तेरे लिए जानम Chapter-14
- 24 October, 2026
अनुराधा को यह एहसास हुआ कि कोई उसे थामे हुए है, उसके भीतर फिर से घबराहट की एक लहर दौड़ गई। उसने हिम्मत जुटाकर धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं।सबसे पहले उसे एक मज़बूत सीना दिखाई दिया, जिस पर उसके दोनों हाथ अब भी टिके हुए थे। एक पल के लिए वह कुछ समझ ही नहीं पाई। फिर उसकी नज़र धीरे-धीरे ऊपर उठी...और सामने राम का चेहरा था।
दोनों की नज़रें पहली बार इस तरह मिलीं कि जैसे कुछ क्षणों के लिए आसपास की हर आवाज़, हर हलचल कहीं पीछे छूट गई हो। अनुराधा की आँखों में अभी भी डर साफ़ दिखाई दे रहा था, जबकि राम की आँखों में एक गहरा, शांत ठहराव था। वह उसे देख तो रहा था, लेकिन उस नज़र में न कोई जल्दबाज़ी थी, न कोई असभ्य उत्सुकता। जैसे वह स्वयं भी इस अचानक बने क्षण को समझने की कोशिश कर रहा हो।
अनुराधा की साँसें अभी तक सामान्य नहीं हुई थीं। उसे अचानक एहसास हुआ कि वह अब भी उसकी बाँहों के सहारे खड़ी है।यह एहसास होते ही उसके चेहरे का रंग बदल गया।
वह लगभग घबराकर एक झटके से पीछे हटना चाहती थी। बिना कुछ सोचे उसने दोनों हथेलियाँ राम के सीने पर रखीं और खुद को अलग करने के लिए हल्का-सा धक्का दे दिया।
घटना इतनी अचानक हुई कि राम भी उसके लिए तैयार नहीं था। उसने एक कदम पीछे हटकर खुद को संभाला। उसकी पीठ लिफ्ट की दीवार से हल्के से टकराई, लेकिन अगले ही क्षण वह फिर पूरी तरह संतुलित होकर सीधा खड़ा हो गया।
इधर अनुराधा दो कदम पीछे हट चुकी थी। उसकी साँसें अब भी तेज़ थीं। एक हाथ अनायास ही अपने दुपट्टे तक चला गया, जैसे खुद को सँभालने की कोशिश कर रहा हो। उसकी आँखों में घबराहट अब भी थी, लेकिन उसके साथ एक गहरा संकोच भी उतर आया था।
लिफ्ट के भीतर फिर से वही ख़ामोशी लौट आई...लेकिन इस बार उस ख़ामोशी का अर्थ पहले जैसा नहीं था।
एक पल के लिए अनुराधा की नज़र भी सामने खड़े उस आदमी के चेहरे पर ठहर गई।इतनी नज़दीक से उसने उसे पहली बार किसी क़ो देखा था।
ऊँचा कद, सधा हुआ व्यक्तित्व, गहरी और बिल्कुल स्थिर आँखें... चेहरे पर ऐसा ठहराव, जैसे किसी भी परिस्थिति का उस पर कोई असर न पड़ता हो। उसकी साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं, जबकि सामने खड़ा वह आदमी बिल्कुल शांत था। उस एक पल के लिए अनुराधा जैसे सब कुछ भूल गई। उसकी आँखें अनचाहे ही उसके चेहरे पर ठहरी रहीं।
लेकिन अगले ही क्षण उसे अपनी स्थिति का एहसास हुआ।उसकी हथेलियाँ अभी कुछ पल पहले तक उसी आदमी के सीने पर टिकी थीं... और वह उसकी बाँहों के सहारे खड़ी थी।
यह एहसास बिजली की तरह उसके भीतर दौड़ गया।वह लगभग घबराकर उससे अलग हुई। पीछे हटते हुए उसका दुपट्टा कंधे से फिसलने लगा, जिसे उसने जल्दी से सँभाला। साँसें अब भी बेकाबू थीं। दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसकी अपनी ही धड़कनें उसके कानों में सुनाई दे रही थीं।
डर...घबराहट...और अपमान का एक अनजाना-सा एहसास...तीनों एक साथ उसके भीतर उमड़ पड़े।उसने सिर उठाकर राम की तरफ़ देखा। इस बार उसकी आँखों में घबराहट नहीं थी। वहाँ गुस्सा था।
"तमीज़ नहीं है आपको?" उसकी आवाज़ काँपी ज़रूर, मगर शब्दों में ज़रा भी लड़खड़ाहट नहीं थी। "इस तरह किसी लड़की को खींचते हैं?"
राम बिना कुछ बोले उसे देखता रहा।उसकी ख़ामोशी ने जैसे अनुराधा के भीतर जमा सारा आक्रोश बाहर निकाल दिया।
"बिना मेरी इजाज़त के मुझे छुआ कैसे आपने?" उसने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा। "क्या समझ रखा है आपने? कोई लड़की अकेली दिख जाए तो...?"
वह बात पूरी नहीं कर पाई। गुस्से ने उसके शब्दों को उलझा दिया।उसने गहरी साँस ली और फिर लगभग तमतमाते हुए बोली,
"सूट-बूट पहन लेने से कोई इंसान जेंटलमैन नहीं बन जाता। जेंटलमैन होने के लिए औरत की इज़्ज़त करना भी आना चाहिए।"
अनुराधा बिना रुके बोले जा रही थी। उसके शब्द एक के बाद एक निकलते जा रहे थे। कभी वह राम को घूरती, कभी गुस्से में भौंहें चढ़ा लेती, तो कभी बोलते-बोलते दुपट्टा कंधे पर ठीक कर लेती। कुछ ही देर पहले डर से काँप रही वही लड़की अब पूरी हिम्मत के साथ उसके सामने खड़ी थी और बिना यह सोचे कि सामने कौन है, उसे खरी-खरी सुनाए जा रही थी।
राम ने एक बार भी उसे बीच में नहीं टोका। कुछ क्षण पहले जब अनुराधा ने खुद को छुड़ाने के लिए उसे धक्का दिया था, तब उसे सचमुच हल्की-सी नाराज़गी हुई थी। बरसों से किसी ने उसके साथ इस तरह पेश आने की हिम्मत नहीं की थी। लेकिन इस समय वह नाराज़गी जाने कहाँ खो गई थी।
उसकी नज़र फिर से अनुराधा के चेहरे पर टिक गई। गुस्से में उसके दोनों गाल हल्के-हल्के गुलाबी पड़ गए थे। ठंड की वजह से उसकी नाक भी सुर्ख हो आई थी। हर बार जब वह तेज़ी से बोलती, उसके गुलाबी होंठ हल्के-से काँप उठते और बड़ी-बड़ी आँखों में भरा गुस्सा और साफ़ दिखाई देने लगता।
राम जाने कब से उसे देखे जा रहा था। वह यह भी भूल गया था कि सामने खड़ी लड़की उससे क्या कह रही है। उसका ध्यान उसके शब्दों पर नहीं, उसके चेहरे पर ठहरा हुआ था। जितना वह उसे देखता, उतना ही उसे महसूस होता कि उसने इतनी सहज, इतनी सादगी से भरी खूबसूरती पहले कभी नहीं देखी।
उसे जैसे पहली बार एहसास हुआ कि किसी चेहरे को सिर्फ़ देखा नहीं जाता... कभी-कभी वह अनजाने में मन पर उतर भी जाता है।
"सुन रहे हो तुम?"अनुराधा ने झुँझलाकर उसकी आँखों के सामने चुटकी बजाई।चुटकी की आवाज़ सुनते ही राम जैसे किसी गहरे ख़याल से बाहर आया। उसने हल्का-सा पलकें झपकाईं।अनुराधा अब भी उसी गुस्से से उसे देख रही थी।
"मैं तब से बोले जा रही हूँ..." उसने तमतमाते हुए कहा, "लेकिन तुम तो निहायत बदतमीज़ किस्म के इंसान हो।"
राम चुप रहा।उसकी ख़ामोशी ने अनुराधा को और चिढ़ा दिया।"क्या तुम लड़कियों को अकेला देखकर हमेशा ऐसी ही हरकत करते हो?"
अनुराधा के आख़िरी शब्द राम के कानों में पड़े तो उसके चेहरे का शांत भाव पहली बार हल्का-सा बदल गया।
अब तक वह बिना कुछ कहे उसकी हर बात सुन रहा था, लेकिन बार-बार उसके चरित्र पर उठते सवाल उसे अच्छे नहीं लगे। उसने गहरी साँस ली। दाहिने हाथ की दो उँगलियाँ अपने माथे पर फेरते हुए उसने क्षणभर के लिए आँखें बंद कीं, मानो अपने भीतर उठ रहे क्रोध को वहीं रोक देना चाहता हो।
जब उसने दोबारा आँखें खोलीं, तो उनमें वही ठंडा ठहराव था... लेकिन अब उसमें कठोरता भी उतर आई थी।बिना कुछ कहे वह एक-एक कदम बढ़ाता हुआ अनुराधा की ओर आने लगा।
राम को अपनी तरफ़ बढ़ते देख अनुराधा का सारा साहस जैसे धीरे-धीरे जवाब देने लगा। अभी तक जो शब्द बिना रुके उसके होंठों से निकल रहे थे, वे अचानक गले में अटक गए। वह अनायास ही एक कदम पीछे हटी, लेकिन पीछे लिफ्ट की ठंडी दीवार थी। अब पीछे हटने की कोई जगह नहीं बची थी।
राम उसके सामने आकर रुक गया।दोनों के बीच अब मुश्किल से एक हाथ भर का फ़ासला रह गया था।अनुराधा ने घबराकर उसकी तरफ़ देखा। उसकी धड़कनें फिर तेज़ हो उठीं। अभी कुछ देर पहले तक जो गुस्सा उसके चेहरे पर था, उसकी जगह अब साफ़ घबराहट ने ले ली थी।
"य... ये... क्या कर रहे हो तुम?" उसकी आवाज़ पहले जैसी तेज़ नहीं रही। "बा... बात... दूर से भी हो सकती है।"उसने जल्दी से दुपट्टा अपने सीने के पास समेट लिया और हकलाते हुए बोली,"ये... ये रघुवंशी एम्पायर है... यहाँ... यहाँ ऐसी हरकतें नहीं चलेंगी।"
उसने बात तो पूरी दृढ़ता से कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी काँपती आवाज़ और तेज़ धड़कनों ने उसका साथ नहीं दिया।राम अब भी उसके सामने उसी स्थिर नज़र से खड़ा था।
उसने अभी तक एक भी शब्द नहीं कहा था। उसकी यही ख़ामोशी... अनुराधा को उसके शब्दों से कहीं ज़्यादा डरा रही थी।
राम को अपनी ओर बढ़ते देख अनुराधा का गला सूख गया। अभी कुछ क्षण पहले तक जो लड़की बिना किसी झिझक के उसे खरी-खरी सुना रही थी, वही अब उसके हर कदम के साथ भीतर ही भीतर असहज होने लगी। उसने अपने चेहरे पर वही कठोरता बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन उसकी उँगलियाँ अनायास ही दुपट्टे के किनारे को कसकर पकड़ चुकी थीं।
जब राम बिल्कुल उसके सामने आकर रुका, तो दोनों के बीच इतना ही फ़ासला बचा था कि अनुराधा को उसकी मौजूदगी पहले से कहीं अधिक तीव्र महसूस होने लगी। उसने खुद को संभालने के लिए ठुड्डी ज़रा-सी ऊपर उठाई, पर उसकी धड़कनों की रफ़्तार उसका साथ नहीं दे रही थी।
राम धीरे-धीरे उसकी ओर झुका। उसकी आँखें अनुराधा की आँखों से हट ही नहीं रही थीं। उसने कुछ नहीं किया, बस उतना ही झुका कि उसकी साँसों की हल्की-सी गर्माहट अनुराधा के चेहरे से टकराकर गुज़र गई। अनुराधा की पलकें अनायास झपक गईं। वह एक पल के लिए बिल्कुल स्थिर रह गई, फिर घबराकर बोली, "य... ये... क्या कर रहे हो तुम? बा... बात दूर से भी हो सकती है।"
राम के होंठों पर एक बहुत हल्की मुस्कान लौटी। उसने उसी शांत स्वर में पूछा, "घबरा रही हो?"
"न... नहीं।" अनुराधा ने जल्दी से जवाब दिया। उसने गर्दन तनिक और सीधी कर ली, जैसे अपने ही शब्दों को सच साबित करना चाहती हो। "मैं... मैं क्यों घबराने लगी?"
राम ने बिना पलक झपकाए उसे देखा। उसकी आवाज़ में न व्यंग्य था, न चुनौती; केवल एक अजीब-सा विश्वास था। "अच्छा... अगर नहीं घबरा रहीं, तो तुम्हारी आवाज़ क्यों काँप रही है? और ये..." उसकी नज़र एक पल के लिए उसके दुपट्टे को कसकर पकड़ी उँगलियों पर गई, "...ये उँगलियाँ इतनी बेचैन क्यों हैं?"
अनुराधा ने जैसे पहली बार महसूस किया कि सचमुच उसकी उँगलियाँ दुपट्टे को इतनी कसकर पकड़े हुए थीं कि पोर सफ़ेद पड़ गए थे। उसने झेंपकर तुरंत हाथ ढीला कर लिया, लेकिन अगले ही पल अपने चेहरे पर फिर वही गुस्सा ले आई। वह नहीं चाहती थी कि सामने खड़ा आदमी उसकी घबराहट पढ़ ले।
"ज़्यादा खुश मत हो," उसने खुद को सँभालते हुए कहा, "मैं तुमसे नहीं... तुम्हारी बदतमीज़ी से परेशान हूँ। और हाँ, मेरे बारे में इतना जानने की कोशिश मत करो।"
राम ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। बस एक पल तक उसे देखता रहा, फिर बहुत धीमे स्वर में बोला, "तुम्हें पढ़ने की कोशिश मैं नहीं कर रहा... तुम खुद अपने चेहरे पर सब लिख देती हो।"
इतना कहकर वह सीधा खड़ा हो गया। लिफ्ट में फिर वही ख़ामोशी उतर आई, लेकिन इस बार अनुराधा के भीतर अजीब-सी खीझ थी। उसे गुस्सा इस बात का कम था कि राम उसके इतने करीब आया था, और ज़्यादा इस बात का कि उसने उसकी घबराहट पहचान ली थी... और वह चाहकर भी उसे झुठला नहीं पा रही थी।
उसी समय एक हल्के-से झटके के साथ लिफ्ट सबसे टॉप फ़्लोर पर आकर रुक गई।
राम ने एक क्षण के लिए अनुराधा की ओर देखा। उसके चेहरे पर फिर वही शांत भाव लौट आया था। जैसे कुछ देर पहले लिफ्ट के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसने उसे अपने भीतर कहीं समेट दिया हो। बिना कुछ कहे वह मुड़ा और बाहर निकलने के लिए कदम बढ़ा दिए।
पीछे खड़ी अनुराधा के भीतर मगर अभी भी गुस्से का ज्वार शांत नहीं हुआ था। उसे लगा, वह बिना कुछ सुने, बिना कुछ कहे ऐसे ही चला जाएगा। उसके भीतर जमा सारा आक्रोश एकाएक शब्द बनकर बाहर आ गया।
"सुनो!"राम के कदम ठिठके, मगर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।अनुराधा तेज़ स्वर में बोली, "आज जो बदतमीज़ी तुमने की है न... उसका हिसाब तुम्हें कभी न कभी ज़रूर मिलेगा।"
राम अब भी चुप रहा।उसकी ख़ामोशी ने अनुराधा के गुस्से को और भड़का दिया। वह दो कदम आगे बढ़ी और लगभग तमतमाते हुए बोली, "दिल तो करता है, यहीं खींचकर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारूँ तुम्हें... बस अफ़सोस इस बात का है कि उससे पहले ही तुम निकल रहे हो।"
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं। गुस्से में उसका चेहरा फिर से लाल पड़ गया था।
"और सुनो..." उसने बिना रुके कहा, "जिस आदमी को किसी लड़की की मर्यादा का ख़याल न हो, उससे किसी और बात की उम्मीद भी क्या की जा सकती है? पता नहीं... तुम अपनी माँ और बहन की इज़्ज़त करना भी जानते हो या नहीं।"
इस बार उसके कदम वहीं रुक गए। उसके शब्द हवा में तैरते हुए राम तक पहुँचे।
कुछ क्षण तक गलियारे में गहरा सन्नाटा पसरा रहा। राम की पीठ अब भी अनुराधा की ओर थी। उसने धीरे से अपनी आँखें बंद कीं और एक लंबी साँस भीतर खींची। उसके चेहरे पर कोई उत्तेजना नहीं थी, लेकिन उसके जबड़े अनायास भींच गए थे।
उसने अब तक अनुराधा की हर बात बिना उत्तर दिए सुन ली थी।लेकिन इस बार...उसने उसके व्यक्तित्व पर नहीं, उसके संस्कारों पर प्रश्न उठा दिया था।
Recent News
तेरे लिए जानम Chapter-23
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-20
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-19
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-18
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-17
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-16
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-15
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-14
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-13
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-12
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-11
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-10
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-9
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-8
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-7
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-6
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-5
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-4
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-3
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-2
- 24 October, 2026
तेरे लिए जानम Chapter-1
- 24 October, 2026
Love Without Wish Chapter-52
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-51
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-50
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-49
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-48
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-47
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-46
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-42
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-41
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-40
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-39
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-38
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-36
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-35
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-24
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-23
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-29
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-27
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-26
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-25
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-20
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-19
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-13c-44
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-6
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-5
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-4
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-3
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-2
- 29 June, 2026
Love Without Wish Chapter-1
- 29 June, 2026