसके करीब आते हुए कहा, ये तो सच है की तुमने मुझे अपने मोह पाष मे ऐसा बांधा की मै कभी निकल नहीं पाया। लेकिन तुमने सोचा है की आगे क्या करना है ! वसुंधरा ने हँसते हुए कहा, ज्यादा लालच अच्छी नहीं महेंद्र। धनंजय ने वसुंधरा इम्पायर हमारे नाम पहले ही कर दिया है। अब कुछ और चाहिए नहीं हमे। आप सोचिये की आगे के काम के लिये क्या हमे उसे बुलाना चाहिए। नहीं नहीं ! वसु '! अभी नहीं। याद है उसने क्या कहा था। जल्दबाजी मे सब कुछ खराब हो जायेगा। इसलिये हमे शांति से काम लेना होग। वो अपने तरीके से ही आएगा। अभी सब कुछ ठीक चल रहा है। चलने दो। वसुंधरा ने कहा, " अभी घर मे ऐसा माहौल है की किसी को हमारी किसी भी परिस्थिति का अंदाजा नहीं होगा। इसलिये हमे सब कुछ अभी इसी बीच मे कर लेना चाहिए। एक बार आप उससे बात क्यों नहीं करते है। आपकी बात तो वो कहीं नहीं टालता है। " अपनी पत्नी की बात पर महेंद्र ने कहा, " हमारे जीवन का यही हिस्सा तो बहुत खूबसूरत है वसु की हमने उसे पाया।  वो ना होता तो तुम भी तो नहीं होती।" कैसी बात कर रहे है आप ! मै आपकी शुरु से थी। बस कुछ समय के लिये वो तूफान आया था। जिसमे हमारा सब कुछ खत्म हुआ। लेकिन आज भी मै आपकी ही हूँ। ये तो सच कहाँ तुमने। महेंद्र मुस्कुराते हुए वसुंधरा को देखते है।♥️


आराध्या गुस्से मे भरी हुई राधा कृष्ण के मन्दिर के पास आती है। जहाँ तानिया उसका इंतजार कर रही थी। उसे यू गुस्से मे चिढ़ा हुआ देख तानिया उसके पास आती है और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछती है, " क्या हुआ तुझे ! ऐसे क्यों बिदकी हुई है। " आराध्या सर पर पल्लू डाल कर राधा - कृष्ण की मूर्ति के आगे हाथ जोड़ती हुई अपनी आँखे बंद कर लेती है। उसके देखा देखी तानिया भी वही करती है। कुछ देर बाद दोनों मन्दिर से बाहर चप्पल पहनती है और ऑटो रुकवाने के लिए हाथ दिखाती है।

तानिया ने कहा, पहले बताएगी की हुआ क्या है ? पहले ऑटो मे बैठ जाऊ फिर बताऊ तुझे !" तानिया ने अपना सर हिलाया और दोनों ऑटो मे बैठ गयी। तानिया ने फिर एक बार आराध्या की तरफ देखा की अब वो कुछ बोलेगी। लेकिन आराध्या खामोश थी। उसे खामोश देख कर तानिया ने कहा, अब कुछ बोलेगी। मेरे पेट मे दर्द होने लगा है। अब बता भी दे मेरी माँ !" आराध्या ने कहा, ऑटो वाले भैया यूनिनेक्स हॉस्पिटल ले चलो। फिर तानिया को देखा और कहा, " सासु माँ ! पीछे से टोंक दी थी। ऊपर से पुलिस की तरह सवाल भी करने लगी थी। उनके सवालों से तंग आ कर कह दिया की अपने बॉयफ्रेंड मे मिलने जा रही हूँ और आपके बेटे को धोखा दे रही हूँ। " आराध्या ने अपनी बात कहीं तो तानिया ने आँखे बड़ी कर ली और ऑटो वाला भी मुड़ कर उसे देखने लगा। ऑटो वाले को यू मुड़ कर देखते देख। आराध्या ने कहा, " काहे बे ! कौन सी बात की मिर्ची लगी तुम्हें। सिर्फ मर्दो को चाहिए बाहरवाली। हम को नहीं चाहिए बाहरवाला। आगे देख कर ठीक से गाड़ी चलाओ। अगर एक्सीडेंट हुआ ना तुमको यही रगेंद कर पीटेंगे। चल आगे देख। ऑटो वाला घबराते हुए, आगे मुँह कर लेता है।

तानिया ने मुँह बनाते हुए कहा, अब तक तो चुगली रानी ने जीजा जी को फोन भी लगा दिया होगा। अरे लगाने दे। उनका बेटा है फिर भी वो अपने बेटे को नहीं जान पायी है। जितना मै अपने ठाकुर को जानती हूँ। वैसे भी रिश्ता भरोसे पर जिया जाता है। भरोसा, प्यार और बातें ये तीन चीजे हर रिश्ते को अच्छा और बुरा बनाती है। इसलिये इन तीन चीजों का इस्तेमाल हमे बेहद संजीदगी से करनी होती है। तानिया ने उसकी बात पर सहमती जतायी। कुछ देर बाद दोनों हॉस्पिटल मे पहुंच जाती है। हॉस्पिटल को देखते हुए तानिया ने कहा, तू स्योर है की वो यहाँ आएगी आज !"

पिछले दस दिनों से कर क्या रही हूँ मै ! यही तो कर रही हूँ। चल अंदर चलते है। रिसेप्शन पर दोनों पहुँचती है। आराध्या ने कहा, मेरी सिस्टर मिसेस दीप्ती चतुर्वेदी का आज अपोटमेंट था। आप बता सकती है की वो किस डॉक्टर के पास गयी है। उसने हमे बुलाया था और अभी उसका फोन नहीं लग रहा है। आराध्या ने अपनी बातें इस तरह से कहीं की रिस्पेशनिस्ट ने कहा, एक मिनट मे, पेसेंट इंट्री चेक कर के बताती हूँ। कुछ पल के बाद उसने कहा, जी मै वो फिफ्थ फ्लोर पर डॉक्टर सहाय के ओपीडी मे है। आराध्या उसे शुक्रिया कहती हुई सीधे लिफ्ट की तरफ बढ़ जाती है।

तानिया ने कहा, अगर उसने हमे नहीं बताया तो हम क्या करेंगे। आराध्या ने उसे घूरा और कहा, अक्ल भगवान ने डी है ना। उसका इस्तेमाल कर और देखते की क्या होता है। दोनों जब उस फ्लोर पर पहुँचती है तो वहाँ मौजूद स्टॉफ ने कहा, मेडम आपके पेपर कहा है। नंबर लगा दू। आराध्या ने उसे कहा, नहीं यहाँ हमारी बहन ने हमे बुलाया है। इसलिये हम उन से मिलने आये है। उस पर उस स्टाफ ने कहा, अच्छा किया जो आप आ गयी। ऐसी बीमारियों मे मरीज को परिवार के साथ की बेहद जरूरत होती है। नहीं तो वो समय से पहले ही टूट जाते है। आप देख लीजिये मेडम आपकी बहन कहाँ है। ये कह कर स्टाप वहाँ से चली जाती है। तानिया ने हैरान होते हुए कहा, कैसी बीमारी। मुझे कैसे मालूम होगा की कैसी बीमारी। ये तो दीप्ती ही बताएगी। आराध्या ये कहती हुई, उस हिस्से को ध्यान से देखती है। जहाँ सभी पेसेंट बैठे हुए थे। लेकिन उसे दीप्ती नजर नहीं आती है।आराध्या ने तानिया से कहा, शायद दीप्ती अंदर गयी है। चल जल्दी। फिर वो दोनों डॉक्टर के केबिन की तरफ जाने लगती है तो वहाँ मौजूद स्टाप उनको रोक देता है। और उन दोनों को देख कर कहता है, "आप दोनों कहाँ जा रही है। अंदर पेसेंट है। आपका जब नंबर आएगा, तब जाना।

आराध्या ने उसे देख कर कहा, हम पेसेंट की बहन है और जो अंदर गयी दीप्ती चतुवेदी। उससे मिलना और कुछ डॉक्टर से भी बात करनी है। स्टाप एक बार कंप्यूटर की स्क्रीन को देखता है। फिर उनको अंदर जाने की इजाजत दे देता है। दोनों तेजी से डॉक्टर के केबिन मे आती है। जहाँ डॉक्टर मौजूद नहीं था और ना कोई पेसेंट दिख रहा था।तानिया ने कहा शायद अंदर हो। वहाँ मौजूद नर्स से आरध्या ने पूछा की डॉक्टर कहाँ है। उस नर्स ने कहा, डॉक्टर स्कैन रूम मे है पेसेंट को अंदर चेक करने गए है। उस पर तानिया ने पूछा की क्या हम अंदर जा सकते है। नर्स ने उन दोनों से कहा, आप बाहर से देख सकती है। आइये मेरे साथ। तानिया ने चिढ कर कहा, ऐसी कौन सी बीमारी हुई है इसे जो इसने हमे नहीं बताया है।आराध्या नर्स के पीछे चलती हुई कहा, ये तो वही बताएगी या ये डॉक्टर ही बताएगा।

दोनों उस कमरे के बाहर खड़ी हो जाती है। दरवाजे पर लगा शीशे मे देख कर उन दोनों की आँखे बड़ी और हैरानी से फेल जाती है। दोनों के आखों मे आंसू आ जाता है।दोनों एक दूसरे के हाथों को कस कर थाम लेती है। आराध्या ने अपनी काँपती आवाज़ मे कहा, नहीं ऐसा नहीं हो सकता है। तानिया ने भी कांपती आवाज़ मे कहा, हाँ ! हाँ  आरू ऐसा हमारी दीप्ती नहीं कर सकती है।

आराध्या की आँखे बड़ी हो गयी, जब उसने बड़ी सी स्कैनर मशीन मे दीप्ती को अंदर से बाहर लाते हुए देखा। हॉस्पिटल के कपड़े मे उसके चेहरे की रौनक खत्म हो गयी थी। कुछ दिनों से किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया था। वो कहाँ जाती है, क्या करती है। लेकिन आराध्या की नजर उसकी हर हरकत पड़ थी। फिर भी वो दीप्ती के दिन ब दिन मुरझाये चेहरे पर ध्यान नहीं रख पायी। इस बात का दर्द उसके चेहरे से दिख रहा था। दीप्ती को जैसे ही नर्स अंदर की तरफ कपड़े बदलवाने को ले गयी। आराध्या सीधे दरवाजा खोल कर अंदर आती है।

डॉक्टर अचानक अपने सामने दो महिलाओं को देख सोच मे पड़ जाता है। उसने गुस्से और हैरानी से कहा, कौन हो तुम लोग और ऐसे कैसे चली आयी अंदर। आराध्या ने भी अपनी तल्ख़ आवाज़ मे कहा, पहले आप बताओं की अभी जो पेसेंट को आपने देखा है, उसको क्या हुवा है? आराध्या के सवाल पर डॉक्टर ने बेहद हैरानी से कहा, हो कौन तुम लोग भाई ! कौन इन दोनों को अंदर आने दिया। निकालो इन्हें और मै क्यों बताऊ अपने पेसेंट की सारी जानकारी। आराध्या ने कुछ कहना चाहा की पीछे से दीप्ती की आवाज़ आयी। " जीजी  " तुम यहाँ क्या कर रही हो। इस बार दीप्ती की तरफ आराध्या और तानिया दोनों उसे घूर कर देखते है।

तानिया ने कहा, " यही सवाल अगर हम तुमसे पूछे तो क्या तुम जबाब दोगी ? " दीप्ती अपने सर को निचे कर लेती है। आराध्या ने कहा, डॉक्टर हो ! एम. बी. बी. एस हो अब तक तो ये देख कर समझ ही गए होंगे की जिसके बारे मे, हम पूछ रहे है। वो हमारी क्या लगती है। अब अगर सीधे तरीके से तुम बोलोगे तो बेहतर होगा। नहीं तो. मेरा तरीका महाकाल की सोंगध बेहद खराब है। डॉक्टर के चेहरे पर आ रही घबराहट देख, जहाँ आराध्या की आँखे छोटी हो गयी थी। वही. दीप्ती ये सोच बैठी थी की डॉक्टर, आरध्या से घबरा गया है। वो बीच बचाव मे आती है। "जीजी ! ऐसे क्यों डरा रही हो तुम डॉक्टर को ! चलो बाहर, हम तुमको सब कुछ बताते है।"

आराध्या जिसका दिमाग़ वैसे ही हिला हुआ था। क्योंकि बार - बार  पूछने पर भी डॉक्टर जबाब नहीं दे रहा था। इसलिये आराध्या ने कहा, " देख छुटकी ! हमरा माथा वैसे ही भन्नाया हुआ है। तूने अगर एक बार भी अपना ज़बड़ा खोला तो हम तेरा ज़बड़ा यही तोड़ देंगे। इसलिये एक दम चुप रहो तुम। समझी। समझी की नहीं।... आराध्या ने थोड़ी तेज आवाज़ मे कहा, जिसे सुनकर दीप्ती डर के मारे पीछे हो गयी। आराध्या ने तब से चुप खड़े डॉक्टर से कहा, " अभी के अभी बको। नहीं तो अब अगर तनिक देर हुई तो ना जाने हम का कर जायेगे। बोलो डॉक्टर या तुमको दिखाएंगे मिसेस आराध्या धनंजय ठाकुर का प्रकोप !"

डॉक्टर ने जैसे ही आराध्या से उसका पूरा नाम सुना। उसने हाथ जोड़ लिया और कहा, माफ कर दीजिये मुझे मिसेस ठाकुर ! आपको पहचाने नहीं। मिसेस चतुर्वेदी को ब्रेन ट्यूमर है, आखिरी स्टेज का। उसकी बात सुनकर तानिया तो जैसे सदमे मे आ गयी और दीप्ती को बच्चे की तरह सीने से लगा लिया। बहुत समय बाद, दीप्ती बच्चे की तरह फुट फुट कर रोने लगी। लेकिन आराध्या की नजर अब भी डॉक्टर पर थी। दीप्ती को यू रोता देख, उसका कलेजा फटने को आया था क्योंकि उसे उसने बच्चे की तरह पाला था। वहाँ मौजूद पानी के गिलास को उठाया और दीप्ती को तानिया से अलग करके पानी उसके मुँह पर लगा दिया। दीप्ती ने एक नजर उसे देखा तो उसने पलकें झपका कर उसे पानी पीने को कहा। फिर उसके कंधे को थपथपा कर शांत होने को कहा।

एक बार फिर आराध्या की तीखी नजर डॉक्टर की तरफ थी। डॉक्टर भी तब तक खुद को संभाल चुका था। आराध्या ने डॉक्टर को गहरी नजर से घूरते हुए कहा, " तुम कन्फर्म हो ना डॉक्टर की मेरी बहन को यही बीमारी है। देखो सोच समझ कर जबाब देना :!" डॉक्टर ने बीना किसी लाग लपेट कर कहा, " आपको क्या लगता है ? मै कोई कबाड़ी वाला हूँ। डॉक्टर हूँ और मुझे अपना काम अच्छी तरह से आता है। आपकी बहन को ब्रेन ट्यूमर ही है। आप चाहे तो अपनी बहन से पूछ ले। ट्यूमर के सारे लक्षण उनको पिछले पांच महीनो से आ रहे है। इनके पास अब ज्यादा वक़्त नहीं है। "
दीप्ती ने भी कहा, हाँ जीजी ! डॉक्टर साहब ठीक कह रहे है।

आराध्या ने एक. तिरछी मुस्कान के साथ कहा, " बहुत बहुत धन्यवाद डॉक्टर ! उम्मीद करती हूँ की आपकी इस बात पर मोहर दुनिया के और डॉक्टर भी लगा दे !" आराध्या की बात सुन कर डॉक्टर तिलमिला गया और बोखलाहट मे कहा, " आप मेरा अपमान कर रही. है। मै भोपाल का बेस्ट न्यूरो सर्जन हूँ। स्पेशलिस्ट हूँ मै कैंसर का। "

आराध्या ने कहा, " सुनो डॉक्टर ! बात ये की इतनी बड़ी बीमारी बताये हो तो जरा जाँच परख तो कर ले। हो सकता है कोई कह दे की इस बीमारी का इलाज है।आराध्या ने मुस्कुरा दिया।
इसलिये डॉक्टर बाबू। तुम्हारे ज्ञान पर हमको कोई शक नहीं है। लेकिन क्या करे इतनी बड़ी बीमारी बोले हो तो कम से कम दस डॉक्टर से पूछ कर इस बात पर भरोसा करना जरूरी है ना की तुमने जो कहा, वो एक सो एक प्रतिशत सत्य है।💥

डॉक्टर के चेहरे पर बदलता भाव देख कर आराध्या ने बेहद चेतावनी भरे अंदाज मे कहा, अगर ये बात झूठ हुई तो डॉक्टर तुम समझ नहीं सकते की हम तुम्हारी कैसी दुर्गति करेंगे। वो क्या है ना ! हमारी आदत है टमाटर को काट कर उसके एक एक बीज को निकलने की और हम अपनी बुद्धि का इस्तेमाल 24/7 करते है। डॉक्टर चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो। आज कल एक डॉक्टर पर रुकना और इलाज करवाना बेबकूफी है। चलते है, हाथ जोड़ती हुई उसके हाथों से सारा फ़ाइल लेती है और दीप्ती के हाथों को थाम कर बाहर निकल जाती है।

अंदर जितना ही खुद को मजबूत दिखा रही थी आराध्या, अब खुद को उतना की कमजोरी महसूस कर रही थी। अस्पताल से दीप्ती के साथ निकला एक एक कदम उसे भारी लग रह था। इस समय उसके विचारों ने अंदर तूफान मचाया हुआ था। तानिया की नजर आराध्या की थके हरे कदमों पर थी। दीप्ती तो कुछ भी बोलने की हालत मे नहीं थी। जिस राज को उसने पांच महीनो से छिपा कर रखा। वो ऐसे बाहर आ गया था। बाहर निकलते के साथ आराध्या बेहोश होकर गिरने लगी। दीप्ती और तानिया जब तक उसे संभालते, तब किसी ने अपनी मजबूत बाहों मे संभाल लिया था। तानिया की नजर सामने जाती है, तो वो धीरे से कहती है, जीजू !

धनंजय ने जब आराध्या की लोकेशन शहर के सबसे बड़े हॉस्पिटल की देखी तो उसे फ़िक्र होने लगी और वो हॉस्पिटल के लिये तुरंत निकल गया। अपनी बाहों मे बेहोशी आराध्या को उसने गालों से थपथपाते हुए कहा, ठकुराइन! तानिया ने उसके चेहरे पर पानी के कुछ छींटे मारे। तब आराध्या ने अपनी आँखे धीरे धीरे खोली। आँखे खोलने के साथ, अपने सामने धनंजय को देख, उसने घबराते हुए कहा, ठाकुर ! वो छुटकी ! दीप्ती जो बगल मे खड़ी थी। उसने जल्दी से उसके हाथों को पकड़ लिया और कहा, मै यही हूँ जीजी !"

धनंजय ने आराध्या को अपनी बाहों मे उठा लिया और तानिया से कहा तुम दोनों भी गाड़ी मे बैठो। ऑफिस मे बात करेंगे। तानिया ने दीप्ती के हाथों को कस के पकड़ा और धनंजय के साथ गाड़ी मे उसे ले कर बैठ गयी। धनंजय ने भी आराध्या को आगे की सीट पर बिठा दिया। आराध्या ने कुछ कहने के लिये मुँह खोला तो धनंजय ने उसके होठो पर अपनी उंगलियां रख दी और कहा, " हम ऑफिस मे बात करेंगे। अभी बिल्कुल शांत बैठो। "

कुछ देर मे सभी धनंजय के सीक्रेट कमरे मे बैठे हुए थे। ध्यान तो रोती हुई तानिया को शांत करवा रहा था। अयान तो अपने सुद बुध खो कर बस खामोश बैठा हुआ था। दीप्ती भी एक और बैठी हुई थी। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अयान ने नजरें मिलाये। आखिर इन पांच महीनो मे सबसे ज्यादा तकलीफ उसने अयान को ही दी थी। आराध्या भी चुप थी और धनंजय ने उसे अपनी बाहों मे ले रखा था।

दीप्ती ने फिर अपनी ख़ामोशी तोड़ते हुए अयान के पास आयी और उसके पास घुटने के पर बैठ गयी। उसकी आँखे लाल थी रोते रोते, उसने अपने काँपते हाथों से अयान के हाथों को थामा। अयान ने अपनी आँखे बंद कर ली। "सॉरी  अयान जी ! जब मुझे ये बात मालूम हुई तो मुझे कुछ समझ मे नहीं आया की मै क्या करुं ! एक पल मे सब कुछ उजड़ गया। मम्मी जी के साथ गयी थी डॉक्टर से ये दिखाने की रोज रोज सर मे इतना दर्द क्यों होता है। लेकिन वहाँ जब जाँच हुई तो ये बीमारी निकल गयी। मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी किसी को कुछ बताने की क्योंकि काफ़ी वक़्त बाद सब खुश रहने लगे थे। एक बार कोशिश किया भी लेकिन मम्मी जी ने समझाया की ये बात मै आपको नहीं बताऊ और ऐसा व्यवहार करुं की आप मुझसे दूर हो जाये। ताकि मेरे मरने के बाद आप अपनी जिंदगी मे आगे बढ़ जाये। मुझे माफ कर दीजिये।"

अयान ने उस के हाथों को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया। उसके सीने से लगते ही दीप्ती के सब्र का बांध एक बार फिर टूट गया और वो फिर से रोने लगी। अयान के भी आखों मे आंसू नहीं रुक रहे थे। दोनो को यू रोता देख वहाँ मौजूद उन चारों के सब्र ने जबाब दे दिया। आयान ने रोते हुए कहा, "अगर तुम्हें कुछ हुआ तो मै खुद मर जाऊगा दीप्ती, लेकिन किसी और को जिंदगी मे नहीं लाऊंगा। प्यार किया है तुमसे। तुमने लाख बुरे शब्द कहे लेकिन  मेरा दिल कभी उस बात को सुन नहीं पाया। मै तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा। नहीं अयान जी, अब कुछ नहीं हो सकता। मेरी बीमारी आखिरी स्टेज पर है और मैंने भी अब हिम्मत खत्म कर ली है। जाते जाते इस बात की तस्सली है की आप सब की आखों मे खुद के लिए नाराजगी और नफ़रत नहीं देख कर मरुंगी। "

आराध्या ने उन दोनों के आखों से आंसू पोंछा और कहा, हिम्मत तब हारना ! जब कम से कम दस डॉक्टर यही कह दे। नहीं तो एक डॉक्टर के कहने से हम ये बात नहीं मानेंगे। उसकी बात सुनकर अचानक सभी ऐसे चुप हो गए। जैसे किसी ने उनकी पसंदीदा चीज उनको दे दी हो। अयान ने कहा, क्या मतलब आपका भाभी !

आराध्या ने एक बार फिर दीप्ती की तरफ देखा और पूछा, " एक बात बता छोटी तुझे हॉस्पिटल और डॉक्टर के पास जाने की सलाह किसने दी थी। "मम्मी जी ने ! दीप्ती ने सीधा जबाब दिया। ठकुराइन तुम क्या सोच रही हो। आराध्या ने धनंजय की तरफ देखते हुए कहा," बहुत सीधी सी बात है ठाकुर! सालों मतलब लगभग पंद्रह साल जो औरत पागलखाने मे बेहद ज़्यादती सह कर रही हो । उसे बेहद प्रताड़ीत किया गया हो और वो आपको अचानक मिलती है। पंद्रह दिन के बाद वो परिवार मे शामिल हो जाती है और बेहद सामान्य व्यवहार करने लगती है। जैसे सदियों से वो इस घर मे रह रही हो। उसे कुछ भी अनजान नहीं लगता है। घर की बेटी की माँ बनने की खबर से लेकर हर भावनात्मक रिश्ते को ऐसे निभाती है, जैसे किसी टारगेट को प्लान कर रही है। जब उनका बड़ा बेटा उनके नाम की कम्पनी उनको खुशी से देता है तो वो ये नहीं कहती है की हम क्या करेंगे इसे लेकर। ये तुम्हारी है और तुम ही रखो। और तो और घर मे कलह की सूत्रधार वो बनती है।"
आप लोगों मे से किसी को ये बातें अजीब नहीं लगी।

आराध्या ने जैसे ही अपनी बातें खत्म की उसकी बात पर सभी सोचने लगते है। जैसे गौर कर रहे हो की बीते छः महीने मे ही कुछ ऐसा ही हुआ है।धनंजय ने कहा, तो क्या हमसे सच मे चूक हुई है ठकुराइन। आराध्या ने कहा, मुझे लगता है की दो महीने पहले जो बात हमेशा वसुधा और रणवीर ने बतायी। वो सच है।