Love without wish Chapter-41
- 29 June, 2026
"क्या मतलब ठाकुर ! यानी आपके माता पिता जिन्दा है। फिर आप इतने चैन से क्यों बैठे है। चलिए हम उनको वहाँ से निकाल कर लाये। "आराध्या की तेज बाते सुनकर धनंजय ने उसे शांत करवाते हुए कहा, " शांत ठकुराइन ! अगर ये इतना आसान होता तो तुम्हें मे ऐसे भवर मे अकेले छोड़ देता। तुम्हें मालूम है की वसुधा अपने चेहरे को बदलवा चुकी है और कल वो अपनी और रणवीर की तस्वीर को मिडिया के आगे करेगी। वो हर हटकंडे अपनायेगी। जिससे ठाकुर परिवार बदनाम हो जाये और तुम्हें अपने कदमों पर झुका सके।
आराध्या ने फिर उसे देखते हुए कहा, " अभी तक जो जैसा जैसा आपने कहा, मैंने वही किया। लेकिन अगर वो तस्वीर मिडिया के आगे ले आयी तो कहने को हम बात दबा देंगे। लेकिन आप भी जानते है। बात दब जाती है लेकिन खत्म नहीं होती !"बिल्कुल सही कहा तुमने ठकुराइन। लेकिन उससे पहले वसुधा तुम्हारे आगे भी वही शर्त रखेगी की तुम अपने शेयर और मालिकाना हक उसे या मेरे रूप मे मौजूद उसके बेटे को दें दो। " तो क्या मै उसकी बात मान लूँ !" आराध्या के सवाल पर धनंजय ने बेहद संजीदगी से कहा, हाँ ! तुम उसकी बात मान लोगी और शादी के बाद उसकी डील पर साइन करोगी !"
आराध्या ने चिढ कर कहा, " जब सब कुछ उस चुड़ैल को ही देना था तो इतना लुका छिपी क्यों खेल रहे हो '! आपको क्यों लगता है की वो मेरी बात मान लेगी। " पहली मेरी बात पूरी सुन लो फिर बोलना। उसने मुझे मार दिया। अब तुम उसके साथ लड़ाई सीधी करोगीं। जैसे ही तुम्हारे पास डील लेकर आये। तुम उसे बता दोगी की, तुम जानती हो की घर मे जो शख्स मौजूद है, वो तुम्हारा ठाकुर नहीं है। अगर उसे डील तुमसे मनवानी है तो तुम्हें, तुम्हारा ठकुर ला कर देगी। तुम उसे शादी तक ये मोहलत दोगी। "
"मतलब ये की डील वो करने आएगी अपने शर्त पर लेकिन मै उसके आगे शर्त रखूगी की उसे अगर प्रॉपर्टी चाहिए तो मुझे असल धनंजय ठाकुर चाहिए। लेकिन उसने अगर मेरी बात नहीं मानी तो !" आराध्या की बात पर धनंजय ने हँसते हुए कहा, फिर उसे मिलवा देना आराध्या धनंजय ठाकुर से !" एक बार तो वो तुम्हारी बात नहीं मानेगी। लेकिन ये तुम बेहतर जानती हो की उसे कैसे लाइन पर लाना है। ये मुझे तुम्हें सिखाने की जरूरत नहीं है।क्योंकि उसके नजर मे मेरी मौत हो चुकी है। उसी बेटे को धनंजय साबित करने के लिये, उसे मेरे असल माता पिता की जरूरत होगी।
तुम्हारी शर्त रखने से दो फायदे होंगे। एक तो वो तस्वीरे नहीं दिखाएगी। उन तस्वीर का जबाब हमारे पास इसलिये नहीं है क्योंकि वसुधा ने अपना चेहरा बदल लिया है। अभी तक बहुत सबूत नहीं जुटा पाया हूँ। वसुधा, राठौर और बिजलानी सबको जड़ से खत्म करने के लिये पुख्ता सबूत चाहिए। तुम्हारे शर्त से, उनका ध्यान अब इस बात पर आ जायेगा की वो वरुण को धनंजय बना कर दुनिया के सामने रखे। इसलिये वो खुद ही माँ -पापा को दुनिया के आगे ले आएगी । अगर उन्दोनो ने उसके बेटे को स्वीकार कर लिया की वही धनंजय है। फिर तुम से जितना वसुधा के लिये बेहद आसान होगा।
हमारे लिये ये फायदा होगा की जब वो खुद सबके सामने वसुंधरा को लाएगी तब ये तस्वीर :!" धनंजय अपने पास से तस्वीर दिखाता है। ये तस्वीर आपके पास कैसे ठाकुर। सबूत इक्क्ठा करने के दौरान ये भी हाथ लगी मेरे।
अब ध्यान से सुनो ठकुराइन ! तुम्हारे शर्त के बाद वसुधा खुद चाल चलेगी की उसका बेटा वरुण ही धनंजय है। जिस दिन वो माँ पापा को दुनिया के आगे लाएगी। उस दिन वो क्या कहानियाँ बनाएगी। ये तो नहीं मालूम। लेकिन तुम उस दिन इस तस्वीर का इस्तेमाल करोगी। इधर ये तस्वीर दुनिया के सामने आएगी और उधर खुद वसुधा इस तस्वीर की हकीकत सबको बताएगी। शादी सात दिनों बाद है, तब तक मै इन सबके काले कारनामो और काली दुनिया को तबाह कर दूँगा और शादी वाले दिन अपनी ठकुराइन के पास होऊंगा।
धनंजय ने जैसे ही अपनी बातें खत्म की आराध्या जा कर उससे लिपट गयी। धनंजय ने मुस्कुराते हुए उसे बाहों मे भर लिया। " ठकुराइन ! हम्म्म! अगर सच मे, मै तुम को धोखा देता और किसी और के साथ....! आअह्ह्ह...!! अरे काटा क्यों। आराध्या ने उसकी बात आधी होने पर ही गर्दन को काट लिया था और उसे घूर रही थी। अरे यार बस बोल रहा था ! तो मै भी बता रही थी। उसके कॉलर को पकड़ कर आराध्या ने कहा, " सुनो ठकुर ! एक तुम ऐसा करते नहीं। जिसका हमें विश्वास है और अगर ऐसा तुमने किया होता तो महकाल की कसम तुम्हे तो जान से मार देते और खुद फांसी पर लटक जाते। ऐसा तो तुम समझना मत की हम तुमको छोड़ देते।
लेकिन फिर भी तुम्हारी जान अगर बच जाती तो... जिंदगी मे कभी तुमको पलट कर नहीं देखते। क्योंकि हमें खुद पर पूरा भरोसा है की हमसे बेहतर तो तुको कोई मिलती नहीं और वो तुम होते जो हमें दर -ब -दर ढूढ़ते। हम तो बिल्कुल नहीं तुमको दोबारा ढूढ़ते समझे ना तुम !"
अरे समझ गया मेरी ठकुराइन ! उसे अपनी बाहों मे दोबारा भरते हुए, अपने होठो को उसके गर्दन पर घुमाते हुए कहा, " मै सिवा तुम्हारे किसी और के पास जाना तो छोड़, सोच भी नहीं सकता। जिंदगी मे सच्चा प्यार मिल जाये तो उसकी क़ीमत क्या होती है, ये धनंजय ठकुर अच्छी तरह से जानता है, ठकुराइन ! हीरे की क़ीमत मुझे मालूम है। अब बताओं, अब भी नाराज हो ! आराध्या ने फिर सर को हाँ मे हिलाया।
धनंजय ने बेहद हैरानी से कहा, " अब क्यों नाराज हो '!मै तो तुम्हें उस दिन से सब कुछ बताते आ रहा हूँ। एक पल को अकेला नहीं छोड़ा है तुम्हें। फिर क्यों नाराज हो। " आराध्या की आँखे नम हो गयी। उसकी नाम आखों को देखते हुए, धनंजय एक बार फिर घबरा गया। "हेय ! क्या हुआ ठकुराइन ! मेरी कोई बात तुमको बुरी लगी।"!!
आराध्या उससे लिपट जाती है और अपना सर ना मे हिलाती है। धनंजय उसे बाहों मे लिपटे हुए फिर से पूछा.. तो क्या बात है मेरी जान ! ऐसे क्यों रोने लगी मेरी ठकुराइन !"
आराध्या ने रोते हुए कहा, फिर उस दिन मॉल मे क्यों थे उसके साथ !" धनंजय ने अपनी आखों को अजीब करते हुए कहा, " अरे ठकुराइन ! बतया तो था उस दिन मुझे वसुधा को भरोसा दिलाना था की मै उसके साथ डील करने मे इंटरेस्टेड हूँ इसलिये तो उस समय उसके साथ। क्योंकि उसने मेरा ध्यान भटकाना चाहा की मुझे मालूम नहीं हो की उसने अपने बेटे को इटली भेजा है।उस मॉल के बाद मे कभी उससे नहीं मिला क्योंकि उसके बाद वसुधा ने अपने बेटे को काम पर लगा दिया। अगर मेरा एक्सीडेंट नहीं भी होता फिर भी वो कुछ तो ऐसा करती मुझे काबू करने के लिये। इसलिये तो मरने का नाटक किया था। ताकि उसका ध्यान मेरी तरफ से बिल्कुल हट जाये।"कहते हुए उसकी आखों मे देखता है।
आराध्या ने उसे घूरती हुई कहा, " एक बात कान खोल कर सुन लो ठाकुर ! अगर ये बात सच होती ना तो!" तो क्या ठकुराइन ! वही करती जो सभी किया है !" धनंजय की बात पर वो अपने सर को हाँ मे हिला देती है। वो मुस्कुराते हुए उसके चेहरे को हाथ मे भर कर बेहद प्यार से कहा, " ओ बीबी ! तुम्हारा ठाकुर अपनी ठकुराइन के साथ सपने मे भी धोखा नहीं कर सकता है!अब उसके होंठ आराध्या के. गालों पर घूम रहे थे। आराध्या आँखे बंद हो गयी थी और उसके हाथ धनंजय के कलाई पर कस चुकी थी।
" ठाकुर ! मै कही भी रहु लेकिन तुम्हारे सांसों की महक हर पल मेरे सांसों मे समाई हुई है। तुम्हारे बदन की खुशुब से मै कभी खुद को बाहर नहीं ला पाया ! तुम मुझे हर वक़्त महसूस होती हो। तुम्हारे आगे मुझे कुछ नहीं दिखता। बस तुम और सिर्फ तुम !"
"ठाकुर ! मुझे घर जाना ! बिल्कुल नहीं ठकुराइन ! आज तो बिल्कुल नहीं जाने दूँगा ! सभी फ़िक्र कर रहे होंगे। कोई नहीं फ़िक्र कर रहा होगा। मुझे आज मेरी ठकुराइन से बेहद सिद्द्त से मोहब्बत करनी है। कह कर उसे बिस्तर पर लिटा देता है। दोनों की सांसों की लय तेज हो गयी थी। धनंजय के होंठ एक बार फिर से आराध्या के होठो पर अपनी पकड़ बना चुका था। दोनों आज बेहद सिद्द्त से एक दूसरे को चूम रहे थे। कुछ देर के किश के बाद, दोनों की नजर एक दूसरे को देख रहे थे। दोनों की आखों मे, एक दूसरे को पाने की बेताबी नजर आ रही थी। आराध्या के हाथ धनंजय के शर्ट के बटन पर चले गए थे। वो एक एक करके उसके शर्ट के बटन खोलने लगी थी। जिसे देख धनंजय ने मुस्कुराते हुए कहा," नोट बेड ठकुराइन "!! उसने सीधे उसके बदन से साड़ी के पल्लू को हटा दिया। दोनों की धड़कन तेज थी लेकिन धनंजय की नजर आराध्या की चढ़ती उतरती सांसों पर थी। उसकी नजरों को देख आरध्या उसके आखों पर हाथ रख देती है और हल्का खुद को उठा कर उसके सीने को चूमती हुई कहा," इतनी बेशर्मी ठीक नहीं है. "
"अरे काहे की बेशर्मी ठकुराइन ! अपने आखों पर से उसके हाथों हटाते हुए कहा। फिर अपने शर्ट को खुद उतार दिया और आराध्या के ब्लाउज के बटन खोलते हुए कहा," बेशर्म क्यों कहा ! जीतनी नजदीकी से आँखे बड़ी बड़ी करके तुमने मुझे देखा है। उतनी करीब और बेशर्मी से मैंने तुम्हें नहीं देखा है। इसलिये आज तुम्हें जी भर के देखूँगा "
" ओह! बेशर्म इंसान कितने झूठे हो तुम। बातों बातों मे दोनों के ऊपरी हिस्से के कपड़े हट चुके थे। आराध्या ने जैसे ही कुछ कहा, धनंजय के हाथ उसके नाजुक हिस्से पर चला गया। अब उसकी जुबान... मीठी सिसकारियों मे बदल चुकी थी। धनंजय के होठो एक बार फिर से उसके बदन पर चलने लगे थे। उसके हाथ धनंजय के पीठ और बालो पर चलने लगा था। धनंजय ने बेहद मोहब्बत से उसके होठो पर अपनी अंगूठे को चलाते हुए कहा, " बहुत बेताब था इस करीबी को जीने के लिये। तुम्हारे साथ रोज रात को होता था लेकिन हर आहट पर चोक्कना रहने के कारण जी नहीं पाता था। "
"मै भी तुम्हारे करीब हो कर भी खुद को करीब नहीं पाती थी। अब ज्यादा देर मत करो ठाकुर !" बिल्कुल नहीं जान अभी तो प्यार शुरु किया है। इतनी जल्दी तो बिल्कुल नहीं ! कह कर उसे सीधा अपने गोद मे उठा लेता है। आराध्या के दोनों पैर उसकी कमर मे बंध जाती है। दोनों एक दूसरे की आखों मे देखने लगते है। दोनों का खुला बदन एक दूसरे मे लिपटा होता है। धनंजय ने आराध्या को कमरे मे मौजूद टैबल पर बिठा देता है। आराध्या उसे उसे मदहोशी मे निहार रही होती है। और धनंजय एक बार फिर झुक कर उसे अपने होठो से उसको मोहब्बत के अहसास मे डुबाने लगता है। आराध्या के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगती है। उसके हाथ धनंजय की. बालो पर मुट्ठीयाँ बनाने लगती है।
धनंजय आज हर तरीके से मोहब्बत जता रहा था और आराध्या भी पीछे नहीं थी। कभी धनंजय के होठो उसके बदन के हर हिस्से को चूम रहे थे तो कभी आराध्या के होंठ उसके बदन को चूम रहे थे। दोनों आज हर तरह से मोहब्बत जता रहे थे। कुछ देर बाद, एक बार फिर दोनों बिस्तर पर थे। इस बार धनंजय ने अपनी मोहब्बत की आखिर मंजिल पर आराध्या को अपने करीब कर लिया और आराध्या की एक आह के साथ धनंजय ने अपनी मोहब्बत के सफर को शुरु किया। आराध्या आहे भर रही थी। आराध्य के आखों मे बहते आंसू देख कर धनंजय रुक जाता है और इशारे मे पूछता है। उस ने मुस्कुराते हुए उसे अपने सीने से लगाते हुए कहा, " आई लव यू ठाकुर ! आई लव यू सो मच !" आज पहली बार आरध्या अपनी मोहब्बत का इजहार कर रही थी। धनंजय की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। वो उसके आखों और चेहरे को. चूमते हुए कहा, " आई लव तो ठकुराइन ! कहते हुए उसकी मोहब्बत की गति तेज हो जाती है और आराध्या की. सिसकियाँ तेज हो जाती है।
ठाकुर हवेली।
तानिया परेशान होकर बिस्तर पर बैठी थी की ध्यान ने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और कहा, क्या बात तानी ! ऐसे उदास क्यों बैठी हो !" कुछ नहीं बस आरू की फ़िक्र हो रही। अरे यार बीबी ! भाभी ठीक होगी। तुम अपने पति पर ध्यान दो ये कह कर उसके कंधे पर अपने होठो को रख देता है। तानिया ने चिढ कर कहा ऐसे कैसे कह रहे हो आप ध्यान !
ध्यान उसे खींच कर बिस्तर पर लिटा देता है और उसकी आखों मे देखते हुए कहता है, " कल खुद देख लेना भाभी को ! इतना भरोसा तो है ना मुझ पर !" तानिया ने अपने सर को हाँ मे हिला दिया। ध्यान ने झटके मे, उसकी साड़ी खींच कर हटा दी। ध्यान ! तानीया कुछ कहती, तब तक ध्यान ने तानिया को खुद की मोहब्बत मे मदहोश करने लगा। अब उसे किसी बात की होश था। दोनों के कपड़े कब एक दूसरे से अलग होकर जमीन पर बिखड़ चुके थे। अब बस तानिया की सीसीकियाँ गुंज रही थी। ध्यान अपनी मोहब्बत मे उसे भींगो चुका था।
अयान और दीप्ती कमरे मे मौजूद थे। दीप्ती अयान की हरकत आँखे छोटी कर के देख रही थी। दादा -दादी के जाने के बाद अयान गाना गुनगुना रहा था। दीप्ती से जब रहा नहीं गया तो उसे पीछे से उसके टीशर्ट के गले को पकड़ कर बिस्तर पर खींच लेती है। अरे.. अरे... बीबी यार गिर जाऊंगा ! ऐसे कौन करता है अपने पति के साथ। मै करती हूँ पति देव और बिस्तर पर गिराया है, जमीन पर नहीं। तुम्हारी हरकते कुछ ऐसी है की दिल चाहिए रहा है तुम्हें तो जमीन पर गिरा दू। दीप्ती ने घूरते हुए अयान से कहा।
क्यों ? ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया, जो तुम चंडी बनी हुई हो ! उसकी बात पर दीप्ती ने अपने एक हाथ कमर पर रखते हुए कहा, अच्छा जी ! तो तुम कौन सा लाल किला जीत कर आये हो जो बड़े गाने गाये जा रहे हो। माहौल खुशनुमा हो तो समझ मे आये भी लेकिन ऐसे माहौल कौन ऐसे पागलपन करता है।
अयान ने उसे कमर से पकड़ा और अपने ऊपर खींच लिया, फिर अपने नाक को उसके गर्दन से लगाते हुए कहा, तो तुम खो तो कुछ और करे। ये.. क्या.. कर रहे हो.. छोड़ो हमें ! बिल्कुल नहीं मेरी तीखी मिर्ची आ तो बस इस मिर्ची को कच्चा पूरी तरह से चबाने का इरादा है। कह कर उसे सीधे खुद के निचे कर लेता है। हम कह रहे चतुर्वेदी जी ! अभी हमें छोड़ दीजिये। बिल्कुल नहीं मिसेस चतुर्वेदी। अब तो आप. हमारी गिरफ्त मे है और यहाँ से आजादी कल सुबह मिलेगी आपको। कहते हुए उसके साड़ी के पल्लो को उसके बदन से हटा देता है। दीप्ती आहे भर कर रह जाती है क्योंकि. अयान अब रुकता नहीं और उसे अपनी मोहब्बत के आगोश मे लेते चला जाता है। कुछ ही देर मे दोनों अपनी मोहब्बत की दुनिया मे खो जाते है।
उज्जैन,
संकल्प ने पुरे परिवार को सिंह निवास चलने को कहा लेकिन दीपा और रिंकू जी ने कहा की वो अम्मा बाबू जी अपने साथ रखना चाहते है।लेकिन संकल्प ने फिर जिद्द करके अयानी और प्रथम को अपने साथ ले गया। अयानी और प्रथम को संकल्प ने अपने घर का सबसे खूबसूरत कमरा दिया। रात काफ़ी हो चुकी धनवी बिल्कुल थक चुकी थी।
लेकिन आज संकल्प उसका बहुत ध्यान रख रहा था। सुबह के वक़्त जो भी हुआ, उसका उसे बेहद अफ़सोस था। वो धनवी से नजर नहीं मिला रहा था। धनवी उसकी सभी हरकत पर ध्यान दें रही थी।संकल्प ने नजर चुराते हुए कहा, " तुम कपड़े बदल लो। मै गर्म दूध लाता हूँ। " वो जैसे ही जाने को होता है की धनवी तेजी से उसके आगे खड़ी हो जाती है। संकल्प ने अपनी नजर चुराते हुए कहा, " क्या बात है ? कुछ चाहिए तुम्हें !" धनवी सीधे संकल्प के चेहरे को हाथों मे थाम लेती है। दोनों की नजरें मिलती है। जहाँ धनवी की आखों मे बेचैनी थी। वही संकल्प की आखों मे नमी थी।
धनवी अपनी पैरों की ऊँगली पर खड़ी होकर सीधे संकल्प के होठो पर अपने होठो को रख कर उसे चूमने लगती है। संकल्प उसके इस बोल्ड एक्शन से हैरान हो जाता है। लेकिन धनवी की कमर को पकड़ उसे संतुलन देता है। जिससे वो हिलना बंद कर दें। धनवी उसके होठो को चूम तो रही थी लेकिन उसे चूमना नहीं आ रहा था। संकल्प उसे चूम नहीं रहा था। जब धनवी अपने मन के मुताबिक उसके होठो को चूम लिया। एक बार फिर दोनों की नजर आपस मे मिली। इस बार धनवी नजर चुरा रही थी और संकल्प उसे मुस्कुरा कर देख रहा था। उसके टोढ़ी को पकड़ उसने ऊपर करते हुए कहा, " ऐसा करने का मतलब !" धनवी ने अपनी नजर उठा कर उसकी बातों का जबाब देते हुए कहा, " आप सुबह से मुझसे नजर इसलिये चुरा रहे है ना क्योंकि जब मुझे थप्पड़....! "संकल्प ने बेचैनी से उसके होठो पर हाथ रख दिया। मत कहो धनवी ऐसे ! मै अपनी पत्नी की रक्षा नहीं कर सका। इस बात से मेरा अंतर्मन बेहद दर्द मे है।
संकल्प जी ! आप खुद को दोष देना बंद कीजिये। माहौल और परिस्थिति ही कुछ ऐसी थी। वैसे भाभी माँ ने उस थप्पड़ का हिसाब बराबर कर लिया। अब उन बातों को भूल जाईये। उसके सीने से लग जाती है। संकल्प उसे बाहों मे भर लेता है। धनवी ने फिर अपनी धीमी आवाज मे कहा," मुझे आज आपकी मोहब्बत चाहिए !" अपने सीने से लगी धनवी की बात सुनकर संकल्प ने उसके बालो को सहलाते हुए कहा, " आज अचानक मेरी राजकुमारी को क्या हो गया ! क्या वो तैयार है या कुछ और बात चल रही है। " आज आपकी धनवी सिर्फ आपकी होना चाहती है। बाक़ी कुछ नहीं है।
" सच कह रही है आप ! धनवी अपनी पलकें झपका देती है। संकल्प उसे मोहब्बत से अपनी गोद मे उठा लेता है और ले जा कर बिस्तर पर सुला देता है। तुम स्योर हो प्रिंसेस ! धनवी एक बार फिर अपने होठो को उसके होठो पर रख देती है।इस बार संकल्प के भी उसका साथ देने लगता है। कुछ देर बाद उसके होंठ धनवी के बदन पर घूमने लगे थे। आज धनवी भी बिल्कुल तैयार थी। या यू कह ले उसे अहसास होने लगा की मोहब्बत अगर है तो उसकी खूबसूरत मंजिल पर चलने मे कोई एतराज नहीं होनी चाहिए।
कुछ देर बाद धनवी की चीख के साथ दोनों की मोहब्बत को मंजिल मिल गयी थी। अब सिर्फ उस कमरे मे दोनों की मोहब्बत मुक़्क़मल हो रही थी।
दूसरी तरफ,
अयानी परेशान होकर खिड़की के पास खड़ी थी और रात की अँधेरे मे चमक रही चांदनी रातों को देख रही थी। तभी पीछे से, प्रथम उसके कंधे को चूम लेता है। क्या सोच रही हो ! कुछ नहीं प्रथम जी। हमारी शादी हुई और हमारे घर पर परेशानियों ने डेरा बसा लिया। बस फ़िक्र हो रही है की ऐसे कब तक चलेगा। अब तो भाभी ने भैया की. शादी की घोषणा कर दि। क्या सच मे हमारी भाभी अब वो नहीं रहेगी। ये कहती हुई अयानी प्रथम की तरफ घूम जाती है।
प्रथम ने मुस्कुराते हुए कहा, " कुछ परेशानी को कुछ वक़्त के लिये छोड़ देना चाहिए। फिर देखना की परेशानी कैसे खत्म होती है। " आप ये बात इतना मुस्कुराते हुए क्यों कह रहे है। वो इस लिये बीबी ! क्योंकि कल सुबह, मै भोपाल लौट जाऊंगा इसलिये चाहता हूँ की तुम से आज अपनी मोहब्बत की दुनिया सजा लूँ।
अयानी उसकी बातों का मतलब समझ कर शर्मा जाती है। उसकी नजर झुक जाती है। प्रथम ने मुस्कुराते हुए उसे बाहों मे उठा लेता है और बेहद आराम से बिस्तर पर सुला देता है। दोनों की नजर मिलती है। बीबी ! तुम्हारी आखों ने तो इजाजत दें दि है लेकिन मै चाहता हूँ की तुम कहो की मुझे इज्जाजत है, तुमसे मोहब्बत करने की। आयानी उसके सीने से लग जाती है। क्या मेरी आखों की भाषा से काम नहीं होगा प्रथम जी। बिल्कुल होगा जानेमन..... कहते हुए प्रथम उसके होठो पर अपने होठो को रख देता है।
आज दोनों की रिश्ते की खूबसूरत शुरुआत होने लगी थी।
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